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gas acidity or ulcer ka homeopathic ilaj
**गैस, एसिडिटी और अल्सर का इलाज **परिचय** आज के भागदौड़ ज़िंदगी, में गलत खानपान और तनाव ने पेट से जुड़ी बहुत सी बीमारियों को आम बना दिया है। - इनमें से सबसे ज़्यादा पाई जाने वाली तीन समस्याएँ हैं — **गैस **, **एसिडिटी ** और **अल्सर**। - ये ३ बीमारियाँ आपस में ही जुड़ी होती हैं। अगर समय पर सही इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकती हैं। 1. गैस क्या है? पेट में गैस बनना यह पाचन तंत्र की प्रक्रिया है, पर जब यह ज़्यादा मात्रा में बनने लगे या बाहर नही निकल पाए, तो पेट में दर्द, और सूजन तथा असहजता महसूस होती है। - यह समस्या तब बढ़ती है, जब हम भोजन को पूरी तरह से पचा नहीं पाते और आंतों में गैस जमा हो जाती है। २) पेट में गैस बनने के क्या मुख्य कारण हो सकते है? पेट में गैस बनने के मुख्य कारण निचे अनुसार है - * जल्दी-जल्दी खाना को खाते जाना। * बहुत ही तला-भुना या ज्यादा मसालेदार भोजन को खाना * ज्यादा चाय, और कॉफी का सेवन करना * तनाव और रात में सही से नींद नहीं आना * कब्ज ३) गैस होने के क्या लक्षण होते है? * पेट में भारीपन जैसा लगना * खट्ठी डकार का आना या पेट में दर्द का होना। * भूख भी सही से नहीं लगना। * कभी-कभी सीने में जलन का होना ४) एसिडिटी क्या है? जब पेट में बनने वाला हाइड्रोक्लोरिक एसिड ज़रूरत से भी ज़्यादा बनने लग जाता है, तो, वो ऊपर आता है, उसे **एसिडिटी** कहते हैं। - यह समस्या *(GERD)* का भी रूप ले सकती है। ##एसिडिटी के क्या कारण है? * ज्यादा मसालेदार और ज्यादा बाहर का भोजन करना। * भूखे पेट ज्यादा समय तक रह जाना * अत्यधिक चाय और कॉफी का सेवन करना * ज्यादा देर तक जागना या सही से नींद नहीं आना # एसिडिटी के क्या लक्षण होते है? * सीने में बहुत ही जोर से जलन का होना * छाती में दर्द का होना * डकार या उल्टी का होना ##जीवनशैली में बदलाव करने से परिवर्तन ## * भोजन करने के तुरंत बाद में नही लेटें। * दिन में छोटे - छोटे अंतर में भोजन को लें। ५) अल्सर क्या है? अल्सर का मतलब है, की — पेट, और छोटी आंत में छाला बन जाना। - सबसे आम प्रकार है **पेप्टिक अल्सर**। जब पेट में बहुत ही ज्यादा एसिड बनता है तब यह स्थिति होती है। ## अल्सर का मुख्य कारण क्या होता है ? * ज्यादा लंबे समय से दर्द निवारक दवा का सेवन करना * ज्यादा शराब और धूम्रपान करना * लगातार एसिडिटी का होना * अनियमित खानपान होने से भी # अल्सर का मुख्य लक्षण क्या है? * सीने में जलन का होना * उल्टी का होना * वजन का कम हो जाना * भूख में कमी होना या नहीं लगना * पेट में छाले का होना #अल्सर से बचाव के लिए क्या करे ? 1. नियमित अपने सही समय पर भोजन करना। 2. जंक फूड, और तली चीज़ें और कार्बोनेटेड ड्रिंक से दुरी बनाये रखना । 3. डेली 30 मिनट तक कसरत करना 4. धूम्रपान और शराब से दूरी रखें। 5. भोजन को चबाकर खाएँ। 6. तनाव को कम करें और ७-८ घंटे की नींद पूरी लें।
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homeopathic me bina operation pancreatitis ka ilaj
१) पैंक्रियाटाइटिस (Pancreatitis) का इलाज और पूरी जानकारी? **परिचय:** अग्नाशय हमारे शरीर के पाचन तंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो की ,पेट के पीछे स्थित होता है। और पाचन एंजाइम तथा इंसुलिन जैसे हार्मोन को बनाता है।पैंक्रियाटाइटिस को अग्नाशय सूजन भी कहते हैं। - जब भी किसी कारण से यह भाग में सूजन हो जाता है. या इसके कोशिका क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो यह खुद ही अपने एंजाइम से पचने लगता है। यही स्थिति *पैंक्रियाटाइटिस* कहलाती है। - यह रोग तीव्र और दीर्घकालिक दोनों के रूप में हो सकता है। २) पैंक्रियाटाइटिस के कितने प्रकार होते है? पैंक्रियाटाइटिस के २ प्रकार होते है- 1. एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस - यह अचानक से शुरू होने वाला रोग है, जो की, कुछ दिनों तक रहता है। अगर सही तरह से इलाज किया जाये तो ,यह सही हो सकता है.  - एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के प्रमुख कारण :: – शराब का बहुत ही अधिक सेवन करना , पित्त की पथरी , वायरल संक्रमण या कुछ दवा का साइड इफेक्ट का होना ।  2. क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस - यह दीर्घकालिक समय तक चलने वाली स्थिति है, जिस में अग्नाशय धीरे-धीरे कार्य करने की क्षमता को खो देता है। - इसका मुख्य कारण है ::- ज्यादा लंबे समय तक शराब को पीना, पारीवारिक कारक, या बार-बार एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का हो जाना । ३) पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के क्या लक्षण दिखाई देते है? पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के लक्षण निचे अनुसार होते है. जैसे की, - * ऊपरी पेट में तेज दर्द का होना। जो की, पीठ तक फैल सकता है.  * उल्टी और मिचली * पेट में सूजन का हो जाना  * भूख नहीं लगना या तो कम लगना * वज़न का अचानक से घट जाना  * पीलिया ४) पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के **मुख्य कारण** क्या होते है? पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के **मुख्य कारण** निचे बताये अनुसार है,  * ज्यादा शराब का सेवन करना।  * पित्त की पथरी * खून में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ जाना  * धूम्रपान का सेवन  * कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव से भी * हाई कैल्शियम का स्तर ##पैंक्रियाटाइटिस का इलाज## - 1. **अस्पताल में शुरुआती इलाज  **भोजन से आराम** कुछ समय के लिए मरीज को खाना नहीं दिया जाता है, ताकि अग्नाशय को आराम मिल सके.  **इंट्रावेनस फ्लूइड (IV Fluids)** शरीर में पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट कमी को पूरा करने के लिए ड्रिप लगाई जाती है। **दर्द निवारक दवाएं**  पेट के दर्द को कण्ट्रोल करने के लिए दर्द को कम करने वाली दवा दी जाती हैं। - 2. **मूल कारण का इलाज * अगर **पित्त की पथरी** का कारण है, तो *गॉलब्लैडर सर्जरी * को किया जाता है. *शराब से पूर्ण परहेज करना अनिवार्य है।  *ट्राइग्लिसराइड्स ज्यादा हो जाने पर दवा दी जाती हैं, ताकि स्तर को कण्ट्रोल में कर सके.  -3. **क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस का उपचार  *एंजाइम सप्लीमेंट्स  - जब अग्नाशय सही तरह से एंजाइम नहीं बना पाता है, तो डॉक्टर कैप्सूल के रूप में देते हैं। जिस से की , भोजन ठीक से पच सके।  *इंसुलिन थेरेपी  - अगर इंसुलिन का उत्पादन प्रभावित हो गया है, तो मधुमेह की तरह इंसुलिन दिया जाता है।  *पोषण संबंधी सपोर्ट  - हाई-प्रोटीन, और लो-फैट डाइट को दिया जाता है। और कभी-कभी विटामिन A, D, E, K खुराक को भी देते है.  *सर्जरी  - यदि नलिका में रुकावट हो तो सर्जरी से ब्लॉकेज को हटाया जाता है। ##घरेलू और जीवनशैली के संबंधी उपाय** ** शराब और धूम्रपान को तो, पूरी तरह से छोड़ें। ** कम चर्बी वाला आहार को लें। ** छोटे अंतराल में और बार-बार भोजन को करें।  **सही मात्रा में पानी को पिएँ। ** ज्यादा मसालेदार, और तला-भुना तथा जंक फूड को नहीं खाएँ। **डॉक्टर के द्वारा दी गई दवा को सही और नियमित रूप से लें।  **तनाव को कम करने के लिए कसरत करें। ५)इसके क्या जटिलताएँ होती है? अगर सही समय पर और सही इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकता है: *अग्नाशय में सिस्ट का होना  * संक्रमण हो जाना  * सांस लेने में भी बहुत ही कठिनाई का होना  * मधुमेह  * पोषणतत्व की कमी
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ibs kya hai or homeopathic me ibs ka ilaj
IBS का होमियोपैथी में सही इलाज ? **परिचय** IBS पाचन के संबंधित विकार है, जिस में व्यक्ति को बार-बार पेट में दर्द का होना , गैस, और कब्ज या दस्त जैसी समस्याएँ होती रहती हैं। - यह बीमारी कोई जानलेवा तो, नहीं है, पर मरीज के व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को बहुत ही ज्यादा असर कर सकती है।  - IBS का मुख्य कारण पाचन तंत्र की संवेदनशीलता और मस्तिष्क के बीच खराब संचार, आंत्र की मांसपेशियों का असामान्य कार्य के बीच असंतुलन को माना जाता है। १) IBS होने के मुख्य क्या लक्षण दिखाई देते है? IBS के लक्षण अलग -अलग व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, पर कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार से है - **बार-बार पेट में तेज दर्द या ऐंठन का होना। **कब्ज और दस्त  **पेट में गैस का बनना या पेट का फूल जाना या भारीपन जैसा महसूस होना  **मल त्याग के बाद राहत जैसा महसूस होना  **थकान और कमजोरी जैसा लगना २) IBS के कितने प्रकार के होते हैं? IBS के तीन तरह के होते हैं.- A. IBS-C :: कब्ज ज़्यादा होता है.  B. IBS-D :: दस्त ज़्यादा होता है.  C. IBS-M :: इसमें कभी दस्त तो कभी कब्ज दोनों ही होता है। ३) IBS होने के क्या मुख्य कारण होते है? IBS के पीछे कई मुख्य कारण हैं: जैसे की, **तनाव और चिंता :: मानसिक तनाव से आंतों की गति और संवेदनशीलता को असर करता है।  **गलत खानपान :: ज्यादा तैलीय, और ज्यादा मसालेदार, इसके अलावा जंक फूड का सेवन करना । **हार्मोनल में बदलाव :: महिलाओं में मासिक धर्म के समय IBS के लक्षण को बढ़ा सकते हैं।  **संक्रमण :: पेट में कोई भी तरह संक्रमण के बाद भी IBS के लक्षण उभर सकते हैं। ## IBS का सही इलाज? IBS का कोई स्थायी इलाज नहीं है , पर जीवनशैली, और खानपान के अलावा कुछ दवा की मदद से पूरी तरह कण्ट्रोल किया जा सकता है। **1.आहार में सुधार** IBS के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भोजन का ही होता है। जिस में - **फाइबर युक्त भोजन लें :: जैसे की - ओट्स, फल, और सब्जियाँ ,साबुत अनाज।  ** ऐसे भोजन से दुरी बनाये रखे की ,जो गैस या जलन को बढ़ाते हैं। (जैसे की - प्याज, लहसुन,गेहूं)।  **डेयरी उत्पाद को कम करें :: अगर लैक्टोज की समस्या है,तो दूध और चीज़ से पूरी तरह दूरी बनाये रखें।  **ज्यादा पानी को पिएँ ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। **अल्कोहल को कम करें।  **2. तनाव पर नियंत्रण** ** डेली कसरत करे। जिस से तनाव को कम करने में मदद मिलती है. ** 7–8 घंटे डेली पर्याप्त नींद ले। ** अपने काम और निजी जीवन में संतुलन को सही तरह से बनाये रखें। **3. घरेलू उपचार**  **त्रिफला चूर्ण :: पाचन को मजबूत बनता है और कब्ज को दूर करता है।  **जीरा, सौंफ और अजवाइन के सेवन से गैस और अपच में फायदेमंद है।  ** रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने के लिए आंवला और गिलोय का उपयोग करे। * * छाछ और हल्का भोजन पेट को राहत देता है। ४) IBS में किन चीज़ों से दुरी बनाये रखे? * बहुत ही मसालेदार भोजन ,या तला-भुना खाना से दुरी। * चाय-कॉफी का सेवन न करे। * धूम्रपान और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।  * ज्यादा तनाव ५)IBS से बचने के लिए क्या उपाय है? - 1.नियमित सही समय पर भोजन करने का फिक्स करे.  - 2. डेली कसरत करना भी अच्छा होता है. - 3. खाने को धीरे-धीरे से और अच्छी तरह से चबाकर खाना चाहिए. - 4. रात के समय में मोबाइल या लैपटॉप से दूरी बनाये रखे. -5. पानी और नींद दोनों को सही तरह से ले.
