CAPTCHA  

Already register click here to Login

Dont have account click here for Register

CAPTCHA  
Thank You
Ok

Videos

Avatar
liver cirrhosis kaise hota hai
१) लिवर सिरोसिस क्यों होता है? लिवर सिरोसिस बहुत ही गंभीर रोग है, जिसमें यकृत की अच्छी कोशिका भी धीरे-धीरे खत्म होने लग जाते है और वहां पर फाइब्रस ऊतक बन जाता है। - यह स्थिति ज्यादा समय तक शराब का सेवन करने से, वायरल हेपेटाइटिस, और भी अन्य कारणों से होती है। - लिवर अपने कार्य जैसे–की, पाचन, प्रोटीन का निर्माण, और विषैले तत्वों का निष्कासन और रक्त शुद्धिकरण – भी सही से नहीं कर पाता है। २) लिवर सिरोसिस के मुख्य कारण क्या होते है? - 1. ज्यादा समय से शराब पीना से लिवर को अधिक नुकसान होता है. - 2. लंबे समय तक यदि संक्रमण रहे तो, भी लिवर की कोशिका नष्ट होने लगती हैं। - 3.मोटापा, मधुमेह और हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से भी लिवर में चर्बी जमने लग जाती है. - 4. पारिवारिक इतिहास से भी इसका होना बहुत ही हो सकता है।  - 5. ज्यादा समय से दवाइयों का दुष्प्रभाव होता है.  ३) लिवर सिरोसिस होने का लक्षण क्या है? शुरुआती समय में कोई भी विशेष लक्षण नहीं होते है.  - लगातार थकान जैसा लगना और कमजोरी का होना  - भूख भी कम लगना - वजन का कम हो जाना - पीलिया जैसा लगना -पेट में सूजन होना - बार-बार उल्टी होना ४) इस रोग का क्या असर होता है? १) जीवनशैली में और आहार में सुधार करना  - शराब को पूर्ण तरह से ही बंद कर देना। - ताज़ा फल और सब्ज़ियाँ, और कम चर्बी वाले खाद्य पदार्थ।- नमक का सेवन बहुत ही कम करना। - पर्याप्त पानी पिने से शरीर के विषैले तत्व बाहर आ जाते है।  २) डेली जाँच और निगरानी - लिवर फंक्शन का टेस्ट  - अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन  - डॉक्टर की सलाह पर समय-समय से दवा का लेना। ५) घरेलू उपाय? - आंवला और एलोवेरा जूस से लिवर को डिटॉक्स करने में मदद होता है. - हल्दी का सेवन से सूजन और संक्रमण कम होता है.#बचाव कैसे करें? * शराब और धूम्रपान को पूरी तरह से दूरी बनाएँ। * हेपेटाइटिस B का टीकाकरण लगवाना भी सही है * वजन को कण्ट्रोल में रखना और डेली व्यायाम करना । *अपने जीवन में स्वच्छ भोजन का सेवन करें।  * बिना डॉक्टर की सलाह से कोई भी तरह का दवा नहीं लेना ।
Avatar
homeopathic me acute pancreatitis ka ilaaj
१) तीव्र अग्नाशयशोथ क्यों  होता है? अग्नाशय मानव शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, जो की भोजन को पचाने में मदद करने वाले एंज़ाइम और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने वाले हार्मोन (इंसुलिन और ग्लूकागॉन) बनाता है। - जब अग्नाशय में अचानक सूजन हो जाती है, तो इसे एक्यूट अग्नाशयशोथ भी कहा जाता है। - यह स्थिति अचानक से शुरू होती है, और कभी-कभी बहुत  जानलेवा साबित हो सकती है।  २)तीव्र अग्नाशयशोथ के मुख्य कारण कौन - कौन से है? तीव्र अग्नाशयशोथ के कई कारण हो सकते हैं, जैसे की ,  - 1.पित्त पथरी : – सबसे आम कारण में से एक है,यह तो बाइल डक्ट को ब्लॉक कर देती है, जिस के कारण से अग्नाशय में सूजन हो  जाती है.  - 2. अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से भी  अग्नाशय पर दबाव बढ़ जाता है.  - 3. उच्च ट्राइग्लिसराइड का लेवल भी हो सकता है।  - 4. बार - बार दवाइयों के दुष्प्रभाव से  - 5. संक्रमण या चोट के संक्रमण से भी हो। - 6. जेनेटिक कारण : कुछ लोगों में तो जन्म से भी हो सकता है.  ३) एक्यूट पैंक्रियास के क्या लक्षण दिखाई देते है? - तीव्र अग्नाशयशोथ के लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है ,जैसे की ,- पेट के ऊपरी वाले भाग में तेज़ दर्द, जो की पीठ तक भी जा सकता है.  - लगातार उल्टी का होना और मिचली  - भूख भी नहीं लगना  - पेट का फूल जाना या गैस की प्रॉब्लम का हो जाना  - ब्लड प्रेशर का कम हो जाना और सांस लेने में भी परेशानी का हो जाना। ३) एक्यूट पैंक्रियास का क्या निदान है? डॉक्टर कुछ जांचें करके बीमारी की पुष्टि करते हैं, जैसे की ,  - 1. सीरम एमाइलेज और लाइपेस का लेवल बढ़ जाने पर खून का जाँच  करते है। - 2. अल्ट्रासाउंड या CT स्कैन : – अग्नाशय में सूजन और पथरी या ब्लॉकेज का पता लगाने में भी हो सकता है.  3. बाइल में डक्ट को पता करने के लिए MRI को किया जाता है। #४) एक्यूट पैंक्रियास का क्या ट्रीटमेंट है? - एक्यूट पैंक्रियास का इलाज **अस्पताल में भर्ती होकर** कर सकते है.  1. प्रारंभिक देखभाल - * पेशेंट को कुछ समय के लिए खाना या पानी भी नहीं दिया जाता, है ताकि अग्नाशय को राहत मिल सके। - *डिहाइड्रेशन और ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए नसों के माध्यम से  IV Fluids को  दे सकते है। - तेज़ दर्द को कम करने के लिए पेनकिलर भी दिया जाता है.  -यदि सांस लेने में परेशानी हो तो ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जाता है.2. कारण का इलाज  * यदि पित्त की पथरी का कारण है, तो एंडोस्कोपी या सर्जरी करके पथरी को निकाला जाता है. *Alcohol:* : दर्दी को शराब को तुरंत बंद करनी होती है।  * दवाइयों और आहार से भी कंट्रोल किया जाता है। 3.*पोषण*  * कुछ मामलों में तो जब सूजन कम होने पर तो तरल आहार से शुरुआत होती है. * गंभीर मामलों में तो मरीज को नाक से डाली हुयी ट्यूब द्वारा लिक्विड भी दिया जाता है. 4. जटिलताओं का प्रबंधन - * संक्रमण : - अगर पैंक्रियास में संक्रमण होने लग जाये तो एंटीबायोटिक्स भी दिए जाते हैं।  * Necrosis या Abscess:कभी-कभी तो सर्जरी या ड्रेनेज की भी ज़रूरत होती है।  * सांस लेने भी परेशानी हो सकते है। तो icu में भी रख सकते है।  #जीवनशैली और रोकथाम के लिए क्या उपाय है? - शराब और धूम्रपान को पूरी तरह से बंद कर देना सही है।  - संतुलित आहार को ही लें, जिसमें कम वसा हो। - डेली कसरत करें जिस से की वजन को कण्ट्रोल में रख सकते है.  - ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल के लेवल की डेली रूप से जांच करते रहना सही है. -डॉक्टर के द्वारा दी गई दवाइयों को समय पर ही लें और डॉक्टर के सलाह पर कोयो और दवा कपो न ले।
Avatar
ibs ka homeopathic me ilaaj
