लसीका ग्रंथियाँ हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली का महत्वपूर्ण भाग हैं। ये छोटे-छोटे सेम आकार की ग्रंथि हैं, जो की पूरे शरीर में होती हैं — खासकर गर्दन, कमर, कान के पीछे के पास।
- इनका कार्य शरीर में संक्रमण या सूजन से लड़ने का होता है। बार बच्चों में यह ग्रंथियाँ सूजकर बड़े हो जाते हैं, जिसे Enlarged Lymph Node कहते है।
२) लसीका ग्रंथियों का क्या कारण है?
बच्चों में लसीका ग्रंथियों बढ़ने के कारण निचे अनुसार हो सकते हैं, इस प्रकार से है,
- संक्रमण : सर्दी-जुकाम, खसरा, चिकनपॉक्स आदि।
- बैक्टीरियल संक्रमण से : टॉन्सिलाइटिस, कान के संक्रमण, स्किन का संक्रमण।
- टीबी : गर्दन में ग्रंथि का बढ़ना ज्यादा समय तक हो सकता है.
- प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया : शरीर में संक्रमण से लड़ता है तो लसीका ग्रंथियाँ सक्रिय होकर बढ़ जाती हैं।
३) लसीका ग्रंथियों के क्या लक्षण दिखाई देते है?
बच्चों में अक्सर ये लक्षण देखे जा सकते हैं जैसे की ,
- गर्दन, कान, कमर में गांठ या सूजन
- गांठ में हल्का दर्द या कोमलता
- गले में खराश का हो जाना
- भूख भी कम लगना
- थकान जैसा लगना
४) लसीका ग्रंथियों में कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
यदि बच्चे में ये लक्षण हों तो तुरंत ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए: जैसे की ,
- 2 हफ्ते से भी ज्यादा समय तक गांठ बनी रहे तब
- गांठ का आकार 2 सेमी से बड़ा हो
- गांठ कठोर हो जाने से
- लगातार वजन का कम होना, रात में पसीना आना
५) लसीका ग्रंथियों का क्या उपचार है?
- वायरल संक्रमण : कुछ मामलों में विशेष दवा की ज़रूरत नहीं होती। पर आराम, उचित पानी और संतुलित आहार से 2 हफ्ते में भी सूजन कम हो जाती है।
- बैक्टीरियल संक्रमण : दर्द और सूजन को कम करने के लिए पेरासिटामोल या इबुप्रोफेन।
- टीबी : जयदा अवधि का टीबी का ट्रीटमेंट (6-9 महीने तक)।