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IGE ke badhne ka homeopathy me kya ilaj hai ?
#IGE के बढ़ जाने का क्या उपचार है? - एंटीबॉडी खास तौर पर एलर्जी से जुड़ा है। जब हमारा शरीर किसी भी चीज़ को ख़तरा समझता है,—जैसे की धूल, पालतू जानवरों के बाल, दवाइयाँ, या कुछ खाने वाली चीज़ें—तो IgE का स्तर बढ़ने लग जाता है. - यदि IgE ज़्यादा रहे, तो मरीज को बार-बार एलर्जी, छींक, खुजली, अस्थमा जैसी प्रॉब्लम हो सकती है. - इस आर्टिकल में हम "IgE बढ़ने के कारण, लक्षण और सबसे महत्वपूर्ण इसका इलाज क्या है"। इस पर बात करने वाले है. १) IGE के बढ़ने का प्रमुख कारण क्या है? IGE के बढ़ने का प्रमुख कारण निचे अनुसार हो सकते है, जैसे की, #1.एलर्जी यह सब से नार्मल कारण है. हमारा शरीर किसी भी चीज़ के संपर्क में आने से कुछ प्रतिक्रिया देने लग जाते है, तो IgE बढ़ जाता है। #1.एलर्जी ट्रिगर * धूल और मिट्टी। * पालतू जानवरों के बाल।  * मूंगफली, अंडा, दूध।  * कुछ दवा के सेवन से।  * फंगस / फफूंदी। #2.अस्थमा - अस्थमा वाले दर्दी में IgE का लेवल बहुत ही ज़्यादा होता है. #3.स्किन के एलर्जी - एटॉपिक डर्मेटाइटिस वाले दर्दी में भी IgE का लेवल बढ़ा रहता है। २) IGE बढ़ने के क्या - क्या लक्षण हो सकते है? - IGE बढ़ने के लक्षण निचे बताये अनुसार है,  - बार-बार छींक का आना। - आंखों में पानी का आ जाना और खुजली का होना - सांस का फूलना - बार-बार पेट में दर्द का होना — किसी फूड एलर्जी की वजह से IgE बढ़ा हो तो, - पित्ती  लोग इन लक्षणों को नॉर्मल मानते हैं, पर असल में यह "High IgE" का संकेत हो सकता है। ३) IGE बढ़ने का इलाज क्या है? #1. एलर्जी टेस्ट और सही ट्रिगर को पहचानना  - किस चीज़ से एलर्जी हो रही है, तो,इसे पहचानना इस के लिए डॉ. कुछ जाँच करा सकते हैं, जैसे की, - सीरम IgE टेस्ट  - स्किन प्रिक टेस्ट - विशिष्ट IgE परीक्षण  एक बार कारण का पता चल जाने पर सही इलाज शुरू कर सकते है. #2. ट्रिगर से बचना - IgE को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है।  - धूल से एलर्जी :: अपने घर और ऑफिस को साफ रखें।  - पालतू जानवर के बाल से एलर्जी। - परागकण से एलर्जी :: सुबह-सुबह बाहर कम जाएँ। - जिन भी खाने वाले पदार्थ से एलर्जी हो, तो उनको नहीं खाना।  - अपने किचन को हमेशा साफ रखें।   #3 "Omalizumab (Anti-IgE Therapy)"  यह बहुत ही प्रभावी इलाज है, खास कर के उन मरीजों में जहां पर  - IgE का लेवल बहुत ज्यादा है,  - बार-बार अस्थमा या तो, त्वचा के एलर्जी होती है, - दवा से भी कंट्रोल नहीं हो रहा। "ओमालिज़ुमैब" सीधे IgE को ब्लॉक कर देता है, जिस से के एलर्जी और अस्थमा में काफी हद तक राहत होती है. - यह इलाज महंगा है,और डॉ. के देखरेख में ही करते है. ४) IgE के लिए घरेलू उपाय ? - भाप को लेना। - हल्के गर्म पानी में नमक डाल कर के गरारा।  - हल्दी वाला दूध पीना - अदरक की चाय को पीना  - अपने घर के साफ़ - सफाई  करना।  - विटामिन - C वाले फल (इम्यून सिस्टम को शांत रखता है). Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp:
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Food Poisoning kya hai or kyu hota hai
#फूड पॉइजनिंग का इलाज – कारण, लक्षण और सही उपचार हम में से भी कितने लोग कभी न कभी तो,फूड पॉइजनिंग का शिकार हुए ही होंगे। खराब भोजन खाने के कुछ ही घंटों के बाद में जब उल्टी, दस्त, और पेट में दर्द जैसी परेशानी होती है, तो यही *फूड पॉइजनिंग* कहलाती है। - यह समस्या देखने में तो, बहुत ही साधारण है, पर इसका सही इलाज अगर सही समय पर न किया गया , तो यह शरीर को गंभीर रूप से डिहाइड्रेट कर सकती है। कुछ केस में तो,अस्पताल में एडमिट होने की भी जरुरत पड़ सकती है. --- १)फूड पॉइजनिंग क्या है? यह एक तरह का संक्रमण या विषाक्तता है, जो तब होता है, जब हम ऐसा खाना या पानी को ग्रहण करते हैं, जिस में बैक्टीरिया, और वायरस, या उनके द्वारा उत्पन्न टॉक्सिन मौजूद होते हैं। सबसे आम कारण जीवाणु हैं —जो की ,इस तरह का है, ""सैल्मोनेला"" ""ई.कोलाई"" ""नोरोवायरस और रोटावायरस"' इन सूक्ष्मजीव खराब या बासी खाना, और ख़राब पानी, या गलत तरीके से स्टोर किए गए फूड में तेजी से बढ़ते हैं। २)फूड पॉइजनिंग होने के मुख्य कारण क्या है? फूड पॉइजनिंग होने के कारण निचे बताये अनुसार हो सकते है, जैसे की,  - बासी भोजन या तो,अधपका हुआ भोजन को खाने से.  - दूषित पानी को पिने से भी।  - सड़क के किनारे खुले में रखे हुए समोसे, चाट, या कटे फल को खाने से ।  - बिना हाथ को धोकर खाना को खाने से। - फ्रिज में ज्यादा लंबे समय तक रखे हुए भोजन को दूसरी बार गर्म कर के खाने से । ३)फूड पॉइजनिंग होने के क्या लक्षण होते है ? इसके लक्षण आम तौर पर २ से ४ घंटे के अंदर दिखने लग जाते है, जैसे की — - उल्टी का होना। - पेट में ऐंठन का होना और तेज दर्द का होना। - कमजोरी और चक्कर जैसा लगना।  - बुखार का आना  * डिहाइड्रेशन का संकेत।  बच्चे, और बुजुर्ग , गर्भवती महिला अगर इस तरह का कोई भी लक्षण हों, तो इलाज में देर नहीं करना चाहिए.  ४)फूड पॉइजनिंग का घरेलू इलाज? - उल्टी और दस्त से अपने शरीर में पानी की बहुत ही कमी हो जाती है। इसलिए "ORS का घोल", और "नारियल पानी" बार-बार लेते रहें। - जब तक लक्षण बने रहें, तब तक हल्का और सादा भोजन करे।  - अदरक वाली चाय पिने से उल्टी और मिचली से राहत दिलाते हैं। - दही में “गुड बैक्टीरिया” आंत को संतुलित करते हैं, जिस से रिकवरी में बहुत ही मदद मिलती है.  ५) बचाव के लिए क्या उपाय है? फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए कुछ उपाय बताये है,- - भोजन को हमेशा ताज़ा और पुरे तरह से पका हुआ ही खाएं। - हमेंशा अपने हाथ को अच्छे से धोने की आदत डालें।  - सड़क किनारे खुले में बिकने वाले खाना को न खाएं।  - फ्रिज का तापमान 4°C से कम रखें। - अपने किचन को अच्छे से साफ रखें।
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pancreatitis bimari kab or kyu hota hai?
