**हेलिकोबैक्टर पाइलोरी** एक तरह का बैक्टीरिया है. जो की, पेट और छोटी आंत की पर्त में संक्रमण कर देता है। यह बैक्टीरिया देश के आधी आबादी के पेट में देखने को मिलता है.
- कई बार लक्षण नहीं देखने को मिलता है, कुछ लोगों में यह तो, **गैस्ट्राइटिस, अल्सर ,पेट का दर्द, यहाँ तक के पेट के कैंसर** का कारण भी बनता है। इसका सही समय पर इलाज करना भी जरूरी है।
२) H. pylori संक्रमण के क्या लक्षण होते है?
हर मरीज में लक्षण अलग-अलग होता हैं।कुछ लक्षण इस तरह दिखाई देते हैं: जैसे की,
- पेट के ऊपरी वाले भाग में जलन या दर्द का होना
- बार-बार खट्टी डकार का आना
- एसिडिटी का होना या तो पेट का फूल जाना
- भूख में कमी हो जाना
- लंबे समय से संक्रमण होने से **अल्सर से खून का आना **
३) H. pylori संक्रमण की जांच ?
इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर कुछ जांचें करवाते हैं:
- Urea Breath Test :: सांस में यूरिया की जांच से बैक्टीरिया का पता किया जाता है।
- Stool Antigen Test :: मल में H. pylori एंटीजन की उपस्थिति होने से।
- Blood Test :: H. pylori के एंटीबॉडी की जांच कर के ।
- गंभीर मामलों में एंडोस्कोपी करके पेट की पर्त का सैंपल लेते है।
४) H. pylori इलाज के दौरान क्या ध्यान देने योग्य बातें है?
* दवाएं का **पूरा कोर्स** करके ही लें,छोड़ना चाहिए। बीच में कोर्स छोड़ने से बैक्टीरिया का रेसिस्टेंट हो सकता है।
* शराब और धूम्रपान से दुरी बनाये रखना सही है।
* ज्यादा मसालेदार और तैलीय खाना खाने से बचना चाहिए.
* उचित मात्रा में पानी को पिएं और पचने में आसान वाले भोजन को करें।
* दवाओं के ४-५ हफ्ते के बाद में **टेस्ट को दोहराया जाता है** जिससे की पुष्टि हो सके कि अब बैक्टीरिया खत्म हुआ है।
#घरेलू और सपोर्टिव उपाय?
H. pylori का इलाज दवाओं से संभव है, पर कुछ घरेलू उपाय से भी लक्षण को कम कर सकते है.
* दही, छाछ के सेवन से बैक्टीरिया को खत्म कर के पेट की सेहत में सुधार होता हैं।
* **ग्रीन टी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। जो की बहुत ही लाभदायी है.
* **शहद जो की बैक्टीरिया की वृद्धि को कम करने में मदद करता है।
* **ब्रोकली और ब्रोकोली स्प्राउट्स:** इनमें सल्फर कंपाउंड होते हैं जो H. pylori पर असर डालते हैं।
५) अगर इलाज न हो तो क्या जटिलताएं होती है?
H. pylori संक्रमण का सही तरह से सही इलाज न किया जाये तो यह आगे जाकर गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है