अग्नाशय में सूजन या चोट लग जाने से होती है, तो पाचन एंजाइम लीक होने लग जाते हैं और अग्नाशय के आसपास के ऊतकों में जमा होने लग जाते हैं, जिससे स्यूडोसिस्ट का निर्माण होता है।
- यदि इसका समय पर सही इलाज न किया जाये तो ये आगे चल कर खतरा हो सकता है।
२) पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट के क्या कारण दिखाई देते है?
पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट के कारण निचे बताये गए अनुसार हो सकते है ,जैसे की - पित्त में पथरी का होना - शराब का ज्यादा सेवन करना - डक्ट सिस्टम में ब्लॉकेज
- अग्न्याशय में संक्रमण : अगर अग्न्याशय में संक्रमण हो तो वहाँ की कोशिकाएं नष्ट हो जाएँ, जिस से तरल पदार्थ एकत्रित कर सकती हैं, जो आगे चलकर स्यूडोसिस्ट बन जाता है।
- अग्न्याशय में चोट
३) पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट के क्या लक्षण होते है?
कुछ स्यूडोसिस्ट बिना किसी लक्षण के भी हो सकते हैं, परंतु जब सिस्ट बड़ा हो जाता है या दबाव डालता है तो ये लक्षण सामने आ सकते हैं:
-पेट में ऊपरी हिस्से में दर्द - सूजन या भारीपन महसूस होना
- उल्टी या मतली
- पाचन संबंधी समस्याएं - भूख में कमी
- पीलिया
४) पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट के लिए क्या-क्या जांच होते है?
पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट की पुष्टि के लिए निम्नलिखित परीक्षण किए जाते हैं:
- अल्ट्रासाउंड - सीटी स्कैन : सिस्ट के आकार का पता करने के लिए - एमआरआई या एमआरसीपी : पैंक्रियाटिक डक्ट की स्थिति देखने के लिए - एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड : ज्यादा सटीक और बायोप्सी के लिए
५) पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट का क्या उपचार है ?
इलाज इस पर निर्भर करता है कि सिस्ट का आकार कितना है, लक्षण हैं या नहीं, और कोई जटिलता तो नहीं है।
1. निगरानी (Observation)
यदि सिस्ट छोटा (5 सेमी से कम) है, बिना लक्षण है और कोई जटिलता नहीं है, तो इसे 4–6 सप्ताह तक निगरानी में रखा जा सकता है। CT या MRI द्वारा फॉलोअप किया जाता है। कई बार ऐसे सिस्ट अपने आप ठीक हो जाते हैं।
2. एंडोस्कोपिक ड्रेनेज (Endoscopic Drainage)
यदि सिस्ट बड़ा हो गया है या लक्षण दे रहा है, तो एंडोस्कोपी द्वारा सिस्ट से द्रव निकाला जाता है। इसके लिए मुंह के माध्यम से एक ट्यूब डाली जाती है जो सिस्ट में जाकर फ्लूइड बाहर निकालती है।
3. पर्क्यूटेनियस ड्रेनेज (Percutaneous Drainage)
अल्ट्रासाउंड या CT के गाइड से, पेट की त्वचा से सुई डालकर सिस्ट से फ्लूइड निकाला जाता है। यह तब किया जाता है जब एंडोस्कोपी संभव न हो।
4. सर्जरी
यदि सिस्ट में संक्रमण हो गया है, बार-बार बना रहा है, या एंडोस्कोपी से लाभ नहीं हो रहा, तो सर्जरी की जाती है। सिस्ट को आंत (jejunum) से जोड़कर फ्लूइड को बाहर निकलने का रास्ता बनाया जाता है। इस प्रक्रिया को सिस्टोजेजुनोस्टॉमी कहा जाता है।
* जीवनशैली और सावधानियां *
- शराब का सेवन पूरी तरह बंद करें
- वसा युक्त भोजन से परहेज करें
- पाचन को आसान बनाने के लिए हल्का और सुपाच्य भोजन लें
- डॉक्टर के निर्देश अनुसार दवाइयों का सेवन करें
- नियमित फॉलोअप जांच करवाएं