१) पैन्क्रियाटाइटिस कब और क्यों होता है? क्या आप ने कभी भी किसी को यह कहते हुए सुना है कि, “मेरे पैनक्रियास में सूजन आ गई है”? - यह सुनाई देने वाला वाक्य गंभीर बीमारी की और संकेत करता है — जैसे की "पैन्क्रियाटाइटिस"। - यह बीमारी शरीर के उस अंग में हो जाती है, जो की , भोजन को पचाने और ब्लड शुगर को कण्ट्रोल करने का काम करता है — "अग्न्याशय"। २) पैंक्रियास क्या काम करता है? पैंक्रियास हमारे पेट के पीछे, पेट और रीढ़ की हड्डी के बीच में होता है। इसके काम करने के दो तरह होते है — 1. पाचन से जुड़ा हुआ काम digestive enzymes यह *पाचन एंजाइम* बनाता है,जो की भोजन में रहे हुए ,वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट को सही से पचाने में भी मदद करते हैं। 2. *हार्मोनल कार्य* इंसुलिन और ग्लूकागोन यह *इंसुलिन और ग्लूकागोन* जैसे हार्मोन को बनाता है, जो की हमारे ब्लड शुगर को कण्ट्रोल करते हैं। जब किसी भी कारण से यह ग्रंथि में सूजन आ जाती है. या इसके द्वारा बनाए गए एंजाइम खुद के भाग को नुकसान करने लग जाते हैं, तो इस स्थिति को "पैन्क्रियाटाइटिस" कहते है. #पैन्क्रियाटाइटिस कितने तरह के होते है ? - दो मुख्य तरह के होते हैं — 1. "तीव्र अग्नाशयशोथ" - यह अचानक से ही शुरू होता है. और बहुत ही तेज़ दर्द होता है। कुछ दर्दी में तो, कुछ दिनों में अपने आप से ठीक हो जाता है, पर गंभीर मामलों में यह जानलेवा होता है. 2. "दीर्घकालिक अग्नाशयशोथ" - यह ज्यादा लंबे समय तक के लिए बना रहता है,और धीरे-धीरे अग्नाशयशोथ को नुकसान करता है. - इसमें पाचन क्षमता बहुत ही कम हो जाती है, और मधुमेह जैसी समस्या भी होता है. ३) पैन्क्रियाटाइटिस कब होती है? यह किसी भी उम्र ले लोगो में हो सकता है, पर "३० से ५५ वर्ष" के बीच में ज्यादा देखने को मिलता है। - यह पुरुषों में अधिक होता है, , ज्यादा "शराब पीने वालों" में। "अक्सर इसके लक्षण अचानक से ही दिखाई देते हैं, जैसे की, -"- अचानक से तेज़ पेट में दर्द का होना - मिचली और उल्टी जैसा लगना - पेट में सूजन का हो जाना अगर ऐसे लक्षण हो तो, पैंक्रियास में सूजन होना शुरू हो चूका है। ४) पैन्क्रियाटाइटिस क्यों होता है? पैन्क्रियाटाइटिस होने के कई कारण हो सकते है, जैसे की, - #1." ज्यादा शराब का सेवन करने से " लंबे समय से शराब पीने पर पैंक्रियास के कोशिका धीरे-धीरे से नष्ट होने लगते है. #2."पित्त की पथरी" - यह "तीव्र अग्नाशयशोथ" का सबसे आम कारण है, - पित्त की थैली में बनी छोटी पथरियाँ डक्ट को ब्लॉक कर देती हैं। इस से पाचन पैंक्रियास में रुक जाते हैं, और उसको नुकसान करते हैं। #3."अधिक वसा का लेवल"  - यदि खून में *triglyceride* बहुत ही अधिक हो जाए तो यह पैंक्रियास में सूजन का कारण बन सकता है।  #4. "संक्रमण" कई बार वायरस और बैक्टीरिया से भी Pancreatitis का कारण बन सकते है.  # 5. "वंशानुगत" कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों से भी इसका खतरा ज्यादा होता है। ५) पैन्क्रियाटाइटिस से बचने के लिए क्या उपाय है? * शराब के सेवन को बिल्कुल ही बंद कर दे.  *फैट और ज्यादा तले हुए भोजन को करने से परहेज करें। *नियमित अपने स्वास्थ्य की जांच कराएँ*, अगर पित्त की पथरी है, तो. *वजन को कण्ट्रोल में रखे.  *डॉक्टर के द्वारा दी गई दवाइयाँ को ही लें* और कोई दूसरी दवा को न ले.
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kya baar baar khuni dast hona ulcerative colitis ho sakta hai?
१) क्या बार-बार खूनी दस्त होना अल्सरेटिव कोलाइटिस हो सकता है? अगर बार-बार "खूनी दस्त " हो रहा है, तो यह पाचन की समस्या ही नहीं, बल्कि "अल्सरेटिव कोलाइटिस " नामक गंभीर आंतों की बीमारी का संकेत हो सकता है। - यह रोग बड़ी आंत और मलाशय के अंदरूनी पर्त में सूजन , घाव पैदा करता है, जिस के कारण से बार-बार दस्त का होना , खून निकलने जैसी समस्याएँ होती हैं। #अल्सरेटिव कोलाइटिस क्या है? अल्सरेटिव कोलाइटिस "क्रॉनिक (दीर्घकालिक)" सूजन के संबंधी रोग है, जो की "इरिटेबल बाउल डिजीज" समूह का भाग है। - इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली गलती से बड़ी आंत के कोशिका पर हमला करने लग जाती है, जिस से सूजन,और अल्सर बन जाते हैं। - इस रोग मुख्य रूप से तीन प्रकार माने जाते हैं- 1. Ulcerative Proctitis :: – केवल मलाशय तक ही सीमित सूजन। 2. Left-sided Colitis :: बाईं ओर के बड़ी आंत तक फैली सूजन। 3. Pancolitis :: बड़ी आंत में सूजन और घाव। २) अल्सरेटिव कोलाइटिस के प्रमुख क्या लक्षण है? इसके लक्षण धीरे-धीरे से बढ़ते हैं ,और समय के साथ - साथ में गंभीर हो सकते हैं। - बार-बार "दस्त", जिसमें से **खून आता है।  - पेट में "मरोड़" और बहुत ही तेज दर्द का होना।  - वज़न का कम हो जाना। और भूख में भी कमी हो सकती है. - कुछ मामलों में तो, "जोड़ों में दर्द" भी हो सकता है. अगर व्यक्ति कई हफ्तों से खूनी दस्त से जूझ रहा है, तो तुरंत ही डॉक्टर से मिलना चाहिए। ३) अल्सरेटिव कोलाइटिस के प्रमुख कारण क्या - क्या है? इसका अभी तक सटीक कारण पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं, पर कई कारक इसके लिए जिम्मेदार है, - 1. ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया शरीर के रोग-प्रतिरोधक प्रणाली गलती से आंत के कोशिक पर हमला करने लग जाती है. 2. आनुवंशिक कारण अगर परिवार में यह रोग है, उनमें भी इसके होने की संभावना और भी ज्यादा होती है। 3. पर्यावरणीय कारण प्रदूषण, और गलत खान-पान, या तो, तंबाकू इस रोग को ट्रिगर करते है. 4. आहार और जीवनशैली ज्यादा मसालेदार भोजन, और फास्ट फूड, अधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से स्थिति को बिगाड़ सकता है। #जाँच (Diagnosis)? अल्सरेटिव कोलाइटिस का पता करने के लिए डॉक्टर कुछ जाँचें करते हैं:- *कोलोनोस्कोपी* ::- सबसे महत्वपूर्ण का जांच, है, जिस में कैमरे की मदद से आंत के अंदर को देख सकते है. *बायोप्सी* :: आंत के पर्त से टिशू लेकर जांच को किया जाता है. *ब्लड टेस्ट* :: संक्रमण, या सूजन का पता करने के लिए. *CT स्कैन या तो MRI स्कैन के माध्यम से आंतों के पूरी स्थिति को जानने के लिए किया जाता है. ४) अल्सरेटिव कोलाइटिस के लिए सही उपचार क्या है? अल्सरेटिव कोलाइटिस का "स्थायी इलाज" नहीं है, पर सही उपचार से इसे कण्ट्रोल कर सकते है. उपचार में मुख्य रूप से ये तरीके शामिल हैं: जैसे की, "आहार और जीवनशैली" * हल्का और पौष्टिक तथा कम फाइबर वाला भोजन को लें।  * उचित मात्रा में पानी को पीएं , जिस से की , डिहाइड्रेशन न हो।  * दूध, कैफीन और ज्यादा मसालेदार भोजन करने से बचें। * कसरत करें। जिस से तनाव में कमी हो सके। घरेलू और प्राकृतिक उपाय क्या है? डॉक्टर के कहे अनुसार ही इन उपाय को कर सकते है. - एलोवेरा का जूस :: हल्की सूजन में बहुत ही मदद कर सकता है। - हल्दी :: इसमें मौजूद करक्यूमिन सूजन को कम करता है. ५) कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए? यदि निचे बताये गए लक्षण में से कुछ भी हों, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:  * १ हफ्ते से भी अधिक समय तक खूनी दस्त का होना  * बहुत तेज़ पेट में दर्द का होना।  * अचानक से वज़न भी कम हो जाना।  * डिहाइड्रेशन जैसा होना * मल में से लगातार खून का आना।
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homeopathic me pancreatic ka bina operation ilaj