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H. pylori Infection treatment in homeopathy
१) H. pylori Infection का इलाज?**परिचय:** हेलिकोबैक्टर पाइलोरी एक तरह का बैक्टीरिया है,जो की हमारे पेट के अंदरूनी पर्त यानी की  गैस्ट्रिक म्यूकोसा में रहता है। - विकासशील देशों में यह संक्रमण बहुत आम है, ज्यादातर मामलों में यह संक्रमण बचपन में होता है, और सही समय पर  सही इलाज नही  किया जाए तो यह **पेप्टिक अल्सर , और गैस्ट्राइटिस ** का कारण भी बन सकता है। २) H. pylori संक्रमण होने के क्या कारण हो सकते है ? यह संक्रमण निम्न कारणों से फैलता है: जैसे की, 1. संक्रमित हुए व्यक्ति के लार, उल्टी  के संपर्क के कारण। 2. दूषित भोजन या दूषित पानी पीने से।  3. एक ही बर्तन में खाये हुए भोजन  या टूथब्रश को साझा करने से। 4. अपने आस - पास में साफ़ - सफाई नहीं हो।   ३) H. pylori संक्रमण होने के क्या लक्षण हो सकते है? हर व्यक्ति में लक्षण अलग हो सकते हैं, पर आमतौर पर ये देखने को मिलते हैं: जैसे की, * पेट में जलन या दर्द का होना  * उल्टी या मिचली का आना  * भूख भी नही लगना या तो कम लगना  * खट्टी डकार का आना या पेट में गैस बनना  * वजन घट जाना  या कम हो जाना और  थकान जैसा लगना अगर संक्रमण ज्यादा लंबे समय तक बना रहे तो **गंभीर अल्सर या तो, गैस्ट्रिक ब्लीडिंग** भी हो सकता है। ४)  H. pylori Infection जांच के लिए डॉक्टर  किस तरह के जाँच करते है?  H. pylori संक्रमण का पता करने के लिए डॉ. कुछ खास तरह के जांचें करवाते हैं: जैसे की, 1. **यूरेज ब्रीथ टेस्ट** इसमें दर्दी विशेष तरल को पीता है, और सांस के नमूने से बैक्टीरिया के मौजूदगी का पता चलता है। 2. **स्टूल एंटीजन टेस्ट**   मल के सैंपल से H. pylori की उपस्थिति के जाँच किया जाता है. 3. **ब्लड टेस्ट** शरीर में H. pylori के एंटीबॉडी की जांच होती है, पर पुराना संक्रमण भी दिखा सकता है।  4. **एंडोस्कोपी** अगर गंभीर लक्षणों में पेट के अंदर कैमरे द्वारा जांच कर ऊतक को लिया जाता है।  #इलाज के दौरान ध्यान देने योग्य क्या बातें है? 1. दवाएं को डॉ. के सलाह अनुसार पूरी अवधि तक लें — कभी भी बीच में बंद नही  करें।  2. ज्यादा मसालेदार और तले भोजन से बचें। और सही समय पर भोजन करे।  3. धूम्रपान और शराब से पूरी तरह से परहेज करें, क्योंकि ये पेट की परत को हानि पहुंचाते हैं।  4. इलाज के बाद में भी डॉ दोबारा टेस्ट करवाने को कहते है, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि, अब  बैक्टीरिया पूरी तरह से खत्म हो गया है।  ५) H. pylori Infection के लिए क्या घरेलू उपाय है? दवा के साथ में  कुछ घरेलू उपाय भी संक्रमण को कम करने में मदद कर सकते हैं: जैसे की,  - **ग्रीन टी** सूजन और संक्रमण को कम करती है। - **लहसुन** प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण रखता है।  - **शहद** संक्रमण को घटाने और पेट की परत की मरम्मत में मदद करता है।  - **फाइबर युक्त भोजन** जैसे के  फल, सब्जियाँ, ओट्स, दलिया — पाचन को सुधारते हैं। पर याद रखें, की यह सहायक उपाय हैं — **डॉक्टर के कहने पर ही ले**। ६) H. pylori से **बचाव** के लिए क्या ध्यान देना चाहिए? H. pylori से बचाव के लिए स्वच्छता और खानपान पर खास करके  ध्यान देना जरूरी है: जैसे की, 1. हमेशा से हल्का गर्म  किया हुआ पानी या फिल्टर किया हुआ पानी को पीएँ। 2. दूषित भोजन को न खाएँ।  3. खाना को खाने से पहले और शौच करने के बाद में अपने  हाथ को अच्छे से साबुन से  धोएँ। 4. संक्रमित हुए मरीज के बर्तन, गिलास , टोवेल को साझा न करें। 5. सड़क किनारे लगाए हुए स्टॉल पर से  पैकेट फ़ूड और  बाहर का खाना को कम खाएँ, ।
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acute pancreatitis kyu hota hai or homeoapthy me iska ilaj
**Acute Pancreatitis का इलाज – कारण, लक्षण और उपचार** **परिचय** एक्यूट अग्नाशयशोथ गंभीर पाचन के संबंधी बीमारी है, जिस में **अग्न्याशय** में अचानक से सूज जाता है। यह सूजन हल्की हो सकती है, या तो, गंभीर हो सकती है, , जो की जीवन के लिए खतरा बन सकता है। - पैंक्रियास हमारे शरीर का महत्वपूर्ण भाग है, जो की, **पाचक एंजाइम** और **इंसुलिन** जैसे हार्मोन को बनाता है। - जब भी किसी कारण से पैंक्रियास में सूजन आ जाता है, तो अपने ही एंजाइम से खुद को हानि पहुँचाने लग जाता है। १) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होने के क्या मुख्य कारण है? एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के कारण निचे बताये अनुसार होते है, जैसे की,  1. **पित्त की पथरी** यह तो सबसे आम कारणों में से एक है। जब भी पित्त की पथरी पित्त नलिका को अवरुद्ध करता है, जिस से अग्न्याशय का रस रुक जाता है, और सूजन हो जाती है।  2. **अत्यधिक शराब सेवन** लंबे समय तक और अधिक मात्रा में शराब पीने से पैंक्रियास की कोशिका क्षतिग्रस्त होने लग जाती है, जिस से की, तीव्र सूजन हो सकती है।  3. **ट्राइग्लिसराइड का बढ़ना**  खून में ट्राइग्लिसराइड का लेवल बहुत ही ज्यादा हो जाने पर पैंक्रियास पर दबाव बढ़ जाता है।  4. **दवाओं का असर** कुछ एंटीबायोटिक्स, या डाययूरेटिक दवाएँ भी इस स्थिति को ट्रिगर कर सकती हैं।  5. **पेट की सर्जरी**  अग्न्याशय के आस-पास की चोट या तो,ऑपरेशन भी सूजन का कारण बनते है।  6. **आनुवांशिक कारण:**  पारिवारिक इतिहास होने के कारण से भी इसका जोखिम और भी बढ़ जाता है. २) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होने पर क्या लक्षण दिखाई देते है ? एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के शुरुआत अचानक से होती है, और इसके लक्षण तेजी से बढ़ते हैं। जैसे की,  **ऊपरी पेट में तेज दर्द**, जो की, पीठ तक फ़ैल सकता है। **मतली और उल्टी होना।**  **पेट में कोमलता का हो जाना ** **भूख कम लगना या तो नहीं लगना।** * गंभीर मामलों में **सांस लेने में परेशानी **, और **लो ब्लड प्रेशर** का हो जाना।  - यदि सही समय पर और सही इलाज न हो, तो यह स्थिति **(ऊतक मृत्यु)** तक बढ़ सकती है। ३) डॉक्टर एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का निदान कैसे करते है? डॉक्टर रोग का पता लगाने के लिए कुछ जाँचें करते हैं, जैसे की – 1. **ब्लड टेस्ट**  सीरम एमाइलेज और लाइपेज स्तर के जांच किया जाता है, जो की, इस रोग में काफी बढ़ जाते हैं।  2. **अल्ट्रासाउंड** अग्न्याशय में सूजन की पहचान के लिए किया जाता है।  3. **CT Scan या MRI:**  सूजन की गंभीरता ,अंगों के स्थिति को जानने के लिए सटीक जांच माना जाता है.  4. **ERCP**  पित्त की नली में पथरी है, तो उसे निकालने के लिए प्रक्रिया को किया जाता है. ४) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का घरेलू देखभाल और जीवनशैली पर क्या असर होता है? **घरेलू देखभाल और जीवनशैली सुधार** हॉस्पिटल से छुट्टी लेने के बाद में मरीज को कुछ सावधानी हमेशा रखनी चाहिए: जैसे की, - शराब और धूम्रपान को पुरे तरीके से दुरी बनाए रखना।  - **फैट रहित भोजन** खाएँ — जैसे की : सब्ज़ी, फल, सूप आदि। - धूम्रपान का सेवन बंद करें। - दिन में छोटे-छोटे अंतर में भोजन को कई बार लें।  - सही मात्रा में पानी को पिए **, ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन नही हो। - कसरत को धीरे-धीरे शुरू करें। ५)संभावित जटिलताएँ? यदि सही समय पर और सही इलाज नहीं किया जाए, तो एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकता है –जैसे की,  **ऊतक का नष्ट होना **मधुमेह का विकास**  ** किडनी फेलियर या फेफड़ों की विफलता**
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ibs kya hai or iske kya laksan hote hai
