rheumatic fever treatment in hindi
#रूमैटिक फीवर (Rheumatic Fever)?
रूमैटिक फीवर सूजन संबंधी रोग है, जो की, प्रायः अनट्रीटेड स्ट्रेप थ्रोट या स्कार्लेट फीवर की जटिलता के रूप में विकसित होता है।
- यह रोग शरीर के कई भागों को असर कर सकता है, जैसे की, हृदय, जोड़ों, त्वचा और मस्तिष्क।
- यदि सही समय पर सही इलाज न किया जाए तो यह गंभीर हृदय संबंधी की समस्याओं का कारण बन सकता है।
२)रूमैटिक फीवर के कारण?
- स्ट्रेप्टोकॉकस बैक्टीरिया संक्रमण :– गले में संक्रमण का सही इलाज न होने पर हो सकता है.
- प्रतिरक्षा तंत्र की प्रतिक्रिया :– बैक्टीरिया से लड़ते समय हमारे शरीर की इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया शरीर के ऊतक पर हमला करने लग जाती है. जिससे सूजन होता है।
#प्रमुख लक्षण?
गले के संक्रमण से 2 से 4 हफ्ते के बाद रूमैटिक फीवर के लक्षण प्रकट होने लगते हैं:
- जोड़ों में दर्द है रहना और सूजन
- त्वचा पर लाल धब्बे का हो जाना
- बुखार और थकान जैसा लगना
३)संभावित जटिलताएँ?
यदि रूमैटिक फीवर का इलाज समय पर न किया जाए तो यह गंभीर परिणाम दे सकता है:
- रूमैटिक हार्ट डिज़ीज़ : – हृदय वाल्व को नुकसान पहुँच सकता है।
- क्रॉनिक जोड़ों की प्रॉब्लम ।
- मस्तिष्क संबंधी गड़बड़ियाँ।
४)निदान?
डॉक्टर निम्नलिखित की जाँच कर सकते हैं, जैसे की,
- गले की स्वैब टेस्ट
- खून की जाँच
- ईसीजी या इकोकार्डियोग्राफी
५)उपचार?
रूमैटिक फीवर का इलाज लक्षणों को कम करने और हृदय को होने वाले नुकसान से बचाने पर केंद्रित होता है:
- एंटीबायोटिक्स :– स्ट्रेप्टोकॉकस संक्रमण को खत्म करने के लिए।
- एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाइयाँ :– दर्द और सूजन को कम करने के लिए
- एंटी-सीज़र दवाइयाँ – अनियंत्रित गतिविधियों के लिए।
-दीर्घकालिक एंटीबायोटिक प्रॉफिलैक्सिस :– दोबारा संक्रमण रोकने के लिए कई सालों तक पेनिसिलिन इंजेक्शन दिए जाते हैं।
#बचाव के उपाय?
- डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीबायोटिक्स का कोर्स जब तक डॉक्टर नहीं बोले तब तक उस कोर्स को करना चाहिए.
- बच्चों में बार-बार गले की खराश होने पर जांच करना सही है।
- हृदय की समस्या वाले मरीजों को नियमित जाँच करवाते रहना चाहिए।