#होमियोपैथी में पैंक्रियाटाइटिस का सही इलाज? **परिचय** पैंक्रियाटाइटिस पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारी है, जिस में अग्न्याशय में सूजन आ जाता है। यह हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, जो की पाचन एंजाइम्स और इंसुलिन बनाता है। - जब किसी कारण से एंजाइम्स खुद अग्न्याशय को ही पचाने लगते हैं, तो सूजन और दर्द होने लग जाता है — इस स्थिति को ही **पैंक्रियाटाइटिस** कहते है. **इसके दो प्रकार होते है - 1. **Acute Pancreatitis** 2. **Chronic Pancreatitis** (1) Acute Pancreatitis क्या होता है? यह दर्द अचानक से शुरू होता है, और कुछ दिनों में अपने आप से ही ठीक हो जाता है. - यदि समय रहते इसका सही इलाज नहीं किया जाये ,तो, आगे जा कर के यह खतरा भी बन सकता है। - इसके कारणों में पित्त की थैली में पथरी या तो , बहुत ही ज्यादा शराब का सेवन होता है। - कभी-कभी दवा का साइड इफ़ेक्ट , उच्च ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल होता है. **मुख्य लक्षण क्या है? - पेट के ऊपरी हिस्से में बहुत ही तेज दर्द का होना।  - उल्टी या तो जी मिचलाना।  - पेट में भारीपन जैसा लगना।  * खाना खाने के बाद में भी दर्द का बढ़ जाना. (2) Chronic Pancreatitis क्या होता है? यह ज्यादा समय तक चलने वाली बीमारी है, जिस में अग्न्याशय धीरे-धीरे से क्षतिग्रस्त होने लग जाता है. - यह ज्यादा समय तक शराब पीने से ,पारिवारिक कारण होने से भी इसका जोखिम और भी बढ़ जाता है, और या तो बार-बार एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होने से विकसित होता है। ** इसके मुख्य लक्षण** - लगातार पेट में जोर - जोर से दर्द का होना। - वजन का घट जाना। - पाचन में प्रॉब्लम का होना  - मधुमेह का लक्षण (क्योंकि इंसुलिन का बनना कम होने लग जाता है) ###पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के क्या कारण है ? *पित्त की पथरी* : – यह सबसे सामान्य कारण में से एक है। *शराब का बहुत ही ज्यादा मात्रा में सेवन करना  *उच्च ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल हाई होना। * वायरल या तो, बैक्टीरियल का संक्रमण #पैंक्रियाटाइटिस का इलाज किस पर निर्भर होता है? (1) अस्पताल में इलाज  - यदि Acute Pancreatitis गंभीर हो तो दर्दी को अस्पताल में ही एडमिट किया जाता है।  *IV Fluids* :: शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए किया जाता है.  * Pain Management* :: बहुत ही तेज़ दर्द को कण्ट्रोल करने के लिए दवाएँ दी जाती हैं।  * कुछ दिनों तक खाना नहीं दिया जाता है , ताकि अग्न्याशय को आराम मिले।  * Lifestyle Changes* :: शराब और धूम्रपान के सेवन को पूरी तरह से त्याग देना । *Low-fat diet* :: कम चर्बी वाला संतुलित आहार।  *Pancreatic Enzyme Supplements* :: पाचन सही से हो सके ,इसके लिए एंजाइम कैप्सूल दिए जाते हैं। #होम्योपैथिक में पैंक्रियाटाइटिस का इलाज? शरीर की आंतरिक शक्ति को बढ़ाकर किया जाता है, जिस से की सूजन और दर्द को नियंत्रित हों सके।  - ये दवाएँ व्यक्ति के लक्षण, और रोग की अवस्था पर निर्भर होती हैं। - होम्योपैथिक इलाज करने से दीर्घकालिक रूप से अग्न्याशय सूजन को कम करने में और पाचन प्रणाली को सही करने में मदद करता है.   #आहार और परहेज़#  * शराब, और तले हुए भोजन से दूर रहें।  * ज्यादा पानी और तरल पदार्थ को लें।  * ताजे फल, और उबली सब्जियाँ और फाइबर वाले भोजन के लेना सही है.  * मसालेदार भोजन से दुरी रखे।  * छोटे-छोटे अंतर में भोजन को दिन में ३-४ बार में ले. ##संभावित जटिलताएँ## पैंक्रियाटाइटिस बीमारी का सही समय पर और सही इलाज न किया जाये ,तो कुछ जटिलताएँ हो सकती हैं –  * पैंक्रियाटिक में सिस्ट * मधुमेह  * किडनी फेल्योर
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gas acidity or ulcer ka homeopathic ilaj
**गैस, एसिडिटी और अल्सर का इलाज **परिचय** आज के भागदौड़ ज़िंदगी, में गलत खानपान और तनाव ने पेट से जुड़ी बहुत सी बीमारियों को आम बना दिया है। - इनमें से सबसे ज़्यादा पाई जाने वाली तीन समस्याएँ हैं — **गैस **, **एसिडिटी ** और **अल्सर**। - ये ३ बीमारियाँ आपस में ही जुड़ी होती हैं। अगर समय पर सही इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकती हैं। 1. गैस क्या है? पेट में गैस बनना यह पाचन तंत्र की प्रक्रिया है, पर जब यह ज़्यादा मात्रा में बनने लगे या बाहर नही निकल पाए, तो पेट में दर्द, और सूजन तथा असहजता महसूस होती है। - यह समस्या तब बढ़ती है, जब हम भोजन को पूरी तरह से पचा नहीं पाते और आंतों में गैस जमा हो जाती है। २) पेट में गैस बनने के क्या मुख्य कारण हो सकते है? पेट में गैस बनने के मुख्य कारण निचे अनुसार है - * जल्दी-जल्दी खाना को खाते जाना। * बहुत ही तला-भुना या ज्यादा मसालेदार भोजन को खाना * ज्यादा चाय, और कॉफी का सेवन करना * तनाव और रात में सही से नींद नहीं आना * कब्ज ३) गैस होने के क्या लक्षण होते है? * पेट में भारीपन जैसा लगना * खट्ठी डकार का आना या पेट में दर्द का होना। * भूख भी सही से नहीं लगना। * कभी-कभी सीने में जलन का होना ४) एसिडिटी क्या है? जब पेट में बनने वाला हाइड्रोक्लोरिक एसिड ज़रूरत से भी ज़्यादा बनने लग जाता है, तो, वो ऊपर आता है, उसे **एसिडिटी** कहते हैं। - यह समस्या *(GERD)* का भी रूप ले सकती है। ##एसिडिटी के क्या कारण है? * ज्यादा मसालेदार और ज्यादा बाहर का भोजन करना। * भूखे पेट ज्यादा समय तक रह जाना * अत्यधिक चाय और कॉफी का सेवन करना * ज्यादा देर तक जागना या सही से नींद नहीं आना # एसिडिटी के क्या लक्षण होते है? * सीने में बहुत ही जोर से जलन का होना * छाती में दर्द का होना * डकार या उल्टी का होना ##जीवनशैली में बदलाव करने से परिवर्तन ## * भोजन करने के तुरंत बाद में नही लेटें। * दिन में छोटे - छोटे अंतर में भोजन को लें। ५) अल्सर क्या है? अल्सर का मतलब है, की — पेट, और छोटी आंत में छाला बन जाना। - सबसे आम प्रकार है **पेप्टिक अल्सर**। जब पेट में बहुत ही ज्यादा एसिड बनता है तब यह स्थिति होती है। ## अल्सर का मुख्य कारण क्या होता है ? * ज्यादा लंबे समय से दर्द निवारक दवा का सेवन करना * ज्यादा शराब और धूम्रपान करना * लगातार एसिडिटी का होना * अनियमित खानपान होने से भी # अल्सर का मुख्य लक्षण क्या है? * सीने में जलन का होना * उल्टी का होना * वजन का कम हो जाना * भूख में कमी होना या नहीं लगना * पेट में छाले का होना #अल्सर से बचाव के लिए क्या करे ? 1. नियमित अपने सही समय पर भोजन करना। 2. जंक फूड, और तली चीज़ें और कार्बोनेटेड ड्रिंक से दुरी बनाये रखना । 3. डेली 30 मिनट तक कसरत करना 4. धूम्रपान और शराब से दूरी रखें। 5. भोजन को चबाकर खाएँ। 6. तनाव को कम करें और ७-८ घंटे की नींद पूरी लें।
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homeopathic me bina operation pancreatitis ka ilaj