IBS का इलाज : – कारण, लक्षण और सही उपचार **परिचय** IBS सामान्य फिर भी परेशान करने वाली पाचन के समस्या है। इसमें व्यक्ति को बार-बार पेट में दर्द, गैस का बनना ,पेट का फूलना, दस्त या कब्ज जैसी शिकायतें होती हैं। - यह बीमारी जानलेवा नहीं है, पर व्यक्ति की दिनचर्या, और मानसिक स्वास्थ्य खानपान को असर करते है. १) IBS के मुख्य कारण क्या है? IBS का कोई एक निश्चित कारण तो नहीं होता है, पर कई वजह से मिलकर विकसित होता है। कुछ प्रमुख कारण निचे बताये अनुसार हो सकते हैं. 1. आंतों की मांसपेशियों की असामान्य गति जब भी आंतों की मांसपेशियाँ बहुत ही तेज़ या बहुत धीमी गति से सिकुड़ने लगती हैं, तो या दस्त या कब्ज की स्थिति हो सकती है.  2.आंतों की तंत्रिकाओं में गड़बड़ी कुछ लोगों में आंतों की नसें बहुत ही संवेदनशील हो जाती हैं, जिस से भी हल्का गैस का कारण बनता है। 3.मानसिक तनाव और चिंता IBS को “माइंड-गट डिसऑर्डर” भी कहा जाता है, क्योंकि यह तनाव, चिंता इसके लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। 4.संक्रमण या फूड पॉइजनिंग किसी संक्रमण के बाद भी आंतों के कार्यप्रणाली असंतुलित हो सकता है, जिस से IBS के लक्षण शुरू हो जाते हैं। 5. खानपान में असंतुलन बहुत ज्यादा मसालेदार खाना ,तली-भुनी चीजें, या तो, डेयरी प्रोडक्ट, फाइबर की कमी भी IBS को ट्रिगर कर सकती है। २) IBS के सामान्य लक्षण क्या हो सकते है? IBS के लक्षण अलग - अलग व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, पर आमतौर पर इनमें शामिल हैं – जैसे की,  - बार-बार **पेट में तेज दर्द का होना या ऐंठन का होना **  **कब्ज या दस्त **, या तो दोनों का बारी-बारी से होना - पेट में गैस बनना और पेट का फूल जाना  - कभी-कभी **मल में (चिकनाहट)** दिखाई देना ३) IBS का निदान(Diagnosis) क्या है ? IBS का पता करने के लिए कोई विशेष टेस्ट नहीं होता है। डॉ. मरीज के लक्षण, और खानपान , जीवनशैली के आधार पर इसका निदान करते हैं।  - कभी-कभी अन्य गंभीर बीमारियों को बाहर करने के लिए **खून का टेस्ट, एंडोस्कोपी** किया जाता है। **IBS का इलाज (Treatment)** IBS का कोई स्थायी इलाज नहीं है, पर सही **जीवनशैली, आहार और दवाओं** का सेवन करने से लक्षणों को पूरी तरह से कण्ट्रोल किया जा सकता है। A ) **आहार**  * फाइबर युक्त भोजन** को ले. जैसे की, फल, सब्जियाँ, ओट्स और साबुत अनाज।  * मसालेदार भोजन , और तली-भुनी और जंक फूड** से पूरी तरह दूरी रखें।  * चाय या कॉफ़ी , शराब, सोडा** और **डेयरी उत्पाद** के सेवन को कम करें।  * दिन में **थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाना** खाएँ, एक साथ में बहुत भारी भोजन नही लें। B ) **तनाव नियंत्रण**  * *योग** डेली करने से तनाव कम होता है।  * उचित मात्रा में **नींद** लें। C ) **घरेलू उपाय** * सुबह खाली पेट **गुनगुना पानी** को पिएँ।  * रोजाना **व्यायाम** करें। जैसे - सुबह टहलना।  **अजवाइन,और हिंग** गैस और पेट दर्द में बहुत फायदेमंद होता हैं। ** पुदीने की चाय** पिने से पाचन शांत होता है. D) **जीवनशैली में सुधार**  * हर दिन फिक्स टाइम पर ही भोजन को करें।  * भोजन को अच्छे से और धीरे-धीरे से चबाकर खाएँ। * टीवी या मोबाइल को देखते हुए खाना नही खाएँ।  * दिनभर में उचित मात्रा में पानी पिएँ।  * धूम्रपान और शराब को पुरे तरह से बंद कर देना ही सही होता है.
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Homeopathic treatment for urticaria
**अर्टिकेरिया(Urticaria) का इलाज – कारण, लक्षण और उपचार** *परिचय* अर्टिकेरिया जिसे आमतौर पर *हाइव्स* कहा जाता है, यह त्वचा के संबंधी समस्या है. जिस में शरीर पर लाल रंग के दाने, या सूजन और खुजली होती है। - इस तरह के स्थिति कुछ मिनटों से लेकर कई दिनों तक रह सकती है। कई बार अपने आप ही ठीक हो जाती है, पर कुछ मामलों में बार-बार वापस से आती है, जिसे *क्रोनिक अर्टिकेरिया* भी कहा जाता है। - इस तरह के समस्या एलर्जिक प्रतिक्रिया, और तनाव, या तो, दवाओं के कारण भी हो सकता है। १) अर्टिकेरिया के मुख्य कारण क्या होता है? अर्टिकेरिया के मुख्य कारण निचे बताये अनुसार हो सकता है. ,जैसे की, - अर्टिकेरिया *एलर्जिक* के कारण से भी होती है, जिस में शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली हिस्टामिन नामक रसायन को छोड़ती है। इस से त्वचा के छोटी रक्त वाहिकाएँ फैल जाती हैं और सूजन के साथ खुजली आना शुरू हो जाती है। इसके प्रमुख कारण हैं – **खाद्य पदार्थों से एलर्जी ** ::– अंडा, नट्स, दूध, सोया, स्ट्रॉबेरी, और चॉकलेट आदि। **दवाइयों का प्रभाव** ::पेनकिलर, एंटीबायोटिक्स या दर्द निवारक जैसे दवाएँ।  **संक्रमण** :: वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण से भी । **कीट के काटने से** :: मच्छर, या अन्य कीटों के डंक से भी स्किन में प्रतिक्रिया होती है। **तापमान में परिवर्तन** :: ठंडी या गर्म हवा के संपर्क में आने से भी कुछ लोगों में अर्टिकेरिया हो जाता है। **मानसिक तनाव** :: ज्यादा चिंता या मानसिक दबाव से भी ट्रिगर बन सकता है।    २)अर्टिकेरिया के लक्षण किस तरह के हो सकते है?अर्टिकेरिया के लक्षण निचे अनुसार हो सकते है, जैसे की,  - त्वचा पर लाल रंग के छोटे-छोटे दाने या चकते का होना ।  * खुजली और जलन जैसा एहसास।  * असरकारक वाले भाग पर सूजन का आ जाना।  * दाने एक जगह से गायब होकर दूसरे जगह पर आ जाना। ३) डॉक्टर अर्टिकेरिया का निदान कैसे करते है?डॉ. आमतौर त्वचा की जांच और मरीज के लक्षण के आधार पर निदान करते हैं। कुछ मामलों में डॉ. नीचे दिए गए कुछ जाँच करने को कहते है – **एलर्जी टेस्ट ** :: किस पदार्थ से एलर्जी हो रही है। उसका पता करने के लिए.  **ब्लड टेस्ट** :: संक्रमण या इम्यून सिस्टम की स्थिति को जानने के लिए.  **थायरॉइड के जांच** :: कभी-कभी थायरॉइड भी असंतुलन का कारण बनता है। ४) अर्टिकेरिया का घरेलू और प्राकृतिक उपचार?**ठंडी सिकाई ** :: खुजली और सूजन वाले जगह पर बर्फ घिसने से तुरंत ही राहत मिलती है।  **एलोवेरा जेल** :: यह स्किन को ठंडक देता है और सूजन को कम करता है।  **नीम और हल्दी** :: इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी का गुण होता है, जो की, संक्रमण को कम करते हैं। **तुलसी के चाय** :: इसमें एंटीऑक्सीडेंट होने से सूजन को कम करने में सहायक हैं। ५) अर्टिकेरिया से बचाव के लिए क्या उपाय है?*जिन खाद्य पदार्थों के खाने से एलर्जीक है, उन से पूरी तरह से दूर रहे। * कॉटन के कपड़े को पहनें जिस से की त्वचा को सांस लेने की जगह मिले।  * बहुत ही ज्यादा गर्म या तो, ठंडे वातावरण से बचें।  * तनाव से बचें — और डेली कसरत करना अच्छा होता है. * उचित मात्रा में पानी पिएँ, ताकि शरीर से टॉक्सिन बाहर निकल सकें। # डॉक्टर से कब संपर्क करें?यदि अर्टिकेरिया के साथ कुछ इस तरह के लक्षण दिखें तो तुरंत ही डॉक्टर से मिलें।  * साँस लेने में कभी -कभी परेशानी का होना। * गले में सूजन का आ जाना।  * तेज बुखार रहना। * लगातार अर्टिकेरिया का होना
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garbhavastha me gerd kyu hota hai
१) गर्भावस्था में GERD (एसिड रिफ्लक्स) क्यों होता है? **परिचय** गर्भावस्था महिला के जीवन का बहुत ही खूब सूरत समय है. इस दौरान शरीर में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक परिवर्तन होते हैं। इन बदलाव के वजह से कई महिला को एसिडिटी, और सीने में जलन या तो खट्टी डकार जैसी समस्याएँ होती हैं। इन लक्षणों को **GERD** कहा जाता है।  - गर्भावस्था के समय के दौरान GERD सामान्य पर परेशान करने वाली स्थिति है। रिसर्च बताते हैं कि, लगभग 50% से ज्यादा गर्भवती महिलाएँ को किसी न किसी रूप में एसिड रिफ्लक्स का अनुभव करती हैं. २) GERD क्या होता है? GERD तब होता है, जब पेट का एसिड वापस से भोजन नली में ऊपर की ओर चला जाता है। - भोजन नली और पेट के बीच में एक वाल्व जैसी संरचना होते है, जिसे हम **(LES)** भी कहते है। - यह वाल्व एसिड को ऊपर जाने से रोकता है, पर यह ढीला पड़ जाता है तो एसिड ऊपर चढ़ने लग जाता है। यही स्थिति GERD कहलाती है। ३) गर्भावस्था में GERD के मुख्य कारण क्या होते है? **1. हार्मोनल में परिवर्तन** गर्भावस्था में *प्रोजेस्टेरोन* हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन गर्भाशय की मांसपेशियों को ढीला रखता है ,जिस से की बच्चा सुरक्षित रूप से विकसित हो सके।  - यह प्रभाव मात्र गर्भाशय तक ही सीमित नहीं रहता है , बल्कि यह भोजन नली के वाल्व को भी ढीला कर देता है। - जिस के कारण से पेट का एसिड ऊपर की ओर जाता है, और सीने में जलन या तो , खट्टी डकारें आने लग जाती है.  **2. बढ़ता हुआ गर्भाशय और पेट पर दबाव** जैसे-जैसे गर्भावस्था महीने आगे बढ़ती जाती है, वैसे ही (baby) का आकार भी बढ़ता जाता है। जिस से की गर्भाशय फैल कर पेट और डायफ्राम पर दबाव डालता है।  - यह दबाव पेट में रहे हुए अंदर के एसिड को ऊपर की ओर ले जाता है। खास कर के जब भी महिला निचे के और झुकती है, और लेटती है. **3. पाचन की गति धीमी होना** गर्भावस्था के समय में शरीर के पाचन की प्रक्रिया से धीमी हो जाती है, ताकि भोजन से ज्यादा पोषक तत्व शिशु तक पहुँच सकें। - धीमी पाचन की क्रिया के कारण से पेट में भोजन ज्यादा लंबे समय तक रहता है, जिस से की एसिड बनने की संभावना और भी बढ़ जाती है. **4. खान-पान और जीवनशैली की आदतें**  महिलाओं में गलत तरह के खान-पान जैसे की, ज्यादा मसालेदार भोजन , या अधिक तला हुआ भोजन खाने से भी GERD की समस्या होती है। - बार-बार ज्यादा मात्रा में भोजन करने से, या तो खाने के तुरंत बाद में लेटना, और ज्यादा चाय-कॉफी पिने से भी हो सकता है.  ३) गर्भावस्था में GERD के प्रमुख लक्षण क्या होते है? गर्भावस्था में GERD के प्रमुख लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है, जैसे की,  - 1. गले और सीने में जलन का होना - 2. खट्टी डकारें का आना या तो पेट में भारीपन जैसा लगना  - 3 . बार-बार खाँसी का आना और गले में खराश होना इस तरह के लक्षण आम तौर पर खाने के तुरंत बाद में या तो , रात में लेटने पर महसूस होते हैं।  ४) GERD के प्रभाव (माँ और शिशु पर)? - कुछ मामलों में तो, GERD माँ या तो, शिशु के लिए खतरा नहीं बनता, है पर जलन और असुविधा से गर्भवती महिला की नींद पर , भूख पर असर पड़ सकता है।  - अगर लक्षण अधिक बढ़ जाएँ तो और महिला को उल्टी, वजन में भी कमी हो, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरुरी होता है।  ५) गर्भावस्था में GERD से राहत के उपाय क्या है?  **1. खान-पान में परिवर्तन करें** - छोटे-छोटे अंतराल में भोजन करें। - ज्यादा मसालेदार और जंकफूड और चॉकलेट चीज़ों को खाने से बचें।  - भोजन करने के बाद में तुरंत लेटना नहीं है। - ठंडे तरल पदार्थ से सीने में जलन को शांत करने में मदद करते हैं।  **2. सोने की स्थिति सही रखें**  बाईं और करवट ले कर सोना गर्भावस्था में अच्छा माना जाता है, क्योंकि पेट पर दबाव कम होता है। **3. कपड़ों का चयन** - ढीले और आरामदायक वाले कपड़े को पहनें। जिस से की पेट पर दबाव न पड़े। **4. जीवनशैली में सुधार**- खाने के तुरंत बाद में व्यायाम न करें।  - रोज़ाना हल्की वॉक करना ,सही है ,जिस से की पाचन क्रिया ठीक रहे।  #GERD से बचाव के लिए उपयोगी टिप्स? - भोजन को धीरे-धीरे और अच्छी तरह से चबा कर करे।- पानी को अधिक पिएँ, पर भोजन के साथ में नहीं, बल्कि बीच-बीच में। - तनाव से दूर रहें। समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित और उचित कदम है।
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gastric treatment in homeopathy | gas ka ilaj
गैस्ट्रिक क्या है और इसका सही इलाज? *परिचय* भारत में इस तरह की प्रॉब्लम अब बहुत ही ज्यादा देखने को मिलता है। गैस की समस्या ,आज के समय में बहुत ही आम बात हो गयी है। -यह समस्या तब होती है, जब पेट में गैस का ज्यादा उत्पादन होता है. या तो सही तरह से गैस बाहर नहीं निकल पाती है । - यह एक सामान्य प्रॉब्लम है, पर इसका सही इलाज और ध्यान नही दिया जाए, तो यह *एसिडिटी, पेट में तेज दर्द, या अल्सर* जैसी गंभीर बीमारियों हो सकती है.  १ ) गैस्ट्रिक समस्या क्या है? गैस्ट्रिक को हम दूसरे शब्दो में “पेट में गैस बनना” भी कहा जाता है। - जब भोजन सही ढंग से नहीं पचता है, तो उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट और फैट्स आंतों में किण्वित होकर गैस उत्पन्न करते हैं।  - इस गैस से छाती या पेट के ऊपरी भाग में तेज दर्द या सीने में जलन , और भारीपन का कारण बनती है।  २) गैस्ट्रिक की मुख्य वजह क्या है? - 1. **ख़राब तरह का खानपान** : – बहुत ही ज्यादा तला-भुना, और मसालेदार भोजन , या बाहर का खाना बहुत ही ज्यादा मात्रा में खाना या तो,देर से खाना खाना। - 2. **खाने की अनियमित दिनचर्या** :– बहुत ही लंबे समय तक रहना या बार-बार खाना।  - 3. मानसिक तनाव से पाचन को बहुत ही ज्यादा असर होता है। - 4. शरीर में से पानी की कमी का होना।  - 5. ज्यादा कैफीन और शराब का सेवन करने से पेट की अम्लता को बढ़ाता हैं। - 6. **धूम्रपान करने से पेट के म्यूकोसा को नुकसान होता है। ३) गैस्ट्रिक के क्या लक्षण हो सकते है? गैस्ट्रिक के लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है , जैसे की, - पेट में गैस बन जाना और सीने में बहुत ही तेज दर्द का होना  - मुँह में से खट्टी डकारें का आना  - सही तरह से भूख न लगना  * सिर में तेज दर्द और चिड़चिड़ापन लगना यदि इस तरह की स्थिति बार-बार हो, जाये तो *GERD** का संकेत हो सकता है।  ४ ) गैस्ट्रिक होने पर क्या खाएँ और क्या नहीं खाएँ? #क्या खाएँ#  * हल्का और कम मसाले वाला भोजन को खाना * केला, पपीता और सेब बहुत ही लाभदायक है   * दही और छाछका सेवन करना   * उचित मात्रा में पानी को पीना  # क्या न खाएँ# * ज्यादा तले-भुने और मसालेदार वाला भोजन नहीं करना * फास्ट फूड, और कोल्ड ड्रिंक से दुरी बनाये रखना * चाय और कॉफ़ी को कम पीना  * देर रात में खाना को नहीं खाना  # दैनिक आदतें#  * खाना को अच्छे से चबाकर और धीरे-धीरे खाएँ। * भोजन करने के बाद में तुरंत न लेटें।  * डेली कसरत या मॉर्निंग में टहलना ५) गैस्ट्रिक से बचाव के प्रभावी उपाय क्या है? निचे कुछ उपाय को बताया गया है, जैसे की,  - 1. दिन में ३ बार हल्का - हल्का करके भोजन करें, - 2. कम से कम 7 घंटे तक नींद लें। - 3. भोजन करने के बाद में तुरंत नहीं सोना चाहिए। - 4. धूम्रपान और शराब से पूरी तरह से दूरी को बनाएँ  - 5. तनाव को कम करने के लिए मॉर्निंग में योग करें।  - 6. ज्यादा मसालेदार, तैलीय और जंक फूड से परहेज़ करें।
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chronic pancreatitis ka bina operation treatment in homeopathy
१) क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस का सही इलाज? **परिचय:** क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस गंभीर और ज्यादा लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है. जिस में की अग्न्याशय में धीरे-धीरे से सूजन और क्षति हो जाती है। - यह बार-बार होने वाले *एक्यूट पैनक्रियाटाइटिस* या ज्यादा लंबे समय तक शराब का सेवन करने से ,और गलत खानपान, आनुवंशिक कारणों से होती है। - जब अग्न्याशय की कोशिका नष्ट हो जाती हैं, तो पाचन एंजाइम और इंसुलिन का उत्पादन कम हो जाता है, जिस से की **पाचन की प्रॉब्लम और मधुमेह ** हो सकते हैं। २) **क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस के क्या मुख्य लक्षण होते है? क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस के लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है. जैसे की, - 1. **ऊपरी पेट में तेज दर्द का होना ** : — यह दर्द पीठ तक फ़ैल जा सकता है और कुछ दिनों तक रह सकता है।  - 2. **वजन का कम होना** : — पाचन एंजाइम की कमी होने से हमारा शरीर कुछ पोषक तत्वों को सही से नहीं सोख पाता है. - 3 . **मितली या उल्टी और भूख में भी कमी हो जाना।** - 4. **शुगर बढ़ना ** :— जब पैंक्रियाज इंसुलिन सही से नहीं बना पाता है. ३) इलाज के उद्देश्य क्या है? क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस का पूरी तरह से ठीक करना तो संभव नहीं है, पर इलाज से लक्षणों को कण्ट्रोल किया जा सकता है. और उपचार के मुख्य उद्देश्य हैं: जैसे की ,  - दर्द को कम करना इसका मुख्या उद्देश्य है.  - पाचन को सुधारना। - पोषण की कमी को पूरा करने के लिए।  - मधुमेह को कण्ट्रोल करना  - जटिलताओं को रोकना  ##1.दवा से इलाज** a) पेन मैनेजमेंट* हल्के से हो रहे दर्द में **पैरासिटामोल** को दिया जाता हैं।  * ज्यादा लंबे समय तक दर्द होने पर *endoscopic therapy* का उपयोग करते है. b) पाचन एंजाइम सप्लीमेंट  * अग्न्याशय सही तरह से एंजाइम नहीं बना पाता, है ,तो डॉ. **enzyme capsules देते हैं।  * इस दवा को खाने के साथ लेने पर **चर्बी , प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट** के पाचन में सही तरह की मदद करते हैं।  c) इंसुलिन या शुगर कंट्रोल दवाएं*  * अगर दर्दी को मधुमेह बढ़ता जाए, तो **इंसुलिन इंजेक्शन**को देते है.  --- ## 2. खानपान और जीवनशैली में परिवर्तन करने से  - यह तरीका इलाज का सबसे महत्व का भाग है। - शराब और धूम्रपान को तो पूरी तरह से ही बंद करें**, क्योंकि इस से पैंक्रियाज को ज्यादा नुकसान होता है.  - कम चर्बी वाला आहार को ही खाना चाहिए। **, जिस से की पाचन आसान हो।  - छोटे-छोटे अंतर में बार-बार भोजन करें ** - प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट मिलने वाले ही भोजन करे। * (जैसे दालें, चावल, सब्ज़ियाँ) लें। - पानी को ज्यादा पीना चाहिए। ताकि डिहाइड्रेशन न हो। ## 3. घरेलू उपाय और देखभाल - हल्का और पौष्टिक भोजन को ही करें। - गर्म पानी से सेंक करने से * पेट दर्द में बहुत ही राहत देता है। - तनाव से जितना हो सके उतना तो दूर ही रहें। - डॉ. ने जो भी सलाह बताया है, उनका पालन सही तरह से करे।  ##4 .जटिलताएं क्या है? - मधुमेह का बढ़ जाना - वजन में कमी हो जाना।  - पैंक्रियाटिक कैंसर का जोखिम का खतरा होना।  - पित्त की नली में अवरोध।  - पेट में ज्यादा पानी का भर जाना
