Typhoid Fever kya hai?or kaise hota hai?
टाइफाइड (Typhoid Fever)
टाइफाइड बुखार भारत में एक बहुत आम बीमारी है, जो मुख्यतः दूषित पानी और भोजन से फैलती है। गर्मियों और बरसात के मौसम में इसके मामले अधिक आते हैं। सही उपचार से यह पूरी तरह ठीक हो जाती है, लेकिन देर से उपचार में आँतों में छेद जैसी गंभीर जटिलताएँ हो सकती हैं।
टाइफाइड क्या है?
टाइफाइड बुखार एक जीवाणु जनित बीमारी है, जो साल्मोनेला टाइफी (Salmonella Typhi) नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह बैक्टीरिया केवल मनुष्यों में पाया जाता है और दूषित पानी या भोजन के माध्यम से फैलता है।
टाइफाइड दुनियाभर में हर साल लगभग 1.2 करोड़ लोगों को प्रभावित करता है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशिया में यह अधिक पाया जाता है, जहाँ स्वच्छ पानी और स्वच्छता की कमी एक प्रमुख कारण है।
उपचार न मिलने पर टाइफाइड 3 से 4 सप्ताह तक चल सकता है और आँतों में छेद (Intestinal Perforation) या रक्तस्राव जैसी जानलेवा जटिलताएँ उत्पन्न कर सकता है।
टाइफाइड शरीर में कैसे फैलता है?
दूषित पानी या भोजन के साथ साल्मोनेला बैक्टीरिया मुँह के रास्ते पेट में पहुँचते हैं। पेट का एसिड अधिकांश बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है, लेकिन कुछ बच जाते हैं और छोटी आँत में पहुँच जाते हैं।
छोटी आँत की दीवार से बैक्टीरिया लिम्फ नोड्स में पहुँचते हैं और वहाँ बढ़ते हैं। ऊष्मायन अवधि (6 से 30 दिन, सामान्यतः 10–14 दिन) के बाद बैक्टीरिया रक्त में प्रवेश कर जाते हैं — इसे Bacteraemia कहा जाता है।
खून में पहुँचकर बैक्टीरिया यकृत, पित्ताशय और अस्थि मज्जा के तक फैल जाते हैं। यकृत का आकार बढ़ जाता है। आँतों में (लिम्फॉइड ऊतक) में सूजन और अल्सर बनते हैं, जो आँत में छेद का कारण भी बन सकते हैं।
टाइफाइड के कारण?
- दूषित पानी पीना:
नल, कुएँ या तालाब के पानी में बैक्टीरिया की मौजूदगी संक्रमण का सबसे बड़ा कारण है।
- बाहर का खुला और कच्चा खाना:
सड़क किनारे का खाना, कटे फल और कच्ची सब्जियाँ, जो दूषित पानी से धुले हों।
- शौच के बाद में हाथ को न धोना:
- मक्खियाँ:
मक्खियाँ मल से बैक्टीरिया उठाकर भोजन पर बैठती हैं और उसे दूषित करती हैं।
- Carrier व्यक्ति:
कुछ लोग ठीक होने के बाद भी अपने पित्ताशय में बैक्टीरिया रखते हैं और दूसरों में संक्रमण फैला सकते हैं।
टाइफाइड के लक्षण?
टाइफाइड के लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं — पहले सप्ताह में हल्के और दूसरे सप्ताह में अधिक गंभीर हो जाते हैं।
- धीरे-धीरे बढ़ता बुखार — 99°F से शुरू होकर 103–104°F तक पहुँच सकता है.
- सिरदर्द, थकान और भूख न लगना
- पेट दर्द, पेट फूलना, दस्त (बच्चों में) या कब्ज़ (वयस्कों में)
- पेट पर हल्के गुलाबी चकत्ते — टाइफाइड की विशिष्ट पहचान
- यकृत का बढ़ना — पेट के बाईं ओर भारीपन
- बुखार के बावजूद नाड़ी की गति धीमी रहना — इसे Relative Bradycardia कहते हैं
तीसरे-चौथे सप्ताह में:
अत्यधिक कमज़ोरी और पेट में तेज़ दर्द — यह आँत में छेद का संकेत हो सकता है।