१) पैंक्रियाटाइटिस (Pancreatitis) का इलाज और पूरी जानकारी? **परिचय:** अग्नाशय हमारे शरीर के पाचन तंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो की ,पेट के पीछे स्थित होता है। और पाचन एंजाइम तथा इंसुलिन जैसे हार्मोन को बनाता है।पैंक्रियाटाइटिस को अग्नाशय सूजन भी कहते हैं। - जब भी किसी कारण से यह भाग में सूजन हो जाता है. या इसके कोशिका क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो यह खुद ही अपने एंजाइम से पचने लगता है। यही स्थिति *पैंक्रियाटाइटिस* कहलाती है। - यह रोग तीव्र और दीर्घकालिक दोनों के रूप में हो सकता है। २) पैंक्रियाटाइटिस के कितने प्रकार होते है? पैंक्रियाटाइटिस के २ प्रकार होते है- 1. एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस - यह अचानक से शुरू होने वाला रोग है, जो की, कुछ दिनों तक रहता है। अगर सही तरह से इलाज किया जाये तो ,यह सही हो सकता है.  - एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के प्रमुख कारण :: – शराब का बहुत ही अधिक सेवन करना , पित्त की पथरी , वायरल संक्रमण या कुछ दवा का साइड इफेक्ट का होना ।  2. क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस - यह दीर्घकालिक समय तक चलने वाली स्थिति है, जिस में अग्नाशय धीरे-धीरे कार्य करने की क्षमता को खो देता है। - इसका मुख्य कारण है ::- ज्यादा लंबे समय तक शराब को पीना, पारीवारिक कारक, या बार-बार एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का हो जाना । ३) पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के क्या लक्षण दिखाई देते है? पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के लक्षण निचे अनुसार होते है. जैसे की, - * ऊपरी पेट में तेज दर्द का होना। जो की, पीठ तक फैल सकता है.  * उल्टी और मिचली * पेट में सूजन का हो जाना  * भूख नहीं लगना या तो कम लगना * वज़न का अचानक से घट जाना  * पीलिया ४) पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के **मुख्य कारण** क्या होते है? पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के **मुख्य कारण** निचे बताये अनुसार है,  * ज्यादा शराब का सेवन करना।  * पित्त की पथरी * खून में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ जाना  * धूम्रपान का सेवन  * कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव से भी * हाई कैल्शियम का स्तर ##पैंक्रियाटाइटिस का इलाज## - 1. **अस्पताल में शुरुआती इलाज  **भोजन से आराम** कुछ समय के लिए मरीज को खाना नहीं दिया जाता है, ताकि अग्नाशय को आराम मिल सके.  **इंट्रावेनस फ्लूइड (IV Fluids)** शरीर में पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट कमी को पूरा करने के लिए ड्रिप लगाई जाती है। **दर्द निवारक दवाएं**  पेट के दर्द को कण्ट्रोल करने के लिए दर्द को कम करने वाली दवा दी जाती हैं। - 2. **मूल कारण का इलाज * अगर **पित्त की पथरी** का कारण है, तो *गॉलब्लैडर सर्जरी * को किया जाता है. *शराब से पूर्ण परहेज करना अनिवार्य है।  *ट्राइग्लिसराइड्स ज्यादा हो जाने पर दवा दी जाती हैं, ताकि स्तर को कण्ट्रोल में कर सके.  -3. **क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस का उपचार  *एंजाइम सप्लीमेंट्स  - जब अग्नाशय सही तरह से एंजाइम नहीं बना पाता है, तो डॉक्टर कैप्सूल के रूप में देते हैं। जिस से की , भोजन ठीक से पच सके।  *इंसुलिन थेरेपी  - अगर इंसुलिन का उत्पादन प्रभावित हो गया है, तो मधुमेह की तरह इंसुलिन दिया जाता है।  *पोषण संबंधी सपोर्ट  - हाई-प्रोटीन, और लो-फैट डाइट को दिया जाता है। और कभी-कभी विटामिन A, D, E, K खुराक को भी देते है.  *सर्जरी  - यदि नलिका में रुकावट हो तो सर्जरी से ब्लॉकेज को हटाया जाता है। ##घरेलू और जीवनशैली के संबंधी उपाय** ** शराब और धूम्रपान को तो, पूरी तरह से छोड़ें। ** कम चर्बी वाला आहार को लें। ** छोटे अंतराल में और बार-बार भोजन को करें।  **सही मात्रा में पानी को पिएँ। ** ज्यादा मसालेदार, और तला-भुना तथा जंक फूड को नहीं खाएँ। **डॉक्टर के द्वारा दी गई दवा को सही और नियमित रूप से लें।  **तनाव को कम करने के लिए कसरत करें। ५)इसके क्या जटिलताएँ होती है? अगर सही समय पर और सही इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकता है: *अग्नाशय में सिस्ट का होना  * संक्रमण हो जाना  * सांस लेने में भी बहुत ही कठिनाई का होना  * मधुमेह  * पोषणतत्व की कमी
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ibs kya hai or homeopathic me ibs ka ilaj
IBS का होमियोपैथी में सही इलाज ? **परिचय** IBS पाचन के संबंधित विकार है, जिस में व्यक्ति को बार-बार पेट में दर्द का होना , गैस, और कब्ज या दस्त जैसी समस्याएँ होती रहती हैं। - यह बीमारी कोई जानलेवा तो, नहीं है, पर मरीज के व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को बहुत ही ज्यादा असर कर सकती है।  - IBS का मुख्य कारण पाचन तंत्र की संवेदनशीलता और मस्तिष्क के बीच खराब संचार, आंत्र की मांसपेशियों का असामान्य कार्य के बीच असंतुलन को माना जाता है। १) IBS होने के मुख्य क्या लक्षण दिखाई देते है? IBS के लक्षण अलग -अलग व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, पर कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार से है - **बार-बार पेट में तेज दर्द या ऐंठन का होना। **कब्ज और दस्त  **पेट में गैस का बनना या पेट का फूल जाना या भारीपन जैसा महसूस होना  **मल त्याग के बाद राहत जैसा महसूस होना  **थकान और कमजोरी जैसा लगना २) IBS के कितने प्रकार के होते हैं? IBS के तीन तरह के होते हैं.- A. IBS-C :: कब्ज ज़्यादा होता है.  B. IBS-D :: दस्त ज़्यादा होता है.  C. IBS-M :: इसमें कभी दस्त तो कभी कब्ज दोनों ही होता है। ३) IBS होने के क्या मुख्य कारण होते है? IBS के पीछे कई मुख्य कारण हैं: जैसे की, **तनाव और चिंता :: मानसिक तनाव से आंतों की गति और संवेदनशीलता को असर करता है।  **गलत खानपान :: ज्यादा तैलीय, और ज्यादा मसालेदार, इसके अलावा जंक फूड का सेवन करना । **हार्मोनल में बदलाव :: महिलाओं में मासिक धर्म के समय IBS के लक्षण को बढ़ा सकते हैं।  **संक्रमण :: पेट में कोई भी तरह संक्रमण के बाद भी IBS के लक्षण उभर सकते हैं। ## IBS का सही इलाज? IBS का कोई स्थायी इलाज नहीं है , पर जीवनशैली, और खानपान के अलावा कुछ दवा की मदद से पूरी तरह कण्ट्रोल किया जा सकता है। **1.आहार में सुधार** IBS के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भोजन का ही होता है। जिस में - **फाइबर युक्त भोजन लें :: जैसे की - ओट्स, फल, और सब्जियाँ ,साबुत अनाज।  ** ऐसे भोजन से दुरी बनाये रखे की ,जो गैस या जलन को बढ़ाते हैं। (जैसे की - प्याज, लहसुन,गेहूं)।  **डेयरी उत्पाद को कम करें :: अगर लैक्टोज की समस्या है,तो दूध और चीज़ से पूरी तरह दूरी बनाये रखें।  **ज्यादा पानी को पिएँ ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। **अल्कोहल को कम करें।  **2. तनाव पर नियंत्रण** ** डेली कसरत करे। जिस से तनाव को कम करने में मदद मिलती है. ** 7–8 घंटे डेली पर्याप्त नींद ले। ** अपने काम और निजी जीवन में संतुलन को सही तरह से बनाये रखें। **3. घरेलू उपचार**  **त्रिफला चूर्ण :: पाचन को मजबूत बनता है और कब्ज को दूर करता है।  **जीरा, सौंफ और अजवाइन के सेवन से गैस और अपच में फायदेमंद है।  ** रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने के लिए आंवला और गिलोय का उपयोग करे। * * छाछ और हल्का भोजन पेट को राहत देता है। ४) IBS में किन चीज़ों से दुरी बनाये रखे? * बहुत ही मसालेदार भोजन ,या तला-भुना खाना से दुरी। * चाय-कॉफी का सेवन न करे। * धूम्रपान और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।  * ज्यादा तनाव ५)IBS से बचने के लिए क्या उपाय है? - 1.नियमित सही समय पर भोजन करने का फिक्स करे.  - 2. डेली कसरत करना भी अच्छा होता है. - 3. खाने को धीरे-धीरे से और अच्छी तरह से चबाकर खाना चाहिए. - 4. रात के समय में मोबाइल या लैपटॉप से दूरी बनाये रखे. -5. पानी और नींद दोनों को सही तरह से ले.
