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kya pancreatitis normal ho sakta hai?
१)पैंक्रियाटाइटिस क्या है? क्या यह सामान्य हो सकता है? पैंक्रियाटाइटिस एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसमें अग्न्याशय में सूजन आ जाती है। अग्न्याशय पेट के पीछे स्थित एक महत्वपूर्ण अंग है जो हमारे शरीर में पाचन एंजाइम और इंसुलिन जैसे हार्मोन बनाने का काम करता है। जब किसी कारण से पाचन एंजाइम समय से पहले ही सक्रिय हो जाते हैं, तो वे भोजन को पचाने के बजाय अग्न्याशय के ऊतकों को ही नुकसान पहुंचाने लगते हैं। इस स्थिति को ही पैंक्रियाटाइटिस कहा जाता है। २)क्या पैंक्रियाटाइटिस अपने आप ठीक हो सकता है? यह इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी कितनी गंभीर है।  कुछ मामलों में हल्का पैंक्रियाटाइटिस सही इलाज, आराम और डॉक्टर की निगरानी से पूरी तरह ठीक हो सकता है। लेकिन यदि बीमारी गंभीर हो जाए तो अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करवाना आवश्यक हो सकता है। #1. तीव्र पैंक्रियाटाइटिस(Acute Pancreatitis) - यह अचानक शुरू होने वाली स्थिति होती है। - कई बार यह कुछ दिनों के इलाज से ठीक भी हो सकता है।  - समय पर इलाज मिलने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। #2. दीर्घकालिक पैंक्रियाटाइटिस(Chronic Pancreatitis) - यह लंबे समय तक रहने वाली समस्या होती है। - इसमें अग्न्याशय धीरे-धीरे कमजोर और क्षतिग्रस्त होने लगता है।  - यदि समय पर उपचार न किया जाए तो स्थायी नुकसान हो सकता है। ३) क्या पैंक्रियाटाइटिस सामान्य बीमारी है? अगर बात तीव्र पैंक्रियाटाइटिस की करें तो कई मामलों में सही इलाज और आराम से सामान्य स्थिति में आ सकता है। - अस्पताल में मरीज को कुछ दिनों तक दवाइयाँ, तरल पदार्थ और हल्का भोजन दिया जाता है, जिससे उसकी स्थिति में सुधार होता है। लेकिन इसे बिल्कुल साधारण बीमारी समझना भी सही नहीं है क्योंकि।  - यह अचानक गंभीर रूप ले सकता है. - किडनी और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर असर पड़ सकता है.  इसीलिए पैंक्रियाटाइटिस को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।  ४) पैंक्रियाटाइटिस होने के प्रमुख कारण? यह बीमारी कई कारणों से हो सकती है, जैसे: की, - पित्ताशय की पथरी (Gallstones), अत्यधिक शराब का सेवन, खून में ट्राइग्लिसराइड का अधिक स्तर, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट, पारिवारिक कारण  ५) पैंक्रियाटाइटिस के लक्षण? इस बीमारी में कई प्रकार के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे: की, - पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द , दर्द का पीठ तक फैलना, मतली और उल्टी, पेट में सूजन या भारीपन, भूख कम लगना - अगर किसी व्यक्ति को बहुत तेज दर्द या लगातार उल्टी हो रही हो तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। ५) पैंक्रियाटाइटिस का इलाज और रिकवरी? - इलाज मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है। सामान्यत:  - कुछ समय तक ठोस भोजन बंद किया जाता है. - शरीर में तरल की कमी पूरी करने के लिए IV फ्लूड दिया जाता है. #कारण के अनुसार उपचार# यदि बीमारी का कारण पित्त की पथरी या कोई अन्य समस्या है, तो उसका भी इलाज किया जाता है।  आमतौर पर हल्के मामलों में मरीज 3 से 7 दिनों में ठीक हो सकता है।लेकिन यदि सूजन बहुत अधिक हो जाए, ऊतक नष्ट होने लगें या संक्रमण फैल जाए तो ICU में इलाज की आवश्यकता पड़ सकती है। ६) क्या पैंक्रियाटाइटिस पूरी तरह ठीक हो सकता है? तीव्र पैंक्रियाटाइटिस के कई मामलों में सही इलाज और समय पर देखभाल से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।  लेकिन दीर्घकालिक पैंक्रियाटाइटिस में बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है, पूरी तरह समाप्त करना हमेशा संभव नहीं होता।  ७) पैंक्रियाटाइटिस से बचाव कैसे करें? इस बीमारी से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सावधानियाँ अपनानी चाहिए:  - शराब का सेवन पूरी तरह बंद करें।  - कम वसा (Low Fat) वाला संतुलित आहार लें.erte
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omega 3 sharir mein kya fayda karta hai
१) ओमेगा-3 शरीर में क्या फायदा करता है? ओमेगा-3 जरुरी फैटी एसिड है, जो के हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरुरी होता है। इसे आवश्यक कहा जाता है, क्योंकि हमारा शरीर इसको नहीं बना सकता है, इसलिए हम इसको भोजन के माध्यम से लेना होता है. - ओमेगा-3 हृदय, मस्तिष्क, आंखों, त्वचा तथा संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। २) ओमेगा-3 मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है? - अल्फा-लिनोलेनिक एसिड :: यह मुख्य रूप से पौधों से प्राप्त होता है।  - इकोसापेंटेनोइक एसिड :: यह वसायुक्त मछलियों में होता है।  डोकोसाहेक्सेनोइक एसिड :: यह मस्तिष्क, आंखों के लिए है।  वसायुक्त मछलियां जैसे की, Salmon, Sardine तथा Mackerel ओमेगा-3 के अच्छे स्रोत हैं। 1. हृदय को स्वस्थ रखता है.  ओमेगा-3 का बड़ा लाभ हृदय का स्वास्थ्य होता है. - अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है. - ट्राइग्लिसराइड स्तर को कण्ट्रोल करता है. नियमित रूप से ओमेगा-3 लेने पर हार्ट अटैक तथा स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है।  2. मस्तिष्क की शक्ति को बढ़ाता है। - DHA मस्तिष्क का जरुरी घटक है। ओमेगा-3:  - याददाश्त को अच्छा करता है. - एकाग्रता को भी बढ़ाता है.  बच्चों में यह मस्तिष्क के विकास के लिए आवश्यक है. # 3. जोड़ों तथा हड्डियों के लिए फायदेमंद - किसी को गठिया ,जोड़ों में दर्द के समस्या है, तो ओमेगा-3 लाभकारी हो सकता है।  - जोड़ों के अकड़न को कम करता है.  - चलने-फिरने में भी आसानी होता है.  # 4. आंखों के लिए भी जरूरी होता है.  - DHA आंखों के रेटिना का जरुरी भाग है। ओमेगा-3  - आंखों का सूखापन कम करता है.  - उम्र बढ़ने के साथ में होने वाली दृष्टि के समस्याओं का जोखिम को कम करता है.  आजकल स्क्रीन का उपयोग करने वाले लोगों के लिए ओमेगा-3 का सेवन महत्वपूर्ण हो गया है।  5. गर्भावस्था तथा बच्चों के लिए लाभकारी - गर्भावस्था के दौरान ओमेगा-3 मां तथा बच्चो दोनों के लिए जरूरी होता है। - शिशु के मस्तिष्क तथा आंखों के विकास में मदद करता है. - बच्चों के सीखने की क्षमता को अच्छा बनाता है # 6. त्वचा तथा बालों के लिए फायदेमंद - ओमेगा-3 त्वचा को चमकदार बनाने में भी मदद करता है। - त्वचा के नमी को भी बनाए रखता है.  - मुंहासों , सूजन को भी कम करता है.  - बालों के मजबूती में सहायक होता है  7. वजन को नियंत्रण तथा मधुमेह में मददगार - ओमेगा-3 मेटाबॉलिज्म को अच्छा बनाता है, तथा शरीर के चर्बी को कम करने में मदद कर सकता है।  - यह इंसुलिन को बढ़ाने में मदद करता है, जिस से मधुमेह को कण्ट्रोल में सहायता हो सकती है। ३) ओमेगा-3 के दैनिक आवश्यकता क्या है? - वयस्कों के लिए दिन में २५०-५०० मिलीग्राम EPA , DHA पर्याप्त माना जाता है। पर सही मात्रा व्यक्ति के उम्र, स्वास्थ्य के स्थिति , डॉक्टर की सलाह पर निर्भर है।   #ओमेगा-3 में से क्या - क्या स्रोत है?  #मांसाहारी स्रोत में# - सैल्मन मछली - सार्डिन  - फिश का ऑयल  #शाकाहारी स्रोत में#  - अखरोट , सोयाबीन का तेल भोजन से सही मात्रा में न मिले, तो डॉ. के सलाह से सप्लीमेंट को दिया जा सकता है। ४) ओमेगा-3 के दुष्प्रभाव होते हैं क्या ? ज्यादा मात्रा में लेने से, - पेट भी खराब हो सकता है. - गैस या तो,एसिडिटी हो सकती है। - खून भी पतला होने का खतरा बढ़ सकता है.
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Vitamin E sharir ke liye kyu jaruri hai?
