Chronic Pyelonephritis kya hai? or kaise hota hai?
क्रॉनिक पायलोनेफ्राइटिस क्या है?
क्रॉनिक पायलोनेफ्राइटिस (Chronic Pyelonephritis) गुर्दों (Kidneys) की एक दीर्घकालिक (लंबे समय तक चलने वाली) सूजन और संक्रमण संबंधी बीमारी है। इसमें बार-बार या लंबे समय तक बैक्टीरियल संक्रमण के कारण गुर्दों के ऊतकों को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचता है। समय के साथ यह नुकसान गुर्दों में निशान (scarring) बना सकता है और उनकी कार्यक्षमता को कमजोर कर सकता है।
साधारण शब्दों में, जब पेशाब की नली (Urinary Tract) से बैक्टीरिया बार-बार ऊपर की ओर बढ़कर किडनी तक पहुँचते हैं और संक्रमण को पूरी तरह ठीक नहीं किया जाता, तो यह स्थिति धीरे-धीरे क्रॉनिक पायलोनेफ्राइटिस में बदल जाती है।
अगर इसका सही समय पर इलाज न किया जाए, तो यह किडनी फेलियर (Renal Failure) तक भी पहुँच सकता है, जो जीवन के लिए खतरनाक हो सकता है।
क्रॉनिक पायलोनेफ्राइटिस कैसे होता है?
यह बीमारी आमतौर पर निम्न प्रक्रिया से विकसित होती है:
1 . यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) की शुरुआत:
संक्रमण अक्सर मूत्रमार्ग (urethra) से शुरू होता है और मूत्राशय (bladder) तक पहुँचता है।
2 . संक्रमण का ऊपर की ओर बढ़ना:
बैक्टीरिया मूत्रवाहिनी (ureter) के जरिए ऊपर किडनी तक पहुँच जाते हैं।
3 . बार-बार संक्रमण या अधूरा इलाज:
अगर संक्रमण बार-बार होता रहे या एंटीबायोटिक को पूरा न लिया जाए, तो बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते।
4 . किडनी में स्थायी नुकसान:
लगातार सूजन के कारण किडनी के ऊतकों में निशान बन जाते हैं और उसकी फिल्टर करने की क्षमता घटने लगती है।
5 . दीर्घकालिक अवस्था में बदलना:
यही स्थिति धीरे-धीरे क्रॉनिक पायलोनेफ्राइटिस का रूप ले लेती है।
क्रॉनिक पायलोनेफ्राइटिस के कारण?
इस बीमारी के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं:
1. बार-बार यूरिन इंफेक्शन (Recurrent UTI)
यह सबसे आम कारण है। जिन लोगों को बार-बार पेशाब में संक्रमण होता है, उनमें यह बीमारी विकसित होने का खतरा अधिक होता है।
2. पेशाब का रुकना या वापस बहना (Vesicoureteral Reflux - VUR)
इस स्थिति में मूत्र मूत्राशय से वापस किडनी की ओर बहने लगता है, जिससे बैक्टीरिया किडनी तक पहुँच जाते हैं।
3. किडनी स्टोन (Kidney Stones)
पथरी पेशाब के प्रवाह को बाधित कर सकती है, जिससे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं और संक्रमण बढ़ता है।
4. मूत्र मार्ग में रुकावट (Urinary Obstruction)
प्रोस्टेट बढ़ना, ट्यूमर, या जन्मजात विकृतियों के कारण पेशाब सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाता, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
5. मधुमेह (Diabetes)
डायबिटीज वाले लोगों में संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे बार-बार UTI हो सकता है।
6. कमजोर इम्यून सिस्टम
एचआईवी, कैंसर, या लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वाले लोगों में संक्रमण जल्दी और बार-बार हो सकता है।
7. लंबे समय तक कैथेटर का उपयोग
जिन मरीजों को लंबे समय तक यूरिन कैथेटर लगा रहता है, उनमें बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा अधिक होता है।
8. गर्भावस्था
गर्भावस्था में मूत्र मार्ग पर दबाव पड़ता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
क्रॉनिक पायलोनेफ्राइटिस के लक्षण?
इस बीमारी के लक्षण शुरुआत में हल्के हो सकते हैं और धीरे-धीरे बढ़ते हैं। कई बार मरीज को लंबे समय तक पता भी नहीं चलता।
#प्रारंभिक लक्षण:
• बार-बार पेशाब आना
• पेशाब करते समय जलन
• पेशाब में बदबू
• हल्का बुखार
• पीठ के निचले हिस्से में हल्का दर्द
#आगे बढ़ने पर लक्षण:
• पीठ या कमर में तेज दर्द
• बार-बार संक्रमण
• थकान और कमजोरी
• भूख न लगना
• मतली या उल्टी
• वजन कम होना
#गंभीर अवस्था के लक्षण (किडनी डैमेज के संकेत):
• पेशाब की मात्रा कम होना
• पैरों और चेहरे पर सूजन
• उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure)
• खून की कमी (Anemia)
• गंभीर थकान
• यूरिमिया (खून में विषैले पदार्थों का बढ़ना)
क्रॉनिक पायलोनेफ्राइटिस कितना खतरनाक है?
अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह निम्न जटिलताओं का कारण बन सकता है:
• किडनी में स्थायी निशान (Scarring)
• किडनी फेलियर
• बार-बार गंभीर संक्रमण (Sepsis का खतरा)
• उच्च रक्तचाप
• किडनी सिकुड़ना (Shrunken Kidney)
#निदान#
डॉक्टर इस बीमारी की पुष्टि के लिए निम्न परीक्षण कर सकते हैं:
• यूरिन टेस्ट (Urine Routine & Culture)
• ब्लड टेस्ट (Kidney Function Test – KFT)
• अल्ट्रासाउंड (USG KUB)
• CT Scan या MRI (जरूरत पड़ने पर)
• DMSA Scan (किडनी में निशान देखने के लिए)