१) आईबीएस का क्या इलाज है? - यह आम पाचन तंत्र की समस्या है, जो की, बड़ी आंत को असर करती है। इस रोग में पेट में दर्द का होना , कब्ज, दस्त, गैस और पेट फूलना जैसे लक्षण बार-बार दिखाई देते हैं। - यह रोग जानलेवा नहीं है, पर लंबे समय तक रहने पर पेशेंट की जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य को असर कर सकती है। इसका सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव करने से भी यह रोग कण्ट्रोल किया जा सकता है। २) आईबीएस के मुख्य कारण क्या होते है? IBS का अभी तक सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, पर रिसर्च और चिकित्सकीय अनुभव बताते हैं कि इसके पीछे कई फैक्टर जिम्मेदार हो सकते हैं: जैसे की, - 1. कभी कभी आंतों की मांसपेशियाँ ज्यादा ही संकुचित हो जाती हैं, जिससे दस्त होते हैं, और कभी बहुत धीमी गति से काम करती हैं.  - 2. तनाव या चिंता में यह गड़बड़ा जाता है और पाचन तंत्र को असर कर सकता है।  - 3.संक्रमण के बाद : – गंभीर पेट के संक्रमण के बाद में आंतों की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। जिस से की IBS हो सकता है. - 4.आंतों में बैक्टीरिया का असंतुलन होने से भी हो सकता है.  - 5. ज्यादा मसालेदार भोजन, तैलीय खाना, फास्ट फूड, से भी कई लोगों में आईबीएस को ट्रिगर करते हैं। ३)आईबीएस होने के क्या लक्षण हो सकते है? आईबीएस के लक्षण हर पेशेंट में अलग - अलग हो सकते हैं। आम तौर पर देखे जाने वाले लक्षण हैं:  - बार-बार पेट में दर्द का होना या ऐंठन - कब्ज, दस्त या दोनो एक ही साथ में - गैस और पेट का फूलना - थकान और नींद की भी प्रॉब्लम  - तनाव और चिंता का बढ़ जाना  ४)आईबीएस का इलाज? इब्स का कोई स्थायी इलाज नहीं है, पर सही उपचार और जीवनशैली में सुधार होने से लक्षणों को कण्ट्रोल किया जा सकता है। - डाइट में बदलाव : आईबीएस के पेशेंट के लिए डाइट की भूमिका लेना सही है. - फाइबर का सेवन बढ़ाएँ : – कब्ज के मरीजों को अपने आहार में सब्जियाँ, फल, दालें और साबुत अनाज का उपयोग करना सही होता है. - डॉक्टर लो-FODMAP डाइट की सलाह देते हैं।  - कैफीन और अल्कोहल से दूर रहना सही हो सकता है.  - पानी का अधिक मात्रा मेँ सेवन करना सही होता है. *तनाव प्रबंधन* IBS का संबंध दिमाग और पाचनतंत्र से है, इसलिए तनाव को कण्ट्रोल करना जरूरी है। - शरीर और दिमाग को शांत करने के लिए योग करना चाहिए। - ध्यान करने से मानसिक शांति और तनाव को कण्ट्रोल में मदद करता है। - नींद की कमी से भी आईबीएस असर हो सकता है. - जरूरत पड़ने पर भी साइकोथेरेपी से भी लाभ मिलता है. * (घरेलू उपचार)* - अदरक और अजवाइन का सेवन करने से भी गैस कम करते हैं। - इसबगोल कब्ज की समस्या में आराम देता है।  - पुदीना की चाय : –आंतों की ऐंठन को कम करता है.  - हल्दी वाला दूध पेट की सूजन और दर्द को कम करता है. ५) आईबीएस में किस बात का ध्यान रखें? - अपने नियमित समय पर ही भोजन करना सही हो सकता है.  - छोटे-छोटे अंतराल में हल्का भोजन करना सही है. - ज्यादा तेल और मसाले वाले भोजन से दुरी रखना। - धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूर रहें।  - रोजाना कम से कम 30 मिनट तक कसरत करना सही होता है.
Avatar
Urticaria ka homeopathy me ilaaj | urticaria kyu hota hai
१)अर्टिकेरिया (Urticaria) का क्या इलाज है? अर्टिकेरिया, जिसे हम **पित्ती या शीतपित्त** के नाम से भी जाना जाता है, यह एक त्वचा विकार है. - शरीर पर अचानक से लाल दाने , खुजलीदार और उभरे हुए दाने दिखाई देते हैं। यह कुछ मिनटों से लेकर कई घंटों तक भी रह सकती है. कई बार बार-बार उभरती रहती है। - अर्टिकेरिया का कारण एलर्जी, दवाइयों की प्रतिक्रिया, संक्रमण, या पर्यावरणीय तत्व हो सकते हैं। इसका सही इलाज और नियंत्रण रोगी की जीवनशैली को काफी आसान बना सकता है. २)अर्टिकेरिया के प्रकार कितने होते है? यह ३ तरह के होते है, जैसे की, *1. एक्यूट अर्टिकेरिया : अचानक से होता है, और ४ सप्ताह के अंदर ही सही हो जाता है। 2. क्रोनिक अर्टिकेरिया : यह 6 सप्ताह से ज्यादा समय तक और बार-बार होता है , तो इसे क्रॉनिक कहा जाता है। 3. फिजिकल अर्टिकेरिया : धूप, पसीने से भी --- ३)अर्टिकेरिया के क्या लक्षण दिखाई देते है? अर्टिकेरिया के लक्षण निचे अनुसार हो सकते है ,जैसे की, - खुजलीदार लाल चकत्ते दाने  - त्वचा पर जलन या चुभन जैसा लगना  - बार-बार दाने आकर खत्म होजाते है - गंभीर स्थिति में सांस लेने में परेशानी का होना ४)अर्टिकेरिया का इलाज? (क) घरेलू उपाय **ठंडी सिकाई **  प्रभावित वाले जगह पर बर्फ की सिकाई करने पर खुजली और जलन कम हो जाती है.  **एलर्जन से बचाव**  यदि किसी भोजन, दवा, से अर्टिकेरिया होता है तो उससे दूर रहना। ढीले और कॉटन के कपड़े के कपड़े पहनें।  **तनाव कम करना: योग,और ध्यान से तनावजनित अर्टिकेरिया को कण्ट्रोल करने में मदद करते हैं।  **हर्बल उपचार: नीम, हल्दी का सेवन या लेप त्वचा की सूजन और खुजली कम कर सकते हैं।  (ख) जीवनशैली में परिवर्तन **संतुलित आहार : तीखा, मसालेदार खाद्य पदार्थ से बचें।  **पर्याप्त नींद ** शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को और भी बढ़ाती है। **पानी ज्यादा पिने से भी शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद मिलती है.  ५)अर्टिकेरिया कब खतरनाक हो जाता है? * सांस लेने में बहुत ही परेशानी का होना  * गले या जीभ पर सूजन का हो जाना * चक्कर का आना
Avatar
acute necrotizing ka homeopathic me ilaaj
१) एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस का इलाज? एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस बहुत ही गंभीर स्थिति है। इसमें पैंक्रियास के ऊतक नष्ट होकर नेक्रोसिस की अवस्था में चले जाते हैं। - यह स्थिति एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस की तुलना में बहुत ही खतरनाक मानी जाती है और यदि समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा हो सकती है।  २) एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस का कारण और खतरे क्या है? नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस के सामान्य कारण हैं, जैसे  की ,  * पित्ताशय की पथरी  * ज्यादा शराब का सेवन  * खून में ट्राइग्लिसराइड का अत्यधिक बढ़ जाना जैसा  * कुछ दवाओं का ज्यादा साइड इफेक्ट  * पेट की चोट या ऑपरेशन के बाद की जटिलताएं  - यह बीमारी तब गंभीर हो जाती है जब पैंक्रियास का ऊतक मरने लगता है और संक्रमण   का खतरा बढ़ जाता है। *  इसके लक्षण  * तेज और लगातार पेट दर्द (ऊपरी पेट में) * मतली और उल्टी * बुखार * पेट में सूजन और कोमलता * भूख न लगना * रक्तचाप गिरना और शॉक की स्थिति यदि संक्रमण हो जाए तो मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। #३)निदान?डॉक्टर निम्न जांचों केआधार पर इसकी पुष्टि करते हैं  *सीटी स्कैन (CT Scan): – यह सबसे जरुरी जांच है, जिससे नेक्रोसिस की ज्यादा और संक्रमण का पता चलता है। * रक्त जांच (Blood Test):– एंजाइम, श्वेत रक्त कोशिकाएं , शुगर और किडनी/लिवर की कार्यक्षमता की जाँच। *अल्ट्रासाउंड* : – सूजन  को देखने के लिए। *कल्चर टेस्ट*: – यदि संक्रमण का संदेह हो तो।  *४)इलाज* 1.प्रारंभिक चिकित्सा  *अस्पताल में भर्ती* : नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस हमेशा अस्पताल में, अक्सर ICU स्तर पर इलाज की मांग करता है।  * तरल पदार्थ :  शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने के लिए दिया जाता  है। * ऑक्सीजन सपोर्ट*: यदि सांस लेने में परेशानी हो रही है तों ।  * दर्द नियंत्रण* : तेज दर्द को कम करने के लिए दर्दनिवारक की दवाएं दी जाती हैं।  * एंटीबायोटिक्स* : केवल तभी दी जाती हैं जब संक्रमण की पुष्टि हो, वरना अनावश्यक एंटीबायोटिक से बचा जाता है। # 2. पोषण प्रबंधन  * पेशेंट को लंबे समय तक खाना नही देने से शरीर बहुत ही कमजोर हो जाता  है।  * शुरुआती दिनों में * : नासोजेजुनल ट्यूब से लिक्विड डाइट को दिया जाता है।  * ज़रूरत पड़ने पर * :  IV के माध्यम से पोषण दिया जाता है।  # 3.नेक्रोसिस और संक्रमण का प्रबंधन * यदि पैंक्रियास का मृत ऊतक **संक्रमित नहीं** है तो  दवाओं से और निगरानी से भी सुधार हो जाता है। * यदि **संक्रमित नेक्रोसिस*  है तो सर्जिकल प्रक्रिया की ज़रूरत पड़ती है:  * एंडोस्कोपिक ड्रेनेज* :– एंडोस्कोप के माध्यम से पैंक्रियास से पसया मृत ऊतक निकाला जाता है। *अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन की मदद से संक्रमित हुए तरल को बाहर निकाला जाता है।  #4. अन्य अंगों की देखभाल नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस कई बार मल्टी-ऑर्गन फेलियर  का  भी कारण बनता है। * किडनी सपोर्ट के **डायलिसिस** भी किया जा सकता है। * फेफड़ों अगर ख़राब हो तो  **वेंटिलेटर सपोर्ट** भी  दिया जाता है। * ब्लड प्रेशर बनाए रखने के लिए कुछ दवाएं और ICU की मॉनिटरिंग ज़रूरी होती है।  #५)जटिलताएँ क्या हो सकती है? * पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट का होना  * रक्त में संक्रमण  * अंगों का फ़ैल हो जाना  * लंबे समय से  **क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस** में बदल जाना * मधुमेह का हो जाना जैसे ##रिकवरी और जीवनशैली - इलाज के बाद पेशेंट को जीवनशैली में बदलाव की सलाह दिया जाता है: * शराब और धूम्रपान को  पूरी तरह से बंद करना। * कम चर्बी वाला आहार लें। * समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेते रहें। * रक्त शर्करा और लिवर फंक्शन की जांच करना ।
Avatar
homeopathy me IgE ka ilaj or ige kya hota hai
# IGE का क्या इलाज है? IgE  यह एक विशेष प्रकार की एंटीबॉडी है, जो की शरीर की **इम्यून सिस्टम** के  द्वारा बनाई जाती है। एंटीबॉडी मुख्य रूप से **एलर्जी और अस्थमा** जैसी समस्याओं से जुड़ी होती है। - जब शरीर में किसी एलर्जन जैसे की , धूल,  पालतू जानवर का बाल, या इत्र  के संपर्क में आता है तो IgE ज्यादा एक्टिव हो जाता है.और हिस्टामिन जैसे रसायन रिलीज़ करता है। - इससे  खुजली का होना , छींक का आना , साँस लेने में परेशानी , त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई देते है. २ ) IGE होने पर क्या कारण हो सकते है? - IgE के स्तर बढ़ने पर कई अलग- अलग  कारण हो सकते हैं: जैसे की,  1. एलर्जी : – धूल, फंगस, इत्र, पालतू जानवर के बाल को छूने से.  2.फूड एलर्जी : - दूध, अंडा, मूंगफली, समुद्री भोजन आदि।  3. अस्थमा :– जिन मरीज को अस्थमा है, उनमें अक्सर IgE  का लेवल बढ़ा पाया जाता है। 4. त्वचा रोग: – जैसे एक्जिमा या एटोपिक डर्मेटाइटिस।  5. परजीवी संक्रमण : – वर्म से होने वाला संक्रमण से भी IgE बढ़ा सकते हैं।  6. परिवार में एलर्जी  का इतिहास होने पर भी  ३) IGE के क्या लक्षण हो सकते है? - लगातार छींक का आते रहना  - आँखों में से पानी और नाक में से पानी बहना - त्वचा पर लाल दाने का दिखाई देना  -  सांस लेने में परेशानी का होना  -  बार-बार खाँसी आते  रहना  -  भोजन करते समय रिएक्शन हो जाना  ४) IGE की जाँच ? -  सिरम IgE टेस्ट : – खून की जाँच से ही  IgE की मात्रा को नापा जाता  है। -स्किन प्रिक टेस्ट : – अलग-अलग एलर्जन्स से  शरीर की प्रतिक्रिया को देखने के लिए किया जाता है। - फूड एलर्जी टेस्ट : – खाने-पीने की वस्तु से होने वाली एलर्जी। ५) HIGH  IGE का इलाज ? - 1. एलर्जन से बचाव  * जिस भी चीज़ से आपको एलर्जी हो, उनसे  दूरी बनाएँ। * पालतू जानवरों के बाल को छूने और इत्र  से दूरी रखें। * जो भी खाद्य से एलर्जी हो तो उन  भोजन से पूरी तरह परहेज़ करें। 2. इम्यूनोथेरेपी  * इसमें मरीज को कम मात्रा में एलर्जन देते है, और धीरे-धीरे उसकी खुराक को  बढ़ाई जाती है।  * इससे शरीर की एलर्जन  कम होती है।  3. जीवनशैली और घरेलू उपाय - भाप लेना में बहुत ही  परेशानी से कम करता है। - हल्दी और शहद यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। - अदरक और तुलसी से एलर्जिक लक्षणों को कम करने में सहायक होते है ।  #जटिलताएँ? यदि IgE का लेवल लंबे समय तक ज्यादा रहे और इलाज न किया जाए तो:  * लगातार अस्थमा का अटैक का आना  * क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस होना  * स्किन पर  रैशेज़ का होना #रोकथाम  * अपने घर के आसपास सफाई रखे. * मौसम के बदलने के समय  * संतुलित आहार का सेवन करना । * डॉक्टर के द्वारा दी गई दवाइयों का सेवन करने से
Avatar
homeopathy me bacche ka pancreatitis ka ilaaj
१) पैंक्रियाटाइटिस क्यों होता है? पैंक्रियाटाइटिस बहुत ही गंभीर बीमारी है, जिसमें अग्न्याशय में सूजन होती है। यह अचानक से एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस या लंबे समय तक बनी रहने वाली क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस हो सकती है। - पैंक्रियाटाइटिस बीमारी इलाज का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि, रोग कितना गंभीर है। सही समय पर सही उचित उपचार मिलने से अधिकांश लोग स्वस्थ हो सकते हैं. #१)पैंक्रियाटाइटिस के इलाज का मूल उद्देश्य क्या होता है? - पैंक्रियाटाइटिस इलाज का मुख्य उद्देश्य यह होता है ,  * सूजन और दर्द को कंटोल करना * पाचन तंत्र को सही करना * जटिलता को कम करना  * पिताशय की पथरी, शराब सेवन को खत्म करना #२). एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का शुरुआती इलाज (a) अस्पताल में भर्ती एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के पेशेंट को ज्यादातर अस्पताल में एडमिट किया जाता है। क्योंकि यह स्थिति अचानक से ही बिगड़ सकती है। (b) उपवास और तरल आहार * कुछ समय के लिए पेशेंट को खाने-पीने से रोक दिया जाता है, जिससे की अग्न्याशय को आराम मिल सके। * नसों के जरिये से तरल दिया जाता है। (c) दर्द नियंत्रण * दर्द को कम करने के लिए पेनकिलर की दवा दी जाती हैं। * कभी इंफेक्शन होने पर भी एंटीबायोटिक भी दिए जाते हैं। (d) कारण का इलाज * यदि पित्त की पथरी कारण है, तो ERCP की जाती है। * अल्कोहल का सेवन वजह है, तो शराब को पूरी तरह से छोड़ना जरूरी है। ३). क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस का इलाज यह बीमारी लंबे समय तक बनी रहती है, और धीरे-धीरे अग्न्याशय को हानि करते है। इसका इलाज बहुत ही ज्यादा जटिल होता है।  (a) जीवनशैली में बदलाव * शराब का सेवन और धूम्रपान को पूरी तरह से छोड़ना। * तैलीय और ज्यादातर मसालेदार भोजन से बचना। * कम फैट वाले भोजन को ही लेना।  (b) दर्द का प्रबंधन * लंबे समय दर्द रहने पर पेनकिलर दिया जाता है। * कभी तो नर्व ब्लॉक भी किया जाता है। (c) पाचन एंजाइम की कमी की पूर्ति क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस में अग्न्याशय उचित एंजाइम नहीं बना पाता जिससे डॉक्टर पैनक्रियाटिक एंजाइम सप्लीमेंट देते हैं। (d) डायबिटीज का नियंत्रण ऐसे मरीजों के ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल के लिए इंसुलिन या अन्य दवाओं की जरूरत होती है। (e) सर्जरी और एंडोस्कोपी * यदि डक्ट ब्लॉक हो जाता है ,तो एंडोस्कोपिक स्टेंटिंग की जाती है। * कुछ मामलों में पैंक्रियास का भाग भी निकालना जरूरी हो सकता है।  ४). घरेलू और सहायक उपचार * हल्का भोजन करें। * उचित मात्रा में पानी को पिएँ। * डॉक्टर की सलाह से ही विटामिन और खनिज सप्लीमेंट को लें। ५).जटिलताओं की रोकथाम यदि इलाज में देर हो जाए तो निम्न समस्याएँ हो सकती हैं: * पैनक्रियाटिक सिस्ट जैसे प्रॉब्लम * आंतरिक रक्तस्राव  * संक्रमण हो जाना * किडनी फेल्योर  * कमजोरी जैसा लगना इन्हें रोकने के लिए समय पर उपचार और नियमित फॉलोअप बेहद जरूरी है।    *निष्कर्ष*  यदि पैंक्रियाटाइटिस का सही समय पर सही तरह से इलाज मरीज का करवाया जाता है ,तो इस बीमारी का इलाज पॉसिबल है।