१) विटामिन E शरीर के लिए क्यों जरूरी है? - विटामिन E शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट विटामिन है, जो हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरुरी है। यह मुख्य रूप से सेल्स के सुरक्षा, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत , त्वचा तथा बालों के स्वास्थ्य के लिए जाना जाता है। - विटामिन E शरीर में वसा के साथ मिलकर के कार्य करता है, तथा कोशिकाओं के झिल्लियों को क्षति से भी बचाता है। २) विटामिन E क्या है? विटामिन E समूह है जिसे टोकॉफेरॉल भी कहा जाता है। इस में अल्फा-टोकॉफेरॉल सबसे एक्टिव तथा शरीर के लिए सबसे उपयोगी है।  यह विटामिन प्राकृतिक रूप से कई तरह के खाद्य पदार्थों में मिलता है,जैसे कि,  - हरी पत्तेदार वाले सब्जियाँ।  - बीज तथा नट्स। - साबुत अनाज।  * कुछ फल में जैसे कि, एवोकाडो तथा किवी। ३) शरीर में विटामिन E का क्या रोल होता है? विटामिन E कई तरह से शरीर को लाभ पहुंचाता है।, जैसे की,  a) एंटीऑक्सीडेंट का काम - विटामिन E फ्री रेडिकल्स रासायनिक पदार्थ हैं जो के शरीर की कोशिकाओं को क्षति पहुँचा सकते हैं , तथा उम्र बढ़ने, कैंसर, हृदय रोग जैसी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।  - विटामिन E इन से लड़कर के कोशिकाओं के सुरक्षा करता है। b) हृदय स्वास्थ्य में सहायक - विटामिन E रक्त वाहिका में कोलेस्ट्रॉल के ऑक्सीकरण प्रक्रिया को रोकता है।  - यह विशेष रूप से खराब कोलेस्ट्रॉल के ऑक्सीकरण को कम करके धमनियों में ब्लॉकेजकी संभावना घटाता है। c) प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत बनाता है. - इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाता है।  - यह सफेद रक्त कोशिकाओं के कार्य को बढ़ाता है, तथा शरीर को संक्रमणों से लड़ने में सक्षम बनाता है। d) त्वचा तथा बालों के लिए लाभदायक - त्वचा की नमी को बनाए रखने, झुर्रियों को कम करने तथा सूरज की UV किरणों से सुरक्षा में मदद करता है। e) मांसपेशियों तथा तंत्रिकाओं के स्वास्थ्य के लिए  - विटामिन E मांसपेशियों तथा नसों में ऑक्सीजन को पहुंचाने, सूजन को कम करने में भी मदद करता है।  ४)विटामिन E के कमी होने का लक्षण? शरीर में विटामिन E की कमी हो जाए, तो इसके मुख्य लक्षण हैं, - मांसपेशियों में कमजोरी तथा थकान जैसा लगना  - दृष्टि के समस्याएँ।  - हाथ-पैर में झुनझुनी या सुन्नपन जैसा लगना- त्वचा तथा बालों के समस्याएँ ५) विटामिन E का अधिक सेवन तथा सावधानियाँ? विटामिन E की कमी से बचना भी जरुरी है, पर इसका ज्यादा सेवन भी हानिकारक हो सकता है।  - रक्त का पतला हो सकता है.  - रक्तस्राव का जोखिम भी बढ़ सकता है. विटामिन E का सेवन संतुलित मात्रा में तथा डॉ. की सलाह से करना चाहिए। ६) विटामिन E को प्राकृतिक रूप से प्राप्त करना - नट्स तथा बीजों को नाश्ते में उपयोग करें।  - हरी पत्तेदार सब्जि को सलाद के रूप में लें।  - मूंगफली तेल का उपयोग कम करे । - किवी , आम जैसे फलों को डाइट में उपयोग करे.
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Pancreatitis hone ka homeopathy me ilaj
१) Pancreatitis होने का सही इलाज? - Pancreatitis का मतलब अग्न्याशय में सूजन का होना। - यह प्रॉब्लम अचानक से भी हो सकती है, तथा लंबे समय तक रहने वाली भी। सही समय पर इलाज न मिले तो यह गंभीर जटिलताएँ भी पैदा कर सकती है।  - Pancreatitis के २ तरह का होता है, (१) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस (२) क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस। (२) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होने पर क्या होता है? एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के होने पर अचानक से तेज पेट में दर्द के साथ शुरू होता है। इसका इलाज अस्पताल में एडमिट कर के ही किया जाता है।  #अस्पताल में भर्ती  - ज़्यादातर दर्दी को तुरंत ही अस्पताल में भर्ती किया जाता है, ताकि डॉ. लगातार निगरानी कर सकें। #IV Fluids  - शरीर में पानी के कमी न हो इसलिए नस के माध्यम से तरल पदार्थ को दिए जाते हैं। इस से ब्लड प्रेशर तथा अंगों की कार्यक्षमता भी बनी रहती है।  # दर्द नियंत्रण  - तेज पेट का दर्द को कण्ट्रोल करने के लिए पेनकिलर के दवाएँ को दी जाती हैं।  # खाना रोकना  - शुरुआत में दर्दी को कुछ समय तक खाना भी नहीं दिया जाता है,ताकि अग्न्याशय को आराम मिल सके। ३) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होने का कारण क्या हो सकता है? - यदि कारण पित्त की पथरी है तो,गॉलब्लैडर को निकालने के लिए सर्जरी की जा सकती है।  - अगर कारण शराब है तो, पूरी तरह से बंद करना जरूरी है।  - यदि संक्रमण हो तो, एंटीबायोटिक भी दी जाती है।  ४) क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस कैसे होता है? क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस लंबे समय तक चलने वाली समस्या है, जिस में अग्न्याशय को धीरे-धीरे नुक्सान हो जाता है। #जीवनशैली में परिवर्तन - शराब को पूरी तरह से ही बंद करें। - धूम्रपान को छोड़ें। #एंजाइम सप्लीमेंट  - जब अग्न्याशय पर्याप्त मात्रा में एंजाइम नहीं बना पाता है,तो डॉक्टर Pancreatic Enzyme Supplements को देते हैं, ताकि खाना सही से पच सके। # इंसुलिन - यदि अग्न्याशय के क्षमता बहुत कम हो जाए तो भी मरीज को मधुमेह हो सकता है। ऐसी स्थिति में इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है।  #सर्जरी - गंभीर मामलों में सर्जरी को किया जाता है , ब्लॉकेज को हटाया जा सके. ५) Pancreatitis का सही डाइट प्लान (क्या खाएं?) ✔ क्या खाएं  - उबली हुई सब्जियाँ।  - दलिया, ओट्स। - लो फैट दूध - नारियल का पानी  ❌ क्या न खाएं: - तली हुई ज्यादा चीजें - ज्यादा मसालेदार भोजन ,जंक फूड - शराब छोटे-छोटे अंतराल में ३-४ बार खाना अच्छा होता है। ६) Pancreatitis के जटिलताओं से बचाव ? - संक्रमण  - किडनी फेल्योर - पैनक्रियाटिक सिस्ट जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
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heart disease ka homeopathy me kya ilaj hai?
1) हृदय रोग का क्या इलाज है? हृदय रोग आज के समय में दुनिया भर में मौत बड़ा कारण बन चुका है। भारत देश में भी हर साल लाखों लोग अब हृदय रोग के संबंधी समस्याओं से प्रभावित होते हैं। - हृदय रोग कई तरह के होते हैं, जैसे की,कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट-अटैक, हार्ट फेलियरआदि। अगर सही समय पर सही पहचान तथा इलाज से इस बीमारी को काफी हद तक कण्ट्रोल किया जा सकता है। २) हृदय रोग के मुख्य क्या - क्या कारण होते है? हृदय रोग के कई कारण हो सकते है, जैसे की,  - उच्च रक्तचाप  - मधुमेह  - हाई कोलेस्ट्रॉल - धूम्रपान तथा तंबाकू का सेवन  - मोटापा - ज्यादा तनाव  - सही तरह का खान-पान नहीं होना इन जोखिम को नियंत्रित करके हृदय रोग के खतरे को कम किया जा सकता है। ३) हृदय रोग का इलाज? हृदय रोग का इलाज रोग तथा उसके प्रकार पर निर्भर करता है। मुख्य रूप से तीन तरीकों से इलाज किया जाता है:  १) दवाइयों के द्वारा इलाज  डॉ. स्थिति के अनुसार ही दवाइयाँ को दे सकते हैं:,  - ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने की दवा  - कोलेस्ट्रॉल कम करने वाले दवा -सीने में हो रहे दर्द को कम करने के दवाइन दवा का डेली सेवन जरूरी होता है। बिना डॉ. की सलाह दवा को बंद नहीं करनी चाहिए।  २) एंजियोप्लास्टी  - अगर हृदय के धमनियों में ब्लॉकेज हो जाता है तो, डॉ. एंजियोप्लास्टी सलाह को देते हैं। इसमें पतली ट्यूब के जरिए ब्लॉकेज वाली जगह पर स्टेंट को लगाया जाता है, जिस से रक्त प्रवाह सामान्य हो जाता है।  ३) लाइफ़स्टाइल में परिवर्तन  - हृदय रोग के इलाज के साथ में दवा के साथ लाइफ़स्टाइल में बदलाव ज़रूरी है:  # स्वस्थ आहार का सेवन - कम तेल ,कम नमक वाला भोजन करना - हरी सब्ज़ियाँ , फल का उपयोग करना  - ओमेगा-3 (जैसे अखरोट, अलसी)  # नियमित कसरत - रोज़ाना 30 मिनट तक सुबह तेज़ चलना - योग करना  # धूम्रपान को छोड़ें  - तंबाकू तथा सिगरेट हृदय की धमनियों को नुकसान पहुँचाते हैं। # तनाव को कम करें  ध्यान , योग तथा सही पर्याप्त नींद से तनाव कम करने में मदद करते हैं। ४ ) हार्ट अटैक के समय क्या करें? अगर किसी व्यक्ति को अचानक से सीने में तेज दर्द का होना , सांस का फूलना ,बाएं हाथ में दर्द हो तो तुरंत ही, - एम्बुलेंस को बुलाएं।  - व्यक्ति को आरामदायक स्थिति में बैठें। देर नहीं करें, तथा तुरंत ही अस्पताल ले जाएं। सही समय पर सही इलाज मिलने से जान बचाई भी जा सकती है। ५) जांच तथा नियमित परीक्षण के लिए क्या जरुरी है? हृदय रोग से बचाव तथा समय पर सही इलाज के लिए नियमित जांच भी जरूरी है,  - ब्लड प्रेशर को चेक करना - कोलेस्ट्रॉल का टेस्ट - ईसीजी  40 साल के उम्र के बाद में नियमित हेल्थ का चेकअप करवाना चाहिए, ६) क्या हृदय रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है? - हृदय रोग को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है, पर सही इलाज तथा जीवनशैली से इसे कण्ट्रोल किया जा सकता है।
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homeopathic me acute necrotizing pancreratitis ka ilaj kya hai?