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Pancreatitis Atrophy treatment in homeopathy
१) Pancreatitis Atrophy का इलाज – कारण, लक्षण और उपचार की पूरी जानकारी? #परिचय **पैंक्रियाटाइटिस एट्रोफी ** का अर्थ होता है की, *अग्न्याशय  का सिकुड़ जाना। - यह प्रकार की स्थिति **क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस** के ज्यादा लंबे समय तक बने रहने के कारण से होता है। - जब बार-बार सूजन होता है, तो पैंक्रियाज के ऊतक धीरे-धीरे से नष्ट हो जाते हैं, और उसका अंग छोटा और कमजोर हो जाता है। - यह तरह की समस्या धीरे-धीरे पाचन को असर करती है ,और शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाने से ,या तो,  वज़न  कम होने जैसी परेशानी  होती है. २) पैंक्रियाटाइटिस एट्रोफी का प्रमुख कारण क्या होता है? पैंक्रियाज  सिकुड़ने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे की,  1.** ज्यादा लंबे समय तक शराब का सेवन** लगातार शराब पीने से पैंक्रियाज में सूजन हो जाती है, जो की बाद में उसे हानि कर सकता है.  2. **क्रॉनिक पैंक्रिएटाइटिस**   – पुराने सूजन के कारण से पैंक्रियाज के टिश्यू फाइब्रोटिक होने से काम करना बंद कर देते हैं।  3. **ऑटोइम्यून पैंक्रिएटाइटिस**   – शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली पैंक्रियाज के कोशिका पर हमला कर देते है।  4. कुछ लोगों में तो, जन्म से ही पैंक्रियाज कमजोर होता है, और सही तरह के  एंजाइम असामान्य बनते हैं।  5. गॉलब्लैडर स्टोन**   – पित्त नली के अवरोध से पैंक्रियाज में दबाव बढ़ने लग जाता है, जिस से की हानि होता है। ३)  Pancreatitis Atrophy के क्या लक्षण हो सकते है? इसके लक्षण धीरे-धीरे से होते हैं. जो की इस तरह से होते है, * ऊपरी पेट में लगातार दर्द का होना *  अपच  जैसा लगना * वज़न का कम  हो जाना  * भूख में भी कमी होना या तो भूख नहीं लगना  * ब्लड शुगर का बढ़ जाना इस तरह के लक्षणों को नज़रअंदाज़ किया गया , तो पैंक्रियाज के  कार्य करने की क्षमता लगभग खत्म हो जाती है।  ४) Pancreatitis Atrophy के लिए डॉक्टर किस तरह की (जांचें) करते है? Pancreatic atrophy का पता करने के लिए डॉ. कुछ जाँच करवाने को कहते हैं, जैसे की,  1. CT Scan या MRI :– पैंक्रियाज के आकार और संरचना को देखने के लिए किया जाता है. 2. **Endoscopic Ultrasound** :– ऊतक के हानि और फाइब्रोसिस का आकलन के लिए । 3. **Pancreatic Function Test** :– एंजाइम और कार्य क्षमता को मापने के लिए।  4. **Blood Test ** : – सूजन और एंजाइम असामान्यता के जांच के लिए।  #उपचार? Pancreatitis Atrophy का इलाज उसके कारण और लक्षण पर निर्भर करता है। जैसे की,  #1. *आहार और जीवनशैली में परिवर्तन* पैंक्रियाटाइटिस एट्रोफी के दर्दी को खाने-पीने में और अपने जीवन शैली पर ध्यान देना चाहिए।  **खाने में क्या खाना चाहिए** -  उबली हुई सब्ज़ियाँ और दलिया का उपयोग करना  *  पचने वाले प्रोटीन * विटामिन- A, D, K वाले खाद्य पदार्थ को खाने से  ** क्या नहीं खाना चाहिए**  -  ज़्यादा तैलीय और ज्यादा मसालेदार तली हुई चीज़ें।  * चाय और कॉफ़ी और कार्बोनेटेड ड्रिंक * शराब और धूम्रपान **किस आदत को सुधारें** * भोजन को छोटे - छोटे हिस्सों में ३-४ बार-बार खाएं  * तनाव से बचें और डेली कसरत करे।  * सही तरह से ७-८ घंटे की नींद को लें.  #2 .*सर्जिकल या एंडोस्कोपिक उपचार*  कई बार डक्ट ब्लॉकेज होने पर सर्जरी की आवश्यकता होती है, जैसे की, *Endoscopic stenting :  – पित्त या पैंक्रियाज डक्ट को खोलने के लिए.  *Partial Pancreatectomy : – खराब भाग को निकालना। *Celiac plexus block * :– दर्द को कम करने के लिए नर्व ब्लॉक
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mesenteric lymph node kab aur kyu badhta hai
1) मेसेंटेरिक लिम्फ नोड्स कब और क्यों बढ़ते हैं? **परिचय:** मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली  में **लिम्फ नोड्स** महत्वपूर्ण भूमिका  अदा करता हैं। छोटी-छोटी ग्रंथियाँ शरीर के अलग -अलग  भाग में मौजूद रहती हैं.और संक्रमण और सूजन से शरीर की रक्षा करती हैं। - जब **आंतों या पेट** में किसी प्रकार का संक्रमण या (सूजन) होता है, तो **मेसेंटरी** — यानी आंतों को पेट की दीवार से जोड़ने वाला भाग — में मौजूद लिम्फ नोड्स सूज जाते हैं। इस स्थिति को **मेसेंटेरिक लिम्फैडेनोपैथी ** कहा जाता है। २) मेसेंटेरिक लिम्फ नोड्स बढ़ने के सामान्य कारण क्या है? #(क)संक्रमण - *वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस* :  बच्चों में इसका होना सबसे आम कारण में से एक है। इसमें दस्त, बुखार और उल्टी के साथ लिम्फ नोड्स का आकार बढ़ सकता है।  - *बैक्टीरियल इंफेक्शन**:  (जैसे साल्मोनेला, यर्सिनिया आदि) भी आंत की अंदर की पर्त में सूजन पैदा करते हैं, जिससे लिम्फ नोड्स फूले हुए दिखाई देते हैं। #(ख)सूजन से संबंधित रोग  *क्रोहन डिज़ीज़** और **अल्सरेटिव कोलाइटिस** जैसी सूजन संबंधी आंतों की बीमारियों में लिम्फ नोड्स का आकार बढ़ सकता है। * **अपेंडिसाइटिस** के दौरान भी अपेंडिक्स के आसपास के मेसेंटेरिक लिम्फ नोड्स प्रभावित हो सकते हैं। (ग) कैंसर संबंधी कारण  * जब शरीर में **कैंसर कोशिकाएँ फैलती हैं**, तो वे लिम्फ नोड्स में जाकर उन्हें बड़ा कर सकती हैं। **लिम्फोमा** या **मेटास्टैटिक कैंसर** की स्थिति में भी इन नोड्स का असामान्य रूप से बढ़ना देखा जाता है। ३)  मेसेंटेरिक लिम्फ नोड्स बढ़ने के क्या लक्षण होते है?  - मेसेंटेरिक लिम्फ नोड्स बढ़ने के दौरान निम्नलिखित लक्षण महसूस हो सकते हैं — जैसे की ,  * नाभि या पेट के मध्य भाग में तेज दर्द का होना **  * उल्टी का  होना  *पेट में सूजन या भारीपन जैसा महसूस होना  * कभी-कभी भूख में कमी भी हो सकती है. ४)मेसेंटेरिक लिम्फ नोड्स की जांचें डॉक्टर कैसे करते है? - डॉक्टर स्थिति का पता करने के लिए कुछ जाँच करवाने की सलाह देते हैं — जैसे की , - अल्ट्रासाउंड ::  बच्चों में  और वयस्कों दोनों में ही लिम्फ नोड्स के आकार और संख्या को देखने के लिए।- CT Scan या MRI ::  इनसे लिम्फ नोड्स की सटीक स्थिति, आकार और आसपास के भाग की स्थिति का पूरा जानकारी मिलता है।  - ब्लड टेस्ट:: संक्रमण, सूजन या किसी इम्यून डिसऑर्डर की पुष्टि के लिए किया जाता है। - बायोप्सी :: अगर डॉक्टर को **टीबी** या **कैंसर** का संदेह हो, तो लिम्फ नोड से टिश्यू सैंपल लेकर माइक्रोस्कोपिक जांच की जाती है। #कब डॉक्टर से संपर्क करें? निम्न स्थितियों में तुरंत ही डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है — जैसे की ,  * पेट में **लगातार  तेज दर्द** रहना या दर्द का बार-बार होना * २ –३ दिनों से भी अधिक दिन में बुखार** बने रहना  *वजन का कम होना * **अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन** में लिम्फ नोड्स का बड़ जाना 
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celiac disease ka homeopathy me ilaaj kya hai