Avatar
acute aur chronic pancreas ke factor kya hai
१) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस और क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस के फैक्टर क्या है? पैंक्रियाटाइटिस बहुत ही गंभीर बीमारी की स्थिति है, जिसमें अग्न्याशय में सूजन आ जाती है। अग्न्याशय मानव शरीर के पाचन तंत्र का महत्वपूर्ण भाग है। जो की ,इंसुलिन और ग्लूकागॉन जैसे हार्मोन और पाचक एंजाइम को बनाता है। - इसमें जब सूजन हो जाती है, तो पाचन की प्रक्रिया और शरीर का शुगर लेवल दोनों को असर होते हैं. *पैंक्रियाटाइटिस २ तरह का होता है* - १) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस :– ये अचानक से होने वाली, तेज और छोटे समय तक की सूजन हो सकती है. - २) क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस : – ये लंबे समय तक होने वाली और बार-बार होने वाली सूजन से होता है। इन दोनों स्थितियों के होने कई कारण से होते हैं। *1.एक्यूट पैंक्रियास के कारण* यह आमतौर पर अचानक से होता है ,और सही इलाज मिलने पर पूरी तरह से ठीक हो सकता है। इसके प्रमुख कारण हैं , जो क इस तरह से है , (क) पित्ताशय की पथरी - पित्त थैली में बने स्टोन से बाइल डक्ट को ब्लॉक कर देते हैं, जिस से पैनक्रियाटिक सही तरीके से एंजाइम निकल नहीं पाते है ,और पैंक्रियाज में ही एक्टिव होकर सूजन कर देते हैं। (ख) अधिक मात्र में शराब को पीने से भी पैंक्रियाज की कोशिका को ज्यादा नुकसान होता है. (ग) जब खून में ट्राइग्लिसराइड का लेवल 1000 mg/dL से भी ज्यादा हो जाने पर भी पैंक्रियाटाइटिस का कारण बनता है। (घ) कुछ दवाइयाँ के प्रभाव से भी साइड इफेक्ट के रूप में पैंक्रियाज पर प्रभाव होता हैं। (ङ) कुछ वायरल या बैक्टीरियल के संक्रमण, से भी अग्न्याशय में सूजन का कारण होता है। *2.क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस के कारण* यह बीमारी लंबे समय तक की चलने वाली बीमारी है, जिस में बार-बार सूजन होती रहती है। और धीरे-धीरे से पैंक्रियाज की कोशिका को नुक्सान होता हैं। - इसका सबसे बड़ा खतरा मधुमेह या पैंक्रियाटिक कैंसर का कारण बन सकता है। (क) अल्कोहल का सेवन : लगातार ज्यादा मात्रा में शराब पीने से पैंक्रियाज में सूजन आती है, और यह क्रोनिक रूप में बदल जाता है. (ख) धूम्रपान : पैंक्रियाटिक डैमेज को असर करता है , और शराब के असर को अधिक गंभीर बना देता है। (ग) जेनेटिक फैक्टर : कुछ लोगों में पारिवारिक इतिहास से जोखिम को और भी बढ़ा देते हैं। (घ)ऑटोइम्यून पैंक्रियाटाइटिस : जब हमारे शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से पैंक्रियाज पर ही अटैक करने लगता है। (ङ) पैंक्रियाटिक डक्ट का जन्मजात असामान्य का होना। (च) खून में बढ़े हुए ट्राइग्लिसराइड या कैल्शियम का लेवल लंबे समय तक पैंक्रियास पर असर होता है. (छ) अगर बार-बार एक्यूट पैंक्रियास हो तो वह धीरे-धीरे क्रोनिक में हो जाता है. 3. एक्यूट और क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिसके बीच में तुलना? - शुरुआत : एक्यूट में अचानक से धीरे-धीरे, और क्रोनिक में लंबे समय में - अवधि : एक्यूट बीमारी में कुछ दिनों से कुछ हफ्तों तक पर क्रोनिक में लम्बे वर्षों तक जारी। - मुख्य कारण : एक्यूट में पिताशय की पथरी , कुछ लंबे समय तक शराब, जब की क्रोनिक में धूम्रपान और जेनेटिक फैक्टर.4. बचाव के क्या उपाय है? - शराब और धूम्रपान से हमेशा के लिए दूरी बनाएँ। - अच्छे डाइट को अपनाएँ जोकि खासकर के लो-फैट और हाई-फाइबर डाइट।  - नियमित कसरत करे और वजन को कण्ट्रोल में रखें।  - रक्त शुगर और ट्राइग्लिसराइड की जाँच को करवाते रहें।  - समय पर गॉलब्लैडर स्टोन का सही इलाज करवाएँ।    *निष्कर्ष*  ये दोनों ही बीमारी बहुत ही गंभीर की स्थिति है , जिन के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस यह तो अचानक से होता है ,और सही इलाज है , जबकि क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस यह तो लंबे समय तक चलकर अग्न्याशय को स्थायी नुकसान पहुँचा देता है।
Avatar
homeopathic me vocal cord nodules ka ilaaj
१) वोकल कॉर्ड नोड्यूल्स का क्या इलाज है? यह एक तरह के  गले की एक नार्मल समस्या है, जिसे  स्पीकर नोड्यूल्स भी कहते  है। - यह छोटे और कठोर उभार होते हैं,जो की वोकल कॉर्ड्स पर बन जाते हैं। इनका मुख्य कारण गले का ज्यादा मात्रा में उपयोग होने से , ज़ोर से लगातार बोलना, गाना गाना। - कभी-कभी खुरदुरी हुयी अवाज और कभी बैठी हुई अवाज  लगने लगती है। २) वोकल कॉर्ड नोड्यूल्स होने पर क्या लक्षण हो सकते है? वोकल कॉर्ड नोड्यूल्स होने के लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है. जैसे की,   - खुरदुरी आवाज़ या  अवाज  का बैठ जाना।  - ज्यादा लंबे समय तक बोलने पर  - गले में खराश का महसूस होना - आवाज़ की टोन पर नियंत्रण खोना - गले में जलन का महसूस होना  ३) वोकल कॉर्ड नोड्यूल्स के क्या कारण दिखाई देते है? वोकल कॉर्ड नोड्यूल्स के कारण निचे अनुसार हो सकते है,जैसे की, -  ज़ोर से ज़ोर पर बोलना या चिल्लाना से  - लंबे समय में गाना गाना, वो भी ऊँचे सुरों में  - धूम्रपान का सेवन और शराब का सेवन करने से - गले में संक्रमण होने पर  ४) वोकल कॉर्ड नोड्यूल्स के घरेलू और प्राकृतिक उपाय क्या है? - गले की सूजन और खराश को कम करने के लिए दिन में  ३-४  बार नमक पानी के गरारे करना फायदेमंद है। - भाप लेने पर गले की नमी होती है, और वोकल कॉर्ड्स पर दबाव भी कम होता है।  - दिनभर में उचित पानी पीना बहुत ज़रूरी है।- अदरक वाली चाय पिने और शहद से गले को आराम देते हैं।  - धूम्रपान और शराब से परहेज़ करने से ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं और नोड्यूल्स को बिगाड़ सकते हैं।  ५) वोकल कॉर्ड नोड्यूल्स के लिए बचाव के तरीके? - सामान्य आवाज़ में ही बात करना सही होता है। -  लगातार बात नहीं करें और  बीच-बीच में गले को भी आराम दें  - पर्याप्त मात्रा में नींद ले। और तनावमुक्त जीवन को जिए। - पब्लिक में स्पीकिंग करने से पहले ही वॉयस वॉर्म-अप करें #कब डॉक्टर से संपर्क करें? - यदि आवाज़ के लगातार १-२ हफ़्तों तक भारी रेहने से। - बोलते समय दर्द का महसूस होना  - खाँसी या जलन जैसा लगना *निष्कर्ष*  वोकल कॉर्ड नोड्यूल्स सामान्य समस्या  है यदि उसका सही समय पर सही तरह से   इलाज न  किया जाये तो आगे चलकर ज्यादा प्रॉब्लम हो सकती है।
Avatar
chronic pancreas kya hai