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H. pylori Infection treatment in homeopathy
१) H. pylori Infection का इलाज?**परिचय:** हेलिकोबैक्टर पाइलोरी एक तरह का बैक्टीरिया है,जो की हमारे पेट के अंदरूनी पर्त यानी की  गैस्ट्रिक म्यूकोसा में रहता है। - विकासशील देशों में यह संक्रमण बहुत आम है, ज्यादातर मामलों में यह संक्रमण बचपन में होता है, और सही समय पर  सही इलाज नही  किया जाए तो यह **पेप्टिक अल्सर , और गैस्ट्राइटिस ** का कारण भी बन सकता है। २) H. pylori संक्रमण होने के क्या कारण हो सकते है ? यह संक्रमण निम्न कारणों से फैलता है: जैसे की, 1. संक्रमित हुए व्यक्ति के लार, उल्टी  के संपर्क के कारण। 2. दूषित भोजन या दूषित पानी पीने से।  3. एक ही बर्तन में खाये हुए भोजन  या टूथब्रश को साझा करने से। 4. अपने आस - पास में साफ़ - सफाई नहीं हो।   ३) H. pylori संक्रमण होने के क्या लक्षण हो सकते है? हर व्यक्ति में लक्षण अलग हो सकते हैं, पर आमतौर पर ये देखने को मिलते हैं: जैसे की, * पेट में जलन या दर्द का होना  * उल्टी या मिचली का आना  * भूख भी नही लगना या तो कम लगना  * खट्टी डकार का आना या पेट में गैस बनना  * वजन घट जाना  या कम हो जाना और  थकान जैसा लगना अगर संक्रमण ज्यादा लंबे समय तक बना रहे तो **गंभीर अल्सर या तो, गैस्ट्रिक ब्लीडिंग** भी हो सकता है। ४)  H. pylori Infection जांच के लिए डॉक्टर  किस तरह के जाँच करते है?  H. pylori संक्रमण का पता करने के लिए डॉ. कुछ खास तरह के जांचें करवाते हैं: जैसे की, 1. **यूरेज ब्रीथ टेस्ट** इसमें दर्दी विशेष तरल को पीता है, और सांस के नमूने से बैक्टीरिया के मौजूदगी का पता चलता है। 2. **स्टूल एंटीजन टेस्ट**   मल के सैंपल से H. pylori की उपस्थिति के जाँच किया जाता है. 3. **ब्लड टेस्ट** शरीर में H. pylori के एंटीबॉडी की जांच होती है, पर पुराना संक्रमण भी दिखा सकता है।  4. **एंडोस्कोपी** अगर गंभीर लक्षणों में पेट के अंदर कैमरे द्वारा जांच कर ऊतक को लिया जाता है।  #इलाज के दौरान ध्यान देने योग्य क्या बातें है? 1. दवाएं को डॉ. के सलाह अनुसार पूरी अवधि तक लें — कभी भी बीच में बंद नही  करें।  2. ज्यादा मसालेदार और तले भोजन से बचें। और सही समय पर भोजन करे।  3. धूम्रपान और शराब से पूरी तरह से परहेज करें, क्योंकि ये पेट की परत को हानि पहुंचाते हैं।  4. इलाज के बाद में भी डॉ दोबारा टेस्ट करवाने को कहते है, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि, अब  बैक्टीरिया पूरी तरह से खत्म हो गया है।  ५) H. pylori Infection के लिए क्या घरेलू उपाय है? दवा के साथ में  कुछ घरेलू उपाय भी संक्रमण को कम करने में मदद कर सकते हैं: जैसे की,  - **ग्रीन टी** सूजन और संक्रमण को कम करती है। - **लहसुन** प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण रखता है।  - **शहद** संक्रमण को घटाने और पेट की परत की मरम्मत में मदद करता है।  - **फाइबर युक्त भोजन** जैसे के  फल, सब्जियाँ, ओट्स, दलिया — पाचन को सुधारते हैं। पर याद रखें, की यह सहायक उपाय हैं — **डॉक्टर के कहने पर ही ले**। ६) H. pylori से **बचाव** के लिए क्या ध्यान देना चाहिए? H. pylori से बचाव के लिए स्वच्छता और खानपान पर खास करके  ध्यान देना जरूरी है: जैसे की, 1. हमेशा से हल्का गर्म  किया हुआ पानी या फिल्टर किया हुआ पानी को पीएँ। 2. दूषित भोजन को न खाएँ।  3. खाना को खाने से पहले और शौच करने के बाद में अपने  हाथ को अच्छे से साबुन से  धोएँ। 4. संक्रमित हुए मरीज के बर्तन, गिलास , टोवेल को साझा न करें। 5. सड़क किनारे लगाए हुए स्टॉल पर से  पैकेट फ़ूड और  बाहर का खाना को कम खाएँ, ।
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acute pancreatitis kyu hota hai or homeoapthy me iska ilaj
**Acute Pancreatitis का इलाज – कारण, लक्षण और उपचार** **परिचय** एक्यूट अग्नाशयशोथ गंभीर पाचन के संबंधी बीमारी है, जिस में **अग्न्याशय** में अचानक से सूज जाता है। यह सूजन हल्की हो सकती है, या तो, गंभीर हो सकती है, , जो की जीवन के लिए खतरा बन सकता है। - पैंक्रियास हमारे शरीर का महत्वपूर्ण भाग है, जो की, **पाचक एंजाइम** और **इंसुलिन** जैसे हार्मोन को बनाता है। - जब भी किसी कारण से पैंक्रियास में सूजन आ जाता है, तो अपने ही एंजाइम से खुद को हानि पहुँचाने लग जाता है। १) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होने के क्या मुख्य कारण है? एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के कारण निचे बताये अनुसार होते है, जैसे की,  1. **पित्त की पथरी** यह तो सबसे आम कारणों में से एक है। जब भी पित्त की पथरी पित्त नलिका को अवरुद्ध करता है, जिस से अग्न्याशय का रस रुक जाता है, और सूजन हो जाती है।  2. **अत्यधिक शराब सेवन** लंबे समय तक और अधिक मात्रा में शराब पीने से पैंक्रियास की कोशिका क्षतिग्रस्त होने लग जाती है, जिस से की, तीव्र सूजन हो सकती है।  3. **ट्राइग्लिसराइड का बढ़ना**  खून में ट्राइग्लिसराइड का लेवल बहुत ही ज्यादा हो जाने पर पैंक्रियास पर दबाव बढ़ जाता है।  4. **दवाओं का असर** कुछ एंटीबायोटिक्स, या डाययूरेटिक दवाएँ भी इस स्थिति को ट्रिगर कर सकती हैं।  5. **पेट की सर्जरी**  अग्न्याशय के आस-पास की चोट या तो,ऑपरेशन भी सूजन का कारण बनते है।  6. **आनुवांशिक कारण:**  पारिवारिक इतिहास होने के कारण से भी इसका जोखिम और भी बढ़ जाता है. २) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होने पर क्या लक्षण दिखाई देते है ? एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के शुरुआत अचानक से होती है, और इसके लक्षण तेजी से बढ़ते हैं। जैसे की,  **ऊपरी पेट में तेज दर्द**, जो की, पीठ तक फ़ैल सकता है। **मतली और उल्टी होना।**  **पेट में कोमलता का हो जाना ** **भूख कम लगना या तो नहीं लगना।** * गंभीर मामलों में **सांस लेने में परेशानी **, और **लो ब्लड प्रेशर** का हो जाना।  - यदि सही समय पर और सही इलाज न हो, तो यह स्थिति **(ऊतक मृत्यु)** तक बढ़ सकती है। ३) डॉक्टर एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का निदान कैसे करते है? डॉक्टर रोग का पता लगाने के लिए कुछ जाँचें करते हैं, जैसे की – 1. **ब्लड टेस्ट**  सीरम एमाइलेज और लाइपेज स्तर के जांच किया जाता है, जो की, इस रोग में काफी बढ़ जाते हैं।  2. **अल्ट्रासाउंड** अग्न्याशय में सूजन की पहचान के लिए किया जाता है।  3. **CT Scan या MRI:**  सूजन की गंभीरता ,अंगों के स्थिति को जानने के लिए सटीक जांच माना जाता है.  4. **ERCP**  पित्त की नली में पथरी है, तो उसे निकालने के लिए प्रक्रिया को किया जाता है. ४) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का घरेलू देखभाल और जीवनशैली पर क्या असर होता है? **घरेलू देखभाल और जीवनशैली सुधार** हॉस्पिटल से छुट्टी लेने के बाद में मरीज को कुछ सावधानी हमेशा रखनी चाहिए: जैसे की, - शराब और धूम्रपान को पुरे तरीके से दुरी बनाए रखना।  - **फैट रहित भोजन** खाएँ — जैसे की : सब्ज़ी, फल, सूप आदि। - धूम्रपान का सेवन बंद करें। - दिन में छोटे-छोटे अंतर में भोजन को कई बार लें।  - सही मात्रा में पानी को पिए **, ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन नही हो। - कसरत को धीरे-धीरे शुरू करें। ५)संभावित जटिलताएँ? यदि सही समय पर और सही इलाज नहीं किया जाए, तो एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकता है –जैसे की,  **ऊतक का नष्ट होना **मधुमेह का विकास**  ** किडनी फेलियर या फेफड़ों की विफलता**
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ibs kya hai or iske kya laksan hote hai
