अर्टिकेरिया, जिसे हम **पित्ती या शीतपित्त** के नाम से भी जाना जाता है, यह एक त्वचा विकार है.
- शरीर पर अचानक से लाल दाने , खुजलीदार और उभरे हुए दाने दिखाई देते हैं। यह कुछ मिनटों से लेकर कई घंटों तक भी रह सकती है. कई बार बार-बार उभरती रहती है।
- अर्टिकेरिया का कारण एलर्जी, दवाइयों की प्रतिक्रिया, संक्रमण, या पर्यावरणीय तत्व हो सकते हैं। इसका सही इलाज और नियंत्रण रोगी की जीवनशैली को काफी आसान बना सकता है.
२)अर्टिकेरिया के प्रकार कितने होते है?
यह ३ तरह के होते है, जैसे की,
*1. एक्यूट अर्टिकेरिया : अचानक से होता है, और ४ सप्ताह के अंदर ही सही हो जाता है।
2. क्रोनिक अर्टिकेरिया : यह 6 सप्ताह से ज्यादा समय तक और बार-बार होता है , तो इसे क्रॉनिक कहा जाता है।
3. फिजिकल अर्टिकेरिया : धूप, पसीने से भी
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३)अर्टिकेरिया के क्या लक्षण दिखाई देते है?
अर्टिकेरिया के लक्षण निचे अनुसार हो सकते है ,जैसे की,
- खुजलीदार लाल चकत्ते दाने
- त्वचा पर जलन या चुभन जैसा लगना
- बार-बार दाने आकर खत्म होजाते है
- गंभीर स्थिति में सांस लेने में परेशानी का होना
४)अर्टिकेरिया का इलाज?
(क) घरेलू उपाय
**ठंडी सिकाई **
प्रभावित वाले जगह पर बर्फ की सिकाई करने पर खुजली और जलन कम हो जाती है.
**एलर्जन से बचाव**
यदि किसी भोजन, दवा, से अर्टिकेरिया होता है तो उससे दूर रहना।
ढीले और कॉटन के कपड़े के कपड़े पहनें।
**तनाव कम करना:
योग,और ध्यान से तनावजनित अर्टिकेरिया को कण्ट्रोल करने में मदद करते हैं।
**हर्बल उपचार:
नीम, हल्दी का सेवन या लेप त्वचा की सूजन और खुजली कम कर सकते हैं।
(ख) जीवनशैली में परिवर्तन
**संतुलित आहार : तीखा, मसालेदार खाद्य पदार्थ से बचें।
**पर्याप्त नींद **
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को और भी बढ़ाती है।
**पानी ज्यादा पिने से भी शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद मिलती है.