१)क्रॉनिक पैंक्रियास का क्या इलाज है? क्रॉनिक पैंक्रियास यह लम्बे समय तक की बीमारी है, जिसमें अग्न्याशय को धीरे-धीरे हानि होने लग जाता है। -  अग्न्याशय की पाचन एंज़ाइम और हार्मोन  बनाने की कार्य क्षमता  को असर होती है। - आमतौर पर लंबे समय तक शराब का सेवन करने , धूम्रपान करने , बार-बार होने वाले एक्यूट पैंक्रियास के कारणों से होता है।  - इस बीमारी का पूरी तरह तो इलाज संभव नहीं है, पर सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव लाने पर से लक्षणों को कण्ट्रोल किया जा सकता है. २) क्रॉनिक पैंक्रियास के मुख्य लक्षण क्या हो सकते है? - पेट के ऊपरी भागों में लगातार दर्द का होना - भोजन को पचने में परेशानी होना  - वज़न का कम हो जाना - मधुमेह होने का खतरा  ३) क्रोनिक पैंक्रियास के मुख्य कारण क्या है? क्रोनिक पैंक्रियास के प्रमुख कारणों में शामिल हैं जो की ,इस तरह से है , - ज्यादा मात्रा में शराब का  डेली सेवन करने से  -  ध्रूमपान करने से  - आटोइम्यून रोग - उच्च कैल्शियम का स्तर - बार-बार होने वाले एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस  ४). चिकित्सकीय उपचार  (क)दवाएँ - दर्द नियंत्रण : दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर पेनकिलर दवाइयाँ  लिखते हैं। - एंज़ाइम सप्लीमेंट्स: अग्न्याशय जितना चाहिए उतना एंज़ाइम नहीं बना पाता है , इसलिए पाचन को सुधारने के लिए पैनक्रियाटिक एंज़ाइम कैप्सूल दिया जाता है. - यदि मरीज को मधुमेह हो जाए तो इंसुलिन या ओरल हाइपोग्लाइसेमिक दवाएँ दी जाती हैं। (ख) एंडोस्कोपिक उपचार - यदि पैन्क्रियाटिक नली में पथरी हो, तो एंडोस्कोपिक के माध्यम से उसे हटाया जा सकता है। जिस से की दर्द कम होता है, और पाचन की क्रिया में सुधार होता है। (ग) जीवनशैली और घरेलू उपाय - शराब और धूम्रपान से दुरी  : क्रॉनिक पैंक्रियास के इलाज में शराब और धूम्रपान को पूरी तरह से छोड़ना  चाहिए।  - संतुलित आहार : कम चर्बी वाला भोजन करने से पाचन तंत्र पर ज़्यादा लोड न पड़े ,जिस के लिए भोजन को छोटे-छोटे भागो में लेना बेहतर है। - डॉक्टर की सलाह से विटामिन-B12 और विटामिन-D की दवाई लेने से शरीर स्वस्थ होता है.  - तनाव प्रबंधन : लगातार दर्द होने से तनाव और डिप्रेशन हो सकता है। इसके लिए योग, करना अच्छा होता है।  ५) क्रोनिक पैंक्रियास की संभावित जटिलताएँ है ? - मधुमेह - वज़न में भारी कमी होने से - पित्ताशय की समस्या होने से  - पैन्क्रियाटिक कैंसर का खतरा ज्यादा होने पर
Avatar
liver cirrhosis ka homeopathic me ilaaj
१) लिवर सिरोसिस का क्या इलाज है? लिवर सिरोसिस बहुत ही गंभीर बीमारी है, जिसमें लिवर की कोशिका धीरे - धीरे से  ख़त्म हो कर उनकी जगह पर फाइब्रोसिस बन जाते हैं। - यह स्कार टिश्यू लिवर के कार्यों में जैसे की ,खून का शुद्धिकरण , पित्त का उत्पादन, दवाइयों के मेटाबॉलिज्म और पोषक तत्वों के भंडारण को असर करता है। - यह बीमारी धीरे-धीरे से बढ़ने लग जाता है, और सही समय पर इलाज न हो तो यह  लिवर कैंसर तक भी हो सकता है। २) लिवर सिरोसिस का इलाज कैसे होता है? लिवर सिरोसिस का पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है, क्योंकि जो कोशिका नष्ट हो चुकी है ,वो लिवर की कोशिका वापस नहीं आतीं है। - पर सही इलाज और जीवनशैली के परिवर्तन से कम हो सकता है. #लिवर सिरोसिस कई कारणों से हो सकता है, जैसे की, - शराब का सेवन हमेशा के लिए बंद करना चाहिए.  - हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C को कण्ट्रोल किए जा सकते हैं। - वजन का घट जाना, मधुमेह का सही प्रबंधन करना। *दवाइयाँ और चिकित्सकीय प्रबंधन* - डाययूरेटिक्स : शरीर में जमा पानी और सूजन को कम करने के लिए। - रक्तस्राव के खतरे को कम करने के लिए.  - हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी दिमाग पर असर न हो उसके लिए। *जीवनशैली में परिवर्तन*  - शराब को पूरी तरह सें बंद कर देना।  - कम चर्बी वाले और संतुलित प्रोटीन वाले आहार का सेवन  -नमक के पानी से सिकाई करने पर सूजन कम हो जाती है।  - ज्यादा जंक फूड, और प्रोसेस्ड चीज़ों से बचना। - नियमित कसरत करना *जटिलताओं का इलाज* सिरोसिस के कारण से कई जटिलता हो सकती हैं, जिनका अलग-अलग इलाज किया जाता है. -खून की उल्टी/खून आना : एंडोस्कोपी के माध्यम से वैरिक्स का इलाज और दवाइयाँ।  - लैक्टुलोज या एंटीबायोटिक से अमोनिया को कम करना। -  नियमित अल्ट्रासाउंड और AFP टेस्ट से मॉनिटरिंग करते रहना।  *लिवर ट्रांसप्लांट* यदि सिरोसिस ज्यादा हो चुका हो और लिवर की  कार्य करने की क्षमता भी खत्म हो जाए, तो मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है. - इसमें बीमार  पर्सन के लिवर को निकाल कर डोनर का स्वस्थ लिवर लगाया जाता है। - यह बहुत ही महंगा और जटिल इलाज है, पर कई पेशेंट की जिंदगी को बचाता है।
Avatar
epididymal cyst treatment in homeopathy
१) एपिडिडिमल सिस्ट क्या होता है? एपिडिडिमल सिस्ट एक छोटा, मुलायम, तरल से भरा थैला है, जो की एपिडिडिमिस के अंदर ही बनता है। - यह गोल के आकार में होता है, जो की अंडकोष की सतह पर महसूस किया जाता है। - जब इस सिस्ट में शुक्राणु मौजूद रहते हैं तो इसे स्पर्माटोसील भी कहा जाता है। २) एपिडिडिमल सिस्ट होने के कारण क्या होते है? एपिडिडिमल सिस्ट होने के कारण निचे अनुसार हो सकते है. ,जैसे की,  -एपिडिडिमिस नलियों में ब्लॉकेज :– शुक्राणु और तरल का सामान्य प्रवाह रुक जाने से थैली जैसी संरचना बनती है. - शरीर में हार्मोनल का परिवर्तन होने से भी इस सिस्ट के बनने में रोल अदा करते है। - कभी-कभी चोट या संक्रमण के बाद में भी यह समस्या देखने को मिलती है. - यह समस्या 40 वर्ष से ज्यादा उम्र के पुरुषों में देखने को मिलता है.| ३) एपिडिडिमल सिस्ट होने के क्या लक्षण होते है? एपिडिडिमल सिस्ट होने के लक्षण निचे बताये गए अनुसार हो सकते है. जैसे की,  - अंडकोष में गांठ का होना या तो सूजन जैसा हो जाना - अंडकोष में भारीपन जैसा लगना  - कभी-कभी हल्का दर्द का होना - बड़े सिस्ट हो जाने पर चलने, और दौड़ने में परेशानी। ४) एपिडिडिमल सिस्ट का निदान कैसे किया जाता है? एपिडिडिमल सिस्ट का निदान करने के लिए डॉक्टर कुछ जाँच का सहारा लेते है. - फिजिकल एग्जामिनेशन : – डॉ. अंडकोष को छू कर ही गांठ को समझते हैं।  - अल्ट्रासाउंड टेस्ट करने से पता चलता है, कि गांठ ठोस है या तरल से भरी हुई। - यदि संक्रमण का संदेह हो तो मूत्र और रक्त की भी जांच की जाती है। #घरेलू और सहायक उपाय? - गर्म किये हुए पानी से सिकाई करने से दर्द और सूजन में बहुतु ही आराम होता है.  - नियमित स्वयं की जांच करना। जिस से की किसी नए बदलाव का पता चल सके। - ज्यादा दर्द या तेजी से आकार बढ़ने की स्थिति में डॉक्टर से मिलना चाहिए  ५) एपिडिडिमल सिस्ट की क्या जटिलताएँ होती है? एपिडिडिमल सिस्ट की जटिलताएँ निचे अनुसार होती है. जैसे की,  - संक्रमण के कारण से सिर में तेज दर्द का होना और बुखार जैसा लगना ।- बहुत बड़ा सिस्ट हो जाने पर अंडकोष पर दबाव पड़ने पर असहजता होती है.  - कुछ दुर्लभ मामलों में प्रजनन क्षमता पर भी असर होता है.
