lactose ka homeopathy me kya ilaaj hai or kya lakshan hota hai
१) लैक्टोज़ क्या है?
लैक्टोज़ दूध और डेयरी उत्पादों में पाए जाने वाला प्राकृतिक शुगर है, जैसे पनीर, दही, मक्खन और आइसक्रीम।
- यह दो सरल शर्करा अणुओं – ग्लूकोज़ और गैलेक्टोज़ – से मिलकर बना होता है। शरीर में मौजूद लैक्टेज़ एंज़ाइम इसे तोड़कर ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
२) लैक्टोज़ इनटॉलरेंस के कारण?
लैक्टोज़ इनटॉलरेंस के कारण निचे बताये अनुसार हो सकते है. जैसे की ,
- उम्र बढ़ने के साथ शरीर में लैक्टेज़ एंज़ाइम की मात्रा भी घटने लगती है।
- अनुवांशिक कारण :: कुछ लोगों में जन्म से ही लैक्टेज़ का स्तर कम होता है।
- आंत से जुड़ी बीमारियाँ :: जैसे की, Celiac disease, Crohn’s disease, Gastroenteritis आदि।
- इनमें आंत की परत को नुकसान होने से लैक्टेज़ एंज़ाइम भी घट जाता है।
- छोटी आंत की सर्जरी या संक्रमण के बाद भी यह समस्या हो सकती है।
३)लैक्टोज़ इनटॉलरेंस के लक्षण क्या है?
लैक्टोज़ इनटॉलरेंस के लक्षण आमतौर पर दूध या डेयरी उत्पादों के सेवन के 30 मिनट से 2 घंटे के भीतर दिखाई देने लगते हैं।
- पेट का फूल जाना
- पेट में गैस का बनना
- पेट में ऐंठन और तेज दर्द का होना
- दस्त या ढीला मल
- मतली या उल्टी
लक्षणों की तीव्रता व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करती है. और यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि कितनी मात्रा में लैक्टोज़ लिया गया है।
** लैक्टोज़ इनटॉलरेंस और दूध एलर्जी में अंतर**
- लैक्टोज़ इनटॉलरेंस:
यह पाचन संबंधी की समस्या है।
इसमें लैक्टोज़ पचता नहीं है ,और गैस, दस्त जैसी दिक्कतें होती हैं।
**दूध एलर्जी:**
- यह इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया है।
- इसमें खुजली, सूजन, सांस लेने में कठिनाई और गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हो सकते हैं।
४) निदान?
**हाइड्रोजन ब्रीथ टेस्ट** लैक्टोज़ लेने के बाद में सांस में हाइड्रोजन की मात्रा मापी जाती है।
- हाइड्रोजन का बढ़ना लैक्टोज़ इनटॉलरेंस की पुष्टि करता है।
**लैक्टोज़ टॉलरेंस टेस्ट**
- लैक्टोज़ पीने के बाद ब्लड शुगर लेवल की जांच की जाती है।
**स्टूल टेस्ट (बच्चों में)**
मल में एसिड की मात्रा देखी जाती है।
५) उपचार?
लैक्टोज़ इनटॉलरेंस का कोई स्थायी इलाज नहीं है, पर सही खान-पान और जीवनशैली से इसे कण्ट्रोल किया जा सकता है।
**डाइट मैनेजमेंट**
- दूध और डेयरी उत्पादों से बचें या सीमित मात्रा में लें।
- लैक्टोज़-फ्री दूध और सोया/बादाम दूध का विकल्प चुनें।
- दही (Curd/Yogurt) कुछ लोगों के लिए आसानी से पच सकता है।
**लैक्टेज़ सप्लीमेंट्स**
- बाजार में लैक्टेज़ एंज़ाइम की टैबलेट्स या ड्रॉप्स उपलब्ध हैं, जो दूध पचाने में मदद करती हैं।
**कैल्शियम और विटामिन D का सेवन**
- डेयरी से परहेज़ करने पर कैल्शियम की कमी हो सकती है।
- इसके लिए हरी सब्जियाँ, मछली, बादाम, सोया और कैल्शियम सप्लीमेंट्स का उपयोग किया जा सकता है।
**जीवनशैली में बदलाव **
- दूध की जगह लैक्टोज़-फ्री या प्लांट-बेस्ड मिल्क (सोया, ओट्स, बादाम) का प्रयोग करें।
- डेयरी लेते समय छोटी मात्रा से शुरू करें और देखें कितना सहन कर पाते हैं।
- संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीना ज़रूरी है।