१)सीलिएक डिज़ीज़ का इलाज क्या है? यह ऑटोइम्यून विकार है, जिस में शरीर ग्लूटेन नामक प्रोटीन को पचाने में असमर्थ है। - जब भी कोई मरीज सीलिएक रोग से पीड़ित होते है, तो भी ग्लूटेन वाला भोजन करते है, तो उसके रोग-प्रतिरोधक प्रणाली आंतों के दीवार पर हमला करते है। जिस के कारण से आंतों में सूजन आ जाते है.  - भोजन से मिलने वाला पोषक तत्व को ठीक से अवशोषित भी नहीं कर पाता है। जिस के परिणाम स्वरूप शरीर में पोषण की कमी और एनीमिया, हड्डियों में कमजोरी और अन्य जटिल समस्याएँ भी हो सकती हैं। आज के लेख में समझेंगे कि, सीलिएक डिज़ीज़ का इलाज क्या है, इसका प्रबंधन कैसे किया जाता है. और मरीज़ को क्या सावधानियों का पालन करना चाहिए।  २) सीलिएक डिज़ीज़ का मूल उपचार क्या है? चिकित्सा विज्ञान में **सीलिएक रोग का कोई स्थायी इलाज ** अभी तो उपलब्ध नहीं है। - इस बीमारी को दवा से ठीक नहीं कर सकते है , पर  जीवनशैली और आहार में परिवर्तन करके कर सकते है। सबसे प्रभावी और प्रमुख इलाज है।  #1.**ग्लूटेन-फ्री डाइट** सीलिएक डिज़ीज वाले  मरीज को जीवनभर **ग्लूटेन-मुक्त भोजन** करना होता है। जिसका अर्थ है, कि गेहूँ, और जौ ,राई में से बनने वाले  पदार्थ को पूरी तरह छोड़ देना सही है।  **Avoid Foods** * गेहूँ की रोटी, नान, ब्रेड, केक, बिस्किट आदि को नहीं खाना । * जौ से बने पेय पदार्थ को भी नहीं खाना चाहिए.  * किसी भी तरह का प्रसंस्कृत खाना जिसमें ग्लूटेन मिश्रित हो।  **खाने वाले खाद्य पदार्थ** * मक्का (कॉर्न)  * बाजरा, और  ज्वार  * आलूऔर शकरकंद  * ताजे फल और ताजे सब्ज़ियाँ  * दूध से बनने वाले उत्पाद (यदि लैक्टोज इनटॉलरेंस नही हो तो )   # 2. **पोषण कमी की पूर्ति ** सीलिएक मरीज को अक्सर पोषण की कमी होती है, क्योंकि ज्यादा लंबे समय तक आंतें पोषक तत्वों को सही तहर से अवशोषित नहीं कर पातीं है।  इसलिए डॉ.कुछ निम्नलिखित सप्लीमेंट्स लेने की सलाह भी  देते हैं – जैसे की ,  * आयरन सप्लीमेंट  : – एनीमिया को दूर करने के लिए.  *  हड्डियों के मजबूती के लिए कैल्शियम और विटामिन-D  * विटामिन-B12 और फोलिक एसिड : – थकान और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से बचाव के लिए। * मेटाबॉलिज्म को सुधारने के लिए जिंक और मैग्नीशियम। #3. **दवाइयाँ और अन्य उपचार** * सीलिएक का **कोई इलाज दवा से नहीं होता है.**  * यदि ग्लूटेन-फ्री डाइट देना शुरू करने के बाद भी लक्षण बने हैं, तो डॉ.  सूजन को कम करने के लिए **स्टेरॉयड दवाएँ** देते है। #4. **जीवनशैली और सावधानियाँ** * कोई भी तरह का पैक्ड फूड खरीदते समय हमेशा  **ग्लूटेन-फ्री वाला  लेबल** को देखें।  * ज्यादातर बाहर खाना खाते टाइम में सावधानी रखें, क्योंकि यह तली हुई चीज़ों में छुपा हुआ ग्लूटेनहो सकता है। * अपने परिवार और मित्र को इसके बारे में बताएं, ताकि वे खाने-पीने में ध्यान रख सकें। 5. **दीर्घकालिक प्रबंधन** यह रोग अगर हो जाए तो जीवनभर  ग्लूटेन से परहेज़ करना बहुत ही जरुरी हो जाता है। * अगर मरीज नियमित रूप से डाइट का पालन करे,  तो वह भी सामान्य जीवन जी सकता है। 6. **भविष्य की संभावनाएँ** विज्ञान लगातार सर्च कर रहा है, ताकि सीलिएक रोग का कोई स्थायी इलाज खोज सके। अभी जिन क्षेत्रों पर काम हो रहा है, जैसे की ,–  * वैकल्पिक दवाइयाँ: ** :- ऐसी कोई दवा जो ग्लूटेन को तोड़कर उसे नुकसानदायक बनने से रोक सके । * टीकाकरण (Vaccine):** :- इम्यून सिस्टम को ग्लूटेन को सहन करने योग्य बनाने के प्रयास।  *एंजाइम सप्लीमेंट्स:** जो खाने में होने वाला ग्लूटेन को हानिरहित बना सकें।
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pancreas ke neck me mildly atrophied
१)पैंक्रियाज के Neck में Mildly Atrophied का इलाज? मानव शरीर में पैंक्रियाज बहुत ही  महत्वपूर्ण अंग है, जो की पाचन और रक्त शर्करा को नियंत्रण में भूमिका निभाता है। -  पैंक्रियाज पेट के पीछे होता है, और मुख्य तीन भाग में बाँटा गया है –  **हेड **, **नेक**, और **टेल**। - कभी-कभी इमेजिंग टेस्ट में रिपोर्ट में पता चलता है कि, पैंक्रियाज के नेक वाले भाग में हल्की सिकुड़न देखी गई है। २) पैंक्रियाज में एट्रोफी क्या है? Atrophy का अर्थ है,की  किसी भाग या ऊतक के आकार छोटा हो जाना या तो उसका  कार्य करने की क्षमता में कमी का आ जाना। * जब पैंक्रियाज के किसी भाग में एट्रोफी होता है, तो वहां की कोशिका सिकुड़ जाती हैं।  * यदि यह **(हल्की)** है, तो कोई भी गंभीर लक्षण नहीं देती है, पर समय के साथ समस्या और भी बढ़ सकती है। ३) पैंक्रियाज के Neck में Mild Atrophy के संभावित कारण क्या है? 1. * उम्र बढ़ने के साथ में पैंक्रियास का साइज भी धीरे-धीरे से छोटा हो जाता  है।   * एट्रोफी वृद्ध लोगों में बहुत ही ज्यादा देखने को मिलती  है। 2. क्रॉनिक पैन्क्रियाटाइटिस में लंबे समय तक सूजन हो जाने से ग्रंथी  सिकुड़  सकती है।   * इसमें बहुत ही दर्द, और पाचन की समस्या और मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।  3. * यदि उस भाग में खून का प्रवाह कम होने लग जाए तो ऊतक धीरे-धीरे सिकुड़ने लग जाते है. 4.* पैंक्रियाज की नली में रुकावट आ जाने से उस क्षेत्र पर दबाव पड़ता है और  साथ में एट्रोफी हो सकता है। 5. * कई बार तो पैंक्रियाज की कोशिका सिकुड़ कर उस ही जगह पर में फैट जमा होने लग जाता है। इसे **lipomatosis** भी कहते हैं।  ४) क्या लक्षण है? इसके लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है , जैसे की.  * ऊपरी पेट में तेज दर्द का होना या तो , पीठ में दर्द का होना  * भूख भी कम लगना  * वज़न का घट  जाना  * अपच, और गैस, की प्रॉब्लम का होना * मधुमेह का खतरा हो सकता है।  ५) डॉ. किस तरह की जाँच करते है? अगरआप के रिपोर्ट में *“mildly atrophied pancreas neck”* लिखा है, तो डॉ.  इन टेस्ट्स की सलाह देते हैं: जैसे की,  1.इमेजिंग टेस्ट में तो :– CT Scan, MRI,  या  तो Ultrasound जैसे टेस्ट करवाना।  2. रक्त की जांच : – एमिलेज , लिवर फंक्शन टेस्ट , ब्लड शुगर।  3. **स्टूल टेस्ट से **:  – चर्बी की मात्रा और पाचन एंजाइम  कमी की जाँच करने के लिए।  #क्या जटिलताएँ हो सकते है? अगर एट्रोफी का कारण इलाज के बिना बढ़ता रहा तो. * बार-बार पेट में तेज दर्द का होना  * कुपोषण * मधुमेह का खतरा भी होता है ।  #किस तरह से बचाव  कर  सकते है? * शराब और धूम्रपान से पूरी तरह की दूरी बनाएं।  * हेल्दी डायट को अपनाएं जिस में  की ताजे फल, और सब्जियां, प्रोटीन होता है ।  * डेली कसरत करें। * अगर पेट में बार-बार दर्द होता हो या  तो पाचन समस्या लंबे समय तक हो तो तुरंत डॉ. को दिखाएं।
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homeopathy me ulcerative colitis ka ilaaj
१) क्या अल्सरेटिव कोलाइटिस जानलेवा बीमारी है? भारत में आजकल पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारी तेजी से बढ़ रही हैं। जो की महिला और पुरुष दोनों वर्ग में देखने को मिलता है।  इनमें से **अल्सरेटिव कोलाइटिस **, है, जो की बड़ी आंत और मलाशय  को असर करती है। - यह **दीर्घकालिक सूजन से संबंधी रोग** है, जिसमें की आंत की अंदर की परत पर छाले और सूजन हो जाते हैं। - कुछ लोग इसको साधारण पेट की बीमारी समझ लेते हैं, पर वास्तव में यह गंभीर स्थिति भी बन सकती है। २) अल्सरेटिव कोलाइटिस क्या है में मरीज को क्या लक्षण होते है? इस में रोगी को अक्सर ये लक्षण दिखाई देते हैं. जैसे की ,  * बार-बार दस्त का होना, जिस में  की खून आ सकता है. * पेट में बहुत ही तेज दर्द और ऐंठन का होना  * अचानक से  वजन का कम हो जाना  * थकान और कमजोरी जैसा हो जाना  *कभी -कभी तो भूख न लगन भी नहीं लगना  ३) क्या यह जानलेवा बीमारी है? सामान्य स्थिति में अल्सरेटिव कोलाइटिस ** जानलेवा नहीं है **, अगर इस बीमारी को नजर अंदाज कर दिया जाए और इलाज सही से न किया जाए तो यह **गंभीर जटिलताओं** का कारण बन सकती है। - इन्हीं जटिलता के कारण से यह बीमारी **जीवन के लिए खतरा** बन सकती है। *अल्सरेटिव कोलाइटिस से जुड़ी गंभीर जटिलताएँ* 1.**गंभीर रक्तस्राव** लगातार आंत में से खून आ जाने पर कभी-कभी तो **एनीमिया** भी हो सकता है। अधिक रक्तस्राव की स्थिति जानलेवा भी बन जाती है।  2. **टॉक्सिक मेगाकोलन ** यह गंभीर स्थिति है, जिस में की बड़ी आंत अचानक से फैलने  लग जाती है और उस में गैस जमा होने लग  जाती है। समय पर सही इलाज न हो तो आंत फट सकती है, जिस से की संक्रमण और मृत्यु का खतरा और भी बढ़ जाता है।  3.**आंत का फटना** आंत में छेद होने से बैक्टीरिया पेट की गुहा में पहुँच सकते हैं. और **सेप्सिस** जैसी जानलेवा समस्या हो सकती है. 4. **कैंसर का खतरा**   ज्यादा समय तक अल्सरेटिव कोलाइटिस रहने पर बड़ी आंत में **कोलन कैंसर** होने का खतरा ज्यादा होता है. 5.**शरीर पर अन्य प्रभाव** * लिवर की बीमारी * आँखों, त्वचा और जोड़ों में सूजन हो जाना * हड्डियों में भी कमजोरी होना इन सभी कारणों से यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।  ४) अल्सरेटिव कोलाइटिस का  इलाज क्यों ज़रूरी है? इसका  अभी तक  कोई भी तरह से **पूर्ण इलाज** नहीं है, पर दवा और जीवनशैली में बदलाव लाने से इसे **नियंत्रित** किया जा सकता है। - अगर मरीज समय पर इलाज ले और डॉ. की सलाह का पालन करे, तो वह सामान्य जीवन जी सकता है।  #अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज  १) **सर्जरी** जब दवा से फायदा न मिले, तो डॉ. आंत का प्रभावित भाग निकालने की सलाह दे सकते हैं। - कई बार पूरी बड़ी आंत को हटाना भी पड़ सकता है। जिस से की रोग पूरी तरह खत्म हो सकता है, पर यह बड़ा और बहुत ही जटिल ऑपरेशन होता है।  २). *जीवनशैली और खानपान में परिवर्तन से**   *आसानी से पचने वाले और  संतुलित भोजन को  लें.  * ज्यादा मसालेदार और तैलीय भोजन नहीं खाना चाहिए।  * शराब और धूम्रपान से दुरी बनाये रखना।  * तनाव को कम करने के लिए कसरत करे.  ५) क्या मरीज सामान्य जीवन जी सकता है? जवाब = हाँ, पर रोगी ** सही समय पर सही निदान** कराए और **नियमित इलाज** ले, तो वह सामान्य जीवन जी सकता है। - बहुत से लोग इस बीमारी के साथ रहते हुए भी पढ़ाई, और  नौकरी, परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाते हैं।