IBS का इलाज : – कारण, लक्षण और सही उपचार **परिचय** IBS सामान्य फिर भी परेशान करने वाली पाचन के समस्या है। इसमें व्यक्ति को बार-बार पेट में दर्द, गैस का बनना ,पेट का फूलना, दस्त या कब्ज जैसी शिकायतें होती हैं। - यह बीमारी जानलेवा नहीं है, पर व्यक्ति की दिनचर्या, और मानसिक स्वास्थ्य खानपान को असर करते है. १) IBS के मुख्य कारण क्या है? IBS का कोई एक निश्चित कारण तो नहीं होता है, पर कई वजह से मिलकर विकसित होता है। कुछ प्रमुख कारण निचे बताये अनुसार हो सकते हैं. 1. आंतों की मांसपेशियों की असामान्य गति जब भी आंतों की मांसपेशियाँ बहुत ही तेज़ या बहुत धीमी गति से सिकुड़ने लगती हैं, तो या दस्त या कब्ज की स्थिति हो सकती है.  2.आंतों की तंत्रिकाओं में गड़बड़ी कुछ लोगों में आंतों की नसें बहुत ही संवेदनशील हो जाती हैं, जिस से भी हल्का गैस का कारण बनता है। 3.मानसिक तनाव और चिंता IBS को “माइंड-गट डिसऑर्डर” भी कहा जाता है, क्योंकि यह तनाव, चिंता इसके लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। 4.संक्रमण या फूड पॉइजनिंग किसी संक्रमण के बाद भी आंतों के कार्यप्रणाली असंतुलित हो सकता है, जिस से IBS के लक्षण शुरू हो जाते हैं। 5. खानपान में असंतुलन बहुत ज्यादा मसालेदार खाना ,तली-भुनी चीजें, या तो, डेयरी प्रोडक्ट, फाइबर की कमी भी IBS को ट्रिगर कर सकती है। २) IBS के सामान्य लक्षण क्या हो सकते है? IBS के लक्षण अलग - अलग व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, पर आमतौर पर इनमें शामिल हैं – जैसे की,  - बार-बार **पेट में तेज दर्द का होना या ऐंठन का होना **  **कब्ज या दस्त **, या तो दोनों का बारी-बारी से होना - पेट में गैस बनना और पेट का फूल जाना  - कभी-कभी **मल में (चिकनाहट)** दिखाई देना ३) IBS का निदान(Diagnosis) क्या है ? IBS का पता करने के लिए कोई विशेष टेस्ट नहीं होता है। डॉ. मरीज के लक्षण, और खानपान , जीवनशैली के आधार पर इसका निदान करते हैं।  - कभी-कभी अन्य गंभीर बीमारियों को बाहर करने के लिए **खून का टेस्ट, एंडोस्कोपी** किया जाता है। **IBS का इलाज (Treatment)** IBS का कोई स्थायी इलाज नहीं है, पर सही **जीवनशैली, आहार और दवाओं** का सेवन करने से लक्षणों को पूरी तरह से कण्ट्रोल किया जा सकता है। A ) **आहार**  * फाइबर युक्त भोजन** को ले. जैसे की, फल, सब्जियाँ, ओट्स और साबुत अनाज।  * मसालेदार भोजन , और तली-भुनी और जंक फूड** से पूरी तरह दूरी रखें।  * चाय या कॉफ़ी , शराब, सोडा** और **डेयरी उत्पाद** के सेवन को कम करें।  * दिन में **थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाना** खाएँ, एक साथ में बहुत भारी भोजन नही लें। B ) **तनाव नियंत्रण**  * *योग** डेली करने से तनाव कम होता है।  * उचित मात्रा में **नींद** लें। C ) **घरेलू उपाय** * सुबह खाली पेट **गुनगुना पानी** को पिएँ।  * रोजाना **व्यायाम** करें। जैसे - सुबह टहलना।  **अजवाइन,और हिंग** गैस और पेट दर्द में बहुत फायदेमंद होता हैं। ** पुदीने की चाय** पिने से पाचन शांत होता है. D) **जीवनशैली में सुधार**  * हर दिन फिक्स टाइम पर ही भोजन को करें।  * भोजन को अच्छे से और धीरे-धीरे से चबाकर खाएँ। * टीवी या मोबाइल को देखते हुए खाना नही खाएँ।  * दिनभर में उचित मात्रा में पानी पिएँ।  * धूम्रपान और शराब को पुरे तरह से बंद कर देना ही सही होता है.
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Homeopathic treatment for urticaria
**अर्टिकेरिया(Urticaria) का इलाज – कारण, लक्षण और उपचार** *परिचय* अर्टिकेरिया जिसे आमतौर पर *हाइव्स* कहा जाता है, यह त्वचा के संबंधी समस्या है. जिस में शरीर पर लाल रंग के दाने, या सूजन और खुजली होती है। - इस तरह के स्थिति कुछ मिनटों से लेकर कई दिनों तक रह सकती है। कई बार अपने आप ही ठीक हो जाती है, पर कुछ मामलों में बार-बार वापस से आती है, जिसे *क्रोनिक अर्टिकेरिया* भी कहा जाता है। - इस तरह के समस्या एलर्जिक प्रतिक्रिया, और तनाव, या तो, दवाओं के कारण भी हो सकता है। १) अर्टिकेरिया के मुख्य कारण क्या होता है? अर्टिकेरिया के मुख्य कारण निचे बताये अनुसार हो सकता है. ,जैसे की, - अर्टिकेरिया *एलर्जिक* के कारण से भी होती है, जिस में शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली हिस्टामिन नामक रसायन को छोड़ती है। इस से त्वचा के छोटी रक्त वाहिकाएँ फैल जाती हैं और सूजन के साथ खुजली आना शुरू हो जाती है। इसके प्रमुख कारण हैं – **खाद्य पदार्थों से एलर्जी ** ::– अंडा, नट्स, दूध, सोया, स्ट्रॉबेरी, और चॉकलेट आदि। **दवाइयों का प्रभाव** ::पेनकिलर, एंटीबायोटिक्स या दर्द निवारक जैसे दवाएँ।  **संक्रमण** :: वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण से भी । **कीट के काटने से** :: मच्छर, या अन्य कीटों के डंक से भी स्किन में प्रतिक्रिया होती है। **तापमान में परिवर्तन** :: ठंडी या गर्म हवा के संपर्क में आने से भी कुछ लोगों में अर्टिकेरिया हो जाता है। **मानसिक तनाव** :: ज्यादा चिंता या मानसिक दबाव से भी ट्रिगर बन सकता है।    २)अर्टिकेरिया के लक्षण किस तरह के हो सकते है?अर्टिकेरिया के लक्षण निचे अनुसार हो सकते है, जैसे की,  - त्वचा पर लाल रंग के छोटे-छोटे दाने या चकते का होना ।  * खुजली और जलन जैसा एहसास।  * असरकारक वाले भाग पर सूजन का आ जाना।  * दाने एक जगह से गायब होकर दूसरे जगह पर आ जाना। ३) डॉक्टर अर्टिकेरिया का निदान कैसे करते है?डॉ. आमतौर त्वचा की जांच और मरीज के लक्षण के आधार पर निदान करते हैं। कुछ मामलों में डॉ. नीचे दिए गए कुछ जाँच करने को कहते है – **एलर्जी टेस्ट ** :: किस पदार्थ से एलर्जी हो रही है। उसका पता करने के लिए.  **ब्लड टेस्ट** :: संक्रमण या इम्यून सिस्टम की स्थिति को जानने के लिए.  **थायरॉइड के जांच** :: कभी-कभी थायरॉइड भी असंतुलन का कारण बनता है। ४) अर्टिकेरिया का घरेलू और प्राकृतिक उपचार?**ठंडी सिकाई ** :: खुजली और सूजन वाले जगह पर बर्फ घिसने से तुरंत ही राहत मिलती है।  **एलोवेरा जेल** :: यह स्किन को ठंडक देता है और सूजन को कम करता है।  **नीम और हल्दी** :: इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी का गुण होता है, जो की, संक्रमण को कम करते हैं। **तुलसी के चाय** :: इसमें एंटीऑक्सीडेंट होने से सूजन को कम करने में सहायक हैं। ५) अर्टिकेरिया से बचाव के लिए क्या उपाय है?*जिन खाद्य पदार्थों के खाने से एलर्जीक है, उन से पूरी तरह से दूर रहे। * कॉटन के कपड़े को पहनें जिस से की त्वचा को सांस लेने की जगह मिले।  * बहुत ही ज्यादा गर्म या तो, ठंडे वातावरण से बचें।  * तनाव से बचें — और डेली कसरत करना अच्छा होता है. * उचित मात्रा में पानी पिएँ, ताकि शरीर से टॉक्सिन बाहर निकल सकें। # डॉक्टर से कब संपर्क करें?यदि अर्टिकेरिया के साथ कुछ इस तरह के लक्षण दिखें तो तुरंत ही डॉक्टर से मिलें।  * साँस लेने में कभी -कभी परेशानी का होना। * गले में सूजन का आ जाना।  * तेज बुखार रहना। * लगातार अर्टिकेरिया का होना
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garbhavastha me gerd kyu hota hai
