अल्सरेटिव कोलाइटिस गंभीर आंतों के बीमारी है, जिस में बड़ी आंत तथा रेक्टम के अंदरू पर्त में सूजन तथा घाव बन जाते हैं।
- यह बीमारी लंबे समय तक रहने वाली होती है. इसमें पेट में दर्द, बार-बार दस्त, खून के साथ मल का आना, कमजोरी का होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। सही समय पर तथा जीवन-शैली में सुधार कर के कण्ट्रोल कर सकते है.
२) अल्सरेटिव कोलाइटिस के उपचार का उद्देश्य क्या है?
इस बीमारी के इलाज का उद्देश्य तीन चीजें हैं: जो के इस तरह से है,
(1) आंतों के सूजन को कम करना।
(2) लक्षणों को कण्ट्रोल करना।
(3) इस बीमारी को दोबारा बढ़ने से रोकना।
इलाज दर्दी के स्थिति, बीमारी के गंभीरता , रोग के फैलाव के अनुसार अलग-अलग होता है.
#1. दवा के द्वारा उपचार (1) एंटी-इन्फ्लेमेटरी के दवा
यह आंतों के सूजन को कम करती हैं, तथा बीमारी को कण्ट्रोल रखने में मदद करते हैं।
(2) स्टेरॉयड के दवा
- जब भी सूजन ज्यादा हो जाती है, तब डॉ. दवा जल्दी असर करते हैं, पर लंबे समय तक उपयोग से साइड-इफेक्ट होता हैं.
(3) इम्यून सिस्टम को कण्ट्रोल करने के दवा
- कुछ दर्दी में इम्यून सिस्टम आंतों पर हमला करता है। ऐसे में इम्यूनोसप्रेसिव दवा दी जाती हैं। नियंत्रित करके सूजन कम भी करती हैं।
2.आहार तथा जीवन-शैली में परिवर्तन - मरीजों के सही डाइट का लेना बहुत ही जरुरी है।
#खाने में क्या लें#
- हल्का तथा सुपाच्य वाला भोजन।
- उबली हुयी सब्जि।
- खिचड़ी तथा चावल
- पर्याप्त पानी को पीना
# किन चीजों से दूर रहे#
- ज्यादा तला हुआ भोजन।
- जंक फूड
- चाय ,कॉफ़ी।
छोटे-छोटे अंतर पर कई बार लेना फायदेमंद होता है।
3. तनाव पर कण्ट्रोल
- मानसिक तनाव कम करने के लिए डेली योग करे. तथा पर्याप्त नींद ले.
4. होम्योपैथिक का दृष्टिकोण
- कुछ दर्दी होम्योपैथिक से उपचार अपनाते हैं, जिस में दर्दी के पूरे लक्षणोंके आधार पर दवा दी जाती है।
- कोई भी उपचार को करने से पहले डॉ. की सलाह लेना जरूरी है।
5. नियमित जांच तथा फॉलो-अप
- यह दीर्घकालिक बीमारी है, दर्दी को डेली रूप से डॉ. से जांच कराते रहना चाहिए।
खून के जांच, पोषण स्तर के जांच स्थिति पर नजर रखी जा सकती है।