क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस लंबे समय तक चलने वाली सूजन से संबंधी बीमारी है, जो अग्न्याशय को असर करती है। यह रोग धीरे-धीरे विकसित होता है और समय के साथ अग्न्याशय को नुकसान पहुंचाता है। यह स्थिति तब खड़ी होती है जब अग्न्याशय के ऊतकों में लगातार सूजन बनी रहती है, जिससे पाचन एंजाइम और हार्मोन उत्पादन को असर होता है।
२) क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस के कौन कौन से कारण होते है ?
क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस कारण निचे बातये अनुसार हो सकते है जैसे की ,
* अत्यधिक शराब का सेवन –: लगातार शराब पीने से अग्न्याशय पर नकारात्मक असर पड़ता है।
* धूम्रपान – : यह अग्न्याशय के ऊतकों को सीधा ही नुकसान पहुंचाता है।
* आनुवंशिक कारण –: परिवार में इस बीमारी का इतिहास होने से इसका जोखिम और भी बढ़ सकता है।
* अवरोधक कारण –: पित्त नली में रुकावट होने से अग्न्याशय में सूजन हो सकती है।
* वसायुक्त आहार – उच्च चर्बी वाले आहार से अग्न्याशय पर भार बढ़ सकता है।
३) क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस के लक्षण क्या हो सकते है ?
क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस के लक्षण निचे अनुसार हो सकते है जैसे की ,
- पेट के ऊपरी हिस्से में लगातार दर्द का होना -पाचन क्रियाओं में गड़बड़ी
-वजन काम हो जाना -तैलीय व चिकना मल
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मधुमेह
-जी मिचलाना और उल्टी आना
४) क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस का इलाज?
1. जीवनशैली में बदलाव लाना
शराब और धूम्रपान से दुरी रखे
स्वस्थ आहार का उपयोग करे
संतुलित भोजन लें
भरपूर पानी पिएं
व्यायाम करे
२ . सर्जिकल और अन्य उपचार
एंडोस्कोपिक उपचार
– पित्त नली में अवरोध को हटाने के लिए किया जाता है।
पैंक्रियास सर्जरी – जब उपचार कारगर नहीं होते, है तो क्षतिग्रस्त हिस्से को निकालने के लिए सर्जरी की जाती है।
न्यूरोलाइटिक ब्लॉक – दर्द को कण्ट्रोल करने के लिए नसों को ब्लॉक किया जाता है।
३) रोकथाम के उपाय - संतुलित आहार का सेवन करें।
-शराब और धूम्रपान से दूर रहे नियमित रूप से कसरत करे