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GERD treatment in homeopathic
१) GERD क्या है?GERD गंभीर पाचन संबंधी की समस्या है। जिस में पेट का एसिड बार-बार (भोजन नली) में चला जाता है। - जिस से की सीने में जलन का होना , खट्टी डकार का आना और कभी-कभी तो  खाँसी जैसी समस्याएँ होने लगती हैं। - इसका सही समय पर इलाज नही किया  हो, तो यह अल्सर, या बैरेट्स इसोफेगस जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। २) GERD के इलाज के प्रमुख तरीके क्या है? #1. जीवनशैली में बदलाव  सबसे पहला और महत्वपूर्ण इलाज जीवनशैली में सुधार करना है। कई बार दवा से भी ज्यादा असर डेली की आदत सुधारने से भी  होता है। *खाने के आदत बदलें*- ज्यादा तैलीय और मसालेदार खाना और  ज्यादा खट्टे भोजन से बचें। - कॉफी और चाय, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स को कम करें। - छोटे-छोटे भाग में दिन में ३-४ बार खाना को खाएँ।  - भोजन करने के बाद में  तुरंत सोना नहीं चाहिए।  - मोटापा GERD का बड़ा कारण है। जिस से की एसिड ऊपर की ओर आता है.  # 2.दवाइयो से इलाज अगर जीवनशैली में सुधारने से लाभ नहीं मिले, तो डॉ. दवाइयाँ देते हैं। * एंटासिड* : यह तुरंत आराम देते हैं, और पेट का एसिड न्यूट्रलाइज करते हैं।  *H2 Blockers* : यह एसिड का उत्पादन कम करते हैं।  *Prokinetics* : यह दवा भोजन नली और पेट की गति को सुधारती हैं,  जिस से की  एसिड ऊपर नही आए।  #3.एंडोस्कोपिक और सर्जिकल इलाज कुछ दर्दी में दवाऔर जीवनशैली में सुधार से भी लक्षण कण्ट्रोल नहीं होते। ऐसे मामलों में सर्जरी की जाती है.  *फंडोप्लिकेशन* : गर्ड की सबसे नार्मल सर्जरी है। जिसमे की पेट के ऊपरी भाग में भोजन नली के चारों ओर लपेट कर मजबूत वाल्व बनाते है.  और एसिड वापस नही  आए।  *LINX Device*:    इसमें एक मैग्नेटिक रिंग इसोफेगस के चारों तरफ लगाते है। जो की भोजन को नीचे जाने देते है, पर एसिड को ऊपर नहीं आने देते है। #4.घरेलू उपाय गर्ड से राहत पाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे भी कारगर साबित हो सकते हैं।  - खाना खाने के बाद मुँह में अदरक का छोटा टुकड़ा रख के धीमे -धीमे चबाएँ।  - सौंफ को चबा लेने से सीने में जलन कम होती  है। - एलोवेरा का जूस सीमित मात्रा में लेना बहुत ही फायदेमंद होता है. #5. किन्ह लोगो को तुरंत ही डॉ. से मिलना चाहिए? गर्ड के हल्के लक्षण घर पर कंट्रोल किए जा सकते हैं, लेकिन अगर निम्न लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए:  *बार-बार में उल्टी का होना* बहुत ही तेज सीने में दर्द होने से (हार्ट अटैक भी हो सकता है)  * वजन का तेजी से गटकम हो जाना  * खाना - खाने में परेशानी का होना
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chronic calcified pancreas ka homeopathic treatment
१) क्रॉनिक कैल्सीफाइड पैंक्रियाटाइटिस का क्या इलाज है? यह अग्न्याशय की बहुत ही गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है। जिस में की अग्न्याशय में सूजन होने के साथ में ही कैल्शियम जमने लग जाता है. -  समय के साथ में यह रोग तो पाचन तंत्र और इंसुलिन दोनों को असर करता है, जिस से  की **पाचन संबंधी की समस्या, लगातार दर्द का होना और मधुमेह ** जैसी स्थिति हो सकती है। आज के आर्टिकल में  इसके **इलाज, दवा और आहार और आधुनिक विकल्पों** के बारे में बात करने वाले है. २)इलाज उद्देश्य क्या है? *दर्द को कण्ट्रोल करने के लिए * *पाचन की क्रिया को सुधारने के लिए *  *पोषण कमी को पूरा करने में*  * जीवन के गुणवत्ता में सुधार के लिए* 2. दवा से कैसे इलाज होता है? * दर्द को कम करने के लिए पेनकिलर की दवा दी जाती है। * पाचन को सुधारने के लिए *(PERT)* देते है। जो की भोजन को तोड़ने में मदद करता है। * अगर मरीज को मधुमेह हो जाता है, तो इंसुलिन या ओरल एंटीडायबिटिक दवा की दे सकते है।  *विटामिन-A, विटामिन-D, अन्य एंटीऑक्सीडेंट्स के कमी को पूरा करने में सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं। ३) एंडोस्कोपिक उपचार? *ERCP* के माध्यम से पित्त की नलिका और अग्न्याशय में नलि की रुकावट को हटाया जाता है।  *स्टेंटिंग* :  नली में रुकावट हो जाने पर  स्टेंट डालते है ,जिस से की पाचक रस  सरलता से निकल सके।  * अगर कैल्सीफाइड स्टोन नलि में फंसे है, तो उन्हें एंडोस्कोप से बाहर निकाला जाता है. ४)शल्य चिकित्सा अगर दवा और एंडोस्कोपिक इलाज से आराम नहीं मिल रहा है,तो ऑपरेशन की जरुरत होती है। - इसमें पैंक्रियाटिक डक्ट को आंत से जोड़ देते है. जिस से की पाचक रस का बहाव आसान हो जाता है।  *अग्न्याशय के प्रभाव वाले भाग को  हटा दिया जाता है। ५)जीवनशैली और आहार के लिए क्या  प्रबंधन है? * शराब और धूम्रपान से तो पूरी तरह  से दुरी बनाये रखना सही होता है।  * ज्यादा तेलीय, और मसालेदार भोजन या तली-भुनी चीज़ों से बचना चाहिए। *  पुरे दिन भर में  ३-४ बार छोटे-छोटे  हल्का भोजन करना सही है। * **प्रोटीन या विटामिन वाले  आहर का उपयोग करना चाहिए  ** * पानी को ज्यादा मात्रा में पीना सही होता है. ६) जटिलताओं का प्रबंधन *मधुमेह* – :  इंसुलिन या दवाओं से कंट्रोल।  *पोषण की कमी के लिए ** विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट्स का उपयोग करते है।  *लंबे समय से चलने वाली क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस से कैंसर का खतरा और भी बढ़ सकता है, इसलिए नियमित चेकअप  करना भी ज़रूरी है।
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H pylori treatment in homeopathy
१)एच. पाइलोरी क्या है? **हेलिकोबैक्टर पाइलोरी** एक तरह का बैक्टीरिया है. जो की, पेट और छोटी आंत  की पर्त में संक्रमण कर देता है। यह बैक्टीरिया देश के आधी आबादी के पेट में देखने को मिलता है. - कई बार लक्षण नहीं देखने को मिलता है, कुछ लोगों में यह तो, **गैस्ट्राइटिस, अल्सर ,पेट का दर्द,  यहाँ तक के पेट के कैंसर** का कारण भी बनता है। इसका सही समय पर इलाज करना भी जरूरी है। २) H. pylori संक्रमण के क्या लक्षण होते है? हर मरीज में लक्षण अलग-अलग होता  हैं।कुछ लक्षण इस तरह दिखाई देते हैं: जैसे की,  -  पेट के ऊपरी वाले भाग में जलन या दर्द का होना  -  बार-बार खट्टी डकार का आना- एसिडिटी का होना या तो पेट का फूल जाना  -  भूख में कमी हो जाना  -  लंबे समय से  संक्रमण  होने से **अल्सर से खून का आना **  ३) H. pylori संक्रमण की जांच ? इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर कुछ जांचें करवाते हैं:- Urea Breath Test :: सांस में यूरिया की जांच से बैक्टीरिया का पता किया जाता है।  - Stool Antigen Test :: मल में H. pylori एंटीजन की उपस्थिति होने  से।  - Blood Test :: H. pylori के एंटीबॉडी की जांच कर के । -  गंभीर मामलों में एंडोस्कोपी करके पेट की पर्त का सैंपल लेते  है।  ४) H. pylori इलाज के दौरान क्या ध्यान देने योग्य बातें है? * दवाएं का **पूरा कोर्स** करके ही लें,छोड़ना चाहिए।  बीच में कोर्स छोड़ने से बैक्टीरिया का रेसिस्टेंट हो सकता है। * शराब और धूम्रपान से दुरी बनाये रखना सही है।  * ज्यादा  मसालेदार और तैलीय खाना खाने से बचना चाहिए.  * उचित मात्रा में पानी को पिएं और पचने में आसान वाले भोजन को करें। * दवाओं के ४-५ हफ्ते के बाद में  **टेस्ट को दोहराया जाता है** जिससे की पुष्टि हो सके कि अब बैक्टीरिया  खत्म हुआ है। #घरेलू और सपोर्टिव उपाय? H. pylori का इलाज दवाओं से संभव है, पर कुछ घरेलू उपाय से भी लक्षण को कम कर सकते है. * दही, छाछ के  सेवन से  बैक्टीरिया को खत्म कर के पेट की सेहत में सुधार होता  हैं।  * **ग्रीन टी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। जो की बहुत ही लाभदायी है.  * **शहद जो की बैक्टीरिया की वृद्धि को कम करने में मदद करता है।   * **ब्रोकली और ब्रोकोली स्प्राउट्स:** इनमें सल्फर कंपाउंड होते हैं जो H. pylori पर असर डालते हैं।  ५) अगर इलाज न हो तो क्या जटिलताएं  होती है? H. pylori संक्रमण का सही तरह से सही इलाज न किया जाये तो यह आगे जाकर  गंभीर बीमारियों का कारण  भी बन सकता है* पेप्टिक अलसर  * ज्यादा लंबे समय से तक पेट में सूजन का होना  *पेट का कैंसर  *MALT Lymphoma (एक तरह पेट का कैंसर)