१) Acute necrotizing pancreatitis का सही इलाज क्या है? Acute necrotizing pancreatitis गंभीर रूप है, जिस में अग्न्याशय के ऊतकों का कुछ भाग मर जाता है। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है. अधिकतर दर्दी को ICU में भर्ती करके इलाज की जरुरत होती है। #1. प्रारंभिक प्रबंधन  Acute necrotizing pancreatitis में शुरुआती ५० से ७० घंटे महत्वपूर्ण होते हैं।  (१ ) ICU में भर्ती तथा मॉनिटरिंग  - ब्लड प्रेशर, हार्ट का रेट, ऑक्सीजन, यूरिन के लगातार निगरानी।  - लिवर तथा फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच करना। (२ ) IV Fluids  - पर्याप्त मात्रा में IV Fluids को दिया जाता है, ताकि डिहाइड्रेशन तथा शॉक से बचाव हो सके।  - फ्लूइड की मात्रा दर्दी की स्थिति के अनुसार ही की जाती है।  (३ ) दर्द नियंत्रण  - तेज पेट के दर्द के लिए ओपिऑइड एनाल्जेसिक दिए जा सकते हैं। दर्द को कण्ट्रोल से मरीज की सांस तथा हृदय की स्थिति सही रहती है।  #2. पोषण प्रबंधन ANP में दर्दी को लंबे समय तक भूखा रखा जाता था, पर अब नई गाइडलाइन्स के अनुसार:  - एंटरल न्यूट्रिशन जल्दी शुरू करना ही अच्छा माना जाता है। - इससे आंत के कार्य करने के क्षमता बनी रहती है ,तथा संक्रमण का खतरा कम होता है।  - यदि मरीज एंटरल फीड सहन नहीं कर पाता है, तब IV पोषण को दिया जाता है। # 3. संक्रमण का प्रबंधन  ANP में मृत ऊतक संक्रमित हो सकता है, जो सेप्सिस का भी कारण बनता है। - यदि CT स्कैन या क्लिनिकल लक्षणों से भी संक्रमण हो, तो ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं। - ब्लड कल्चर तथा इमेजिंग की मदद से संक्रमण का पता करते है. #4. इमेजिंग तथा मॉनिटरिंग - बार-बार CT स्कैन केवल जरूरत पड़ने पर ही किया जाता है। #5. इंटरवेंशनल तथा सर्जिकल उपचार  - यदि necrotic tissue संक्रमित हो जाए तो, हस्तक्षेप की जरुरत हो सकता है। #6. कारण का उपचार  ANP के सामान्य कारण हैं, जो के इस तरह से है,  - पित्त की पथरी। - ज्यादा शराब का सेवन करना। - हाई ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर  (1) गॉलब्लैडर स्टोन :: पित्त की पथरी का कारण हो, तो दर्दी की स्थिति सही होने पर गॉलब्लैडर को निकालने की जरुरत होती है।  (2) हाई ट्राइग्लिसराइड्स :: इंसुलिन इन्फ्यूजन के जरूरत पड़ सकती है।  (3) शराब को पूर्ण रूप से परहेज की जरुरत होती है। #7. जटिलताओं का प्रबंधन ANP में कई जटिलताएँ हो सकती हैं, जो की इस तरह से है,  - एक्यूट किडनी इंजरी  - सेप्सिस - अग्न्याशय स्यूडोसिस्ट  इन स्थितियों के संबंधित विशेषज्ञ की मदद ली जाती है।  #8. रिकवरी तथा फॉलो-अप  - दर्दी को कई हफ्तों तक हॉस्पिटल में ही रहना पड़ सकता है। - हॉस्पिटल से डिस्चार्ज के बाद में भी हल्का, कम वसा वाला भोजन दिया जाता है. - शराब तथा धूम्रपान से पूर्ण रूप से परहेज करना  - नियमित फॉलो-अप। - कुछ दर्दी में अग्न्याशय के कार्यक्षमता कम हो जाती है, जिस से मधुमेह , पाचन एंजाइम की कमी हो सकती है.
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Acid Reflux hone ka homeopathy me ilaj?
१) एसिड रिफ्लक्स क्या है? और क्यों होता है? - एसिड रिफ्लक्स, जिसे गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज(GERD) भी कहते है , यह पाचन की नार्मल समस्या है। जिस में पेट का एसिड भोजन नलीकी ओर वापस आ जाता है। - यह स्थिति जलन, पेट में असुविधा तथा कभी-कभी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है। २) एसिड रिफ्लक्स होने के क्या -क्या कारण दिखाई देते है? - यह तब होता है जब ,लोअर इसोफेगल स्फिंक्टर, जो भोजन नली तथा पेट के बीच स्थित होता है, पूरी तरह से बंद नहीं होता है। इसके कारण पेट का एसिड नली में वापस आ जाता है। तथा जलन भी पैदा करता है। - इसके मुख्य कारण निचे बताये अनुसार है,  1. अनियमित खान-पान :: बहुत ज्यादा मसालेदार तथा तैलीय , तला हुआ भोजन, ज्यादा कैफीन , शराब एसिड रिफ्लक्स को बढ़ाते हैं। 2. मोटापा :: पेट में ज्यादा चर्बी पेट पर दबाव डालती है, जिस से एसिड रिफ्लक्स का जोखिम बढ़ता है। 3. धूम्रपान LES को कमजोर कर देता है, जिस से एसिड रिफ्लक्स की संभावना बढ़ाता है। 4. गर्भावस्था :: गर्भ में बढ़ते हुए बच्चे के कारण से पेट पर दबाव बढ़ता है ,तथा एसिड नली में लौट सकता है। ३) एसिड रिफ्लक्स होने के क्या -क्या लक्षण होते है? - एसिड रिफ्लक्स के लक्षण खाने के बाद या तो,रात को सोते समय दिखाई देते हैं। मुख्य लक्षण हैं, - सीने में जलन :: सबसे नार्मल लक्षण,है, जो के पेट से सीने की ओर उठती है। - खट्टी डकार :: खाने के बाद में खट्टी डकार आती है। - गले में खराश या तो, दर्द :: गले की म्यूकोसा को नुकसान पहुंचा सकता है। - सांस लेने में परेशानी :: कभी-कभी एसिड फेफड़ों की ओर चला जाता है, तथा खाँसी या तो,अस्थमा जैसी समस्या हो सकती है. - भूख कम होना तथा उल्टी :: खाना निगलना भी मुश्किल हो सकता है। ४) एसिड रिफ्लक्स का घरेलू क्या इलाज है? मध्यम एसिड रिफ्लक्स के मामलों में घरेलू को कर सकते है, 1. खान-पान में परिवर्तन - छोटे - छोटे हिस्से में खाना को खाएं। - तैलीय, मसालेदार तथा तेज़ खाने से बचें।  - कॉफी तथा शराब का सेवन कम करें।  2. सोने का तरीका - सोते समय अपना सिर ,छाती को थोड़ा - सा ऊँचा रखें। - भोजन के तुरंत बाद में सोने से बचें।  3. वजन को नियंत्रित रखें - नियमित संतुलित आहार से पेट पर दबाव कम ,होगा। 4. धूम्रपान और शराब से बचें - यह दोनों LES को कमजोर करते हैं , जिस से के एसिड रिफ्लक्स बढ़ाते हैं। 5. घरेलू राहत देने वाले उपाय - अदरक :: अदरक डालकर चाय पीने से पेट की सूजन कम होती है।  - एलोवेरा जूस :: पेट की जलन को नियंत्रित करता है।  - सौंफ तथा पुदीना :: पेट को ठंडक देते हैं. # एसिड रिफ्लक्स से जीवनशैली क्या बदलाव होता है? - भोजन करने के बाद में तुरंत लेटने से बचें। - हल्का डेली कसरत करे.  - साफ़ -सुथरे कपडे को ही पहने।  - स्ट्रेस कम करने के लिए डेली कसरत करे.
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Fibromyalgia ka homeopathic me ilaj?
