पैन्क्रियाटाइटिस का इलाज : एक सम्पूर्ण मार्गदर्शिका
पैन्क्रियाटाइटिस बहुत ही गंभीर और कभी-कभी तो जानलेवा स्थिति होती है, जिसमें अग्न्याशय में सूजन आ जाती है।
- अग्न्याशय हमारे शरीर का महत्वपूर्ण भाग है जो की , पाचन एंजाइम और इंसुलिन जैसे हार्मोन का निर्माण करता है।
- जब ये एंजाइम समय से पहले ही सक्रिय हो जाते हैं, तो वे अग्न्याशय को ही नुकसान पहुँचाने लगते हैं, जिससे की सूजन और दर्द होता है।
*पैन्क्रियाटाइटिस दो प्रकार की होती है:*
*एक्यूट पैंक्रियास * : पैंक्रियास की होने वाले अचानक सूजन होती है इसमें यदि सही समय पर इलाज किया जाये तो ये सही हो जाता है.
*क्रोनिक पैंक्रियास * : यह बीमारी लंबे समय तक चलने वाली है और धीरे-धीरे अग्न्याशय को नुकसान करता है।
- आज के लेख में हम पैन्क्रियाटाइटिस के इलाज के सभी पहलुओं को समझेंगे – घरेलू उपायों से लेकर मेडिकल उपचार और जीवनशैली परिवर्तन तक।
1. पैन्क्रियाटाइटिस का प्रारंभिक इलाज क्या होता है?
- अस्पताल में इलाज की जरुरत
एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस के मामलों में पेशेंट को अस्पताल में भर्ती करना जरुरी होता है। उनके इलाज में निम्न शामिल होते हैं जैसे की ,
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डिहाइड्रेशन को रोकने के लिए तरल पदार्थ को चढ़ाना।
- तेज पेट दर्द को कण्ट्रोल करने के लिए पेनकिलर्स की दवा को देना।
- कुछ समय तक तो भोजन नहीं देना जिस से की अग्न्याशय को आराम मिले सके।
- रक्त परीक्षण, CT स्कैन या अल्ट्रासाउंड से स्थिति पर नजर बनाये रखना।
2. कारण का इलाज करना बेहद जरूरी है
इसका मुख्य उद्देश्य केवल सूजन को ही कम करना नहीं है, बल्कि उसके कारण को भी समाप्त करना होता है.
* कुछ सामान्य कारणों का तो इलाज इस तरह से होता है*
- यदि यह कारण है, तो डॉक्टर पित्ताशय को निकालने की सलाह दे सकते हैं।
- शराब को पूरी तरह से त्यागना सही होता है।
- उच्च ट्राइग्लिसराइड स्तर : दवाइयों और खानपान से कण्ट्रोल किया जाता है।
3. क्रॉनिक पैन्क्रियाटाइटिस का इलाज
-एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी : अग्न्याशय, सही से जब एंजाइम नहीं बना पाता है ,इसलिए भोजन के साथ में ही पाचन एंजाइम्स की गोलियाँ देते है।
-यदि मधुमेह विकसित हो जाए, तो इंसुलिन की जरुरत पड़ सकती है।
- हाई फाइबर और कम फैट वाला संतुलित आहार दिया जाता है।
- यदि लगातार दर्द बना रहे या डक्ट में ब्लॉक हो, तो सर्जरी से राहत मिलती है।
4. घरेलू उपचार और जीवनशैली परिवर्तन
इलाज के साथ में कुछ जीवनशैली परिवर्तन भी जरूरी होते हैं
- शराब और धूम्रपान से दूरी बनाये रखना चाहिए.
-तले हुए, मसालेदार भोजन से बचना चाहिए।
- दिन में ३-४ बार में हल्का खाना खाने से पाचन आसान से होता है।
- शरीर को हाइड्रेट रखना भी बहुत ही जरूरी है।
- तनाव को कम करने के लिए योग जरुरी है
5 . रिकवरी और फॉलो-अप लेना
इलाज के बाद मरीज को कुछ हफ्तों तक विशेष सावधानी रखना है।
- डॉक्टर के अनुसार ही नियमित फॉलो-अप जरूरी है। और पेट के दर्द, उल्टी या बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।