Avatar
acute necrotizing pancreatic ka nidaan
१) एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैनक्रियाटाइटिस का इलाज ? पैंक्रियास हमारे शरीर का मुख्य भाग है , पैंक्रियास का काम पाचक एंजाइम बनाना, जो की भोजन को पचाने में मदद करते हैं। और इंसुलिन और ग्लूकागॉन जैसे हार्मोन बनाना, जो रक्त शर्करा को कण्ट्रोल करते हैं। - एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैनक्रियास बहुत ही गंभीर और जानलेवा बीमारी है। जिसमे पैनक्रियास की कोशिका में सूजन होने और एन्ज़ाइम के कारण से नष्ट होने लगती हैं और “नेक्रोसिस” होता है। - यह अचानक से शुरू होती है ,और पेशेंट को पेट में तेज दर्द , उल्टी, पाचन संबंधी समस्या होती हैं।  - यदि सही समय पर सही इलाज न मिले तो यह मरीज के मृत्यु तक का कारण भी बन सकती है।  २) ANP इलाज के मुख्य लक्ष्य? 1. शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन सही से बनाए रखना। 2. संक्रमण को रोकना  3. जटिलताओं का सही से इलाज  4. सर्जरी या ड्रेनेज  ३) एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियास के क्या कारण हो सकते है? एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियास होने कुछ कारण निचे बताये अनुसार हो सकते है. जैसे की,  - पित्त की पथरी :– पैनक्रियाज़ की नली में रुकावट डाल के एंजाइम का बहाव को रोक देता है. -ज्यादा शराब का लंबे समय तक सेवन करने से लंबे समय तक ज्यादा शराब का सेवन करने से  - कुछ दवाओं के ज्यादा उपयोग करने से  - वायरल और बैक्टीरियल जैसे संक्रमण होने से । ४) एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैनक्रियाज़ होने पर क्या लक्षण होते है? एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैनक्रियाज़ के लक्षण इस तरह से हो सकते है.जैसे की , - अचानक से तेज पेट में दर्द का होना - उल्टी और मतली  - बहुत ही तेज ह्रदय की धड़कन - सांस लेने में भी बहुत परेशानी का होना - ब्लड प्रेशर का कम होना  5 . एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैनक्रियाज़ के रोकथाम का उपाय क्या है? ANP का उपाय निचे बताये अनुसार हो सकता है, जैसे की ,  - संतुलित आहार और कम मसालेदार भोजन खाने से बचना चाहिए. - पित्त की पथरी का सही समय पर ही सही इलाज करते रहना। - शुगर लेवल को कण्ट्रोल में रखना  - मोटापा को कम करना
Avatar
liver cirrhosis ka ilaaj kya hai?
१) लिवर सिरोसिस क्या बीमारी है? लिवर सिरोसिस गंभीर बीमारी है, जिसमें लिवर की कोशिका धीरे-धीरे से क्षतिग्रस्त होकर फाइब्रोटिक में परिवर्तन हो जाते हैं।  - यह लिवर के कार्य करने को असर कर देती है.जैसे कि , प्रोटीन बनाना, खून को फ़िल्टर करना और हानिकारक पदार्थों को अदंर से बाहर निकालना। - यदि इसका सही समय पर उपचार न किया जाये तो जानलेवा भी हो सकता है। २) लिवर सिरोसिस होने पर क्या कारण दिखाई देते है? लिवर सिरोसिस होने के कई कारणों हो सकता है, जैसे की, - लंबे समय से ज्यादा शराब का सेवन करने पर लिवर की कोशिकाओं को हानि हो सकती है। - हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण के वायरस संक्रमण से भी लिवर को स्थायी हानि होती है। - ऑटोइम्यून बीमारियाँ प्रतिरक्षा प्रणाली लिवर पर हमला करने लग जाती है। - पित्त प्रवाह रुक जाने से भी लिवर को हानि होती है. ३) लिवर सिरोसिस पर क्या लक्षण हो सकते है? लिवर सिरोसिस के लक्षण निचे अनुसार हो सकते है ,जैसे की , - थकान या कमजोरी लगना  - भूख नहीं लगना - वजन कम हो जाना  - त्वचा और आंखों का का पीला पड़ जाना  - सोने में परेशानी का आना  ४) लिवर सिरोसिस का इलाज? *लक्षणों और जटिलताओं का प्रबंधन* - पेट में पानी (Ascites) – नमक कम करना,डाइयूरेटिक दवाएँ - संक्रमण : समय पर एंटीबायोटिक दिया जाता है। * जीवनशैली में परिवर्तन * - संतुलित आहार का डेली उपयोग करना - नमक का कम उपयोग करना  - धूम्रपान या शराब से दुरी रखना।5) लिवर सिरोसिस रोकथाम के उपाय ? - हेपेटाइटिस बी का टीका लगना चाहिए। - स्वच्छ पानी और स्वच्छ भोजन को उपयोग में लेना - नियमित स्वास्थ्य की जांच करवाना  - डेली कसरत करना।
Avatar
acute pancreatic ka karan kya hai
1) एक्यूट पैंक्रियास बीमारी क्या है? एक्यूट पैंक्रियास बहुत ही गंभीर और अचानक से होने वाली सूजन संबंधी की बीमारी है. जो की अग्न्याशय में होती है। - अग्न्याशय मानव शरीर का मुख्य भाग होता है। जो की पेट के पीछे स्थित ग्रंथि है, जिसका काम पाचन के लिए एंजाइम और ब्लड शुगर को कण्ट्रोल करने के लिए हार्मोन बनाता है। - जब किसी कारण अग्न्याशय के पाचक एंजाइम समय से पहले ही एक्टिव हो जाते हैं, तो वे खुद ही अग्न्याशय के ऊतकों को पचाने लगते हैं।   2) एक्यूट पैंक्रियास बीमारी होने के कारण क्या हो सकते है? 1. पित्त की पथरी यह सबसे नार्मल कारण में से एक है। जो लगभग ४० से ४५% मामलों में एक्यूट पैंक्रियास का कारण होता है। - पित्त की पथरी छोटी और कठोर होती हैं, जो की पित्ताशय में बनती हैं। जब यह पथरी बाइल डक्ट में फंस जाते है, तो पाचक रस का प्रवाह रुक जाने , और एंजाइम वापस पैनक्रियास में जमा होकर सूजन कर देते है।  2. ज्यादा शराब का सेवन करना - लंबे समय से ज्यादा शराब पिने से पैनक्रियास पर दबाव पड़ता है। और एंजाइम की समय से पहले ही एक्टिव और पैनक्रियास की कोशिका को नुकसान होता है. 3. उच्च ट्राइग्लिसराइड का लेवल  - ज्यादा ट्राइग्लिसराइड फैटी एसिड में टूट कर पैंक्रियास को हानि कर सकते है. 4. चोट या सर्जरी  पेट पर चोट लगने , और सड़क दुर्घटना , खेल के दौरान में चोट लगने , पैनक्रियास को हानि कर सकते है. 5. कुछ दवाएं दवाओं के साइड इफेक्ट से पैनक्रियास पर असर हो सकता है. 6. बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण करने से - वायरल संक्रमण के कारण से : मम्प्स , और कॉकसैकी वायरस से भी पैनक्रियास को असर होता है। - बैक्टीरियल संक्रमण के कारण से : कुछ बैक्टीरिया रक्त से पैनक्रियास में सूजन कर देते है। 7.अनुवांशिक कारण होने से - कुछ लोगों में जन्म से अनुवांशिक कारण होने से ही पैनक्रियास के एंजाइम से जुड़ी समस्याएं होती हैं, 8. कैल्शियम का ज्यादा स्तर रक्त में कैल्शियम का लेवल बढ़ जाने से पैनक्रियास के अंदर एंजाइम समय से पहले ही एक्टिव हो जाते है. 9. ऑटोइम्यून पैनक्रियाटाइटिस - यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पैनक्रियास पर हमला कर देते है. - कैसे पता चलता है: रक्त टेस्ट में IgG4 का लेवल बढ़ा है, और स्टेरॉयड से इलाज होता है। *निष्कर्ष* एक्यूट पैंक्रियास होने के कई कारण हो सकता है, जिनमें सबसे मुख्य पित्त की पथरी , शराब का बहुत सेवन करना। - अगर समय पर और सही इलाज से मरीज पूरी तरह अच्छा हो सकता हैं, पर देर होने पर यह जानलेवा भी है।
Avatar
acute necrotizing pancreatic treatment in homeopathic
१) एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियास क्या है? यह गंभीर प्रकार की अग्नाशय की सूजन है, जिसमें Pancreas का कुछ भाग सूजने या संक्रमित होने के साथ-साथ में ही मरने लग जाते है। - नार्मल पैंक्रियास में मात्र सूजन ही होती है, पर इस प्रकार में ऊतक नष्ट होना एक गंभीर हो सकता है। - यह बीमारी सही समय पर सही इलाज न हो तो जानलेवा जटिलताएं भी बन सकती है। २) एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियास होने क्या कारण है? ANP के कई कारण हो सकते हैं, जो की प्रकार से हो सकता है , जैसे की - पित्त की पथरी : – पित्त की नली में रुकावट से पैंक्रियास में एंजाइम जमा होने लग जाते हैं। - बहुत ही ज्यादा शराब का सेवन लंबे समय तक पीना ये बहुत बडा कारण है।  - उच्च चर्बी का स्तर : खून में वसा की मात्र ज्यादा Pancreas को नुकसान पहुंचा सकती है।  - कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट से भी पैंक्रियास हो सकता है।    ३) एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियास होने के लक्षण क्या हो सकते है? ANP के लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है, जैसे की, - ऊपरी पेट में तेज़ दर्द का होना जो की पीठ तक फैल सकता है। - बार-बार उल्टी या मितली  - पेट का फूल जाना - तेज़ ह्रदय की धड़कन - कुछ मामलों में तो सांस लेने में बहुत ही परेशानी ४) ANP ठीक हो सकता है? हाँ, अगर सही समय में सही इलाज किया जाये तो ये बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकता है, पर यह बात पर निर्भर करता है:  - अगर Pancreas का कम भाग ही असर हुआ है, तो रिकवरी जल्दी होती है। - अगर बिना संक्रमण वाले केस का इलाज सरल है। - जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, उतनी ही अच्छी रिकवरी की संभावना अच्छी होगी। ५ ) ANP का इलाज ? 1. हॉस्पिटल में भर्ती ज्यादातर केस में पेटेंट को ICU या निगरानी वार्ड में रखा जाता है. 2. शरीर से काफी तरल निकल जाता है, इस लिए IV fluids के द्वारा पूरा किया जाता है।  3. तेज़ दर्द को कण्ट्रोल करने के लिए पेनकिलर्स भी दिया जा सकता है.  4. अधिक केस में खाना मुँह से नहीं देते है, बल्कि नाक के माध्यम से ट्यूब या IV से दिया जाता है,  5.अगर Necrotic area में संक्रमण है ,तो सर्जरी/ड्रेनेज की ज़रूरत है। #रिकवरी के बाद सावधानियां? - शराब को पूरी तरह से छोड़ना बहुत ही ज़रूरी है। - लो-फैट डाइट :– ज्यादा मसालेदार और तना हुआ भोजन से दुरी रखना। - वजन को कंटोल में रखें और नियमित कसरत करें। - समय-समय पर खून और अल्ट्रासाउंड की जांच डॉक्टर के माध्यम, से करवाएं।
