शिंगल्स, जिसे हरपीज़ ज़ोस्टर भी कहते है, त्वचा पर होने वाला दर्दनीय और फफोलेदार वाला संक्रमण है।
- इसका कारण वेरिसेला ज़ोस्टर वायरस है, जिस के कारण से वायरस बचपन में चिकनपॉक्स या छोटी माता का कारण बनता है।
- चिकनपॉक्स होने के बाद यह वायरस शरीर में निष्क्रिय अवस्था में तंत्रिका के अंदर छिपा रहता है। कई सालों बाद जब शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, तब यह वायरस दोबारा सक्रिय होकर शिंगल्स के रूप में सामने आता है।
२) शिंगल्स कैसे होता है?
जब कोई व्यक्ति चिकनपॉक्स से ठीक हो जाता है, तब वायरस पूरी तरह से खत्म नहीं होता है । यह रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क से जुड़ी नसों में छिपा रहता है।
*निम्न परिस्थितियों में वायरस दोबारा एक्टिव हो सकता है:*
- जैसे -जैसे उम्र बढ़ती जाती है, वैसे प्रतिरक्षा का कमजोर होता जाता है.
- कैंसर या HIV जैसी समस्या
- लंबे समय तक स्टेरॉइड दवाओं का सेवन करने से
- मानसिक तनाव और थकान जैसे लगना
- किसी गंभीर बीमारी या सर्जरी के बाद
३) शिंगल्स के लक्षण?
शुरुआत में इसके लक्षण नार्मल हो सकते हैं, पर धीरे-धीरे तेज दर्द और फफोलों के रूप में दिखने लगता है। मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
- जलन या झुनझुनी – जैसे प्रभावित भाग में जलन होना , खुजली या चुभने जैसा लगना ।
- नसों से जुड़ा हुए गहरा दर्द जो की कई बार नींद तक खराब कर देता है।
- त्वचा पर लाल धब्बे या छोटे- छोटे दाने का दिखाई देना।
- कुछ दिनों में उसी दाने में पानी भरे छोटे-छोटे फफोले बनने लगते हैं।
#जटिलताएँ ?
यदि समय पर सही इलाज न किया जाए, तो शिंगल्स कई गंभीर समस्याएँ पैदा कर सकता है:
- पोस्ट-हरपीटिक न्यूराल्जिया : – फफोले ठीक हो जाने के बाद भी लंबे समय तक तेज नसों का दर्द बना रहता है.
- आँखों में शिंगल्स : – आँख में संक्रमण हो जाने पर दृष्टि हानि तक हो सकती है।
- त्वचा में निशान : – फफोले ठीक होने के बाद में भी दाग या निशान रह सकते हैं।
- कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक शक्ति वाले मरीजों में इसका संक्रमण बहुत ही तेजी से फैलना।
५) शिंगल्स का निदान ?
डॉ. आमतौर पर शारीरिक जांच और लक्षणों के आधार पर शिंगल्स का पता लगा लेते हैं।
- कुछ मामलों में वायरस का पता के लिए लैब टेस्ट या पीसीआर भी कराया जा सकता है।
#शिंगल्स से बचाव ?
- टीकाकरण करना सही है।
-50 वर्ष से ऊपर वाले लोगों के लिए वैक्सीन है, जो की रोग के खतरे और जटिलताओं को काफी हद तक कम करता है।
- संतुलित आहार, डेली कसरत और तनाव-नियंत्रण जरूरी है।
- संक्रमित व्यक्ति से दूरी रखना ही सही होता है.