Hypercalcemia ka ilaaj
#हाइपरकैल्सीमिया
शरीर के लिए कैल्शियम एक महत्वपूर्ण मिनरल है, जो हड्डियों की मजबूती, मांसपेशियों की गतिविधियों, नसों के संचार और हार्मोन स्राव के लिए ज़रूरी होता है। लेकिन जब यह कैल्शियम सामान्य से अधिक मात्रा में खून में जमा हो जाता है, तो उसे हाइपरकैल्सीमिया कहा जाता है। यह स्थिति कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है और समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह घातक भी साबित हो सकती है।
१) हाइपरकैल्सीमिया क्या है?
हाइपरकैल्सीमिया ऐसी अवस्था है, जिस में खून में कैल्शियम का स्तर सामान्य से भी (8.5–10.5 mg/dL) से ज्यादा हो जाता है.
- यह ज्यादा कैल्शियम शरीर की अलग - अलग महत्वपूर्ण प्रक्रिया पर नकारात्मक असर डाल सकता है — जैसे की , हड्डियाँ का कमजोर होने लग जाना , किडनी का कार्य करने पर भी असर होता है, और मानसिक कार्य क्षमता में भी असंतुलित हो सकती है।
२) हाइपरकैल्सीमिया के प्रमुख कारण?
- अति सक्रिय पैराथायरॉइड ग्रंथियाँ :
यह हाइपरकैल्सीमिया का आम कारण है। जब की, पैराथायरॉइड ग्रंथियाँ ज्यादा मात्रा में पैराथायरॉइड हार्मोन का उत्पादन करती हैं, तो यह हड्डियों में से कैल्शियम को बाहर निकालकर खून में छोड़ देती हैं, जिससे खून में कैल्शियम का लेवल असामान्य रूप से बढ़ जाता है।
- कैंसर : कुछ तरह के कैंसर जैसे की, फेफड़े, स्तन या ब्लड कैंसर भी हाइपरकैल्सीमिया का कारण बन सकते हैं। यह ट्यूमर की वजह से हड्डियों में टूट-फूट या कैल्शियम से रिलीज से होता है।
- ज्यादा मात्रा में विटामिन - D लेने से शरीर में कैल्शियम का अवशोषण बढ़ जाता है, जिससे हाइपरकैल्सीमिया हो सकता है।
- कुछ दवाएं जैसे की ,थायाजाइड डाइयूरेटिक्स, लिथियम या विटामिन सप्लीमेंट्स हाइपरकैल्सीमिया को बढ़ावा दे सकती हैं।
३) हाइपरकैल्सीमिया के लक्षण?
हाइपरकैल्सीमिया के लक्षण उसकी तीव्रता पर निर्भर करते हैं। कुछ मामलों में कोई विशेष लक्षण नहीं होते है, लेकिन जब कैल्शियम का स्तर ज्यादा हो जाता है, तो निम्नलिखित लक्षण देखे जा सकते हैं:
- ज्यादा प्यास लगने और बार-बार पेशाब का आना
- कब्ज़ और अपच
- पेट में दर्द और मतली
- मांसपेशियों में कमजोरी और थकान का लगना
- हड्डियों में दर्द जैसा लगना
- मानसिक भ्रम, या चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन
- दिल की धड़कन का असामान्य होना
- गुर्दे का खराब हो जाना
#हाइपरकैल्सीमिया का निदान कैसे होता है?
हाइपरकैल्सीमिया का पता लगाने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित जांचें करते हैं:
- ब्लड का टेस्ट : कैल्शियम का स्तर, PTH हार्मोन, विटामिन D, क्रिएटिनिन
- यूरीन का टेस्ट : शरीर से कैल्शियम का कितना उत्सर्जन हो रहा है
- ECG : यदि दिल की धड़कन में गड़बड़ी है तो
#हाइपरकैल्सीमिया का इलाज
इलाज की योजना कैल्शियम के स्तर और कारण पर निर्भर करती है:
- उचित पानी की मात्रा
- डाइट में कैल्शियम और विटामिन
- D का संतुलन
- दवाओं की समीक्षा
- डाययूरेटिक्स : जैसे फ्यूरोसेमाइड, जो कैल्शियम को यूरीन के माध्यम से बाहर निकालने में मदद करते हैं
बिसफॉस्फोनेट्स : ये हड्डियों से कैल्शियम रिलीज को रोकते हैं।
- हार्मोन में जो की रक्त में कैल्शियम को कम करता है
- अगर पैराथायरॉइड ग्रंथि में ट्यूमर हो तो ऑपरेशन
#हाइपरकैल्सीमिया से बचाव कैसे करें?
- डॉक्टर की सलाह से ही विटामिन - D और कैल्शियम सप्लीमेंट का प्रयोग करें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और डिहाइड्रेशन से बचना चाहिए.
- कोई भी नई दवा के सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह लें.
- स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएं और डेली व्यायाम करें।
*निष्कर्ष*
हाइपरकैल्सीमिया गंभीर स्थिति है, जो की शरीर के कई भागो को असर कर सकती है, लेकिन अगर समय रहते इसका पहचान हो जाए तो उचित उपचार शुरू कर दिया जाए, तो इसे सफलतापूर्वक नियंत्रित किया जा सकता है।