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Psoriasis ke liye kya tips ko follow kre?
१ ) सोरायसिस के लिए उपयोगी टिप्स क्या है? यह लंबे समय तक रहने वाली स्किन के संबंधी बीमारी है, जिस में त्वचा पर लाल चकत्ते , सूखी और परतदार चकत्ते दिखाई देते हैं।  - शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के असंतुलन के कारण से होती है। त्वचा की कोशिकाएँ धीरे‑धीरे बनती ,बदलती हैं, पर सोरायसिस में बहुत तेज हो जाती है। -त्वचा पर मोटी परत जमने लगती है। कई लोगों को इस में खुजली, जलन और दर्द भी महसूस होता है। इसका स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है, पर सही देखभाल से नियंत्रित किया जा सकता है।   #1. त्वचा को मॉइस्चराइज़ रखें - सोरायसिस में त्वचा जल्दी सूख जाती है। त्वचा को नमी देना सबसे जरूरी है। - नहाने के तुरंत बाद में मॉइस्चराइज़र लगाना अच्छा रहता है। नारियल तेल, एलोवेरा जेल या तो, डॉ के द्वारा सुझाई गई क्रीम त्वचा को मुलायम रखने में मदद करती हैं। - खुशबू वाले उत्पादों से बचना चाहिए। #2. तनाव को नहीं ले.  - तनाव सोरायसिस को बढ़ाने का मुख्य कारणों में है। जब व्यक्ति चिंता या मानसिक दबाव में रहता है, तो बीमारी के लक्षण तेज हो सकते हैं। #3. संतुलित आहार को ही लें  - खान‑पान का सीधा असर त्वचा पर पड़ता है। ताजे फल, हरी सब्जियाँ, दालें, साबुत अनाज और ओमेगा‑3 फैटी एसिड से भरपूर भोजन फायदेमंद माना जाता है। - मछली, अखरोट और अलसी जैसे खाद्य पदार्थ सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। #4. धूप का सही उपयोग करें  - हल्की धूप सोरायसिस के दर्दी के लिए लाभदायक है क्योंकि सूर्य की किरणें त्वचा की सूजन कम करने में मदद करती हैं।   # 5. त्वचा के चोट से बचाएँ  - रगड़कर न नहाएँ ,कठोर साबुन का उपयोग न करें।#6. नियमित(डेली) व्यायाम करें - व्यायाम करने से भी शरीर को स्वस्थ रखने से भी तनाव कम करने में भी मदद करता है।  - हल्की दौड़, पैदल चलना या साइकिल चलाना जैसे व्यायाम शरीर की सूजन कम करने में सहायक हो सकते हैं।  # 7. डॉ. की सलाह जरूर ले.  - सोरायसिस का इलाज व्यक्ति के अनुसार अलग‑अलग हो सकता है। कुछ लोगों को केवल क्रीम या मलहम से आराम मिल जाता है. - कुछ को दवाओं या लाइट थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है।  # 8. पर्याप्त पानी को पीना चाहिए - शरीर में पानी की कमी होने पर त्वचा सूखी हो सकती है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है।
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Diarrhea hone par kya tips ko follow karna chahiye?
१) डायरिया के लिए उपयोगी टिप्स क्या है? - डायरिया, जिसे दस्त कहते है, यह ऐसी समस्या है जिस में पतला मल आता है।  - बच्चों से ले कर के बड़ों तक किसी को भी हो सकता है। - ज्यादातर मामलों में दूषित भोजन, दूषित पानी, वायरल या तो, बैक्टीरियल संक्रमण, फूड पॉइजनिंग, के कारण होता है।  - यदि सही देखभाल न हो तो, शरीर में पानी ,जरूरी मिनरल्स की कमी हो सकती है। २) डायरिया होने के मुख्य कारण क्या - क्या है? - दूषित पानी या तो, दूषित खाना को खाना - वायरल या तो, बैक्टीरियल का संक्रमण  - ज्यादा मसालेदार भोजन या तो, बाहर का भोजन करना - खराब स्वच्छता ३) डायरिया के क्या लक्षण होते है? - बार बार पतला मल का आना  - पेट में मरोड़  - कमजोरी और थकान - शरीर में से पानी की कमी हो जाना  यदि लंबे समय तक दस्त रहे तो डिहाइड्रेशन हो सकती है। ४) डायरिया में क्या योग्य टिप्स है? 1. खूब पानी को पिएं - डायरिया होने से शरीर से पानी निकल जाता है। इसलिए नारियल पानी, नींबू पानी जैसी चीजें लेते रहें।  # 2. ORS का सेवन करें  ORS शरीर में पानी और नमक की कमी को पूरा करने में मदद करता है।  # 3.सुपाच्य भोजन करें - डायरिया में समय पेट पर दबाव नहीं डालना चाहिए। खिचड़ी, दलिया,केला]जैसे हल्के भोजन का सेवन करें। # 4. तला‑भुना मसालेदार भोजन को खाना बंद करें  # 5. दही में बैक्टीरिया होते हैं, जो पेट को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।  #6. डायरिया के समय शरीर बहुत ही कमजोर हो जाता है। इसलिए आराम जरूरी है.  # 7. सफाई का बहुत ही ध्यान रखें ४) डायरिया के लिए घरेलू उपाय? #केला  - केले में पोटैशियम होता है, जो शरीर में मिनरल्स की कमी पूरी करने में मदद करता है। #अदरक - अदरक की चाय पेट दर्द कम करने में सहायक हो सकती है।  #नारियल पानी  - नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने का अच्छा तरीका है।
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Tuberculosis kya hai? or kaise hota hai?
