kandhe ke dard ka homeopathic ilaj | shoulder pain treatment in homeopathic
#फ्रोज़न शोल्डर: जब कंधा अकड़ जाए?
- क्या आपने कभी महसूस किया है कि आपका कंधा अचानक बिना किसी चोट के, एक दिन अकड़ गया है?
- साधारण काम, जैसे कंघी करना, शर्ट को पहनना, या कार की सीट बेल्ट को खींचना, अचानक असहनीय रूप से कठिन और दर्दनाक हो जाता है। यह स्थिति फ्रोज़न शोल्डर कहलाती है।
१) फ्रोज़न शोल्डर क्या है?
यह कंधे के जोड़ को असर करने वाली एक ऐसी स्थिति है, जहाँ कंधे की गति की सीमा गंभीर रूप से प्रतिबंधित हो जाती है। और चिकित्सा की दुनिया में इसे एडहेसिव कैप्सुलाइटिस नाम से जाना जाता है। - इस नाम से ही पता चलता है कि, यह हमारे कंधे के जोड़ के चारों ओर एक सुरक्षात्मक परत—जिसे जोड़ का कैप्सूल कहते हैं—को असर करती है।
- इस स्थिति में, यह कैप्सूल मोटा, सख्त और सिकुड़ा हुआ हो जाता है, जिससे हमें लगता है कि, हमारा कंधा 'जम' गया है या 'फ्रोज़न' हो गया है।
२) कैसे होता है फ्रोज़न शोल्डर?
फ्रोज़न शोल्डर मूल रूप से कंधे के जोड़ की संरचना में एक रहस्यमय बदलाव के कारण होता है।
- हमारा कंधा शरीर के सबसे लचीले जोड़ों में से एक है, क्योंकि यह एक बॉल-एंड-सॉकेट जोड़ है, जो हमें लगभग 360 डिग्री घूमने की अनुमति देता है।
- यह गति जोड़ के कैप्सूल की चिकनाई और लोच पर निर्भर करती है। फ्रोज़न शोल्डर में, किसी अज्ञात कारण से, यह कैप्सूल प्रतिक्रिया करना शुरू कर देता है।
- कल्पना कीजिए कि, आप के जोड़ के चारों ओर एक ढीला, और लचीला दस्ताना है। फ्रोज़न शोल्डर में, यह दस्ताना सूज जाता है, मोटा हो जाता है और फिर कसकर सिकुड़ जाता है। इस प्रक्रिया में, कैप्सूल के अंदर रेशेदार ऊतक के चिपचिपे बैंड बनने लगते हैं, जिन्हें एडहेसन कहा जाता है।
- ये एडहेसन जोड़ के अंदर की खाली जगह को भर देते हैं, जिस से बॉल-एंड-सॉकेट एक दूसरे से चिपकने लगते हैं. और जोड़ की सामान्य गति बाधित हो जाती है।
#यह एक तीन-चरणीय यात्रा है:
१) फ्रीजिंग चरण :: इस शुरुआत में, दर्द धीरे-धीरे से बढ़ता जाता है। दर्द बढ़ने के साथ ही, आप पाते हैं कि, आपके कंधे को हिलाने की क्षमता कम होने लगी है। - यह वह समय होता है, जब आप अनजाने में दर्द से बचने के लिए कंधे को कम इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं।
२) फ्रोज़न चरण :: इस चरण तक आते-आते दर्द में थोड़ी स्थिरता आ सकती है, पर कंधे की अकड़न चरम पर होती है। जोड़ ऐसा महसूस होता है ,जैसे की, सीमेंट से भर गया हो। यह वह समय है जब, साधारण काम, जैसे कि पीठ खुजलाना या पर्स/वॉलेट निकालना, असंभव लगने लगता है।
३) पिघलने का चरण :: यह वह चरण है , जब अकड़न धीरे-धीरे से कम होने लगती है, और कंधे की गति की सीमा वापस आना शुरू हो जाती है। - यह अपने आप ठीक होने की लंबी प्रक्रिया है, जिस के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है।
३) जोखिम और कारण क्या है?
फ्रोज़न शोल्डर अक्सर बिना किसी स्पष्ट कारण के होता है, कुछ कारक इसे विकसित होने की संभावना को बढ़ाते हैं। - सबसे बड़ा जोखिम कारक है :: कंधे की गतिहीनता। - यदि किसी चोट, फ्रैक्चर या सर्जरी के बाद कंधे को लंबे समय तक स्थिर रखा जाता है, तो कैप्सूल सिकुड़ने लगता है, जिस से यह स्थिति पैदा हो सकती है। - इसके अलावा, कुछ स्वास्थ्य स्थितियाँ भी इसका जोखिम बढ़ाती हैं। इनमें सबसे प्रमुख है मधुमेह । - मधुमेह से पीड़ित लोगों को फ्रोज़न शोल्डर होने की संभावना कई गुना होती है, और अक्सर यह दोनों कंधों में भी हो सकता है। अन्य जोखिम कारकों में थायरॉइड की समस्याएँ, हृदय रोग और पार्किंसंस रोग शामिल हैं। - फ्रोज़न शोल्डर से जूझ रहे व्यक्ति के लिए सबसे जरुरी बात है. धैर्य और जागरूकता। यह स्थिति आप को सिखाती है कि, शरीर को ठीक होने के लिए समय देना कितना ज़रूरी है। - रिकवरी की यात्रा धीमी हो सकती है, कभी-कभी दो साल या उससे भी अधिक समय लग सकता है, पर अधिकांश लोग अपनी पूरी या लगभग पूरी गतिशीलता वापस पा लेते हैं।
अपने जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए, विशेषज्ञ मार्गदर्शन जरुरी है। कंधे को सुरक्षित रूप से और धीरे-धीरे हिलाने-डुलाने के लिए नियमित व्यायाम करना ज़रूरी होता है। **ध्यान रखें कि**, दर्द को नज़रअंदाज़ करने से यह स्थिति और बिगड़ सकती है, इसलिए अपने शरीर की सीमाओं को पहचानना और उसका सम्मान करना महत्वपूर्ण है।