१) फाइब्रोमायल्जिया का क्या इलाज है? फाइब्रोमायल्जिया दीर्घकालिक (क्रॉनिक) दर्द के संबंधी रोग है, जिस में पूरे शरीर में दर्द, थकान, तथा नींद के प्रॉब्लम होती है। मानसिक तनाव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। - यह बीमारी हड्डियों की ही नहीं, पर दर्द को महसूस करने वाली नसों तथा मस्तिष्क के संवेदनशीलता से जुड़ी होती है। सामान्य जांच के रिपोर्ट सामान्य आती हैं, जिस से दर्दी को समझाने में कठिनाई होती है. २)फाइब्रोमायल्जिया के क्या लक्षण होते है? - फाइब्रोमायल्जिया के लक्षण अलग - अलग व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, पर सामान्यतः ये देखे जाते हैं,  - शरीर में लंबे समय तक दर्द।  - सुबह उठते समय शरीर में अकड़न - ज्यादा थकान तथा कमजोरी का होना  - सिरदर्द का होना या तो, माइग्रेन का होना - ध्यान को केंद्रित करने में परेशानी - चिंता  महिलाओं में यह रोग अधिक पाया जाता है, खास कर के 30–50 वर्ष की आयु में। ३) फाइब्रोमायल्जिया का सही इलाज? - फाइब्रोमायल्जिया का कोई स्थायी इलाज नहीं है, पर सही उपचार योजना से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। आमतौर पर दवा, जीवनशैली में परिवर्तन और मानसिक स्वास्थ्य सहायता के संयोजन से किया जाता है। #1. दवा के द्वारा उपचार डॉ दर्दी की स्थिति के अनुसार दवा देते हैं, जैसे की, - दर्द निवारक के दवाएं।  #2. फिजियोथेरेपी तथा व्यायाम  नियमित व्यायाम फाइब्रोमायल्जिया से इलाज का सबसे महत्वपूर्ण भाग है।  - हल्की - सी स्ट्रेचिंग  - कसरत करना  - सुबह - सुबह वॉकिंग करना  धीरे-धीरे से शुरू करें तथा नियमितता बनाए रखें। #3. तनाव के प्रबंधन  यह मानसिक तनाव से जुड़ा है, इसलिए तनाव को कम करना जरूरी है। - मेडिटेशन करना  - हलकी - सी गहरी सांस लेने के अभ्यास  उपाय दर्द की तीव्रता और मानसिक बोझ को कम करने में मदद करते हैं। # 4. नींद में सुधार  - रोज नियमित समय पर ही पर सोने की आदत - मोबाइल तथा टीवी से दूरी बनाये रखना  सही नींद से थकान तथा दर्द दोनों में राहत मिलती है।  # 5. संतुलित आहार का लेना  फाइब्रोमायल्जिया कोई विशेष डाइट नहीं है, पर संतुलित आहार ज्यादा फायदेमंद होता है। - हरी सब्जियां और फल  - प्रोटीन युक्त का आहार - जंक फूड तथा ज्यादा चीनी से बचना चाहिए, क्योंकि सूजन तथा थकान बढ़ा सकते हैं।  # 6. वैकल्पिक उपचार  कुछ दर्दी को वैकल्पिक उपचारों से राहत मिल जाती है.  - मसाज का थेरेपी  - प्राकृतिक का चिकित्सा  इनकी प्रभावशीलता व्यक्ति पर निर्भर करती है, विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।४) जीवनशैली में परिवर्तन का क्या महत्व है? - फाइब्रोमायल्जिया लंबी अवधि की स्थिति है, धैर्य तथा नियमितता बहुत ही जरूरी है।  - काम तथा आराम के बीच संतुलन को बनाये रखें। - सकारात्मक सोच को बनाए रखें।  - परिवार तथा दोस्तों का मदद लें.  समय के साथ - साथ में सही रूटीन बनाने से जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।  ५) कब डॉ. से मिलना चाहिए? - शरीर में तीन महीने से ज्यादा समय से भी तक लगातार दर्द का हो, थकान या मानसिक तनाव बढ़ रहा हो, तो ही डॉ। से संपर्क करें। सही समय पर निदान और उपचार से स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सकती है।
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liver me charbi kyu jam jati hai
१) लिवर में चर्बी क्यों जम जाती है? आज के बदलते हुए जीवनशैली के कारण से लिवर में चर्बी जमना आम समस्या बन गई है। - यह स्थिति शुरुआती चरण में कोई गंभीर लक्षण नहीं दिखाई देते है, पर समय इसका इलाज न किया जाए तो लीवर सिरोसिस तथा लीवर फेल्योर जैसी गंभीर बीमारी का कारण भी बन सकती है। २) लिवर और उसका काम क्या होता है? लीवर शरीर का महत्वपूर्ण भाग है। यह हमारे शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है, तथा भोजन से ऊर्जा का निर्माण भी करता है. - फैटी एसिड तथा कोलेस्ट्रॉल संतुलन को बनाए रखता है। लिवर में चर्बी जमा होने लगता है, तो उसके काम पर भी असर होने लगता है। ३) लिवर में चर्बी जमने के क्या - क्या मुख्य कारण होते है ? 1. अस्वस्थ खानपान - ज्यादा तेल तथा तला भुना तथा जंक फूड का सेवन। - चीनी तथा शुगर वाले पेय का ज्यादा मात्रा में सेवन। - प्रोसेस्ड फूड का सेवन  2. मोटापा - जयदा वजन तथा पेट की चर्बी सीधे ही लिवर में चर्बी जमने का कारण बनती है। 3. शराब का ज्यादा सेवन  - शराब का ज्यादा सेवन करने से लिवर को असर करता है। यह Alcoholic Fatty Liver Disease का मैन कारण है।  4. मधुमेह तथा इंसुलिन प्रतिरोध  - टाइप - 2 मधुमेह में लिवर चर्बी को सही तरह से प्रोसेस नहीं कर पाता है।  - इंसुलिन प्रतिरोध के कारण से लिवर में फैटी एसिड निर्माण बढ़ जाता है।  5. अनुवांशिकता  - अगर परिवार में किसी को भी फैटी लिवर की समस्या है, तो इसका जोखिम बढ़ जाती है।  6. दवा तथा हार्मोनल का असंतुलन  - स्टेरॉयड, एंटीबायोटिक तथा कुछ हार्मोनल दवा के ज्यादा उपयोग।  ४) लिवर में चर्बी के कितने प्रकार होते है? 1. Non-Alcoholic Fatty Liver Disease :: गैर-अल्कोहलिक फैटी लिवर है। - मोटापा तथा खराब खानपान , इंसुलिन का प्रतिरोध का मैन कारण हैं।  2. Alcoholic Fatty Liver Disease :: ज्यादा शराब पीने से होता है।  - शराब के कारण से ही लिवर में चर्बी जमा हो जाती है. तथा सूजन शुरू हो जाती है।  ५) लिवर में चर्बी होने के क्या - क्या लक्षण होते है? शुरुआत में कोई भी तरह के लक्षण नहीं दिखते है। जैसे-जैसे स्थिति बढ़ती है, - थकान तथा कमजोरी का महसूस होना  - भूख भी कम लगना तथा वजन का बढ़ जाना - मतली तथा उल्टी  - आंखों का पीलापन (पीलिया ) जैसे - गंभीर स्थिति में  नोट:: शुरुआती चरण में ब्लड का टेस्ट तथा अल्ट्रासाउंड से ही फैटी लिवर के पहचान होती है।  ६) लिवर में चर्बी से बचाव तथा उपचार? 1. अच्छा खानपान  - ज्यादा तला-भुना तथा अधिक मीठा भोजन को कम ही करें। - फलों, सब्जियों तथा ओट्स के सेवन को बढ़ाएं।  2. वजन को नियंत्रण  - नियमित कसरत करने से वजन कण्ट्रोल में होता है, लिवर में जमा फैट कम होता है।  3. शराब से दुरी  - लिवर में चर्बी जमा है, तो शराब को पूरी तरह से बंद करना चाहिए।  4. नियमित व्यायाम  5. दवाओं का सही तरह से उपयोग  - डॉ. के सलाह बिना कोई भी दवा को न लें। 6. नियमित जांच  - अल्ट्रासाउंड को सही समय पर करवाएं। जिस से की शुरुआती पहचान होने से जटिलताओं से बचा जा सकता है।
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homeopathic me chronic pancreatic ka kya ilaj hai?
#क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस का इलाज - कारण तथा उपचार ? - क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस पुरानी सूजन की बीमारी है, जिस में पैंक्रियास धीरे-धीरे खराब होता जा रहा है। पैंक्रियास मानव का ज़रूरी अंग है, जो के पाचन के लिए एंजाइम तथा ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए इंसुलिन बनाता है। - जब पैंक्रियास में लगातार सूजन रहती है, तो काम बिगड़ जाता है, और दर्दी को कई तरह हेल्थ का प्रॉब्लम होता हैं। १) क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस क्या है? यह ऐसी कंडीशन है, जिस में पैंक्रियास को हमेशा नुकसान होता है। एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस से अलग है कि, एक्यूट फ़ॉर्म टेम्पररी होता है, पर क्रोनिक फ़ॉर्म पैंक्रियास के स्ट्रक्चर तथा फंक्शन में दोनों पर असर पड़ता है। २) क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस होने पर क्या लक्षण होता है? क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस का नॉर्मल लक्षणों में शामिल हो सकते हैं, जैसे की,  - पेट के ऊपरी वाले भाग में बार-बार दर्द का होना।  - दर्द का जो के पीठ तक फैल सकता है. - वज़न का कम हो जाना। - मतली तथा उल्टी का होना  - मधुमेह का बढ़ जाना जब पैंक्रियास में इंसुलिन बनाना कम हो जाता है, तो ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है.  ३) क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस के होने पर कारण दिखाई देते है? - इस बीमारी के मुख्य कारण हैं, जो के इस तरह से है,  1. ज्यादा समय तक शराब का उपयोग करना  2. ध्रूमपान  3. जेनेटिक कारण 4. पित्ताशय की पथरी 5. हाई ट्राइग्लिसराइड का स्तर भारत देश में, शराब पीना इसका सबसे बड़ा कारण माना जाता है। ४) क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस का होम्योपैथिक में इलाज? 1. लाइफस्टाइल में परिवर्तन  इलाज में पहला तथा सबसे ज़रूरी कदम है, लाइफस्टाइल में बदलाव करना। - शराब को तुरंत ही छोड़ दे. - ध्रूमपान को छोड़ दें - कम फैट वाली डाइट प्लान को लें.  - उचित मात्रा में पानी पिएं।  शराब तथा ध्रूमपान करने से पैंक्रियास नुकसान पहुंचाते हैं, इन्हें छोड़ना बहुत ही ज़रूरी है।  2. दवाएं डॉ. दर्दी के हालत के आधार पर ही दवाएं देता है, # दर्द को कम करने की दवाएं  - हल्के से दर्द के लिए पेनकिलर को दिया जाता हैं। #पैंक्रियाटिक एंजाइम सप्लीमेंट्स - सप्लीमेंट्स पाचन में मदद करता हैं, तथा पेट के समस्याओं को कम भी करते हैं। खाने के साथ में लिया जाता है, ताकि पोषक तत्वों को ठीक से सोख सके।  #इंसुलिन थेरेपी  - अगर दर्दी को मधुमेह है, तो इंसुलिन इंजेक्शन के ज़रूरत पड़ सकती है।  3. एंडोस्कोपिक से ट्रीटमेंट - कुछ मामलों में तो, पैंक्रियाटिक डक्ट में ब्लॉक हो जाता है। इस कंडीशन में , ERCP नाम का प्रोसीजर किया जाता है। प्रोसीजर से ब्लॉकेज को हटाता है, दर्द कम करता है. 4. सर्जरी - अगर दवाएं तथा एंडोस्कोपिक ट्रीटमेंट से भी काम नहीं करते हैं, तो सर्जरी की ज़रूरत हो सकती है। - सर्जिकल प्रोसीजर से पैंक्रियास के डैमेज वाला भाग को हटा सकते हैं। ४ ) क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस से बचाव के लिए क्या कर सकते है? निचे बताये अनुसार बचाव कर सकते है, जैसे की,  - शराब को छोड़ दे.  - ध्रूमपान भी छोड़ें। - हेल्दी तथा बैलेंस्ड वाला डाइट लें.  - रेगुलर हेल्थ का चेक-अप - ब्लड ट्राइग्लिसराइड्स को नियंत्रण करें
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ovarian cyst kya hai or kyu hota hai?