क्षय रोग — तपेदिक (Tuberculosis / TB) क्षय रोग, जिसे आम भाषा में TB या तपेदिक कहते हैं, दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक है। भारत में हर साल लाखों लोग TB से पीड़ित होते हैं। अच्छी बात यह है कि सरकार के DOTS कार्यक्रम के तहत TB का उपचार पूरी तरह मुफ्त और प्रभावी है। १) क्षय रोग (TB) क्या है? क्षय रोग एक जीवाणु जनित संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (Mycobacterium Tuberculosis) नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह बैक्टीरिया मुख्यतः फेफड़ों पर हमला करता है, जिसे पल्मोनरी TB कहते हैं। लेकिन यह मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, गुर्दे, लिम्फ नोड्स और आँतों को भी प्रभावित कर सकता है, जिसे एक्स्ट्रापल्मोनरी TB कहा जाता है।  TB दो अवस्थाओं में हो सकती है — - अव्यक्त TB (Latent TB), जिसमें बैक्टीरिया शरीर में होते हैं लेकिन सक्रिय नहीं होते और लक्षण नहीं दिखते और सक्रिय TB (Active TB), जिसमें बैक्टीरिया सक्रिय होकर बीमारी पैदा करते हैं और दूसरों में फैल भी सकते हैं।  - आज के समय में MDR-TB (Multi-Drug Resistant TB) एक बड़ी चुनौती है, जो तब होती है जब मरीज़ अपनी दवाइयाँ बीच में ही छोड़ देते हैं। ३) TB शरीर में कैसे फैलती है? - TB बैक्टीरिया हवा के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते हैं। जब कोई सक्रिय TB का मरीज़ खाँसता, छींकता, बोलता या थूकता है, तो लाखों सूक्ष्म बैक्टीरिया हवा में तैरने लगते हैं। ये बैक्टीरिया हवा में घंटों तक जीवित रह सकते हैं। - जब कोई स्वस्थ व्यक्ति इस बैक्टीरिया से भरी हवा में साँस लेता है, तो बैक्टीरिया उसके फेफड़ों में पहुँच जाते हैं। यदि उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत है, तो शरीर इन्हें दबा देता है और बीमारी नहीं होती। लेकिन कमज़ोर प्रतिरक्षा में बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं। - फेफड़ों में बैक्टीरिया के आसपास शरीर एक सुरक्षात्मक परत बना लेता है, जिसे Granuloma कहते हैं। यदि प्रतिरक्षा कमज़ोर हो जाए, तो यह परत टूट जाती है और बैक्टीरिया रक्त में मिलकर पूरे शरीर में फैल सकते हैं। ४) TB होने के कारण और जोखिम कारक? TB किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ परिस्थितियाँ इसका खतरा बढ़ा देती हैं।  TB के मरीज़ के करीबी संपर्क में रहना: घर या कार्यस्थल पर यदि कोई सक्रिय TB का मरीज़ है, तो संक्रमण का खतरा अधिक होता है।  HIV/AIDS: HIV से पीड़ित व्यक्तियों की प्रतिरक्षा बहुत कमज़ोर होती है, जिससे उन्हें TB होने का खतरा लगभग 20 गुना अधिक होता है।  कुपोषण: पर्याप्त पोषण न मिलने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो जाती है। मधुमेह: मधुमेह के रोगियों में TB का खतरा लगभग तीन गुना अधिक होता है।  धूम्रपान और शराब: ये फेफड़ों को कमज़ोर करते हैं और शरीर की प्रतिरक्षा को घटाते हैं।  भीड़भाड़ वाले बंद स्थान: जेल, झुग्गियाँ या बंद कमरों में रहने से संक्रमण का खतरा अधिक होता है। क्षय रोग के प्रमुख लक्षण? TB के लक्षण धीरे-धीरे प्रकट होते हैं। यदि निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो तुरंत TB की जाँच करानी चाहिए। - दो सप्ताह से अधिक समय से लगातार खाँसी  - खाँसी के साथ खून आना — यह TB का महत्वपूर्ण संकेत है  - रात में पसीना आना, भले ही मौसम ठंडा हो  - शाम को हल्का बुखार, जो आता-जाता रहे  - बिना किसी प्रयास के तेज़ी से वज़न कम होना  - सीने में दर्द और साँस फूलना - लंबे समय तक थकान और भूख न लगना
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Acidity hone par kya tips ko use kre?
१) Acidity से राहत पाने के आसान असरदार टिप्स क्या है? - आज कल के जीवनशैली में, अनियमित खानपान , तनाव से भी acidity पेट में जलन की समस्या आम हो गई है।  - कई लोग मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, पर बार-बार acidity होना भी शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।  - पेट में जलन, खट्टी डकारें का आना, सीने में जलन जैसे लक्षण रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकते हैं। - कुछ घरेलू उपायों से भी acidity को नियंत्रित किया जा सकता है। २) Acidity क्या होती है? - जब पेट में बनने वाला एसिड जरूरत से ज्यादा बन ने लगता है,तो भोजन नली की ओर आने लगता है, तब acidity की समस्या होती है। - यह ज्यादा मसालेदार खाना, लंबे समय तक खाली पेट रहना, चाय-कॉफी पीना, तनाव मुख्य कारण हैं।  ३) Acidity के सामान्य लक्षण क्या है? - सीने में जलन - खट्टी डकारें आना - पेट फूलना - गले में जलन महसूस होना  - खाने के बाद भारीपन - मिचली या उल्टी जैसा महसूस होना ४) Acidity से बचने के असरदार टिप्स क्या है? # 1. अपने नियमित समय पर भोजन करें - खाली पेट रहने से पेट में acid ज्यादा बनने लगता है। समय पर खाना खाना जरूरी है। - सुबह का नाश्ता न छोड़ें।  # 2. मसालेदार तथा तला-भुना खाना कम करें - ज्यादा तेल, मिर्च मसालों वाला खाना acidity को बढ़ा सकता है।  - फास्ट फूड, चिप्स, पिज्जा , ज्यादा तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।  # 3. ज्यादा चाय और कॉफी से दूर रहना चाहिए  # 4. खूब पानी को पिएं  - डेली कम से कम ४ लीटर जितना पानी पीना digestion को बेहतर बनाता है. acidity कम करने में मदद करता है। # 5. भोजन को धीरे-धीरे से चबाकर खाएं  - जल्दी जल्दी खाने से भी भोजन नहीं पच पाता। आराम से बैठकर ही खाना खाएं। # 6. तनाव को कण्ट्रोल में रखे  - तनाव बड़ा कारण बन सकता है। योग करने से भी तनाव को कम करने में मदद करते हैं। # 7. धूम्रपान , शराब से पूरी तरह से दूरी बनाये रखे.  ५) Acidity के लिए घरेलू उपाय? #ठंडा दूध  - बिना शक्कर वाला ठंडा दूध पिने से भी पेट की जलन को शांत करने में मदद करता है। #सौंफ - खाने के बाद भी सौंफ को चबाने से digestion बेहतर होता है.  # तुलसी के पता - तुलसी क पत्ते को चबाने से भी पेट को ठंडक मिलती है।
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piliya hone par kya tips ko follow karna chahiye
१) पीलिया होने पर अपनाने के लिए क्या - क्या जरूरी टिप्स है? - पीलिया सामान्य पर गंभीर बीमारी है, जो के शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाने के कारण से होती है। - इस बीमारी में त्वचा, आंखों , नाखूनों का रंग भी पीला दिखाई देने लगता है।  - पीलिया लीवर के कमजोरी या संक्रमण के कारण से होता है। गलत तरह का खानपान, दूषित पानी, शराब का सेवन , वायरल संक्रमण प्रमुख कारण माने जाते हैं।  - यदि समय पर सही देखभाल और उपचार किया जाए, तो पीलिया से जल्दी राहत मिल सकती है।  #1. सही से आराम करें - पीलिया होने से शरीर कमजोर हो जाता है, व्यक्ति जल्दी थकान जैसा महसूस करता है। मरीज को आराम करना चाहिए। - ज्यादा मेहनत, तनाव और देर रात तक जागने से बचना चाहिए।   #2. हल्का पौष्टिक भोजन को लें  - पीलिया के समय खानपान का ध्यान रखना जरूरी है। तला-भुना, मसालेदार और भारी भोजन लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है। #3. ज्यादातर पानी को पिएं  - पीलिया के दर्दी को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं, लीवर काम करने में आसानी होती है। - दिन में कम से कम 8 गिलास पानी पीना चाहिए।  #4. शराब और धूम्रपान से दूर रहें#5. डॉ. की सलाह को लें  - पीलिया में डॉ. की सलाह लेना जरूरी है। डॉ. मरीज की स्थिति को देखकर सही दवा ,जांच को बताते हैं। - डॉ के बिना कोई दवा को लेना नुकसानदायक हो सकता है। #6. साफ़-सफाई का विशेष ध्यान देना चाहिए  # 7. ताजा फल - फलों में विटामिन ,मिनरल भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।  #8 . नियमित जांच करते रहना  - पीलिया में ब्लड टेस्ट , लीवर फंक्शन का टेस्ट से बीमारी गंभीरता का पता चलता है।
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nimoniya kya hota hai? or normal kya laksan hote hai?