१) गर्भावस्था में GERD (एसिड रिफ्लक्स) क्यों होता है? **परिचय** गर्भावस्था महिला के जीवन का बहुत ही खूब सूरत समय है. इस दौरान शरीर में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक परिवर्तन होते हैं। इन बदलाव के वजह से कई महिला को एसिडिटी, और सीने में जलन या तो खट्टी डकार जैसी समस्याएँ होती हैं। इन लक्षणों को **GERD** कहा जाता है।  - गर्भावस्था के समय के दौरान GERD सामान्य पर परेशान करने वाली स्थिति है। रिसर्च बताते हैं कि, लगभग 50% से ज्यादा गर्भवती महिलाएँ को किसी न किसी रूप में एसिड रिफ्लक्स का अनुभव करती हैं. २) GERD क्या होता है? GERD तब होता है, जब पेट का एसिड वापस से भोजन नली में ऊपर की ओर चला जाता है। - भोजन नली और पेट के बीच में एक वाल्व जैसी संरचना होते है, जिसे हम **(LES)** भी कहते है। - यह वाल्व एसिड को ऊपर जाने से रोकता है, पर यह ढीला पड़ जाता है तो एसिड ऊपर चढ़ने लग जाता है। यही स्थिति GERD कहलाती है। ३) गर्भावस्था में GERD के मुख्य कारण क्या होते है? **1. हार्मोनल में परिवर्तन** गर्भावस्था में *प्रोजेस्टेरोन* हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन गर्भाशय की मांसपेशियों को ढीला रखता है ,जिस से की बच्चा सुरक्षित रूप से विकसित हो सके।  - यह प्रभाव मात्र गर्भाशय तक ही सीमित नहीं रहता है , बल्कि यह भोजन नली के वाल्व को भी ढीला कर देता है। - जिस के कारण से पेट का एसिड ऊपर की ओर जाता है, और सीने में जलन या तो , खट्टी डकारें आने लग जाती है.  **2. बढ़ता हुआ गर्भाशय और पेट पर दबाव** जैसे-जैसे गर्भावस्था महीने आगे बढ़ती जाती है, वैसे ही (baby) का आकार भी बढ़ता जाता है। जिस से की गर्भाशय फैल कर पेट और डायफ्राम पर दबाव डालता है।  - यह दबाव पेट में रहे हुए अंदर के एसिड को ऊपर की ओर ले जाता है। खास कर के जब भी महिला निचे के और झुकती है, और लेटती है. **3. पाचन की गति धीमी होना** गर्भावस्था के समय में शरीर के पाचन की प्रक्रिया से धीमी हो जाती है, ताकि भोजन से ज्यादा पोषक तत्व शिशु तक पहुँच सकें। - धीमी पाचन की क्रिया के कारण से पेट में भोजन ज्यादा लंबे समय तक रहता है, जिस से की एसिड बनने की संभावना और भी बढ़ जाती है. **4. खान-पान और जीवनशैली की आदतें**  महिलाओं में गलत तरह के खान-पान जैसे की, ज्यादा मसालेदार भोजन , या अधिक तला हुआ भोजन खाने से भी GERD की समस्या होती है। - बार-बार ज्यादा मात्रा में भोजन करने से, या तो खाने के तुरंत बाद में लेटना, और ज्यादा चाय-कॉफी पिने से भी हो सकता है.  ३) गर्भावस्था में GERD के प्रमुख लक्षण क्या होते है? गर्भावस्था में GERD के प्रमुख लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है, जैसे की,  - 1. गले और सीने में जलन का होना - 2. खट्टी डकारें का आना या तो पेट में भारीपन जैसा लगना  - 3 . बार-बार खाँसी का आना और गले में खराश होना इस तरह के लक्षण आम तौर पर खाने के तुरंत बाद में या तो , रात में लेटने पर महसूस होते हैं।  ४) GERD के प्रभाव (माँ और शिशु पर)? - कुछ मामलों में तो, GERD माँ या तो, शिशु के लिए खतरा नहीं बनता, है पर जलन और असुविधा से गर्भवती महिला की नींद पर , भूख पर असर पड़ सकता है।  - अगर लक्षण अधिक बढ़ जाएँ तो और महिला को उल्टी, वजन में भी कमी हो, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरुरी होता है।  ५) गर्भावस्था में GERD से राहत के उपाय क्या है?  **1. खान-पान में परिवर्तन करें** - छोटे-छोटे अंतराल में भोजन करें। - ज्यादा मसालेदार और जंकफूड और चॉकलेट चीज़ों को खाने से बचें।  - भोजन करने के बाद में तुरंत लेटना नहीं है। - ठंडे तरल पदार्थ से सीने में जलन को शांत करने में मदद करते हैं।  **2. सोने की स्थिति सही रखें**  बाईं और करवट ले कर सोना गर्भावस्था में अच्छा माना जाता है, क्योंकि पेट पर दबाव कम होता है। **3. कपड़ों का चयन** - ढीले और आरामदायक वाले कपड़े को पहनें। जिस से की पेट पर दबाव न पड़े। **4. जीवनशैली में सुधार**- खाने के तुरंत बाद में व्यायाम न करें।  - रोज़ाना हल्की वॉक करना ,सही है ,जिस से की पाचन क्रिया ठीक रहे।  #GERD से बचाव के लिए उपयोगी टिप्स? - भोजन को धीरे-धीरे और अच्छी तरह से चबा कर करे।- पानी को अधिक पिएँ, पर भोजन के साथ में नहीं, बल्कि बीच-बीच में। - तनाव से दूर रहें। समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित और उचित कदम है।
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gastric treatment in homeopathy | gas ka ilaj
गैस्ट्रिक क्या है और इसका सही इलाज? *परिचय* भारत में इस तरह की प्रॉब्लम अब बहुत ही ज्यादा देखने को मिलता है। गैस की समस्या ,आज के समय में बहुत ही आम बात हो गयी है। -यह समस्या तब होती है, जब पेट में गैस का ज्यादा उत्पादन होता है. या तो सही तरह से गैस बाहर नहीं निकल पाती है । - यह एक सामान्य प्रॉब्लम है, पर इसका सही इलाज और ध्यान नही दिया जाए, तो यह *एसिडिटी, पेट में तेज दर्द, या अल्सर* जैसी गंभीर बीमारियों हो सकती है.  १ ) गैस्ट्रिक समस्या क्या है? गैस्ट्रिक को हम दूसरे शब्दो में “पेट में गैस बनना” भी कहा जाता है। - जब भोजन सही ढंग से नहीं पचता है, तो उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट और फैट्स आंतों में किण्वित होकर गैस उत्पन्न करते हैं।  - इस गैस से छाती या पेट के ऊपरी भाग में तेज दर्द या सीने में जलन , और भारीपन का कारण बनती है।  २) गैस्ट्रिक की मुख्य वजह क्या है? - 1. **ख़राब तरह का खानपान** : – बहुत ही ज्यादा तला-भुना, और मसालेदार भोजन , या बाहर का खाना बहुत ही ज्यादा मात्रा में खाना या तो,देर से खाना खाना। - 2. **खाने की अनियमित दिनचर्या** :– बहुत ही लंबे समय तक रहना या बार-बार खाना।  - 3. मानसिक तनाव से पाचन को बहुत ही ज्यादा असर होता है। - 4. शरीर में से पानी की कमी का होना।  - 5. ज्यादा कैफीन और शराब का सेवन करने से पेट की अम्लता को बढ़ाता हैं। - 6. **धूम्रपान करने से पेट के म्यूकोसा को नुकसान होता है। ३) गैस्ट्रिक के क्या लक्षण हो सकते है? गैस्ट्रिक के लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है , जैसे की, - पेट में गैस बन जाना और सीने में बहुत ही तेज दर्द का होना  - मुँह में से खट्टी डकारें का आना  - सही तरह से भूख न लगना  * सिर में तेज दर्द और चिड़चिड़ापन लगना यदि इस तरह की स्थिति बार-बार हो, जाये तो *GERD** का संकेत हो सकता है।  ४ ) गैस्ट्रिक होने पर क्या खाएँ और क्या नहीं खाएँ? #क्या खाएँ#  * हल्का और कम मसाले वाला भोजन को खाना * केला, पपीता और सेब बहुत ही लाभदायक है   * दही और छाछका सेवन करना   * उचित मात्रा में पानी को पीना  # क्या न खाएँ# * ज्यादा तले-भुने और मसालेदार वाला भोजन नहीं करना * फास्ट फूड, और कोल्ड ड्रिंक से दुरी बनाये रखना * चाय और कॉफ़ी को कम पीना  * देर रात में खाना को नहीं खाना  # दैनिक आदतें#  * खाना को अच्छे से चबाकर और धीरे-धीरे खाएँ। * भोजन करने के बाद में तुरंत न लेटें।  * डेली कसरत या मॉर्निंग में टहलना ५) गैस्ट्रिक से बचाव के प्रभावी उपाय क्या है? निचे कुछ उपाय को बताया गया है, जैसे की,  - 1. दिन में ३ बार हल्का - हल्का करके भोजन करें, - 2. कम से कम 7 घंटे तक नींद लें। - 3. भोजन करने के बाद में तुरंत नहीं सोना चाहिए। - 4. धूम्रपान और शराब से पूरी तरह से दूरी को बनाएँ  - 5. तनाव को कम करने के लिए मॉर्निंग में योग करें।  - 6. ज्यादा मसालेदार, तैलीय और जंक फूड से परहेज़ करें।
