Malaria kya hai? or kis tarah se failta hai?
मलेरिया (Malaria)
मलेरिया हज़ारों सालों से मानवता को परेशान करने वाली बीमारी है। भारत में हर साल लाखों मलेरिया के मामले सामने आते हैं, जिनमें से कई जानलेवा हो जाते हैं। जागरूकता और समय पर उपचार से मलेरिया से होने वाली मौतों को काफी कम किया जा सकता है।
मलेरिया क्या है?
मलेरिया एक परजीवी जनित बीमारी है, जो प्लाज़्मोडियम (Plasmodium) नामक सूक्ष्म परजीवी के कारण होती है। यह परजीवी मादा एनोफिलीज़ (Anopheles) मच्छर के काटने से मनुष्य के शरीर में प्रवेश करता है। भारत में मुख्यतः P. vivax और P. falciparum प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें P. falciparum सबसे अधिक खतरनाक मानी जाती है।
P. falciparum से होने वाला Cerebral Malaria (मस्तिष्क मलेरिया) अत्यंत गंभीर होता है और 24 से 48 घंटों के भीतर जानलेवा बन सकता है। इसमें मस्तिष्क की रक्त वाहिनियाँ अवरुद्ध हो जाती हैं।
मलेरिया मुख्यतः उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। भारत में झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह अधिक सामान्य है।
मलेरिया शरीर में कैसे काम करता है?
जब संक्रमित मादा एनोफिलीज़ मच्छर काटती है, तो प्लाज़्मोडियम परजीवी (Sporozoites के रूप में) रक्त में प्रवेश करते हैं। ये लगभग 30 मिनट के भीतर यकृत (Liver) तक पहुँच जाते हैं और वहाँ 7 से 14 दिनों तक चुपचाप विकसित होते रहते हैं।
यकृत में इनकी संख्या हज़ारों गुना बढ़ जाती है, जिसके बाद ये लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) में प्रवेश करते हैं। वहाँ ये RBCs को तोड़ते हैं और नई कोशिकाओं को संक्रमित करते हैं। इसी प्रक्रिया के दौरान तेज़ बुखार, ठंड और पसीने के दौरे आते हैं।
P. vivax यकृत में सुप्त अवस्था में महीनों या वर्षों तक रह सकता है और बाद में फिर सक्रिय होकर बीमारी पैदा कर सकता है — इसे Relapse कहा जाता है।
मलेरिया के कारण और जोखिम?
- मादा एनोफिलीज़ मच्छर का काटना:
यह मच्छर शाम और रात के समय काटता है — यह डेंगू फैलाने वाले मच्छर से अलग होता है।
- ठहरा हुआ साफ पानी:
नहरें, तालाब, धान के खेत और बारिश का जमा पानी मच्छरों के पनपने के मुख्य स्थान हैं।
- जंगली और ग्रामीण क्षेत्र:
शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में मलेरिया अधिक पाया जाता है।
- रात को बाहर सोना:
बिना मच्छरदानी के खुले में सोना संक्रमण का खतरा बढ़ाता है।
- बरसात के बाद का मौसम:
अगस्त से अक्टूबर तक मलेरिया के मामले अधिक देखे जाते हैं।
-कमज़ोर प्रतिरक्षा:
कुपोषित बच्चे और गर्भवती महिलाएँ अधिक जोखिम में होती हैं।
मलेरिया के लक्षण?
मलेरिया के लक्षण संक्रमण के 10 से 15 दिन बाद प्रकट होते हैं और इनका एक विशेष पैटर्न होता है।
- ठंड और कँपकँपी के साथ बुखार शुरू होना → तेज़ बुखार → फिर पसीना आकर बुखार उतरना
- यह चक्र हर 48 या 72 घंटे में दोहराता है
- तेज़ सिरदर्द और शरीर में दर्द
- जी मिचलाना और उल्टी
- थकान और कमज़ोरी, जो बुखार उतरने के बाद भी बनी रहती है
- पीलिया — आँखें और त्वचा पीली पड़ना (गंभीर मामलों में)
- खून की कमी (Anaemia) — RBCs के टूटने के कारण
गंभीर मलेरिया में:
बेहोशी, दौरे और साँस फूलना — यह आपातकालीन स्थिति है।