निमोनिया से बचाव तथा देखभाल के महत्वपूर्ण सुझाव? 1. निमोनिया क्या होता है? निमोनिया फेफड़ों में होने वाला एक गंभीर संक्रमण है। इस बीमारी में फेफड़ों की वायु थैलियों में सूजन आ जाती है और उनमें पानी या बलगम जमा हो सकता है। इसके कारण सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है और शरीर कमजोर पड़ने लगता है। 2. निमोनिया के सामान्य लक्षण? निमोनिया होने पर शरीर में कई प्रकार के संकेत दिखाई दे सकते हैं, जैसे —  - लगातार या तेज बुखार आना - खांसी के साथ बलगम निकलना - सीने में दर्द या भारीपन महसूस होना - ठंड लगना और शरीर कांपना - कमजोरी और थकान महसूस होना 3. डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयाँ समय पर लें  डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयों का पूरा कोर्स लें। बिना सलाह के दवा बंद करना संक्रमण को फिर से बढ़ा सकता है।  4. पर्याप्त आराम करें निमोनिया के दौरान शरीर को जल्दी ठीक होने के लिए आराम की जरूरत होती है। ज्यादा मेहनत वाले काम करने से बचें और पूरी नींद लें।  5. ज्यादा तरल पदार्थ पिएँ  शरीर में पानी की कमी न होने दें। तरल पदार्थ बलगम को पतला करने में मदद करते हैं और शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। फायदेमंद पेय पदार्थ:  - गर्म सूप, नारियल पानी, गुनगुना पानी 6. भाप लेने से राहत मिल सकती है  गर्म पानी की भाप लेने से बंद छाती खुलने में मदद मिलती है और सांस लेने में आराम महसूस हो सकता है।  7. धूम्रपान से दूरी बनाए रखें  सिगरेट या किसी भी प्रकार के धुएँ से दूर रहें। धूम्रपान फेफड़ों को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है तथा बीमारी को गंभीर बना सकता है।  8. साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें  संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी है। - हाथों को साबुन से बार-बार धोएँ - आसपास का वातावरण साफ रखें  9. कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?  यदि निम्न समस्याएँ दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें — - सांस लेने में अत्यधिक परेशानी  - बहुत तेज बुखार  - होंठ या चेहरा नीला पड़ना - लगातार कमजोरी बढ़ना - सीने में तेज दर्द होना   10. निमोनिया से बचाव के आसान उपाय  - पौष्टिक और संतुलित भोजन करें - नियमित व्यायाम करें- पर्याप्त नींद लें  - साफ और स्वच्छ वातावरण में रहें - शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखें  - मौसम बदलने पर विशेष सावधानी बरतें
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hepatitis c se bachav ke liye kya tips hai?
१) हेपेटाइटिस - C से बचाव तथा देखभाल के लिए जरूरी टिप्स? - यह एक वायरल संक्रमण है जो, के मुख्य रूप से लीवर को असर करता है। यह बीमारी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में हो सकती है, कई लोगों को इसके बारे में देर से पता लगता है। - यदि समय पर सही इलाज नहीं किया जाए तो लीवर सिरोसिस, लीवर फेलियर जैसी गंभीर समस्या का कारण बन सकती है। - हेपेटाइटिस C का इलाज संभव है। पर नीचे कुछ टिप्स दिए गए हैं, जो के मरीजों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।  #1. जांच करवाएं  - किसी व्यक्ति ने कभी संक्रमित खून को लिया हो, असुरक्षित इंजेक्शन उपयोग किया हो, तो उसे जांच जरूर करवानी चाहिए। # 2. डॉ. की सलाह - हेपेटाइटिस C के लिए एंटीवायरल दवाएं भी हैं, जो के कुछ महीनों में वायरस को खत्म कर सकती हैं।  #3. शराब को छोड़ दे  - शराब पीने से भी लीवर तेजी से खराब हो सकता है। मरीजों को शराब से पूरी तरह बचना चाहिए।  #4. संतुलित भोजन को अपनाएं - लीवर को अच्छा रखने के लिए आहार जरूरी है। जो के भोजन में हरी सब्जि, ताजा फल, प्रोटीन शामिल करें।  #5. वजन को नियंत्रित में रखें  - ज्यादा वजन भी लीवर पर असर डालता है, फैटी लिवर समस्या बढ़ा सकता है। योग और नियमित वॉक करने से भी शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।  #6. दूसरों के संक्रमण से बचाएं - हेपेटाइटिस-C संक्रमित खून के संपर्क में आने से फैलता है। रेजर, टूथब्रश, नेल कटर जैसी चीजें किसी के साथ में भी साझा नहीं करनी चाहिए। #7. मानसिक स्वास्थ्य के लिए ध्यान  - तनाव, चिंता का कारण भी बन सकती है। परिवार के सहयोग से मरीज के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।  #8. टीकाकरण करना - हेपेटाइटिस C वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, पर Hepatitis A और Hepatitis B के टीके लगवाना जरुरी है, जो के संक्रमणों से बचाने में मदद मिलती है।
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heart ki bimari se bachne ke liye kya kya tips hai?
१) दिल की बीमारी से बचाव और स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी टिप्स क्या है? - आज के तेज़ रफ्तार जीवन में दिल के बीमारी यानी हार्ट डिजीज गंभीर समस्या बन चुकी है। - गलत तरह का खान-पान, ख़राब तनाव, नींद की कमी, धूम्रपान की कमी इसके मुख्य कारण हैं।  - यह अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।  २) दिल के बीमारी क्या है?  - जब हृदय सही से काम नहीं करता है,या उसकी रक्त वाहिकाओं में रुकावट आने लग जाती है,, तो उसे हार्ट डिजीज कहा जाता है। - हार्ट फेल्योर जैसी समस्याएं शामिल हैं।  १) स्वस्थ आहार को लेना सही है  -अपने खाने में हरी सब्जि, ताजा फल, साबुत अनाज, दालें को शामिल करें। - तली-भुनी चीजें, नमक और चीनी वाले खाद्य पदार्थ को कम खाएं। - कोल्ड ड्रिंक का सेवन से भी दिल के बीमारियों बढ़ सकता है।  २ ) डेली व्यायाम करना  - हर दिन 30 मिनट तक व्यायाम करना भी जरुरी है, सुबह तेज चलना, दौड़ना जैसे व्यायाम दिल को मजबूत बनाते हैं।   ३ ) तनाव को कम करें  - मानसिक तनाव भी हार्ट डिजीज का कारण बन गया है। चिंता और तनाव से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जिस से दिल पर बुरा असर पड़ता है।  - अपने परिवार तथा दोस्तों के साथ समय बिताएं।  ४) धूम्रपान तथा शराब से दूर रहना चाहिए।  - सिगरेट तथा तंबाकू का सेवन करने से भी दिल के रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।  - धूम्रपान और शराब की आदत छोड़ना बेहद जरूरी है। ५) वजन को नियंत्रित रखे  - ज्यादा वजन अतिरिक्त दबाव डालता है। इस से हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ६) डेली हेल्थ का जांच करवाएं - ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच नियमित रूप से कराएं।
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skin allergy ke liye kya kya tips hai?
