- नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ ऐसी स्थिति है, जिस में "शराब न पीने के बावजूद लिवर में ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है"।
- आजकल आम बीमारी बन चुकी है, खास कर के उन लोगों में जो मोटापे, मधुमेह, हाई कोलेस्ट्रॉल से जूझ रहे हैं। अच्छी बात यह है कि, शुरुआती स्टेज में बीमारी ठीक की जा सकती है।
२) नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ क्यों होता है?
- ज़्यादा वजन का हो जाना या मोटापा।
- टाइप-2 मधुमेह
- हाई ट्राइग्लिसराइड्स / कोलेस्ट्रॉल का हो जाना।
- जंक फूड तथा शुगर-रिच डाइट।
- हार्मोनल का असंतुलन
३) इलाज का मुख्य सिद्धांत क्या है?
नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ का कोई भी टैबलेट से इलाज नहीं है।
इसका प्रभावी इलाज है, जीवन में परिवर्तन + सही डाइट , वजन का कम करना।
#1. वजन का कम करना ::– सबसे असरदार इलाज है.
खोज के अनुसार अगर आप 5–7% वजन को कम कर लेते हैं → लिवर की चर्बी कम होने लगती है.
#2. सही डाइट का चयन करना।
#क्या खाएँ#
✔ हाई फाइबर वाला फूड
- हरी- सब्ज़ियाँ जैसे की ,पालक, लौकी, तोरी।
- फल का सेवन में सेब, पपीता, नाशपाती।
- ब्राउन राइस, दलिया
✔ हेल्दी फैट
- अखरोट, बादाम (कम पर सीमित मात्रा में ).
✔ प्रोटीन - लो-फैट का दही
- मछली (अगर खाते हों तो, ही )
#क्या न खाएँ#
- मीठा तथा शुगर वाले वस्तुए।
- कोल्ड ड्रिंक्स भी नहीं लेना।
- मैदा, बेकरी का आइटम।
- बहुत ही ज़्यादा चावल
#3. दवा से भी ज़्यादा असरदार कसरत करना होता है.
- हफ्ते में कम से कम २ घण्टे जितना कसरत करना। जिस में हो सकता है,
तेज़ चलना , साइक्लिंग करना , कपालभाति।
#4. मधुमेह तथा कोलेस्ट्रॉल पर कंट्रोल रखना
अगर आपको भी डायबिटीज़ , हाई BP , हाई कोलेस्ट्रॉल हो तो, कंट्रोल करना "NAFLD" इलाज का हिस्सा है।
- डॉ द्वारा दी गई दवाएँ को नियमित समय पर लें और खुद से दवा को बंद न करें।
#5. शराब तथा धूम्रपान का सेवन
- शराब से तो, बिल्कुल दुरी कर लेना सही है.
* धूम्रपान करने से लिवर और भी डैमेज हो सकता है.
#6 . नियमित जाँच
हर 6 महीने में Liver Function Test , Ultrasound, (अगर डॉक्टर कहें तो,)
इस से बीमारी की प्रोग्रेस का पता चलता है।