Cardiomyopathy kya hai or iska upchaar?
कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy): कारण, लक्षण
क्या आपको अचानक साँस फूलने लगती है? या कभी-कभी दिल की धड़कन अनियमित लगती है? ये लक्षण सामान्य कमजोरी नहीं, बल्कि एक गंभीर हृदय रोग — कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy) — के संकेत हो सकते हैं।
कार्डियोमायोपैथी एक ऐसी बीमारी है जिसमें हृदय की मांसपेशियाँ कमजोर, मोटी या कठोर हो जाती हैं और हृदय शरीर में ठीक से रक्त पंप नहीं कर पाता। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और समय पर पहचान न हो तो हार्ट फेलियर तक पहुँच सकती है।
कार्डियोमायोपैथी क्या है?
कार्डियोमायोपैथी शब्द तीन ग्रीक शब्दों से बना है — Cardio (हृदय), Myo (मांसपेशी) और Pathy (रोग)। यानी सरल भाषा में यह हृदय की मांसपेशियों की बीमारी है। इस स्थिति में हृदय की मांसपेशियाँ असामान्य रूप से बदल जाती हैं जिससे हृदय की पंपिंग क्षमता प्रभावित होती है।
स्वस्थ हृदय एक शक्तिशाली पंप की तरह काम करता है और पूरे शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुँचाता है।
कार्डियोमायोपैथी मुख्यतः चार प्रकार की होती है। डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी (DCM) सबसे सामान्य प्रकार है जिसमें हृदय का बायाँ वेंट्रिकल कमजोर और फैल जाता है। हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (HCM) में हृदय की मांसपेशियाँ असामान्य रूप से मोटी हो जाती हैं जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है। रेस्ट्रिक्टिव कार्डियोमायोपैथी में हृदय की मांसपेशियाँ कठोर हो जाती हैं और हृदय ठीक से फैल नहीं पाता। अरिदमोजेनिक कार्डियोमायोपैथी एक दुर्लभ प्रकार है जिसमें हृदय के दाएँ वेंट्रिकल की मांसपेशियाँ वसायुक्त ऊतकों से बदल जाती हैं।
कार्डियोमायोपैथी के कारण?
कार्डियोमायोपैथी के कारण इसके प्रकार पर निर्भर करते हैं। कभी-कभी इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं मिलता, जिसे इडियोपैथिक कार्डियोमायोपैथी कहते हैं।
- आनुवंशिक कारण — हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी अधिकतर मामलों में अनुवांशिक होती है और परिवार में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जा सकती है। अगर माता-पिता में से किसी को यह बीमारी है तो बच्चों में इसका खतरा 50% तक हो सकता है।
- हृदय रोग और अन्य बीमारियाँ — लंबे समय तक उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) हृदय की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है और डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी का कारण बन सकता है। इसके अलावा कोरोनरी आर्टरी डिसीज, पिछला हार्ट अटैक, डायबिटीज, थायरॉइड रोग और अमाइलॉइडोसिस जैसी बीमारियाँ भी हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
- जीवनशैली से जुड़े कारण — अत्यधिक शराब का लंबे समय तक सेवन हृदय की मांसपेशियों को कमजोर करता है। कोकेन या एम्फेटामाइन जैसी नशीली दवाओं का सेवन भी हृदय को नुकसान पहुँचाता है। कैंसर की कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी भी हृदय की मांसपेशियों को प्रभावित कर सकती है।
- संक्रमण — वायरल संक्रमण (जैसे मायोकार्डाइटिस) हृदय की मांसपेशियों में सूजन पैदा कर सकता है जो बाद में कार्डियोमायोपैथी बन जाती है। HIV, चागस रोग और अन्य संक्रमण भी हृदय को प्रभावित कर सकते हैं।
-गर्भावस्था — कुछ महिलाओं में गर्भावस्था के अंतिम महीनों में या प्रसव के बाद पेरीपार्टम कार्डियोमायोपैथी विकसित हो सकती है। यह एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य स्थिति है।
जोखिम कारक?
कुछ लोगों में कार्डियोमायोपैथी का खतरा अधिक होता है। जिनके परिवार में हृदय रोग या कार्डियोमायोपैथी का इतिहास हो, जो लंबे समय से उच्च रक्तचाप से पीड़ित हों, जो अत्यधिक शराब या नशीली दवाएँ लेते हों, जिन्हें डायबिटीज या मोटापा हो, जो कीमोथेरेपी या रेडिएशन ले चुके हों, जिन्हें पहले हार्ट अटैक आ चुका हो, या जो गंभीर एनीमिया से पीड़ित हों — इन सभी में कार्डियोमायोपैथी का जोखिम अधिक रहता है।
कार्डियोमायोपैथी के लक्षण?
कार्डियोमायोपैथी के लक्षण शुरुआत में बहुत हल्के होते हैं या बिल्कुल नहीं होते। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, लक्षण स्पष्ट होने लगते हैं।
सबसे आम लक्षण है साँस फूलना — खासकर थोड़ा चलने पर या लेटने पर। थकान और कमजोरी जो सामान्य कामकाज से भी हो जाए, पैरों, टखनों और पेट में सूजन (एडिमा), दिल की धड़कन का अनियमित होना, तेज या धीमा होना (Palpitations), और चक्कर आना या बेहोशी भी कार्डियोमायोपैथी के संकेत हो सकते हैं। सीने में दर्द या दबाव महसूस होना, रात को लेटने पर साँस लेने में परेशानी होना, और खाँसी — खासकर लेटने पर — भी इस बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।
यह बात महत्वपूर्ण है कि हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी कभी-कभी युवाओं में अचानक कार्डिएक अरेस्ट का कारण बन सकती है — यहाँ तक कि खेल के दौरान भी — बिना किसी पूर्व लक्षण के।
डॉक्टर को कब दिखाएँ?
अगर आपको बिना किसी कारण साँस फूलने लगे, थोड़े काम से ही बहुत थकान हो, पैरों या पेट में सूजन आए, दिल की धड़कन अनियमित लगे, या चक्कर आए और बेहोशी का अनुभव हो — तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। अगर सीने में तेज दर्द हो, साँस लेने में बहुत मुश्किल हो, या होंठ और नाखून नीले पड़ जाएँ — तो यह आपातकालीन स्थिति है और तुरंत अस्पताल जाएँ। अगर परिवार में किसी को अचानक कार्डियक अरेस्ट हुआ हो या कम उम्र में हृदय रोग हुआ हो तो जेनेटिक स्क्रीनिंग जरूर करवाएं।