१) त्वचा एलर्जी के लिए उपयोगी टिप्स क्या है? - त्वचा की एलर्जी नार्मल प्रॉब्लम है, जो के किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है। - त्वचा पर लालिमा, खुजली, सूजन या तो, सूखापन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। - एलर्जी होने का कारण अलग-अलग होता है, जैसे की, कोई को धूल, प्रदूषण, कॉस्मेटिक से, दवा, या तो,मौसम परिवर्तन।  - सही समय पर ध्यान नहीं दिया जाए तो समस्या बढ़ सकती है। २) त्वचा की एलर्जी क्या होती है? - शरीर किसी भी चीज़ को हानिकारक समझ कर रिएक्शन देता है, जब एलर्जी होती है। -त्वचा पर खुजली या लाल दाने हो जाते हैं। कुछ लोगों को मौसम के बदलने से भी एलर्जी होती है, जब की कुछ को खाद्य पदार्थों से समस्या होती है।  #त्वचा एलर्जी के लक्षण#  - त्वचा पर लाल दाने का होना  -ज्यादा खुजली का आना  - जलन जैसा लगना ३) स्किन एलर्जी से बचने के लिए क्या टिप्स? #1. त्वचा को क्लीन रखें  - डेली पानी से अपने त्वचा को साफ करें। कोई भी रसायन वाले उत्पादों से बचें।  # 2. मॉइश्चराइजर का उपयोग  - ड्राई स्किन से एलर्जी से ट्रिगर होती है। खुशबू वाले मॉइस्चराइजर लगाना सही होता है। खुजली भी कम करता है। # 3. एलर्जी को कैसे पहचाने- धूल , प्रदूषण से एलर्जी - पालतू जानवर के बाल से होने वाले एलर्जी  - इत्र से एलर्जी  #4. सूती कपड़े को पहना - सूती कपड़े स्किन के लिए अच्छे होते हैं। टाइट कपड़ों से पसीना बढ़ता है, और जलन हो सकती है।  #5. हेल्दी डाइट लेना - विटामिन - C , विटामिन - E वाली डाइट से त्वचा में सुधार होता है। ताजा फल, तजा सब्जि तथा पानी फ़ायदेमंद होता है।  #6. 8 गिलास जितना डेली पानी को पीना सही होता है। #7. तनाव को कम करने के लिए योग, मददगार होता है। ४) घरेलु उपाय # एलोवेरा जेल :: इसमें ठंडक देने वाले गुण होते हैं, जो के खुजली को दूर करने में मदद करते हैं।  # नारियल का तेल :: त्वचा को मॉइस्चराइज़ करता है.रूखापन कम करता है।  #ठंडा सेक :: आइस पैक को कपड़े में लपेट कर असर वाले क्षेत्र पर लगाने से खुजली में राहत मिलती है।
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Depression se nikalne ke liye tips
१) डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए क्या टिप्स है? - आज के तेज़ भागदौड़ ज़िंदगी में मानसिक तनाव भी एक नार्मल समस्या है।  - कुछ लोग को काम का दबाव होने से, कुछ तो,रिश्तों के परेशानियाँ, कुछ आर्थिक तनाव के कारण से भी मानसिक रूप से कमजोर महसूस करने लगते हैं।  - यह उदासी अगर ज्यादा लंबे समय तक बनी है, व्यक्ति की सोच, व्यवहार तथा डेली के ज़िंदगी को असर करने लगती है, इसे डिप्रेशन कहा जाता है। - सही आदतों तथा सकारात्मक प्रयासों से भी डिप्रेशन को कम किया जा सकता है।  # 1. भावनाओं को दबाना नहीं चाहिए  - कुछ लोग परेशानियों को एक-दूसरों से छिपाते हैं। तथा वे सोचते हैं कि, अपनी कमजोरी दिखाना गलत है, पर ऐसा करना भी मानसिक दबाव को बढ़ा देता है।  -अपनी भावनाओं को व्यक्ति के साथ साझा करें। जिस से अकेलापन कम महसूस होता है।  # 2. एक नियमित दिनचर्या को बनाएँ। - डिप्रेशन के समय व्यक्ति आलसी महसूस करता है, तथा किसी भी काम में मन नहीं लगता।  - अपने नियमित दिनचर्या को बनाना सही होता है।  # 3. योग करें  - डेली 30 मिनट सुबह टहलना, योग करना शरीर में ऐसे हार्मोन बनते हैं, जो के मूड को बेहतर बनाते हैं।  - योग करने से तनाव कम करते हैं।  # 4. सही तरह के नींद लें - कम या तो, खराब नींद लेने से भी डिप्रेशन हो सकता है। हर दिन 8 घंटे अच्छी नींद लेना ज़रूरी है। # 5. खुद को अकेला नहीं रखना चाहिए - डिप्रेशन के समय लोग एक दूसरे से मिलना बंद कर देते हैं। पर नकारात्मक विचारों को बढ़ाता है।  - ज्यादातर परिवार ,दोस्तों के साथ में ही समय बिताएँ। # 6. नकारात्मक सोच से दूरी  - व्यक्ति खुद को कभी -कभी बेकार समझने लगता है। जिस से मानसिक स्थिति खराब करती है। - हर इंसान के ज़िंदगी में एक कठिन समय आता है। जिस से वो गलतियों पर सोचने के बजाय उनसे सीखने की कोशिश करें।  # 7. सोशल मीडिया का कम उपयोग - लोग ज्यादा सोशल मीडिया पर समय बिता रहे है,तथा खुद की तुलना करने लगते हैं। इसलिए सोशल मीडिया का कम मात्रा में उपयोग करें  # 8 . लोगो से मदद ले.  - कभी -कभी लोगो के मन में आत्महत्या जैसे विचार आने लगें, तो तुरंत मनोवैज्ञानिक डॉ से संपर्क करें।
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Anemia ke liye kya tips ko follow kare
१) एनीमिया के लिए क्या टिप्स है? - एनीमिया ऐसी स्थिति है, जिस में शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं या तो,हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है।  - हीमोग्लोबिन यह शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के काम को करता है। जब हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है, तब शरीर में कमजोरी तथा थकान जैसी समस्या हो सकती है। - भारत में महिलाओं, बच्चों में एनीमिया होने के प्रॉब्लम नार्मल है। सही तरह का खानपान जीवनशैली को अपनाकर के नियंत्रित कर सकते है। २) एनीमिया होने के क्या लक्षण दिखाई देते है? - शरीर में हमेशा ही थकान जैसा महसूस होना - चक्कर का आना  - त्वचा का रंग पीला पड़ जाना  - सिर में तेज दर्द  - दिल के धड़कन का तेज होना ३) एनीमिया के प्रमुख क्या कारण है? - एनीमिया कितने ही कारणों से हो सकता है। शरीर में आयरन के कमी है। विटामिन B12 तथा अत्यधिक रक्तस्राव, खराब तरह का खानपान, कुछ बीमारियां भी कारण बन सकती हैं। #एनीमिया से बचाव तथा सुधार के लिए टिप्स? # 1. आयरन से मिलने वाले भोजन को खाएं - आयरन हीमोग्लोबिन बनाने में ज्यादा मदद करता है। भोजन में आयरन से भरपूर चीजें को खाये।  - पालक तथा मेथी , हरी पत्तेदार सब्जि, चुकंदर  - गुड़ ,चना  - अनार - दालें तथा राजमाइन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से भी शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है।  #2. विटामिन C  - भोजन करने के साथ में विटामिन C का सेवन करना भी जरुरी है. - संतरा , नींबू , आंवला, अमरूद -नींबू पानी को भी पीना फायदेमंद होता है.  # 3. चाय ,कॉफी को कम पिएं।  # 4. संतुलित आहार को अपनाएं  - आयरन ही नहीं, पर विटामिन B12 , प्रोटीन का सेवन भी जरूरी हैं। ताजे फल का सेवन भी अच्छा है.  # 5. डॉ. के सलाह से ही सप्लीमेंट को लें - डॉ के बिना कोई भी दवा को नहीं ले. # 6. समय पर जांच - गर्भवती महिला को समय हीमोग्लोबिन की जांच करना चाहिए। जिस से एनीमिया की पहचान की जा सकती है. #7. पानी का ज्यादा सेवन करे  - पानी हमारे शरीर में सही पोषक तत्वों का संचार करने में मदद करता है. #8. व्यायाम  - डेली व्यायाम तथा सही नींद लेने से भी शरीर की ऊर्जा बढ़ाने में मदद करते हैं।
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Thyroid ke liye kya tips ko follow karna chahiye?
१) थायरॉइड के लिए क्या टिप्स है? - थायरॉइड छोटी सी तितलीआकार के ग्रंथि होती है, जो के हमारी गर्दन के सामने वाले भाग में स्थित होती है।  - यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा लेवल, वजन, हार्मोन का संतुलन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को कण्ट्रोल करती है।  - आजकल के समय में गलत तरह का खानपान, तनाव तथा खराब जीवनशैली के कारण भी थायरॉइड बढ़ रही है।  - महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है।  #संतुलित आहार को लें. - थायरॉइड को कण्ट्रोल रखने के लिए संतुलित आहार को लेना जरूरी है। - भोजन में आयोडीन, जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्व शामिल करें।  - हरी सब्जि, ताजा फल, साबुत अनाज शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं।  # डेली व्यायाम करना  - थायरॉइड के दर्दी के लिए डेली व्यायाम करना अच्छा होता है। डेली कम से कम 30 मिनट तक कसरत करें।  # तनाव को कम करें  - ज्यादा तनाव से भी थायरॉइड के समस्या को बढ़ा सकता है। मानसिक तनाव लेने से भी शरीर में कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।  # अपने नियमित समय पर ही दवा को लें. - यदि डॉ. ने थायरॉइड के दवा को दिया है, तो उसे डेली सही समय पर लेना जरूरी है।  - दवा लेने के बाद में 30 मिनट तक कुछ भी नहीं खाना चाहिए।   # वजन को कंट्रोल में रखें - थायरॉइड के समस्या में वजन का बढ़ना या तो, घटना नार्मल है। वजन पर ध्यान देना जरूरी है।  - दिनभर उचित मात्रा में पानी को पिएं तथा फाइबर युक्त भोजन को लें। #समय पर जांच करवाएं  - थायरॉइड के समस्या को कण्ट्रोल में रखने के लिए समय पर ब्लड टेस्ट जरूरी है। T3, T4 टेस्ट के माध्यम से थायरॉइड का पता लगाया जाता है।
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Arthritis hone par kya tips ko follow karna chahiye?
१) गठिया (Arthritis) के लिए क्या - क्या टिप्स है? - गठिया ऐसी बीमारी है, जिस में जोड़ों में दर्द तथा सूजन , अकड़न जैसा महसूस होती है। यह समस्या उम्र के बढ़ने के साथ में ज्यादा देखने को मिलती है, पर आजकल गलत तरह के जीवनशैली, मोटापा तथा शारीरिक गति-विधियों के कमी के कारण से युवा वर्ग भी इसके चपेट में आ रहे हैं।  - Arthritis कई तरह का होता है, जिन में सही देखभाल कुछ आसान उपाय को अपनाकर के समस्या को कण्ट्रोल में किया जा सकता है।   # 1. डेली व्यायाम करना  - गठिया रोग में लोग सोचते हैं कि, ज्यादा चलने-फिरने से दर्द बढ़ सकता , पर व्यायाम करने से भी जोड़ों को मजबूत बनाता है।  - डेली 30 मिनट तक योग तथा स्ट्रेचिंग करने से भी जोड़ों की अकड़न कम होती है। # 2. वजन को कण्ट्रोल में रखें - ज्यादा वजन होने से भी घुटनों तथा कमर के जोड़ों पर भी दबाव पड़ सकता है, जिस से दर्द होता है.  # 3. संतुलित आहार को लेना सही है - Arthritis के दर्दी को सही पोषक तत्वों से भरपूर सेवन करने से हरी सब्जियां तथा ताजा फल, ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले खाद्य पदार्थ शामिल करें।  #4. गर्म तथा ठंडी सिकाई का करें दर्द तथा सूजन को कम करने के लिए ठंडी सिकाई असरदार है। - गर्म पानी की थैली जोड़ों के अकड़न को कम करता है, जबकि बर्फ के सिकाई करने से सूजन कम करने में मदद करती है।  #5. उचित आराम लें. - लगातार काम करने से भी जोड़ों पर दबाव बढ़ता है। सही मात्रा में नींद लेने से भी शरीर की रिकवरी होती है और दर्द में राहत मिलती है।  # 6. सही बैठने तथा उठने के आदत को अपनाएं - गलत तरीके से भारी सामान को उठाना भी जोड़ों के समस्या को बढ़ा सकता है।सही मुद्रा में बैठें तथा भारी चीजें को उठाने से बचें।  #7. धूम्रपान तथा शराब से पुरे तरह दूर रहना चाहिए  # 8. डॉ. सलाह जरूर लें  - जोड़ों में दर्द का रहना , सूजन में परेशानी हो रही हो तो डॉ. से जांच करवाना भी जरूरी है। - समय पर इलाज करने से बीमारी को रोका जा सकता है।  # 9. योग का सहारा कभी - कभी आयुर्वेदिक तेलों से मालिश भी दर्द कम करने में मदद मिलती है।
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Anemia ke liye kya tips hai?
