बाल विकास में देरी उस स्थिति को कहते है, जब कोई भी बच्चा अपनी उम्र के अनुसार शारीरिक, तथा मानसिक, और भावनात्मक, सामाजिक या भाषा संबंधी विकास के माइलस्टोन समय पर पूरा नहीं कर पाता है।
- सामान्य रूप से सब बच्चे का विकास अलग-अलग गति से होता है, पर यदि किसी विशेष क्षेत्र में देरी बनी रहे तो उसे विकास में देरी मान सकते है।
- बाल विकास में देरी कोई बीमारी नहीं है, पर संकेत है कि, बच्चे को अतिरिक्त देखभाल, तथा सही मार्गदर्शन की आवश्यकता हो सकती है।
२) विकासात्मक माइलस्टोन क्या होते हैं?
"माइलस्टोन" वो क्षमताएँ होती हैं, जिन्हें बच्चे निश्चित उम्र तक हासिल कर लेते हैं, जैसे की,
- 6 महीने में गर्दन को संभालना।
- 1 साल में खड़ा होना या तो, चलने की कोशिश करना।
- 2 साल में कुछ -कुछ वाक्य को बोलना सीखना।
- ३.५ से ४ साल में तो,दूसरों बच्चो के साथ में खेलना।
३) चाइल्ड डेवलपमेंट डिले के कितने प्रकार होते है?
#1. शारीरिक विकास में देरी - देरी से बैठना तथा रेंगना और चलना।
- कमजोर मांसपेशियाँ के वजह से।
- संतुलन के कमी.
# 2. भाषा और बोलने में देरी
- बच्चे देरी से बोलते है.
- शब्दों को जोड़ कर के भी वाक्य को नहीं बना पाते है.
# 3. बौद्धिक विकास में देरी
- सीखने में परेशानी का होना।
- ध्यान को केंद्रित भी नहीं कर सकते है.
#4. सामाजिक तथा भावनात्मक विकास में देरी
- आँखों से आँख मिला कर के बात न करना।
- अकेले ही रहना उनको ज्यादा पसंद होता है.
#5. फाइन मोटर स्किल में देरी
- पेंसिल को पकड़ने में परेशानी का होना।
- छोटे टॉय को सही से न पकड़ पाना।
- कपड़े को पहनने में परेशानी का होना।
४) बाल विकास में देरी के क्या - क्या कारण होते है?
1. जन्म से जुड़ी हुयी समस्याएँ
- समय से पहले ही जन्म।
- जन्म के समय में ऑक्सीजन के कमी.
- वजन का कम होना
2. पोषण की कमी
- प्रोटीन, तथा आयरन और आयोडीन की कमी का होना।
3. न्यूरोलॉजिकल कारण
- सेरेब्रल पाल्सी
- ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिस ऑर्डर
4. आनुवंशिक का कारण - परिवार में अगर पहले से ही आनुवंशिक का कारण है, तो, विकास संबंधी समस्याएँ हो सकता है.
५) चाइल्ड डेवलपमेंट डिले के क्या - क्या लक्षण होते है?
- उम्र के अनुसार सही से विकास का न होना।
- बोलने में देरी का होना।
- बार-बार बच्चे का गिर जाना।
- दूसरों में रुचि का नहीं लेना।
- सीखने में ज्यादा कठिनाई का होना।
#चाइल्ड डेवलपमेंट का सही इलाज तथा सही प्रबंधन क्या है?
#1. अर्ली इंटरवेंशन
- जितने जल्दी पहचान और इलाज को शुरू होता है, उतने ही बेहतर परिणाम मिलते हैं।
# 2. स्पीच थेरेपी
- भाषा और संप्रेषण के कौशल को सुधारने के लिए।
# 3. फिजियोथेरेपी
- मांसपेशियों के मजबूती तथा संतुलन के लिए।
#4. ऑक्यूपेशनल थेरेपी
- दैनिक गति विधियों को अच्छे से बनाने में मदद करती है।