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#*हेमोलिटिक एनीमिया का इलाज: कारण, लक्षण
हेमोलिटिक एनीमिया ऐसी स्थिति है, जिस में शरीर में लाल रक्त कोशिका बनने से अधिक तेज़ी से नष्ट होने लगती हैं। सामान्य RBCs के उम्र लगभग 120 दिन के होते है, पर इस बीमारी में कुछ दिनों में या हफ्तों में ही टूट जाते हैं।
- जब शरीर नई RBCs उतनी तेज़ी से नहीं बना पाता है, तो खून की कमी होने लग जाती है।
#हेमोलिटिक एनीमिया दो तरह के होते है?
1. "जन्मजात" :– जैसे की, सिकल सेल रोग, थैलेसीमिया, G6PD डेफिशियेंसी।
2."बाद में होने वाली" :– जैसे की, इन्फेक्शन, दवाइयाँ, टॉक्सिन, कैंसर या हार्मोनल कारण।
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यह बीमारी गंभीर हो सकती है, इसलिए समय रहते भी इसका सही इलाज ज़रूरी है।
१) हेमोलिटिक एनीमिया के क्या कारण होते है?
हेमोलिटिक एनीमिया कई वजहों से होता है, जैसे की,
#1. ऑटोइम्यून हेमोलिटिक एनीमिया
- शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से RBCs को दुश्मन समझ कर नुक्सान कर देती है।
#2. संक्रमण
कुछ वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण के कारण से RBCs को नुकसान पहुँचा सकते हैं, जैसे की,
- मलेरिया - हेपेटाइटिस
- HIV
#3. जन्मजात के कारण से * G6PD एंजाइम की कमी से * सिकल सेल रोग
* थैलेसीमिया
२ )हेमोलिटिक एनीमिया के क्या लक्षण होते है?
हेमोलिटिक एनीमिया के लक्षण गंभीरता पर निर्भर करते हैं, पर मुख्य लक्षण इस तरह से है-
- ज्यादा थकान जैसा लगना।
- चक्कर का आ जाना।
- सांस फूलने जैसे प्रॉब्लम। - पीला या फीका रंग।
- पीलिया।
३) हेमोलिटिक एनीमिया की जांच कैसे की जाती है?
हेमोलिटिक एनीमिया का निदान के लिए कुछ जांचें की जाती हैं: जो की इस तरह से है- - पूर्ण रक्त गणना (CBC) :: लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं, या प्लेटलेट्स, और हेमेटोक्रिट के लेवल को मापता है।
- रेटिकुलोसाइट काउंट :: नए RBCs बढ़े हुए हैं या नहीं।
- LDH Levels :: RBC टूटने पर बढ़ते हैं.
- कूम्ब्स टेस्ट :: लाल रक्त कोशिका पर मौजूद एंटीबॉडी का पता करने के लिए किया जाता है.
४ ) आहार और जीवनशैली के लिए क्या टिप्स है?
हेमोलिटिक एनीमिया में डाइट इलाज का हिस्सा है, पर बीमारी सिर्फ डाइट से ठीक नहीं होती है. || खाने में क्या शामिल करें ||
- हरी पत्तेदार के सब्जियाँ। - अनार, चुकंदर और सेब.
- प्रोटीन से मिलने वाले (दाल, अंडा, पनीर)
#किन से बचना चाहिए#
- शराब पिने से।
- जंक फ़ूड से । - इन्फेक्शन से बचना
५) कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
अगर ऐसे लक्षण हो तो,डॉ. के पास जा कर संपर्क करना चाहिए। जैसे की, * पीलिया का तेजी से बढ़ जाना। * गहरा रंग में लाल/काला पेशाब का होना * दिल की तेज़ धड़कन का होना।