१) एनीमिया के लिए उपयोगी टिप्स क्या है? एनीमिया ऐसी स्थिति है, जिस में शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं या तो, हीमोग्लोबिन मात्रा भी कम हो जाती है। - हीमोग्लोबिन शरीर के सब अंगों तक ऑक्सीजन पहुँचाने का कार्य करता है। जब कमी हो जाती है, तो व्यक्ति कमजोरी, थकान, चक्कर का आना जैसी समस्याएँ होने लगती हैं।  - भारत देश में महिलाओं, बच्चों ,बुजुर्गों में एनीमिया सामान्य समस्या है।  २) एनीमिया के सामान्य लक्षण क्या है? - शरीर में हमेशा थकान जैसा लगना - त्वचा का रंग भी पीला पड़ना  - चक्कर आना  - सांस लेने में ज्यादा परेशानी का होना- ध्यान को केंद्रित करने में परेशानी ३) एनीमिया के लिए क्या डाइट लेना सही है? - हरी पत्तेदार सब्जियाँ जैसे की, पालक, मेथी। जिसमे ज्यादा आयरन होता है. - गुड़ ,चना  - अनार तथा चुकंदर  - दाल तथा सोयाबीन  #विटामिन C का सेवन ज्यादा करना चाहिए।  - शरीर में विटामिन C बहुत जरुरी होता है। जैसे की, - संतरा , नींबू, टमाटर, अमरूद।  - शरीर को अधिक लाभ मिलता है।  # चाय तथा कॉफी की मात्रा को कम करें। - अधिक चाय तथा कॉफी पीने से भी शरीर में आयरन को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता है.  - भोजन करने के बाद में कम से कम 2 घंटे बाद ही चाय या तो, कॉफी लें।  # डॉ. की सलाह  - भोजन से ही आयरन की कमी को पूरा नहीं कर सकते है। ऐसे में डॉ. Iron Supplements लेने की सलाह देते हैं। # पानी की मात्रा बढ़ाये  - डेली 8 गिलास पानी पीने के आदत को डालें। शरीर के ऊर्जा बनी रहती है. कमजोरी नहीं महसूस होती है। # महिलाओं को ज्यादा ध्यान देने चाहिए।  - मासिक धर्म तथा गर्भावस्था के कारण से भी एनीमिया का खतरा ज्यादा होता है। - गर्भवती महिलाओं को डॉ. के द्वारा बताए गए आयरन तथा फोलिक एसिड सप्लीमेंट समय पर लेने चाहिए।
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Migraine hone par kya tips ko follow karna chahiye?
१) माइग्रेन के लिए टिप्स?- माइग्रेन काफ़ी परेशानी देने वाली न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिस में आदमी को सिर दर्द के साथ में मतली, उल्टी भी होती है। - यह दर्द नार्मल सिरदर्द से बहुत ही अलग होता है. माइग्रेन को पुरे तरह से ठीक करना मुश्किल है, पर कुछ टिप्स तथा जीवनशैली में परिवर्तन से इसे कण्ट्रोल किया जा सकता है। #1. सही समय पर नींद ले.  - माइग्रेन का बड़ा कारण अनियमित नींद है। एक ही समय पर सोना तथा उठ जाना ज़रूरी है। कम से कम 8 घंटे की नींद लेने की आदत डालें।  #2. तनाव को कण्ट्रोल करें - तनाव को कम करने के लिए योग, गहरी सांस लेने के व्यायाम करे।   #3. संतुलित आहार का सेवन - ताजे फल, ताजा सब्जियां तथा संतुलित आहार को लें। जिस से माइग्रेन को कंट्रोल में मदद करता है।  #4. हाइड्रेशन का ध्यान रखना - पानी के कमी भी माइग्रेन का कारण हो सकता है। जिस से दिन भर में 8 गिलास पानी पीना ही चाहिए।   #5. टीवी (स्क्रीन) टाइम को कम करे  - मोबाइल तथा लैपटॉप का ज्यादा उपयोग होने से भी माइग्रेन का कारण बन गया है। - लगातार फोकस आंखें तथा दिमाग दोनों पर असर डालता है। हर ३० मिनट का ब्रेक लेना जरूरी है।   #6. नियमित व्यायाम - डेली हल्का व्यायाम जैसे की, मॉर्निंग में पैदल चलना, जॉगिंग माइग्रेन को नियंत्रित करने में मदद करता है।  - कसरत करने से खून का संचार बेहतर होता है, तनाव भी कम होता है।  #7. रोशनी तथा शोर से बचाएं  - माइग्रेन के समय तेज़ रोशनी तथा तेज़ शोर से भी सर में दर्द बढ़ जाता है। इसलिए जब भी माइग्रेन महसूस हो, शांत कमरे में आराम करें। #8 . डॉ. की सलाह - माइग्रेन अगर बार-बार हो रहा है तो, डॉ. से सलाह लेना जरूरी है। - डॉ। के अनुसार ही दवा तथा इलाज लेना सही है.  #9 . कैफीन का कम उपयोग  - चाय या तो, कॉफ़ी का कम उपयोग करें।
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KIDNEY STONES KE LIYE KYA UPYOGI TIPS HAI?
१) किडनी स्टोन (पथरी) के लिए उपयोगी टिप्स क्या है? - गुर्दे की पथरी दर्दनाक समस्या है, आजकल बहुत से लोगों में देखने को मिलती है। - यह समस्या तब होती है, जब मूत्र में मौजूद खनिज तथा नमक क्रिस्टल बनाकर जमा हो जाते हैं। पथरी का आकार का कण छोटा यातो, बॉल जितना बड़ा भी हो सकता है।  - कारण में पेशाब में जलन का होना, उल्टी तथा खून भी आ सकता है। सही खान-पान तथा जीवनशैली में परिवर्तन से राहत संभव है।   #1. अधिक मात्रा में पानी पिएं।  - किडनी स्टोन से बचाव करने के लिए सबसे जरूरी चीज है ,पर्याप्त मात्रा में पानी को पीना। - दिनभर में कम से कम ७-८ गिलास पानी तो,जरूर ही पिएं। पानी मूत्र को पतला करता है, तथा खनिज जमा नहीं हो पाते है,तो, पथरी बनने की संभावना कम हो जाती है।  #2. नींबू पानी का सेवन करना। - नींबू में साइट्रेट होते है, जो के पथरी को बनने से रोकने में मदद करता है।  - यह पथरी के खतरे को कम करता है, तथा शरीर को डिटॉक्स भी करता है। #3. नमक का सेवन कम करना  - अधिक नमक खाने से भी शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ती है, जो पथरी बनने का कारण बन सकता है।   #4. ऑक्सलेट खाद्य पदार्थ को कम लें  - पालक, चॉकलेट, चाय तथा कॉफी आदि का सेवन कम मात्रा में करें। #5. कैल्शियम का सेवन करें -सही मात्रा में कैल्शियम को लेना हमारे शरीर के लिए जरूरी है, यह ऑक्सलेट को बांधकर पथरी बनने से रोक सकता है।   6. नियमित कसरत  - शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कसरत करने से किडनी के कार्य बेहतर बनाता है। रोजाना ३० मिनट हल्की एक्सरसाइज करे.  7 . डॉ. की सलाह जरूर लेना चाहिए।- आप को बार-बार पथरी के समस्या आ रही है, तो डॉ. से सलाह लेना जरूरी है। उसी के अनुसार इलाज भी अलग होता है।  8 . हर्बल उपाय  - घरेलू उपाय जैसे की, नारियल पानी , तुलसी का रस, फायदेमंद माने जाते हैं, पर इन्हें अपनाने से पहले डॉ.की सलाह लेना जरुरी है।
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cholesterol ko control karne ke liye kya tips hai?
१) कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल रखने के लिए क्या टिप्स है? - आज के भाग दौड़ जीवन में कोलेस्ट्रॉल का बढ़ जाना आम समस्या है। एक प्रकार का (फैट) है, जो हमारे शरीर के लिए जरूरी है, पर इसकी मात्रा बढ़ जाती है, तो यह हृदय रोग, अन्य गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है। - इस बीमारी को समय रहते कण्ट्रोल करना जरूरी है। # 1. संतुलित आहार को अपनाएं। - कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल रखने के लिए महत्वपूर्ण है, सही तरह का खानपान। - अपने आहार में हरी सब्जि, ताजा फल, साबुत अनाज, फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। - तले-भुने भोजन से दूरी।  # 2. अच्छे फैट का चयन करें। - सभी प्रकार के फैट नुकसानदायक नहीं होते। ट्रांस फैट तथा सैचुरेटेड फैट से बचना चाहिए।   # 3. नियमित कसरत करें।  - डेली कम से कम ३० मिनट तक कसरत करने से कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल में बहुत मददगार होता है। - चलना, दौड़ना, साइकिल को चलाना।  # 4. वजन को कण्ट्रोल में रखें।  - ज्यादा वजन या तो, ज्यादा मोटापा भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का बड़ा कारण है।  - यदि वजन ज्यादा है, तो कम करने की कोशिश करें। #5. धूम्रपान तथा शराब से बचें। # 6. फाइबर तथा ओमेगा-3 का सेवन। - यह फल, सब्जियां,साबुत अनाज में पाया जाता है। - ओमेगा-3 फैटी एसिड दिल के लिए लाभ देते हैं। इसके लिए आप अखरोट तथा मछली का सेवन कर सकते हैं। #7. तनाव को कम करें।- ज्यादा तनाव भी कोलेस्ट्रॉल का कारण हो सकता है। ज्यादा तनाव के कारण से भी लोग अस्वस्थ भोजन तथा गलत आदतों की ओर आकर्षित होते हैं। #8 . अपने स्वास्थ्य की जांच कराएं। - समय पर कोलेस्ट्रॉल की जांच जरूरी है। इस से अपने स्वास्थ्य की स्थिति का पता चलता रहता है.  # 9. उचित नींद लें. - नींद के कमी से भी शरीर के मेटाबॉलिज्म को असर होते है, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का कारण बन सकती है।  - कम से कम 8 घंटे की नींद लेना जरूरी है।
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Typhoid ke liye kya kya tips hai?
१) टाइफॉइड के लिए उपयोगी सुझाव? - टाइफॉइड गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, जो के Salmonella typhi नाम के जीवाणु से होता है।  - यह बीमारी दूषित पानी या तो, ख़राब भोजन से फैलती है।  - भारत में, स्वच्छता के समस्या अभी भी कितने क्षेत्रों में बनी है, टाइफॉइड आम समस्या है। पर सही जानकारी तथा सही समय पर सही इलाज से नियंत्रित किया जा सकता है। २) टाइफॉइड के क्या लक्षण होते है?  - टाइफॉइड होने के लक्षण धीरे-धीरे से होते हैं, शुरुआत में सामान्य बुखार आता हैं। लक्षणों में शामिल हैं,जैसे की, - तेज बुखार (103–104°F तक). - सिर में तेज दर्द तथा कमजोरी। - पेट में तेज दर्द का होना। यदि इन लक्षणों को नजरअंदाज किया तो बीमारी गंभीर रूप ले सकती है. ३) टाइफॉइड के क्या कारण होते है? - टाइफॉइड का मुख्य कारण दूषित पानी या तो दूषित भोजन है।  - खुले में रखा हुआ भोजन।  - गंदे हाथों से खाना को बनाना या तो भोजन को खाना।  - अस्वच्छ वातावरण - संक्रमित व्यक्ति से भी बीमारी फैल सकती है।  ४) टाइफॉइड से बचने के लिए क्या उपाय है?  1. स्वच्छ पानी को पिएं - उबला हुआ या तो, फिल्टर किया हुआ पानी को ही पिएं।  2. हाथ धोने की आदत  - भोजन करने से पहले और शौचालय के बाद में साबुन से हाथ धोना जरूरी है।  3. साफ-सुथरा भोजन करें  - घर का ताजा तथा गरम भोजन को ही खाएं।  4. फल तथा सब्जियों को अच्छी तरह से धोए कर के ही उपयोग में ले. 5. टीकाकरण टाइफॉइड से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है।  ५) टाइफॉइड के दौरान क्या देखभाल करें?- बिना देर किए डॉ. से संपर्क करें। - शरीर को सही आराम देना जरूरी है।  - डिहाइड्रेशन से बचने के लिए नारियल पानी, तथा ORS आदि लें।  - हल्का भोजन करें।  - दर्दी के कपड़े, बर्तन को साफ रखें , जिस से संक्रमण दूसरों तक न फैले।
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hepatitis b hone par kya tip ko follow karna chahiye
१) हेपेटाइटिस बी के लिए क्या टिप्स है - हेपेटाइटिस बी गंभीर वायरल का संक्रमण है, जो के लीवर को असर करता है। ये वायरस संक्रमित रक्त, शरीर के तरल पदार्थ या तो, असुरक्षित चिकित्सा पद्धतियों के जरिये से फैलता है। - यदि सही समय पर ध्यान नहीं दिया जाए, तो क्रोनिक संक्रमण पर प्रतिबंध लग सकता है. - लिवर सिरोसिस या तो, कैंसर का कारण बन सकता है। पर सही जानकारी, तथा जीवनशैली में परिवर्तन से इसे कण्ट्रोल किया जा सकता है।  # 1. टीकाकरण जरूरी है. - हेपेटाइटिस बी से बचने का प्रभावी तरीका टीकाकरण है। - वैक्सीन बच्चों से लेकर के बड़ो तक उपलब्ध है। टीकाकरण नहीं किया है, तो तुरंत डॉ. से सलाह लें तथा टीका लगवाएं।  #2. सुरक्षित रक्त - वायरस संक्रमित रक्त के संपर्क में आने से फैलता है। इसलिए कभी भी उपयोग की गई सुई का उपयोग दूसरी बार न करें।  - रक्त डोनेट रक्त बैंकों में से ही करवाएं। छोटी सावधानियां से भी संक्रमण से बचाने में मदद मिलती हैं।  # 3. स्वच्छता को बनाए रखें।  - डेली स्वच्छता के आदतें भी संक्रमण के खतरे को कम करती हैं - अपने टूथब्रश या तो,नेल कटर को किसी के साथ में शेयर न करें।  - कोई भी घाव हो उसे ढक कर रखें। - हाथ को धोना भी सही आदत है.  # 4. हेल्दी डाइट को फॉलो करें।  - किसी को हेपेटाइटिस बी हो चुका है, तो डाइट को फॉलो करना जरुरी है.  - तेल तथा मसालेदार खाना को कम कर दे।  - ताजे फल तथा ताजा सब्जियां को ज्यादा खाएं। - उच्च प्रोटीन आहार से रिकवरी होती है.  # 5. मेडिकल जांच  - अगर हेपेटाइटिस बी से संक्रमित हैं, तो नियमित जांच जरूरी है। डॉ. लिवर फंक्शन टेस्ट , अल्ट्रासाउंड जैसे टेस्ट सुझाव दे सकते हैं।  # 6. दवा को सिर्फ डॉ. की सलाह से ही ले।  # 7. इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। - इम्युनिटी संक्रमण से लड़ने में मदद करती है , जिस के लिए नियमित कसरत करें। - तनाव को कम रखें।  # 8. सुरक्षित यौन  - प्रोटेक्शन का उपयोग करें, मल्टीपल पार्टनर्स से बचकर के ही रहें  # 9. जागरूकता  - ज़रूरी बात है, की, लोगो के जागरूकता।- यह बीमारी प्रबंधनीय है, तथा सही इलाज के साथ में लोग सामान्य जीवन जी रहे हैं।
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fatty liver rog ke liye kya tips hai?