Avatar
homeopathic me acute necrotizing pancreas ka ilaaj kya hai
१)एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैनक्रियाज़ का इलाज क्या है? एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियास गंभीर सूजन की स्थिति है, जिसमें पैनक्रियाज़ के ऊतक और उसके आसपास के ऊतक भी नष्ट होने लग जाते हैं। - पैनक्रियाज़ की सामान्य सूजन से भी ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि इसमें मृत ऊतक संक्रमण और अंग विफलता का कारण बन सकते हैं। - अगर इसका सही समय पर इलाज न किया जाये तो जानलेवा भी हो सकता है। 2.पैनक्रियाज़ का क्या काम होता है? - मानव शरीर के मुख्य भाग में से एक है, पैनक्रियाज़। - पैंक्रियास का काम पाचक एंजाइम बनाना, जो की भोजन को पचाने में मदद करते हैं। और इंसुलिन और ग्लूकागॉन जैसे हार्मोन बनाना, जो रक्त शर्करा को कण्ट्रोल करते हैं। 3. एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैनक्रियाज़ होने के क्या कारण है? एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैनक्रियाज़ के कई कारण हो सकते हैं,जो की इस प्रकार से है., - पित्त पथरी :– पैनक्रियाज़ की नली में रुकावट डालकर एंजाइम का बहाव रोक देता है. - लंबे समय तक ज्यादा शराब का सेवन करना - कुछ दवाओं का सेवन से दुष्प्रभाव का होना - संक्रमण : वायरल या बैक्टीरियल का संक्रमण होना । 4 . एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैनक्रियाज़ के होने पर क्या लक्षण दिखाई देता है? एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैनक्रियाज़ के लक्षण इस प्रकार से हो सकते है. जैसे की , - अचानक से तेज पेट का दर्द होना - उल्टी और मतली - तेज ह्रदय की धड़कन - सांस लेने में भी परेशानी - ब्लड प्रेशर का कम हो जाना  5. एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैनक्रियाज़ का निदान कैसे किया जाता है? एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैनक्रियाज़ का निदान के लिए निम्नलिखित जांचें की जाती हैं: - खून की जांच * सीरम ऐमिलेज और लाइपेज का लेवल बढ़ा हुआ * लिवर फंक्शन और किडनी फंक्शन का टेस्ट  - इमेजिंग CT स्कैन : – नेक्रोसिस का पता करने के लिए - MRI :- पित्त नलिका की रुकावट का पता करने के 6 .एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैनक्रियाज़ रोकथाम का उपाय ? - संतुलित आहार और कम मसालेदार खाने से बचना - पित्त पथरी के लक्षणों का सही समय पर इलाज करते रहना - शुगर लेवल को कण्ट्रोल में रखना
Avatar
bacho me enlarged lymph node ka ilaaj
१) बच्चों में Enlarged Lymph Node का इलाज? लसीका ग्रंथियाँ हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली का महत्वपूर्ण भाग हैं। ये छोटे-छोटे सेम आकार की ग्रंथि हैं, जो की पूरे शरीर में होती हैं — खासकर गर्दन, कमर, कान के पीछे के पास। - इनका कार्य शरीर में संक्रमण या सूजन से लड़ने का होता है। बार बच्चों में यह ग्रंथियाँ सूजकर बड़े हो जाते हैं, जिसे Enlarged Lymph Node कहते है। २) लसीका ग्रंथियों का क्या कारण है? बच्चों में लसीका ग्रंथियों बढ़ने के कारण निचे अनुसार हो सकते हैं, इस प्रकार से है, - संक्रमण : सर्दी-जुकाम, खसरा, चिकनपॉक्स आदि। - बैक्टीरियल संक्रमण से : टॉन्सिलाइटिस, कान के संक्रमण, स्किन का संक्रमण।  - टीबी : गर्दन में ग्रंथि का बढ़ना ज्यादा समय तक हो सकता है.  - प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया : शरीर में संक्रमण से लड़ता है तो लसीका ग्रंथियाँ सक्रिय होकर बढ़ जाती हैं। ३) लसीका ग्रंथियों के क्या लक्षण दिखाई देते है? बच्चों में अक्सर ये लक्षण देखे जा सकते हैं जैसे की , - गर्दन, कान, कमर में गांठ या सूजन  - गांठ में हल्का दर्द या कोमलता - गले में खराश का हो जाना  - भूख भी कम लगना  - थकान जैसा लगना  ४) लसीका ग्रंथियों में कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए? यदि बच्चे में ये लक्षण हों तो तुरंत ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए: जैसे की , - 2 हफ्ते से भी ज्यादा समय तक गांठ बनी रहे तब  - गांठ का आकार 2 सेमी से बड़ा हो  - गांठ कठोर हो जाने से - लगातार वजन का कम होना, रात में पसीना आना५) लसीका ग्रंथियों का क्या उपचार है? - वायरल संक्रमण : कुछ मामलों में विशेष दवा की ज़रूरत नहीं होती। पर आराम, उचित पानी और संतुलित आहार से 2 हफ्ते में भी सूजन कम हो जाती है। - बैक्टीरियल संक्रमण : दर्द और सूजन को कम करने के लिए पेरासिटामोल या इबुप्रोफेन। - टीबी : जयदा अवधि का टीबी का ट्रीटमेंट (6-9 महीने तक)।  #लसीका ग्रंथियों रोकथाम के लिए क्या करना चाहिए? - बच्चों को सही समय पर ही टीकाकरण करवाना चाहिए  - साबुन से अच्छे से हाथ धोने की आदत डालें। - पोषणयुक्त भोजन और पर्याप्त नींद दें।
Avatar
grooved pancreatic treatment in homeopathy
१) ग्रूव्ड पैंक्रियाटाइटिस क्या है? ग्रूव्ड पैंक्रियाटाइटिस दुर्लभ प्रकार का पुराना पैंक्रियाज की सूजन है, जो की पैंक्रियाज के सिर और डुओडेनम के बीच में स्थित क्षेत्र — जिसे "groove" कहते है। इस बीमारी को पहचानना बहुत ही कठिन होता है। इसके लक्षण और रेडियोलॉजिकल के लक्षण पैंक्रियाज के कैंसर से मिलते जुलतेही हो सकते हैं। २) ग्रूव्ड पैंक्रियाटाइटिस के प्रकार? ग्रूव्ड पैंक्रियाटाइटिस दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:  - Pure Grooved Pancreatitis : केवल ग्रूव एरिया को ही असर होता है जो की पैंक्रियाज और डुओडेनम के बीच मर ही होता है। - Segmental Grooved Pancreatitis : ग्रूव के साथ पैंक्रियाज के सिर वाले भाग में भी सूजन से असर कर सकता है। ३) ग्रूव्ड पैंक्रियाटाइटिस के क्या कारण होते है? ग्रूव्ड पैंक्रियाटाइटिस के कारण निचे अनुसार हो सकते है. जैसे की , - शराब का सबसे ज्यादा सेवन करने से  - धूम्रपान करने से  - बार-बार एक्यूट पैंक्रियास से - डुओडेनल ग्रंथियों में असामान्य वृद्धि होने से ४) ग्रूव्ड पैंक्रियाटाइटिस के क्या लक्षण होते है? ग्रूव्ड पैंक्रियाटाइटिस के लक्षण कुछ इस तरह के हो सकते है। - ऊपरी वाले भाग में पेट दर्द का होना - मतली और उल्टी - वजन का कम हो जाना - भूख भी न लगना - कभी-कभी चेहरा पीला हो जाना  ५) ग्रूव्ड पैंक्रियाटाइटिस का पता कैसे किया जाता है? ग्रूव्ड पैंक्रियाटाइटिस का सही निदान के लिए डॉक्टर कुछ जांच का सहारा लेते है। - सीटी स्कैन डुओडेनल वॉल का बड़ा होना ग्रूव में फाइब्रोसिस और सिस्टिक में परिवर्तन  - एमआरआई पैंक्रियाटिक डक्ट और बाइल डक्ट का पता करने के लिए - एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड कैंसर से भेद करने में उपयोगी होता है  #ग्रूव्ड पैंक्रियाटाइटिस रोकथाम के लिए क्या करना सही है? - शराब और तंबाकू से दुरी बनाये रखना - स्वस्थ जीवनशैली - अगर बार-बार होने वाले एक्यूट पैंक्रियास कासही इलाज करवाना निष्कर्ष ग्रूव्ड पैंक्रियाटाइटिस बहुत ही जटिल पर सही इलाज से अक्सर पैंक्रियाज कैंसर के जैसा है। सही समय पर निदान से इस बीमारी का इलाज संभव है। किसी को भी लंबे समय से ऊपरी पेट में दर्द, उल्टी, या वजन घट जाने जैसी समस्याएं हो रही हों, तो सही जांच और विशेषज्ञ से परामर्श अनिवार्य है।
Avatar
acute pancreas ke attack kyu aate hai?
#एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के अटैक के कारण क्या हो सकते है? एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस अचानक से शुरू होने वाली स्थिति है, जिस में की अग्न्याशय में सूजन आ जाती है। - यह आपातकालीन स्थिति है जो की कुछ ही घंटों, दिनों में तेज दर्द और कई जटिलताओं के साथ सामने आती है. - पैंक्रियाज हमारे शरीर का महत्वपूर्ण भाग है जो की पाचन एंजाइम और हार्मोन का उत्पादन करता है। - जब यह भाग खुद ही अपने एंजाइम से असर हो जाता है, तब एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस हो सकता है। #किन कारणों से एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के अटैक आते है? निचे बताये गए अनुसार एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का कारण हो सकता है,जैसे की,  *1. पित्ताशय की पथरी यह सामान्य कारण में से एक है। जब पित्ताशय की पथरी पित्त की नली के रास्ते को बंद कर देती है, तो यह पैंक्रियाज की नली को भी असर कर सकती है। इस से पैंक्रियाज एंजाइम बाहर निकलने की बजाय खुद ही ग्रंथि में सक्रिय हो जाते हैं और सूजन करते हैं।  *2.ज्यादा शराब का सेवन  शराब का सेवन करने से सीधे ही पैंक्रियाज की कोशिकाओं को नुकसान होता है और एंजाइम के असामान्य स्राव को बढ़ावा देती है। - ज्यादा जोखिम तब होता है जब मरीज लंबे समय से डेली शराब पी रहा है।  *3.हाई ट्राइग्लिसराइड का लेवल  खून में ट्राइग्लिसराइड नामक चर्बी का स्तर बहुत अधिक हो (>1000 mg/dL), तो एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होने का कारण बन सकता है। - मधुमेह जब कण्ट्रोल में न हो तो यह स्थिति बनती है. *4. दवाओं के दुष्प्रभाव  हर मरीज पर इसका असर अलग-अलग होता है, यदि इन दवाओं के सेवन के बाद में पेट में तेज दर्द या पाचन की समस्या शुरू हो तो डॉक्टर से तुरंत परामर्श लें। *5. यदि पेट पर कोई भी तरह की चोट लगती है या कोई पेट से संबंधित सर्जरी होती है,तो पैंक्रियाज की संरचना प्रभावित हो सकती है। इससे उसमें सूजन और एंजाइम का असामान्य रिसाव हो सकता है।  *6. कुछ वायरस से पैंक्रियाज को असर कर सकते हैं और एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का कारण बन सकते हैं। प्रमुख वायरस में शामिल हैं: - हेपेटाइटिस B का वायरस  - कॉक्सैकी वायरस  *7. वंशानुगत कारण: कुछ लोगों में पैंक्रियाज की बीमारी तो वंशानुगत कारण से होते हैं। जैसे कि, पैन्क्रिएटिक डक्ट की बनावट में असामान्यता ।  - यह पैंक्रियाज एंजाइम को बाहर निकलने में बाधा करती है, जिससे सूजन आ सकती है।*8. ऑटोइम्यून पैंक्रियाटाइटिस: शरीर की इम्यून सिस्टम पर स्वयं ही पैंक्रियाज पर अटैक करती है। इसमें सूजन के साथ-साथ पैंक्रियाज के कार्य करने की क्षमता को भी असर होता है। *9. (ERCP) की जाँच से बाइल डक्ट ,पैंक्रियाटिक डक्ट का पता लगाया जाता है। *10. अन्य कारण: -धूम्रपान : यह पैंक्रियाज को नुकसान पहुंचा सकता है। -पैंक्रियाज की नलियों में ट्यूमर होने से भी। -कभी कारण स्पष्ट भी नहीं होता है ।
Avatar
high ige level kyu increase hota hai
१) हाई IgE का स्तर क्यों बढ़ता है?इम्युनोग्लोबुलिन E एक तरह एंटीबॉडी है ,जो की शरीर के इम्यून सिस्टम द्वारा बनाया जाता है। - इसका काम शरीर को एलर्जी, परजीवी संक्रमण, कुछ वायरल संक्रमण से बचाना होता है। - जब शरीर में IgE का स्तर सामान्य से बहुत ज्यादा हो जाता है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। आज के लेख में IgE का स्तर क्यों बढ़ता है, इसके लक्षण, कारण, जांच विधियाँ और इसके नियंत्रण के उपाय के बारे में बात करने वाले है. २) हाई IgE होने के कारण क्या है? इसके होने के कारण निचे अनुसार हो सकते है , जैसे की,  - एलर्जी : एलर्जी वाले लोग धूल, पराग, जानवरों से एलर्जिक होते हैं।- एटोपी : अस्थमा, एलर्जिक राइनाइटिस स्थितियों में भी IgE का लेवल बढ़ा हुआ पाया जा सकता है। - परजीवी संक्रमण : शरीर में IgE बनाकर लड़ने की कोशिश करता है।  - क्रॉनिक इंफेक्शन या सूजन : लंबे समय से चलने वाले संक्रमण को भी IgE को बढ़ा सकते हैं। - खानपान से जुड़ी एलर्जी से भी लोगमें High IgE की श्रेणी में आ सकते हैं। ३)हाई IgE का स्तर होने के लक्षण क्या हो सकते है? हाई IgE का स्त होने के लक्षण निचे बताये अनुसार है, जैसे की, - लगातार छींक का आते रहना - नाक बहना  - आंखों से पानी निकलना या खुजली का आना - सांस लेने में भी परेशानी होना  - बार-बार गले में खराश का हो जाना  ४)हाई IgE के लिए क्या जांच हो सकती है? *Serum IgE Test* : ब्लड टेस्ट के माध्यम से शरीर में टोटल IgE की मात्रा कितना है वो पता करने के लिए होता है। *Allergen Specific IgE Test* किसी एलर्जन के लिए IgE को मापा जाता है। जैसे की :- धूल, जानवर से बाल से एलर्जी , इत्र ,आदि। ५) एलर्जन से बचाव के लिए क्या करना चाहिए? - जिस चीज से भी एलर्जी वो , उस से बचना सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। जैसे की :धुएं , जानवर के बाल की एलर्जी , इत्र आदि से दूरी रखें। - स्टेरॉइड्स : गंभीर मामलों में डॉक्टर इनहेल्ड या ओरल स्टेरॉइड्स दे सकते हैं। - यदि IgE परजीवी संक्रमण से बढ़ा हो, तो उनका इलाज जरुरी है।
Brahm homeo Logo
Brahm Homeopathy
Typically replies within an hour
Brahm homeo
Hi there 👋

How can we help you?
NOW
×
Chat with Us