१) महिलाओं में ओवरीयन सिस्ट क्यों होता है? अंडाशय महिला प्रजनन तंत्र का महत्वपूर्ण भाग है। हर महीने में ओवरी में अंडा बनता है, और हार्मोन स्रावित होते हैं। कभी-कभी ओवरी में तरल से भरी छोटी थैली बन जाती है, जिसे ओवरीयन सिस्ट कहते हैं। - ज़्यादातर सिस्ट नार्मल अपने-आप ही ठीक होने वाली होती हैं, पर कुछ मामलों में दर्द, अनियमित पीरियड भी पैदा कर सकती हैं। २) ओवरीयन सिस्ट क्या है? ओवरी में बनने वाली तरल भरी थैली को ही ओवरीयन सिस्ट कहते है। एक या दोनों ओवरी में हो सकती है।  - अधिकांश सिस्ट सौम्य होती हैं. और १-३ महीनों में बिना इलाज के खत्म हो जाती हैं। ३) महिलाओं में ओवरीयन सिस्ट क्यों होता है? #हार्मोनल का असंतुलन  - महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टेरोन का संतुलन बिगड़ने पर ओवरी में अंडाणु थैली ठीक से फट नहीं पाती है, जिस से सिस्ट बन जाती है।  * हार्मोनल बदलाव के कारण  - अनियमित पीरियड का - तनाव जैसा लगना  - थायरॉयड की प्रॉब्लम  #फंक्शनल का सिस्ट (सबसे आम कारण )  मासिक चक्र के दौरान दो प्रकार की सिस्ट बन सकती हैं.  (१) फॉलिक्युलर सिस्ट :: जब अंडा बाहर नहीं निकलता है।  (२) कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट :: जब अंडा निकलने के बाद बनी संरचना में तरल भर जाता है.  ये प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं. और अक्सर अपने-आप ही सही हो जाती हैं। #पीसीओएस(PCOS)  PCOS एक हार्मोनल का विकार है, जिस में ओवरी में कई छोटी - छोटी सिस्ट बन जाती हैं। इसके लक्षण निचे बताये निचे बताये अनुसार हो सकते है, जैसे की, - अनियमित पीरियड  - वजन का बढ़ जाना - मुंहासे का होना - बांझपन के प्रॉब्लम #एंडोमेट्रियोसिस एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय के अंदर के पर्त जैसी ऊतक ओवरी पर चिपक जाती है, जिस से “चॉकलेट सिस्ट” बन सकती है।  #उसके लक्षण#  - तेज पीरियड का दर्द।  - संभोग के समय ज्यादा दर्द का होना।  # गर्भावस्था  - गर्भावस्था के शुरुआती में कभी-कभी कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट बन सकती है। यह सामान्य होती है. #संक्रमण - गंभीर पेल्विक संक्रमण होने पर भी ओवरी और फेलोपियन ट्यूब में सिस्ट या तो एब्सेस बन सकता है। अगर समय पर सही से इलाज न होने पर जटिलता बढ़ सकती है।  # उम्र और जीवनशैली  - २० से ३५ वर्ष महिलाओं में अधिक होता है.  - मोटापा  - ज्यादा तनाव ३) ओवरीयन सिस्ट के क्या - क्या लक्षण दिखाई देते है? कई बार तो,कोई लक्षण नहीं होते, है पर अगर लक्षण हों तो  - पेट के निचले वाले हिस्से में तेज दर्द का होना। - अनियमित पीरियड।  - पेट का फूल जाना - पेशाब का बार-बार आना ४) ओवरीयन सिस्ट की जांच कब करना चाहिए? - पेल्विक अल्ट्रासाउंड सबसे आम। - हार्मोन का जाँच - कुछ जटिल मामलों में MRI ५) क्या ओवरीयन सिस्ट में कैंसर बन सकती है? - ज़्यादातर सिस्ट गैर-कैंसर होती हैं। पर रजोनिवृत्ति के बाद अगर सिस्ट बनती है, तो सावधानी जरूरी है। #इलाज कैसे होता है?  #ऑब्जर्वेशन  - छोटी तथा बिना लक्षण वाली सिस्ट में १- ३ महीने तक निगरानी की जाती है।  # दवा - हार्मोनल के गोलियां - दर्द निवारक के दवा # सर्जरी  अगर सिस्ट बड़ी हो,तो, लगातार बढ़ रही हो तो लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की जाती है।  ६) बचाव कैसे करना चाहिए? - नियमित कसरत करना  - वजन नियंत्रण में रखना- तनाव को कम करें  - नियमित चेकअप करना
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Acid Reflux kya hai or kis karan se hota hai?
१) एसिड रिफ्लक्स (Acid Reflux) का इलाज – कारण, लक्षण और उपचार? एसिड रिफ्लक्स सामान्य पर स्वास्थ्य की समस्या है, जिस में पेट का एसिड भोजन नली में वापस आ जाता है। इस से सीने में जलन , खट्टी डकार और कभी-कभी गले में जलन या तो,दर्द जैसी समस्याएँ होती हैं। - यदि इसे समय पर नही समझा जाए तो यह गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज जैसी गंभीर समस्या में परिवर्तन हो सकता है। २) एसिड रिफ्लक्स के क्या -क्या कारण होते है? एसिड रिफ्लक्स मुख्यतः तब होता है, जब निचला इसोफेगल स्फिंक्टर सही तरीके से काम नहीं करता है।  - LES एक मांसपेशी है, जो के पेट तथा भोजन नली के बीच में स्थित होती है. और भोजन तथा एसिड को पेट में रखने का काम करती है। - जब यह कमजोर हो जाता है, या तो, ढीला हो जाता है, तो पेट का एसिड ऊपर के ओर भोजन नली में चला जाता है।   # इसके मुख्य कारण हैं, तरह से है, 1. अनियमित भोजन तथा फास्ट फूड :: ज्यादा तैलीय तथा मसालेदार और तले हुए भोजन से एसिड बहुत अधिक बनता है।  2. ज्यादा पेट भर कर के खाना से भी पेट पर दबाव बढ़ता है।  3. मोटापा और पेट की अतिरिक्त चर्बी :: पेट पर दबाव बढ़ने से भी LES कमजोर हो सकता है। 4. धूम्रपान और शराब का सेवन :: यह नली और पेट की मांसपेशियों को कमजोर कर देता है।  5. कुछ दवाइयाँ :: जैसे एंटी-डिप्रेसेंट्स तथा ब्लड प्रेशर के दवा। ३) एसिड रिफ्लक्स के क्या - क्या लक्षण है? एसिड रिफ्लक्स के लक्षण इस प्रकार है, जो के - सीने में जलन :: यह सबसे सामान्य लक्षण है।  - खट्टी डकार :: खाना खाते समय या बाद में। - गले में जलन या खराश :: गले की जलन, खांसी या गले में गांठ जैसा महसूस होना।  - भोजन को निगलने में परेशानी यदि लक्षण लगातार २-३ सप्ताह से ज्यादा रहें तो डॉ. से तुरंत संपर्क करना चाहिए।  ४) एसिड रिफ्लक्स का घरेलू उपचार क्या है? - एसिड रिफ्लक्स को कम करने के लिए कई घरेलू उपाय है, जो के इस तरह से है,  1. छोटे तथा नियमित भोजन करें।  दिन में ३-४ बार छोटे अंतर में भोजन करें।  2. खट्टी और मसालेदार चीजों से परहेज़। - मिर्च, तेलीय भोजन तथा फास्ट फूड से दूरी बनाएं। 3. सोने से पहले खाना नहीं खाएँ।  4. सही वजन बनाए रखें। - मोटापा एसिड रिफ्लक्स को बढ़ाता है। इसलिए योग मददगार हैं।  5. सिर ऊँचा करके सोना  - सोते समय अपना सिर और सीने को थोड़ा ऊँचा रखें। जिस से एसिड के ऊपर आने की संभावना कम करता है। 6. एलोवेरा जूस या अदरक - एलोवेरा जूस तथा अदरक पेट के सूजन को कम कर सकते हैं।  7. पानी का पर्याप्त सेवन करना - दिन में ७ से ८ गिलास पानी पीने से पेट का एसिड संतुलित रहता है। ५) जीवनशैली में क्या - क्या परिवर्तन कर सकते है? - एसिड रिफ्लक्स को कण्ट्रोल करने से जीवनशैली में परिवर्तन सबसे प्रभावी तरीका है, जैसे की,  - धूम्रपान तथा शराब से पूरी तरह से परहेज़ करना सही होता है. - तैलीय तथा मसालेदार भोजन की मात्रा को कम करें। - नियमित रूप से थोड़ा -थोड़ा कसरत करे. - तनाव कम करने के लिए प्राणायाम करें।  ६) कब डॉक्टर से मिलें? यदि नीचे बताए गए लक्षण गंभीर हैं, तो,डॉक्टर से तुरंत मिलने चाहिए, - लगातार २ सप्ताह से ज्यादा समय तक एसिड रिफ्लक्स होना।  - बार-बार उल्टी या खून का आना।  - भोजन निगलने में परेशानी का होना।
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acute pancreatic kya or kyu hota hai?
1) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस क्या है?यह गंभीर कंडिशन है, जिस से पैंक्रियास में अचानक से सूजन आ जाती है। इस तरह के कंडिशन हल्की या कभी-कभी जानलेवा भी हो सकती है। यदि समय पर सही इलाज और सही देखभाल से ज़्यादातर मरीज़ पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। - पैंक्रियास मानव शरीर का ज़रूरी अंग है, जो के डाइजेस्टिव एंजाइम और इंसुलिन बनाता है। - जब यह डाइजेस्टिव एंजाइम समय से पहले ही एक्टिवेट हो जाते हैं, तो पैंक्रियास को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिस से सूजन और दर्द हो सकता है। २) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के क्या मुख्य कारण देखने को मिलते है?एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के मुख्य कारण निचे बताये अनुसार हो सकते है, जैसे की, -  गॉलस्टोन - बहुत ही ज़्यादा मात्रा में शराब का पीना | - हाई ट्राइग्लिसराइड का स्तर। -  कुछ दवाएं के सेवन से  साइड इफेक्ट। - किसी तरह का संक्रमण  ३) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का सही इलाज क्या है?एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस इलाज का मुख्य लक्ष्य हैं, 1. दर्द से आराम। 2. सूजन को कम करना 3. अंदरूनी कारण का इलाज करना (१) अस्पताल में एडमिट होना ज़्यादातर मामलों में, दर्दी को हॉस्पिटल में एडमिट किया जाता है, खासकर - पेट में तेज़ दर्द का होना। - उल्टी तथा डिहाइड्रेशन का होना। - गंभीर मामलों में ICU के भी ज़रूरत पड़ सकती है। (२)  IV फ्लूइड्स एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस से बहुत तेज़ी से डिहाइड्रेशन होता है। इसलिए, दर्दी को रिंगर लैक्टेट इंट्रावीनसली को दिया जाता है। - अंगों के रक्षा भी करता है। पर शुरुआती २४- ४८ घंटे बहुत ही ज़रूरी होते हैं। (३) दर्द का सही मैनेजमेंट पेट में तेज़ दर्द बीमारी का बड़ा लक्षण है। इसके लिए, -  IV पेन रिलीवर। - अगर ज़रूरत पड़ने पर डॉ, दर्दी की हालत के आधार पर दवा को चुनते हैं। (४)  कुछ समय तक खाना-पीना नहीं देते - शुरुआती १-२ दिनों तक तो,दर्दी को पैंक्रियास में आराम देने के लिए कुछ भी खाने-पीने से रोका जा सकता है। अगर दर्दी के हालत में सुधार होता है, तो पहले लिक्विड डाइट को दिया जाता है, फिर हल्का, कम फैट वाला खाना देते है। - गंभीर मामलों में, नेज़ल ट्यूब के माध्यम से न्यूट्रिशन को दिया जाता है। (५) गॉलस्टोन का इलाज - अगर वजह गॉलस्टोन का हो तो, #ERCP का प्रोसीजर - शुरुआती ERCP का उपयोग बाइल डक्ट में फंसे स्टोन को निकालने के लिए करते है। #सर्जरी - आगे के प्रॉब्लम को रोकने के लिए गॉलब्लैडर को निकालने के लिए सर्जरी किया जाता है। (६) शराब से बचें - अगर बीमारी की वजह शराब है ,तो शराब को तुरंत ही छोड़ना ज़रूरी है,  # होम केयर (रिकवरी फेज़)जब दर्दी को हॉस्पिटल से छुट्टी मिलती है,तो, ✔ कम फैट वाला खाना देना सही होता है , -  उबला हुआ खाना। - हरी साग - सब्ज़िया। - ताजा फल ✔ खूब पानी को पीना चाहिए। ✔ शराब और धूमपान से दूर रहे।  ४) डॉक्टर को कब दिखाएँ?अगर इस तरह के लक्षण दिखें,तो तुरंत ही संपर्क करे। -  तेज़ बुखार का आना -  लगातार उल्टी का होना। -  पीलिया | - साँस लेने में परेशानी। - ज़्यादा कमज़ोरी जैसा लगना
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non alcoholic fatty liver disease ka ilaj
१) नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ का इलाज? - नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ ऐसी स्थिति है, जिस में "शराब न पीने के बावजूद लिवर में ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है"। - आजकल आम बीमारी बन चुकी है, खास कर के उन लोगों में जो मोटापे, मधुमेह, हाई कोलेस्ट्रॉल से जूझ रहे हैं। अच्छी बात यह है कि, शुरुआती स्टेज में बीमारी ठीक की जा सकती है। २) नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ क्यों होता है? - ज़्यादा वजन का हो जाना या मोटापा। - टाइप-2 मधुमेह - हाई ट्राइग्लिसराइड्स / कोलेस्ट्रॉल का हो जाना। - जंक फूड तथा शुगर-रिच डाइट।  - हार्मोनल का असंतुलन  ३) इलाज का मुख्य सिद्धांत क्या है? नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ का कोई भी टैबलेट से इलाज नहीं है।  इसका प्रभावी इलाज है, जीवन में परिवर्तन + सही डाइट , वजन का कम करना।  #1. वजन का कम करना ::– सबसे असरदार इलाज है. खोज के अनुसार अगर आप 5–7% वजन को कम कर लेते हैं → लिवर की चर्बी कम होने लगती है.  #2. सही डाइट का चयन करना।  #क्या खाएँ#  ✔ हाई फाइबर वाला फूड  - हरी- सब्ज़ियाँ जैसे की ,पालक, लौकी, तोरी। - फल का सेवन में सेब, पपीता, नाशपाती।  - ब्राउन राइस, दलिया  ✔ हेल्दी फैट  - अखरोट, बादाम (कम पर सीमित मात्रा में ).  ✔ प्रोटीन - लो-फैट का दही - मछली (अगर खाते हों तो, ही )  #क्या न खाएँ# - मीठा तथा शुगर वाले वस्तुए।  - कोल्ड ड्रिंक्स भी नहीं लेना।  - मैदा, बेकरी का आइटम।  - बहुत ही ज़्यादा चावल  #3. दवा से भी ज़्यादा असरदार कसरत करना होता है.  - हफ्ते में कम से कम २ घण्टे जितना कसरत करना। जिस में हो सकता है, तेज़ चलना , साइक्लिंग करना , कपालभाति।  #4. मधुमेह तथा कोलेस्ट्रॉल पर कंट्रोल रखना  अगर आपको भी डायबिटीज़ , हाई BP , हाई कोलेस्ट्रॉल हो तो, कंट्रोल करना "NAFLD" इलाज का हिस्सा है। - डॉ द्वारा दी गई दवाएँ को नियमित समय पर लें और खुद से दवा को बंद न करें। #5. शराब तथा धूम्रपान का सेवन - शराब से तो, बिल्कुल दुरी कर लेना सही है.  * धूम्रपान करने से लिवर और भी डैमेज हो सकता है. #6 . नियमित जाँच  हर 6 महीने में Liver Function Test , Ultrasound, (अगर डॉक्टर कहें तो,) इस से बीमारी की प्रोग्रेस का पता चलता है।
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Allergic Asthma kya hai or kya laksan hote hai?
१) एलर्जिक अस्थमा क्या है? एलर्जिक अस्थमा ऐसी सांस की बीमारी है, जिस में किसी (एलर्जन) के संपर्क में आने पर फेफड़ों की नलियां सूज जाती हैं. और सिकुड़ जाती हैं। इस से सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट, सीने में जकड़न, खांसी तथा सांस फूंलने जैसी समस्याएं होती हैं। - नार्मल एलर्जन में धूल-मिट्टी, परागकण, पालतू जानवरों के बाल, धुआं तथा कुछ केमिकल शामिल हैं।  २) एलर्जिक अस्थमा के क्या -क्या लक्षण दिखाई देते है? एलर्जिक अस्थमा के लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है. जैसे की,  - बार बार सांस का फूल जाना। - सीने में जकड़न या तो दर्द का होना। - रात या सुबह में जल्दी खांसी।  - कोई भी एलर्जन के संपर्क में आने से ही लक्षण बढ़ जाना ३) एलर्जिक अस्थमा का इलाज? एलर्जिक अस्थमा का इलाज पूरी तरह से खत्म करने के बजाय उसे कंट्रोल करने पर केंद्रित करना होता है। सही इलाज से दर्दी सामान्य जीवन भी जी सकता है।  #1. एलर्जन से बचाव इलाज का पहला तथा सबसे जरूरी कदम है, एलर्जन से दूरी बनाये रखना । - घर में धूल नहीं रखें, तथा नियमित सफाई करें।  - बेडशीट तथा तकिए के कवर को गर्म पानी में अच्छे से धोएं। - पालतू जानवरों को अपने बेडरूम से दूर ही रखें। - धुएं तथा प्रदूषण से बचें।  - घर से बाहर निकलते समय मुँह पर मास्क का उपयोग करें।  # 2. Immunotherapy  - अगर एलर्जन की सही से पहचान हो जाए, तो immunotherapy अच्छा विकल्प हो सकता है।  - इसमें शरीर को धीरे धीरे से एलर्जन का आदी बनाया जाता है, जिस से एलर्जी की प्रतिक्रिया कम हो जाती है। यह इलाज लंबे समय तक असरदार हो सकता है।  #3 . घरेलू उपाय तथा लाइफस्टाइल का परिवर्तन  दवा के साथ साथ में कुछ घरेलू उपाय को भी मददगार होते हैं, जैसे की,  - भाप को लेना। - गुनगुना पानी को पीना।  - योग तथा प्राणायाम।  - डॉ. की सलाह से नियमित कसरत करे।  #4. डाइट का रोल कुछ फूड्स तो, सूजन कम करने में मदद करते हैं, जैसे की,  - हरी सब्जियां तथा फल का सेवन।  - विटामिन - C तथा - E वाले भोजन। - प्रोसेस्ड तथा जंक फूड से दूर ही रहना। ४) कब डॉ. से संपर्क करें? - इनहेलर से भी अगर राहत न मिले तो.  - बहुत ही तेज से सांस का फूलना।  - बोलने में भी दिक्कत होना। - होंठ या तो, नाखून का नीले पड़ जाना।
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pancreatitis me sharab pina kitna khatarnak ho sakta hai?