१) फैटी लीवर रोग के लिए क्या टिप्स है? - फैटी लीवर रोग ऐसी स्थिति है, जिस में लीवर कोशिका के अंदर ही ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है।  - ये प्रॉब्लम दो तरह के होते है. १) अल्कोहलिक और २) नॉन-अल्कोहलिक (एनएएफएलडी)। - आज के जीवन में जीवनशैली, अस्वास्थ्य आहार तथा मोटापे के वजह से भी एनएएफएलडी बहुत ही नार्मल हो गया है।  - यदि समय पर ध्यान नहीं दिया जाए, तो लीवर के सूजन, फाइब्रोसिस तथा सिरोसिस बढ़ भी सकता है। जीवनशैली में परिवर्तन से इसे कण्ट्रोल में किया जा सकता है।   # 1. हेल्दी डाइट को फॉलो करें। - फैटी लीवर का बड़ा कारण है, गलत तरह का खाना। - आपको डाइट में प्रोसेस्ड फूड, तलीभुनी चीजें तथा शुगरी ड्रिंक्स को कम करना चाहिए। -ताजे फल, ताजे सब्जियां, साबुत अनाज प्रोटीन में शामिल करें। खासकर के पालक, लौकी लीवर के लिए फायदेमंद होती हैं।  # 2. वजन को कम करने पर ध्यान देना।  - आपका वजन बहुत ही ज्याद हैं, तो ५% अगर वजन कम होने से भी लीवर की चर्बी कम हो सकती है। - संतुलित आहार तथा नियमित व्यायाम करे.   # 3. नियमित कसरत  - डेली कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम करना भी फैटी लीवर के लिए प्रभावी है। -जॉगिंग, साइकिल को चलाना # 4. शीतल पेय से परहेज करें।  - ज्यादा चीनी का सेवन से लीवर में चर्बी बढ़ता है। इसलिए कोल्ड ड्रिंक, बेकरी आइटम का सेवन कम करें।  # 5. पुरे तरह शराब से दूर रहना  - फैटी लीवर से पीड़ित हैं, तो शराब से पूरी तरह दूर रहे। लीवर की कोशिकाओं को नुकसान होता है.  # 6. उचित मात्रा में पानी पिए.  - पानी पिन से भी लिवर डिटॉक्सिफिकेशन के लिए जरुरी है। डेली 3 लीटर पानी पीने की आदत डालें। # 7. चाय ,कॉफ़ी का कम उपयोग करे.  # 8. डायबिटीज तथा कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करें - फैटी लीवर में अक्सर मधुमेह और हाई कोलेस्ट्रॉल होता है। इसलिए ब्लड शुगर तथा लिपिड लेवल को कण्ट्रोल में रखना जरूरी है। # 9. दवा डॉक्टर के सलाह से लें.  - कुछ दवा का सेवन करने से लीवर पर असर होता हैं। डॉ. की सलाह के सप्लीमेंट्स या दवा न लें।  #10. तनाव को कम करें तथा सही मात्रा में नींद लें
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Hypertension hone par kya kya tips ko folloe karna chahiye?
१) उच्च रक्तचाप के लिए उपयोगी सुझाव? - उच्च रक्तचाप, जिसे हाई ब्लड प्रेशर भी कहा जाता है, आज के समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है।  - यह ऐसी स्थिति है, जिस में रक्त के दबाव धमनियों के दीवारों पर अधिक हो जाता है। इसे समय पर नियंत्रित नही किया जाए, तो हृदय रोग, किडनी की समस्या बीमारियों का कारण बन सकता है। - कुछ जीवनशैली में परिवर्तन कर के सही आदतों के जरिये से इसे कण्ट्रोल किया जा सकता है।   #1. संतुलित आहार का उपयोग करें। - उच्च रक्तचाप को कण्ट्रोल करने के लिए जरुरी है सही तरह का खान-पान। - अपने आहार में हरी सब्जि तथा फल, साबुत अनाज,लो-फैट डेयरी उत्पाद शामिल करें। - नमक का सेवन को कम करना जरूरी है,  #2. नियमित कसरत करें। - शारीरिक गतिविधि को रक्तचाप को कण्ट्रोल में रखने में भूमिका निभाती है। - डेली कम से कम ३० मिनट तक योग, या तो, साइकिल चलाना , दौड़ करना फायदेमंद होता है।  3. वजन को नियंत्रित रखें।  - मोटापा उच्च रक्तचाप का प्रमुख कारण है। अगर आपका वजन ज्यादा है, तो धीरे धीरे से कम करने की कोशिश करें। 4. तनाव को कम करें। - मानसिक तनाव को कम करने के लिए मेडिटेशन, प्राणायाम, तथा योग तनाव को कम करने में मदद करते हैं। 5. धूम्रपान तथा शराब से दूरी बनाएँ। - धूम्रपान तथा ज्यादा शराब का सेवन करने से भी रक्तचाप बढ़ाता है. तथा हृदय को नुकसान पहुंचाता है।  6. उचित नींद को लें. - सही तरह के नीद स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। डेली 8 घंटे की नींद लेने से शरीर को आराम मिलता है. 7. डेली जांच कराएँ। - डॉ.की सलाह के अनुसार ही दवा को लेना भी जरूरी है। 8. पोटैशियम वाले खाद्य पदार्थ को लें.  - शरीर में सोडियम के असर को कम करने में मदद करता है, जिस से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।
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