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celiac bimari ka homeopathic ilaj
१) सीलिएक क्या होता है? सीलिएक एक तरह का *ऑटोइम्यून रोग* है, जो की शरीर के रोग-प्रतिरोधक प्रणाली में गेहूं, जौ ,राई जैसे अनाजों में मिलने वाले *ग्लूटेन* प्रोटीन को सहन नहीं कर पाता है. - जिस के कारण छोटी आंत के आंतरिक पर्त को हानि हो सकता है. और पोषक तत्वों का अवशोषण भी बाधित होता है. - यह समस्या का सही समय पर सही इलाज नहीं किया जाये तो, लगातार कमजोरी, दस्त, वजन का कम हो जाना अन्य पाचन संबंधी समस्याओं से जूझता है। २)सीलिएक होने के मुख्य कारण क्या है? सीलिएक के कारण निचे अनुसार हो सकते है, जैसे की, - सीलिएक वंशानुगतर होता है, और आनुवंशिक मार्कर वाले लोगों में होने का जोखिम भी बढ़ जाता है. - ग्लूटेन का सेवन करने से प्रतिरक्षा प्रणाली को एक्टिव कर देते है, जिस से की छोटी आंत को नुकसान होता है. - कुछ वायरल संक्रमण से भी रोग के शुरू होने का चान्सेस होता है. ३) सीलिएक डिज़ीज़ का लक्षण क्या होता है? सीलिएक के लक्षण निचे अनुसार हो सकते है, जैसे की, - लगातार दस्त का होना -पेट का फूल जाना और गैस, या अपच जैसा होना -वजन का कम हो जाना - थकान और कमजोरी जैसा लगना  - त्वचा पर लाल खुजलीदार चकत्ते दाने का होना  ४ . सीलिएक डिज़ीज़ पर परहेज करने वाले खाद्य पदार्थ ?, **परहेज करने वाले खाद्य पदार्थ के नाम **  - गेहूं में से बनने वाले पदार्थ(आटा, ब्रेड)  - राई - सूजी, और मैदा या बेसन में मिलावट करने वाले आटा   - फास्ट फूड का ज्यादा मात्रा में उपयोग करना **खाए जा सकने वाले खाद्य पदार्थ:** - चावल, (कॉर्न)  - बाजरा और ज्वार -ताजे फल और ताजे सब्जि का सेवन ५ ) सीलिएक से बचाव के उपाय क्या है? इस बीमारी को रोका तो नहीं जा सकता, है लेकिन कुछ सावधानियाँ रख के स्वस्थ जीवन जी सकते हैं:  * हमेशा से ही *ग्लूटेन-फ्री लेबल* वाले प्रोडक्ट का उपयोग करना* अपने घर में अलग बर्तन और चम्मच रखें।जिस से की ग्लूटेन-युक्त भोजन का मिश्रण न हो सके.  * बच्चों को शुरूआत से ही इस बीमारी के बारे में शिक्षित करें।
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pancreatitis kyu hota hai
१) पैंक्रियाटाइटिस क्यों होता है? मानव शरीर का मुख्य भाग अग्न्याशय है. यह बहुत ही गंभीर बीमारी की स्थिति है, जिस में अग्न्याशय में सूजन हो जाती है। - यह पाचक एंजाइम और इंसुलिन हार्मोन बनाता है। जब सूजन हो जाती है , तब एंजाइम समय से पहले ही एक्टिव हो जाते हैं, और पैंक्रियास की अपने ही कोशिका को हानि पहुँचाने लगते हैं। - यह स्थिति **अचानक से हो सकती है,जिसे हम एक्यूट पैंक्रियास या ज्यादा लंबे समय होने वाली को क्रोनिक पैंक्रियास ** हो सकती है। २) पैंक्रियाटाइटिस इलाज के क्या तरीके है? पैंक्रियाटाइटिस के तीव्र पैंक्रियास केस में तो ,मरीज को अस्पताल में एडमिट करना जरुरी होता है। इसमें कुछ बातो का ध्यान रखा जाता है. जैसे की,  * दर्दी को कुछ समय तक खाना-पीना नहीं देते है, ताकि अग्न्याशय को आराम मिल सके। * तीव्र पैंक्रियाटाइटिस में बहुत ही तेज दर्द होता है। इसके लिए डॉ. कुछ दर्द निवारक की दवा को देते है। * शरीर में पानी की कमी को दूर करने और इलेक्ट्रोलाइट के असंतुलन को सही करने के लिए सही मात्रा में फ्लूइड्स को चढ़ाए जाते हैं। * कुछ मामलों में तो वेंटिलेशन की जरुरत हो सकती है। #आहार और पोषण में क्या जरुरी है? * जब भी मरीज का सूजन और दर्द कम होने लग जाता है, तब धीरे-धीरे **तरल आहार** से शुरूआत किया जाता है। * कम चर्बी और कार्बोहाइड्रेट वाले आहार को दिया जाता है।  * यदि मरीज सही से खाना नहीं खा पा रहा है तो **पैरेंट्रल न्यूट्रिशन** के द्वारा पोषण देते है। ३) दवाइयों के द्वारा क्या इलाज हो सकता है? * दर्द को कण्ट्रोल करने के लिए ओपिऑयड की दवा दी जाती हैं। * क्रॉनिक पैंक्रियास में पाचन एंजाइम की कमी हो जाने से **पैंक्रियाटिक एंजाइम सप्लीमेंट्स** को भी दिए जाते हैं।  * अगर संक्रमण का जोखिम कम हो तो एंटीबायोटिक्स को भी दिया जाता हैं। #4. किन तरह के जाँच से पता किया जाता है? * अगर पैंक्रियाटाइटिस का कारण पित्त की पथरी है, तो गॉलब्लैडर को निकालने के लिए सर्जरी किया जाता है। * पित्त की नली में रुकावट को दूर करने के लिए एंडोस्कोपिक की प्रक्रिया को किया जाता है.  * कुछ गंभीर मामलों में पैंक्रियास के मृत ऊतक को निकालने के लिए भी सर्जरी करनी पड़ सकती है। ४) पैंक्रियाटाइटिस के लिए जीवनशैली में क्या सुधार जरुरी है? * शराब तो बहुत ही बड़ा कारण है। इसको तो पूरी तरह से बंद ही करना जरुरी है. * धूम्रपान करने से भी दूर रहना चाहिए * ज्यादा मसालेदार खाना खाने से दुरी रखें  * अपने दैनिक जीवन में ताजे फल, और ताजे सब्जि का उपयोग करना सही होता है. * वजन को कण्ट्रोल में रखने के लिये डेली कसरत जरुरी है। ५) पैंक्रियाटाइटिस के लिए क्या जटिलता हो सकती है? अगर सही समय में ही इलाज न किया जाए तो पैंक्रियाटाइटिस से कई जटिलताएँ हो सकता हैं: जैसे की,  * मधुमेह का सही इलाज करने से  * पैंक्रियाटिक के कैंसर का खतरा होने से *किडनी का फेलियर  * कभी- कभी तो सांस लेने में बहुत ही तकलीफ का होना
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thyroid treatment in homeopathic
१) थायरॉयड का क्या इलाज है? - थायरॉयड महत्वपूर्ण ग्रंथि है, जो की गले के सामने तितली के आकार का होता है। यह ग्रंथि हमारें शरीर के मेटाबॉलिज़्म,हृदय की गति और हार्मोन का संतुलन को कण्ट्रोल करते है. - भारत देश में भी लाखों मरीज इस समस्या का सामना कर रहे है.आज का आर्टिकल इसी बात पर चर्चा करने वाले है. २) थायरॉयड कितने प्रकार का होता है? - 1.हाइपोथायरॉयडिज़्म * जब थायरॉयड की ग्रंथि उचित मात्रा में हार्मोन (T3, T4) नहीं बना पाती है. इसी के कारण से शरीर में मेटाबॉलिज़्म भी धीमा हो जाता है।  - 2. हाइपरथायरॉयडिज़्म * जब भी थायरॉयड की ग्रंथि जरूरत से भी ज्यादा हार्मोन बनाने लग जाती है. इसके कारण से मेटाबॉलिज़्म बहुत ही तेज़ हो जाता है।  - 3. गलगंड * थायरॉयड ग्रंथि असामान्य रूप से भी बढ़ जाती है * यह आयोडीन की कमी से या हार्मोनल के असंतुलन से होता है।  4. थायरॉयड नोड्यूल्स और कैंसर *इस ग्रंथि में गांठें या कैंसर की स्थिति हो सकती है. ३) थायरॉयड के क्या लक्षण होते है? **हाइपोथायरॉयडिज़्म के लक्षण निचे अनुसार हो सकते है. ** -थकान और कमजोरी जैसा लगना।  - ठंड ज्यादा लगना  - वजन का बढ़ जाना - त्वचा का रूखापन और बाल का टूटते रहना  **हाइपरथायरॉयडिज़्म के लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है.** - वजन का कम होना  - धड़कन का तेज़ हो जाना- पसीना बहुत ही अधिक मात्रा में आना  - नींद भी नहीं आना #थायरॉयड के क्या कारण है? - आयोडीन की कमी हो जाने पर। - वायरल और बैक्टीरियल जैसा संक्रमण का होना - परिवार में किसी को भी है ,तो इसका होने पर जोखिम और भी बढ़ जाता है. - कुछ दवा के प्रभाव से भी थायरॉयड को असर हो सकता है. #थायरॉयड का क्या इलाज है? - मरीज को किस तरह का थायरॉयड है,इसके ऊपर से ही इलाज करते है.  (1) हाइपोथायरॉयडिज़्म का इलाज  *TSH, T3, T4 टेस्ट का समय पर जाँच कराना बहुत ही ज़रूरी है।  * संतुलित आहार का उपयोग करना चाहिए.  *ज्यादा चर्बी और तैलीय भोजन से दूर रहना चाहिए.  *डेली कसरत करना (2) हाइपरथायरॉयडिज़्म का इलाज  *रेडियोआयोडीन थेरेपी * :– आयोडीन विशेष रूप से देता है ,जो की, थायरॉयड ग्रंथि की ज्यादा सक्रिय कोशिका को नष्ट करता है।  * सर्जरी* :– अगर ग्रंथि बहुत बड़ी हो जाती है,तो सर्जरी करना हो सकता है. ३) थायरॉयड रोग में क्या आहार लेना चाहिए? * हाइपोथायरॉयडिज़्म के लिए जरुरी खाद्य पदार्थ*  - आयोडीन युक्त नमक  - अंडे, दही, दूध - ताजे फल और सब्जियाँ * हाइपोथायरॉयडिज़्म में क्या परहेज़ करना  -ज्यादा सोया प्रोडक्ट्स का उपयोग नहीं करना  - ज्यादा तैलीय जंक फूड नहीं खाना ४) थायरॉयड को नियंत्रण के लिए घरेलू उपाय? - ध्यान करने और नियमित कसरत करने से चिंता कम होता है.  - डेली 7 से 8 घंटे की नींद करना शरीर के हार्मोन के लिए ज़रूरी है।  -हर 3 से 6 महीने में थायरॉयड का टेस्ट कराएँ। #कब डॉक्टर से संपर्क करें? * अगर लंबे समय तक थकान, वजन कम , दिल की धड़कन का अनियमित होना  * गले में सूजन,और गांठ ,सांस लेने में परेशानी हो सकती है।  * डॉ के बताये हुए ही दवा को  खाना चाहिए.
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