१) पैंक्रियाटाइटिस में शराब पीना कितना ख़तरनाक हो सकता है? पैंक्रियाटाइटिस गंभीर बीमारी है, जिस में अग्न्याशय में सूजन आ जाती है। अग्न्याशय शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, जो पाचन एंज़ाइम और इंसुलिन जैसे हार्मोन को बनाता है। जब इसमें सूजन होती है, तो पूरा पाचन तंत्र तथा ब्लड शुगर को कण्ट्रोल से असर होता है. - पैंक्रियाटाइटिस के बड़े कारणों में से एक है , शराब का सेवन।  २) पैंक्रियाटाइटिस कितने तरह का होता है? पैंक्रियाटाइटिस २ तरह का होता है:  1. तीव्र पैंक्रियाटाइटिस :: यह तो,अचानक से शुरू होता है, तथा तेज़ पेट का दर्द, उल्टी, बुखार और कमजोरी के साथ आता है।  2. क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस :: लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है, जिस में अग्न्याशय खराब होता चला जाता है।  - पैंक्रियाटाइटिस का मैन कारण है, क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस का ही है।  ३) शराब अग्न्याशय को किस तरह से नुकसान करती है? निचे बताये अनुसार शराब के सेवन से पैंक्रियास को नुक्सान हो सकता है, जैसे की, - पाचन एंज़ाइम समय से पहले ही एक्टिव हो जाते हैं.  - अग्न्याशय खुद को ही पचाने लगता है.  - फाइब्रोसिस तथा स्थायी नुकसान भी होता है. - छोटी नलिकाएँ भी ब्लॉक हो जाती हैं.  ४) पैंक्रियाटाइटिस में शराब पीने से क्या खतरा हो सकता है? 1. दर्द का कई गुना बढ़ जाना - पैंक्रियाटाइटिस में दर्द से असहनीय होता है। शराब पीने से यह दर्द अचानक से कई गुना बढ़ सकता है.2. बार-बार अटैक आने का जोखिम  अगर बार पैंक्रियाटाइटिस हो चुका है, और मरीज शराब पी रहा रहता है, तो:  - बार-बार अटैक आने का जोखिम होता है.  - हर अटैक पहले से ज़्यादा ख़तरनाक होता है.  - पैंक्रियास को हानि करता है. 3. क्रॉनिक पैंक्रियास में परिवर्तन का खतरा  - तीव्र पैंक्रियाटाइटिस में शराब को पीते रहने से बीमारी Chronic Pancreatitis में बदल सकती है.  4. पाचन तंत्र पूरी तरह से बिगड़ सकता है. शराब के कारण से पैंक्रियास एंज़ाइम को बनाना बंद कर सकता है, जिस से:  - खाना सगी से पचता नहीं है.  - वजन तेज़ी से घट जाता है.  5. मधुमेह का खतरा  जब पैंक्रियास ख़राब होता है, तो इंसुलिन कम हो जाता है, जिस से पैंक्रियाटाइटिस के दर्दी में मधुमेह होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है।  #क्या थोड़ा से शराब पीना सुरक्षित है? - नहीं।  पैंक्रियाटाइटिस के पेशेंट्स के लिए शराब ख़तरनाक है.  - बीयर,वाइन —यह सब भी हानिकारक हो सकता हैं.  ५ ) शराब को छोड़ने से क्या - क्या फायदे होते हैं? - दर्द तथा सूजन में कमी देखने को मिलती है.  - पाचन तथा वजन में भी सुधार। - मानव के जीवन गुणवत्ता में भी सुधार होता है.  # शराब को छोड़ना मुश्किल हो तो क्या कर सकते है? - डॉ. से खुल कर के बात करें। - परिवार के मदद को लें. - ज़रूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक के भी मदद लें सकते है.   #पैंक्रियाटाइटिस में क्या करें और क्या नहीं करें?  #क्या करना चाहिए।  - शराब को पूरी तरह से तो , बंद ही कर दे. - हल्का, वसा वाला भोजन को ही लें. - डॉ. के द्वारा दी गई दवा को नियमित लें.  - समय-समय पर जांच करना भी सही होता है. # क्या नही करें। - शराब का सेवन नहीं करना। - तला भुना तथा ज़्यादा फैटी वाला खाना। - बिना डॉ. के सलाह दवा को बदल देना।
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homeopathy me atopic dermatitis ka ilaj?
१) एटोपिक डर्मेटाइटिस का इलाज? एटोपिक डर्मेटाइटिस, जिसे हम एग्ज़िमा कहते है, यह पुरानी त्वचा रोग है। - इसमें त्वचा बहुत ज़्यादा सूखी, लाल, खुजलीदार और सूजनयुक्त हो जाती है। इस तरह के बीमारी ज़्यादातर बच्चों में पाई जाती है, पर कई मामलों में बड़ों में भी लंबे समय तक बनी रहती है। - यह रोग पूरी तरह से ठीक न हो, पर सही इलाज और देखभाल से नियंत्रित किया जा सकता है। २) एटोपिक डर्मेटाइटिस होने के क्या - क्या कारण होते है? - एटोपिक डर्मेटाइटिस का कोई कारण नहीं होता है , पर इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं.  - जेनेटिक कारण :: अगर परिवार में कोई को भी एलर्जी, अस्थमा या एग्ज़िमा है. - एलर्जी :: धूल - मिट्टी, पालतू जानवर,इत्र। - मौसम में बदलाव :: बहुत ज़्यादा ठंड या तो, बहुत ज़्यादा गर्मी।  - रसायन वाले साबुन, या तो, डिटर्जेंट। - मानसिक तनाव तथा स्ट्रेस। ३) एटोपिक डर्मेटाइटिस के क्या -क्या लक्षण होते है? एटोपिक डर्मेटाइटिस के लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है, जैसे की, - बहुत ज़्यादा खुजली का आना। - स्किन का लाल तथा सूजनयुक्त का होना।  - सूखी तथा फटी त्वचा।  - बार बार खुजलाने से भी घाव बन सकता है. - बच्चों के चेहरे पर गर्दन पर , हाथ-पैर पर दाने का हो जाना। - बड़ों के कोहनी पर , घुटने, तथा गर्दन में ज़्यादा असर. ४) एटोपिक डर्मेटाइटिस का सही इलाज क्या है? 1. मॉइस्चराइज़र का सही उपयोग करना।  त्वचा को हमेशा से ही नम रखना  - दिन में ३ बार मॉइस्चराइज़र लगाएं।  - नहाने के बाद में मॉइस्चराइज़र लगाना अच्छा होता है.  2. स्टेरॉयड क्रीम के सलाह  जब भी सूजन तथा खुजली ज़्यादा हो, तो, डॉ. स्टेरॉयड क्री देते हैं.  - सूजन, लालपन तथा खुजली भी कम करती है.  - हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही क्रीम का इस्तेमाल करें।  3. Non-Steroid के दवा अगर स्टेरॉयड की ज़रूरत पड़ रही हो तो, डॉ कुछ दवा को दे सकते हैं. - लंबे समय तक के लिए ज़्यादा सुरक्षित माना जाता है.  - चेहरा तथा गर्दन जैसे संवेदनशील भाग में  4. इंफेक्शन का इलाज  बार-बार खुजलाने से भी त्वचा में फंगल इंफेक्शन हो सकता है.  5. नहाने का सही तरीका  - डेली गुनगुने पानी से नहाने.  - ज्यादा गर्म पानी से न नहाएं।  ५ ) एटोपिक डर्मेटाइटिस का घरेलू उपाय क्या है? - नारियल तेल का उपयोग करना अच्छा होता है.  - ढीले तथा कॉटन का कपड़े पहनें।  - पसीने तथा ज़्यादा गर्मी से बचें।  ६) एटोपिक डर्मेटाइटिस में क्या नहीं करें? - बार-बार खुजलाना नहीं।  - केमिकल वाले साबुन तथा कॉस्मेटिक्स। - बिना डॉ. के सलाह से स्टेरॉयड क्रीम का उपयोग नहीं करना।  - बहुत गर्म पानी से भी नहीं नहाना # डॉक्टर को कब दिखाएं? - खुजली ज़्यादा हो तो. - दाने ठीक नहीं हो रहे हों तो. - बच्चों में नींद तथा खाना प्रभावित हो रहा हो.
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badhajmi kya hai or kyu hota hai?
१) बदहजमी क्या है? बदहजमी कोई बीमारी नहीं है, पर पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या है, जिस में भोजन सही से पच नहीं पाता है। बदहजमी होने पर पेट में भारीपन, जलन, गैस, मितली और कभी-कभी पेट का दर्द जैसी समस्याएँ होती हैं। - आजकल खराब लाइफ स्टाइल तथा गलत खान-पान के कारण से बदहजमी नार्मल समस्या बन गई है। २) बदहजमी होने के क्या -क्या प्रमुख कारण होते है? बदहजमी होने के कई कारण हो सकते हैं, जो के इस तरह से है, -बहुत ही ज़्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना पाचन को कमजोर कर देता है। - कभी - कभी ज़रूरत से ज्यादा खाने पर भी पेट को पचाने में परेशानी होती है। - अनियमित खान-पान से भी बदहजमी बढ़ाता है। - मानसिक तनाव से भी का सीधा असर पाचन पर पड़ सकता है।  - शराब तथा धूम्रपान पेट के परत को नुकसान पहुँचाते हैं। - तेज़ी से खाना को खाने से भी पाचन बिगाड़ता है। -ज्यादा चाय-कॉफी से एसिडिटी होती है।  ३) बदहजमी होने पर क्या लक्षण दिखाई दे सकते है? बदहजमी के लक्षण व्यक्ति पर निर्भर करते हैं, पर आमतौर पर ये लक्षण देखे जाते हैं, - पेट में ज्यादा जलन या दर्द का होना। - बार-बार खट्टी डकार का आना  - पेट में गैस का बनना - पेट का फूल जाना। - सीने में जलन का होना। - खाना खाने के बाद में भी भारीपन जैसा लगना  ४) बदहजमी होने का घरेलू इलाज क्या है? 1. अजवाइन का सेवन करना  - अजवाइन पाचन के लिए बहुत फायदेमंद होती है।  2. अदरक की चाय पिएँ।  3. सौंफ गैस और एसिडिटी को कम करती है। 4. हींग पेट दर्द और गैस में राहत देती है। 5. दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन सुधारते हैं।  6. नींबू पानी पाचन रसों को सक्रिय करता है। ५) बदहजमी होने पर क्या खाएँ और क्या नहीं खाएँ ? #बदहजमी होने पर खाएँ# - दलिया  - खिचड़ी  - केला - पपीता  - नारियल का पानी #बदहजमी में क्या न खाएँ#  - ज्यादा तला-भुना हुआ खाना  - ज्यादा मिर्च-मसाले वाला  - ज्यादा फास्ट फूड।  - ज्यादा चाय कॉफी ६) बदहजमी होने कब डॉक्टर से संपर्क करें? बदहजमी के समस्या ज्यादा लंबे समय बनी रहे तो डॉक्टर से ज़रूर संपर्क करें:  - लगातार उल्टी का होना - तेज में पेट का दर्द - वजन का अचानक से कम हो जाना।
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genetic pancreatitis kya hai or kyu hota hai?
