neuropathic dard kya hota hai | homeopathy me neuropathic dard ka ilaaj
१) न्यूरोपैथिक दर्द क्या होता है?
न्यूरोपैथिक दर्द यह लम्बी समय तक रही ऐसी स्थिति है, जो तब होती है ,जब हमारी तंत्रिकाएँ किसी चोट लगने से या तो कोई तरह का दबाव की वजह से हानि हो जाती हैं।
- ये तंत्रिका हमारे शरीर का तापमान और दर्द जैसी संवेदना मस्तिष्क तक पहुँचाने का कार्य करती हैं।
- शरीर में जब भी दर्द का असामान्य होना भी हो सकता है.
- नार्मल दर्द किसी भी तरह की चोट या सूजन का संकेत देता है, जबकि न्यूरोपैथिक दर्द बिना चोट किसी स्पष्ट के भी हो सकता है.
२) न्यूरोपैथिक दर्द के लक्षण क्या है?
न्यूरोपैथिक दर्द के लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है, जैसे की,
- कभी - कभी तो सुनापन जैसा भी हो जाता है, पर हम को पता भी नहीं चलता है.
- सामान्य चीज़ों पर दर्द (Allodynia): हल्के हाथों से स्पर्श करना ,और मौसम के परिवर्तन से भी यह दर्द हो सकता है।
- इस तरह के कई लक्षण कभी - कभी देखने को मिलते है, तो कभी रुक-रुककर दर्द आते हैं, जिस से की हमारे डेली के जीवन को असर हो सकता है.
३) न्यूरोपैथिक दर्द के मुख्य कारण क्या हो सकते है?
न्यूरोपैथिक दर्द के मुख्य कारण निचे अनुसार है, जैसे की,
- मधुमेह : ज्यादा लम्बे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने पर भी नसों को हानि पहुँच सकता है।
-किसी भी तरह का एक्सीडेंट, या हड्डी-मांसपेशियों के दबाव पर से भी इस पर असर होता है.
- न्यूरोलॉजिकल रोग में मल्टीपल स्क्लेरोसिस और अन्य तंत्रिका संबंधी के बीमारियाँ भी हो सकती है.
४) न्यूरोपैथिक दर्द का प्रभाव कहा पर होता है?
इसका दर्द केवल शरीर पर ही नहीं, हमारे मानसिक और सामाजिक जीवन पर भी असर कर सकता है, जैसे की ,
- शारीरिक असर : पुरे शरीर में दर्द का होना , थकान और चलने-फिरने में भी बहुत ही परेशानी हो सकती है.
- चिंता, डर और अवसाद जैसा भी हो सकता है.
- असुविधा की वजह से भी रात में नींद पूरी तरह से नहीं हो पाती है.
- दैनिक जीवन में काम करने में भी दिक्कतें हो सकती है.
५) न्यूरोपैथिक दर्द का निदान?
डॉ. आपकी मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों के आधार पर ही कुछ जाँच करने को कहते है।
- रक्त के परीक्षण
- इलेक्ट्रोमायोग्राफी (EMG): के माध्यम से भी मांसपेशियों और नसों की गतिविधि की जाँच करने से यह पता लगता है, की तंत्रिका क्षति कहाँ है, और दर्द का कारण क्या है.
#उपचार और प्रबंधन
न्यूरोपैथिक के दर्द को पूरी तरह से खत्म करना संभव नहीं है, पर लक्षणों को कम करके जीवन की गुणवत्ता में सुधार भी कर सकते है।
१ . फिजिकल थेरेपी : शरीर की ताकत और लचीलापन बढ़ाने वाले व्यायाम।
२. कुछ गंभीर मामलों में इंजेक्शन भी दिया जाता है ,जिससे की आराम मिल सकता है.
३.मधुमेह और मोटापा पर कण्ट्रोल रखना
४) डेली संतुलित आहार और नियमित कसरत करना
५) किसी भी तरह का तनाव और सोचना नहीं चाहिए.