ulcerative colitis ka homeopathic me ilaaj
१)अल्सरेटिव कोलाइटिस क्यों होता है?
अल्सरेटिव कोलाइटिस यह तो लम्बे समय तक चलने वाली आंतों की बीमारी है, जो की, IBD के अंतर्गत आती है।
- इस बीमारी में बड़ी आंत और मलाशय की अंदरू की पर्त में लगातार सूजन और घाव बन जाते हैं।
- यह रोग धीरे-धीरे बढ़ता है, और दर्दी को बार-बार दस्त, खून का आना, पेट में तेज दर्द और कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है।
- यदि इसका समय पर इलाज न मिलने पर यह रोग जीवन के गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।
२) अल्सरेटिव कोलाइटिस होने के क्या कारण होते है?
इसका अभी तक तो, कोई भी तरह का सटीक कारण नहीं पता है, पर शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके पीछे कई कारक हो सकते हैं:
– शरीर की रोग - प्रतिरोधक प्रणाली गलती से अपनी ही आंतों के कोशिका पर हमला करती है।
– यदि पारीवारिक इतिहास है ,तो इसका जोखिम और भी बढ़ जाता है.
– गलत खान-पान और तनाव,या चिंता इस रोग को और भी बढ़ा सकते हैं।
– कुछ बैक्टीरिया और वायरस के संक्रमण से भी इस बीमारी को ट्रिगर कर सकते हैं।
३) अल्सरेटिव कोलाइटिस के क्या लक्षण है?
इसके लक्षण अलग -अलग व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। शुरुआती अवस्था में यह हल्के हो सकते हैं, पर धीरे-धीरे बढ़ कर के और भी गंभीर हो जाते हैं।
- बार-बार दस्त का आना
- पेट में तेज ऐंठन और तेज दर्द का होना
- मलाशय में से भी खून का आना
- थकान और कमजोरी जैसा लगना
- वजन भी कम हो जाना
- कभी -कभी तो भूख भी न लगना
४) अल्सरेटिव कोलाइटिस के कितने प्रकार है?
सूजन आंत के किस भाग में है, इसके आधार पर इसे चार प्रकारों में बाँटा जाता है:
- Ulcerative Proctitis – यह केवल मलाशय तक सीमित।
- Proctosigmoiditis – मलाशय और सिग्मॉइड कोलन प्रभावित।
- Left-sided Colitis – बाईं ओर की कोलन में सूजन।
- Pancolitis – पूरी कोलन प्रभावित, सबसे गंभीर रूप।
५) जटिलताएँ ?
यदि यह रोग लंबे समय तक अनियंत्रित रहे, तो कई जटिलताएँ हो सकती हैं: जैसे की।
- खून की कमी
- कोलन का छिद्र
- बड़ी आंत का कैंसर
- जोड़ों, त्वचा और आँखों में सूजन
- बार-बार संक्रमण का होना
#अल्सरेटिव कोलाइटिस का क्या निदान है?
इस रोग की जाँच करने के लिए डॉक्टर कुछ जाँच करते हैं:
- कोलोनोस्कोपी : – आंतों की अंदरू की सतह को देखने के लिए।
- बायोप्सी : – ऊतक का नमूना ले कर के सूजन की पुष्टि करना।
- रक्त परीक्षण : – एनीमिया और संक्रमण का पता करने के लिए।
- स्टूल टेस्ट : – संक्रमण या खून की जाँच।
- CT Scan / MRI – आंतों में हुई सूजन और जटिलताओं का पता लगाने के लिए।
#बचाव और रोकथाम के क्या उपाय है?
अल्सरेटिव कोलाइटिस को पूरी तरह से रोकना संभव नहीं है, पर इन उपायों से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है:
- संतुलित और पौष्टिक आहार का उपयोग करना ।
- धूम्रपान और शराब से पूरी तरह से बचें।
- पर्याप्त नींद लें और डेली कसरत करें।
-नियमित रूप से डॉ. से परामर्श लेते रहें।