१ )Genetic Pancreatitis क्या है? Genetic Pancreatitis तब होता है, जब कुछ "जीन में म्यूटेशन" के कारण पाचन एंजाइम समय से पहले ही सक्रिय हो जाते हैं. और अग्न्याशय को नुकसान पहुँचाने लगते हैं। - सामान्यतः ये एंजाइम आंत में जाकर के एक्टिव होते हैं, पर इस बीमारी में वे Pancreas के अंदर ही एक्टिव हो जाते हैं।  यह बीमारी "संक्रामक नहीं" होती है, पर पीढ़ी दर पीढ़ी चल सकती है। २) Genetic Pancreatitis के मुख्य क्या कारण है? Genetic Pancreatitis के कारण निचे अनुसार हो सकते है, जैसे की,  1. PRSS1 Gene Mutation :: – सबसे आम कारण में से।  2. SPINK1 Gene :: – एंजाइम को कंट्रोल करने में असफल।  3. CFTR Gene :: – सिस्टिक फाइब्रोसिस से जुड़ा। 4. CTRC Gene :: – एंजाइम को निष्क्रिय करने में समस्या।  इन जीनों खराबी के कारण से अग्न्याशय में बार-बार सूजन होती है। ३) Genetic Pancreatitis के क्या लक्षण हो सकते है? Genetic Pancreatitis के लक्षण व्यक्ति की उम्र ,बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करते हैं, जैसे की, - बार-बार तेज पेट में दर्द का होना।- दर्द भी पीठ तक जा सकता है. - उल्टी तथा मतली का होना। - खाने के बाद में दर्द का बढ़ जाना।  - वजन का कम हो जाना। - लंबे समय में "मधुमेह" का खतरा ४) Genetic Pancreatitis की जांच कैसे की जाती है? इस बीमारी की पहचान के लिए निम्न जांचें की जाती हैं:  #1. Blood Tests  - Amylase , Lipase का स्तर। #2 . Imaging Tests - Ultrasound. - CT Scan . - MRI / MRCP. #3 . परिवार में किसी को Pancreatitis होते है, तो इसका जोखिम और भी ज्यादा हो सकता है. ५) Genetic Pancreatitis का इलाज? - Genetic Pancreatitis का स्थायी इलाज नहीं है, पर सही उपचार से कंट्रोल किया जा सकता है।  #1. दर्द का इलाज  - तेज दर्द के निवारक दवाएं। - जरूरत पड़ने पर हॉस्पिटल में एडमिट होना।  #2. Pancreatic Enzyme Supplements - पाचन को सुधारने में मदद. - वजन तथा पोषण को बनाए रखने में सहायक। #3. आहार तथा जीवनशैली में बदलाव  #क्या खाएं#  - कम चर्बी वाला भोजन। - हल्का ,पच सके ऐसा भोजन करे। - फल, साबुत अनाज, सब्जियाँ।  #क्या नही खाएं# - पूरी तरह से शराब पर निषेध। - तला-भुना तथा ज्यादा फैटी खाना। 4. मधुमेह कण्ट्रोल  - Blood sugar के डेली जांच। - इंसुलिन , दवाइयाँ (जरूरत के अनुसार)  # 5. विटामिन सप्लीमेंट्स - कैल्शियम तथा विटामिन - B12 ६) Genetic Pancreatitis में क्या जटिलताएँ होती है? - क्रोनिक पैंक्रियास। - पैंक्रियास कैंसर का बढ़ा हुआ खतरा।  - स्थायी मधुमेह।  - कुपोषण।  - जीवन के गुणवत्ता में कमी।
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homeopathic me adenomyosis ka ilaj?
Adenomyosis क्या है? कारण, लक्षण और इलाज Adenomyosis स्त्री-रोग के संबंधी समस्या है, जिस में गर्भाशय की अंदरूनी पर्त – एंडोमेट्रियम की कोशिकाएं गर्भाशय की मांसपेशियों की पर्त के अंदर बढ़ने लगती हैं। इस कारण से गर्भाशय बड़ा हो जाता है, जिस से पीरियड्स में अत्यधिक दर्द और बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग होने लगती है। इस तरह के समस्या ३० से ५० उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है, खास कर के उन महिलाओं में जिन की डिलीवरी हो चुकी होती है। १) Adenomyosis कैसे होता है? - सामान्य स्थिति में एंडोमेट्रियम गर्भाशय की अंदरूनी सतह तक ही सीमित रहता है। पर Adenomyosis में कोशिकाएं गर्भाशय की मांसपेशियों के अंदर प्रवेश कर जाती हैं। - पीरियड्स के दौरान कोशिकाएं भी हार्मोन के असर से सूजती और ब्लीड करती हैं, पर बाहर निकलने का रास्ता न होने के कारण से - तेज दर्द होता है, और सूजन बढ़ती है. गर्भाशय भारी तथा संवेदनशील हो जाता है. २) Adenomyosis होने के क्या - क्या मुख्य कारण होते है? Adenomyosis होने का सटीक कारण पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, पर कुछ संभावित कारण माने जाते हैं, जैसे की,  1. हार्मोनल का असंतुलन :: एस्ट्रोजन हार्मोन के ज्यादा इस बीमारी को बढ़ा सकती है। 2. डिलीवरी या गर्भाशय की सर्जरी :: सी-सेक्शन या अन्य गर्भाशय से जुड़ी सर्जरी के बाद एंडोमेट्रियल कोशिकाएं मांसपेशियों में प्रवेश कर सकती हैं।  3.उम्र से भी जुड़ा बदलाव :: उम्र बढ़ने के साथ में गर्भाशय की संरचना में परिवर्तन होता है, जिस से समस्या हो सकती है।  4. सूजन :: डिलीवरी के बाद गर्भाशय में होने वाली सूजन भी कारण बन सकती है।  5. जेनेटिक कारण यह समस्या पारिवारिक रूप से देखी जाती है।  ३) Adenomyosis के क्या -क्या लक्षण दिखाई देते है? हर महिला में लक्षण एक जैसे नहीं होते, पर आमतौर पर निम्न लक्षण हैं,  - पीरियड्स के दौरान असहनीय पेट में दर्द का होना।  - बहुत ज़्यादा समय तक ब्लीडिंग।  - बड़े खून के थक्के। - पेट के निचले भाग में भारीपन जैसा लगना।  - थकान तथा कमजोरी।  - संभोग के दौरान ज्यादा दर्द का होना। ४) Adenomyosis की पहचान कैसे की जाती है? Adenomyosis का पता करने के लिए डॉ. निम्न जांच कर सकते हैं,  1. पेल्विक एग्ज़ामिनेशन  गर्भाशय बड़ा, और दर्दनाक महसूस होता है.  2. अल्ट्रासाउंड  गर्भाशय के मांसपेशियों में असामान्यता होती है. 3. MRI का स्कैन  सबसे सटीक जांच मानी जाती है.  4. ब्लड टेस्ट :: एनीमिया का पता करने के लिए।  ५) Adenomyosis का सही इलाज क्या हो सकता है? 1. दवाइयों के द्वारा इलाज  Pain Killers :: दर्द तथा सूजन को कम करने के लिए।  2. लाइफस्टाइल , घरेलू उपाय - गर्म पानी के थैली से सेक करना।  - कसरत करना। - तनाव को कम करना। - कैफीन तथा जंक फूड से परहेज करना। ६) Adenomyosis होने पर कब डॉ. से मिलना ज़रूरी है? अगर ऐसा कुछ लक्षण दिखाई दे तो तुरंत ही डॉ. से मिलना चाहिए ,  - पीरियड्स में असहनीय तेज दर्द का होना। - बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग का होना। - लगातार थकान जैसा लगना। - अगर दवा से राहत न मिले। तो स्त्री-रोग डॉ. से परामर्श लें।
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liver fibrosis ka homeopathic me kya ilaj hai
१) लिवर फाइब्रोसिस का क्या इलाज है? हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, जो के खून को साफ करने, और पाचन में मदद करने तथा पोषक तत्वों को संग्रहित करने और विषैले तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है। - जब किसी कारण से लिवर कोशिकाओं को बार-बार नुकसान पहुँचता है, तो वहाँ घाव बनने लगते हैं। इसी स्थिति को लिवर फाइब्रोसिस कहा जाता है। - लिवर फाइब्रोसिस बीमारी नहीं, पर लिवर को लंबे समय तक हुए नुकसान का परिणाम है। इसका इलाज संभव है और इसे आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। २ ) लिवर फाइब्रोसिस होने के मुख्य क्या -क्या कारण होते है? - शराब के बहुत ही ज्यादा उपयोग से।  - फैटी लिवर  - हेपेटाइटिस - B और हेपेटाइटिस - C का संक्रमण। - मोटापा और मधुमेह  - आयरन या तो,कॉपर का ज्यादा जमा होना ३ ) लिवर फाइब्रोसिस होने के क्या -क्या लक्षण होते है? शुरुआती अवस्था में तो, कोई भी खास लक्षण नहीं दिखते। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है,तो, कुछ लक्षण यह हो सकते है.  - थकान तथा कमजोरी जैसा लगना।  - भूख भी नहीं लगना। - वजन का कम हो जाना। - पेट के ऊपरी वाले भाग में दर्द का होना। ४) लिवर फाइब्रोसिस का सही इलाज क्या हो सकता है? - लिवर फाइब्रोसिस का कोई “जादुई इलाज” नहीं है, पर सही कारण को पहचान कर के और जीवनशैली में बदलाव कर के इसे रोकना संभव है। #1. कारण का इलाज सबसे जरूरी  - शराब को पूरी तरह से बंद कर दे तो अच्छा है. - हेपेटाइटिस - B या हेपेटाइटिस - C में एंटीवायरल दवाएँ। - वजन का कम होना।  # 2. जीवनशैली में बदलाव इलाज का सबसे महत्वपूर्ण भाग है:  - डेली ३०-४० मिनट जैसा योग करना। - वजन को कण्ट्रोल में रखना। - धूम्रपान को पुरे तरह से बंद कर दे. 3 . लिवर फाइब्रोसिस के लिए डाइट प्लान  #क्या खाएँ#  - हरी सब्जियाँ में (पालक, लौकी).  - फल (सेब,अमरूद,पपीता). - दालें तथा हल्का प्रोटीन।  #क्या न खाएँ# - शराब का सेवन न करे।  - तला-भुना ,तथा जंक फूड।  - कोल्ड ड्रिंक  ५) क्या लिवर फाइब्रोसिस हमेशा के लिए ठीक हो सकता है? - शुरुआती स्टेज (F1– F2) में लिवर फाइब्रोसिस को कम और कण्ट्रोल किया जा सकता है।  - एडवांस स्टेज (F3–F4) में इसे पूरी तरह से ठीक करना मुश्किल होता है, पर सही इलाज से स्थिति को कम किया जा सकता है.
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