hypertension treatment in homeopathy
१) हाइपरटेंशन क्या है?
*परिचय*
हाइपरटेंशन, जिसे हम उच्च रक्तचाप कहते हैं, यह दीर्घकालिक रोग है. जिसमें धमनियों के अंदर रक्त का दबाव सामान्य मानक से लगातार ऊपर रहता है।
- सामान्य BP लगभग 120/80 mmHg होता है, लेकिन यदि यह 140/90 mmHg या उससे भी ज्यादा हो जाए और लंबे समय तक बना रहे तो उसे हाइपरटेंशन माना जाता है।
- इसकी ख़ासियत यह है कि बिना किसी लक्षण के धीरे-धीरे से बढ़ता है.और आगे चलकर हार्ट अटैक, या तो ब्रेन स्ट्रोक, और किडनी डैमेज का कारण बन सकता है।
२) हाइपरटेंशन के प्रकार?
*प्राथमिक (Essential/Primary Hypertension)*
- यह सबसे सामान्य प्रकार है।
- इसमें कोई भी सीधा कारण नहीं मिलता है, पर जीवनशैली और जेनेटिक फैक्टर से जुड़ा है।
*द्वितीयक (Secondary Hypertension)*
यह किसी और बीमारी या दवा के कारण से होता है।
जैसे की,– किडनी रोग, हार्मोनल की समस्या, थायरॉयड।
३) हाइपरटेंशन के कारण और जोखिम कारक?
हाइपरटेंशन कई कारणों से हो सकता है। इनमें से कुछ को कण्ट्रोल कर सकते है ,और कुछ को नहीं।
- अस्वस्थ जीवनशैली : – ज्यादा मात्रा में नमक का सेवन, फास्ट फूड, या तैलीय भोजन।
- मोटापा
- तनाव
- शारीरिक गतिविधि की कमी।
- ज्यादा मात्रा में शराब और धूम्रपान।
- उम्र का बढ़ना।
- परिवारिक इतिहास होने से।
४) हाइपरटेंशन के लक्षण?
हाइपरटेंशन ज्यादातर लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते है । फिर भी कुछ मामलों में निम्न लक्षण हो सकते हैं: जैसे की,
- लगातार सिर में दर्द का होना।
- चक्कर का आना।
- थकान और कमजोरी जैसा लगना ।
- धुंधला दिखना या सही तरह से दिखाई न देना।
- नाक में से खून का आना।
- सांस लेने में परेशानी।
#हाइपरटेंशन से होने वाले नुकसान?
अगर रक्तचाप लंबे समय तक कण्ट्रोल में न रहे तो कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है: जैसे की,
- हृदय रोग : दिल का दौरा, या हृदय विफलता।
- स्ट्रोक: मस्तिष्क में से खून का प्रवाह रुकने या फटने से।
- किडनी फेल्योर
- धमनियों का कठोर होना
५)हाइपरटेंशन की जाँच?
- ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग : बार-बार ब्लड प्रेशर को चेक करते रहना।
- रक्त व मूत्र की जाँच : किडनी और हार्मोनल के समस्या को देखने के लिए।
- ईसीजी : दिल की स्थिति जांचने के लिए।
#हाइपरटेंशन के रोकथाम?
- स्वस्थ आहार का उपयोग करना।
- नियमित कसरत करें।
- तनाव मुक्त रहें।
- ७-८ घंटे की नींद लें।