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chronic pancreatitis ka bina operation treatment in homeopathy
१) क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस का सही इलाज? **परिचय:** क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस गंभीर और ज्यादा लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है. जिस में की अग्न्याशय में धीरे-धीरे से सूजन और क्षति हो जाती है। - यह बार-बार होने वाले *एक्यूट पैनक्रियाटाइटिस* या ज्यादा लंबे समय तक शराब का सेवन करने से ,और गलत खानपान, आनुवंशिक कारणों से होती है। - जब अग्न्याशय की कोशिका नष्ट हो जाती हैं, तो पाचन एंजाइम और इंसुलिन का उत्पादन कम हो जाता है, जिस से की **पाचन की प्रॉब्लम और मधुमेह ** हो सकते हैं। २) **क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस के क्या मुख्य लक्षण होते है? क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस के लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है. जैसे की, - 1. **ऊपरी पेट में तेज दर्द का होना ** : — यह दर्द पीठ तक फ़ैल जा सकता है और कुछ दिनों तक रह सकता है।  - 2. **वजन का कम होना** : — पाचन एंजाइम की कमी होने से हमारा शरीर कुछ पोषक तत्वों को सही से नहीं सोख पाता है. - 3 . **मितली या उल्टी और भूख में भी कमी हो जाना।** - 4. **शुगर बढ़ना ** :— जब पैंक्रियाज इंसुलिन सही से नहीं बना पाता है. ३) इलाज के उद्देश्य क्या है? क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस का पूरी तरह से ठीक करना तो संभव नहीं है, पर इलाज से लक्षणों को कण्ट्रोल किया जा सकता है. और उपचार के मुख्य उद्देश्य हैं: जैसे की ,  - दर्द को कम करना इसका मुख्या उद्देश्य है.  - पाचन को सुधारना। - पोषण की कमी को पूरा करने के लिए।  - मधुमेह को कण्ट्रोल करना  - जटिलताओं को रोकना  ##1.दवा से इलाज** a) पेन मैनेजमेंट* हल्के से हो रहे दर्द में **पैरासिटामोल** को दिया जाता हैं।  * ज्यादा लंबे समय तक दर्द होने पर *endoscopic therapy* का उपयोग करते है. b) पाचन एंजाइम सप्लीमेंट  * अग्न्याशय सही तरह से एंजाइम नहीं बना पाता, है ,तो डॉ. **enzyme capsules देते हैं।  * इस दवा को खाने के साथ लेने पर **चर्बी , प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट** के पाचन में सही तरह की मदद करते हैं।  c) इंसुलिन या शुगर कंट्रोल दवाएं*  * अगर दर्दी को मधुमेह बढ़ता जाए, तो **इंसुलिन इंजेक्शन**को देते है.  --- ## 2. खानपान और जीवनशैली में परिवर्तन करने से  - यह तरीका इलाज का सबसे महत्व का भाग है। - शराब और धूम्रपान को तो पूरी तरह से ही बंद करें**, क्योंकि इस से पैंक्रियाज को ज्यादा नुकसान होता है.  - कम चर्बी वाला आहार को ही खाना चाहिए। **, जिस से की पाचन आसान हो।  - छोटे-छोटे अंतर में बार-बार भोजन करें ** - प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट मिलने वाले ही भोजन करे। * (जैसे दालें, चावल, सब्ज़ियाँ) लें। - पानी को ज्यादा पीना चाहिए। ताकि डिहाइड्रेशन न हो। ## 3. घरेलू उपाय और देखभाल - हल्का और पौष्टिक भोजन को ही करें। - गर्म पानी से सेंक करने से * पेट दर्द में बहुत ही राहत देता है। - तनाव से जितना हो सके उतना तो दूर ही रहें। - डॉ. ने जो भी सलाह बताया है, उनका पालन सही तरह से करे।  ##4 .जटिलताएं क्या है? - मधुमेह का बढ़ जाना - वजन में कमी हो जाना।  - पैंक्रियाटिक कैंसर का जोखिम का खतरा होना।  - पित्त की नली में अवरोध।  - पेट में ज्यादा पानी का भर जाना
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Pancreatitis Atrophy treatment in homeopathy
१) Pancreatitis Atrophy का इलाज – कारण, लक्षण और उपचार की पूरी जानकारी? #परिचय **पैंक्रियाटाइटिस एट्रोफी ** का अर्थ होता है की, *अग्न्याशय  का सिकुड़ जाना। - यह प्रकार की स्थिति **क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस** के ज्यादा लंबे समय तक बने रहने के कारण से होता है। - जब बार-बार सूजन होता है, तो पैंक्रियाज के ऊतक धीरे-धीरे से नष्ट हो जाते हैं, और उसका अंग छोटा और कमजोर हो जाता है। - यह तरह की समस्या धीरे-धीरे पाचन को असर करती है ,और शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाने से ,या तो,  वज़न  कम होने जैसी परेशानी  होती है. २) पैंक्रियाटाइटिस एट्रोफी का प्रमुख कारण क्या होता है? पैंक्रियाज  सिकुड़ने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे की,  1.** ज्यादा लंबे समय तक शराब का सेवन** लगातार शराब पीने से पैंक्रियाज में सूजन हो जाती है, जो की बाद में उसे हानि कर सकता है.  2. **क्रॉनिक पैंक्रिएटाइटिस**   – पुराने सूजन के कारण से पैंक्रियाज के टिश्यू फाइब्रोटिक होने से काम करना बंद कर देते हैं।  3. **ऑटोइम्यून पैंक्रिएटाइटिस**   – शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली पैंक्रियाज के कोशिका पर हमला कर देते है।  4. कुछ लोगों में तो, जन्म से ही पैंक्रियाज कमजोर होता है, और सही तरह के  एंजाइम असामान्य बनते हैं।  5. गॉलब्लैडर स्टोन**   – पित्त नली के अवरोध से पैंक्रियाज में दबाव बढ़ने लग जाता है, जिस से की हानि होता है। ३)  Pancreatitis Atrophy के क्या लक्षण हो सकते है? इसके लक्षण धीरे-धीरे से होते हैं. जो की इस तरह से होते है, * ऊपरी पेट में लगातार दर्द का होना *  अपच  जैसा लगना * वज़न का कम  हो जाना  * भूख में भी कमी होना या तो भूख नहीं लगना  * ब्लड शुगर का बढ़ जाना इस तरह के लक्षणों को नज़रअंदाज़ किया गया , तो पैंक्रियाज के  कार्य करने की क्षमता लगभग खत्म हो जाती है।  ४) Pancreatitis Atrophy के लिए डॉक्टर किस तरह की (जांचें) करते है? Pancreatic atrophy का पता करने के लिए डॉ. कुछ जाँच करवाने को कहते हैं, जैसे की,  1. CT Scan या MRI :– पैंक्रियाज के आकार और संरचना को देखने के लिए किया जाता है. 2. **Endoscopic Ultrasound** :– ऊतक के हानि और फाइब्रोसिस का आकलन के लिए । 3. **Pancreatic Function Test** :– एंजाइम और कार्य क्षमता को मापने के लिए।  4. **Blood Test ** : – सूजन और एंजाइम असामान्यता के जांच के लिए।  #उपचार? Pancreatitis Atrophy का इलाज उसके कारण और लक्षण पर निर्भर करता है। जैसे की,  #1. *आहार और जीवनशैली में परिवर्तन* पैंक्रियाटाइटिस एट्रोफी के दर्दी को खाने-पीने में और अपने जीवन शैली पर ध्यान देना चाहिए।  **खाने में क्या खाना चाहिए** -  उबली हुई सब्ज़ियाँ और दलिया का उपयोग करना  *  पचने वाले प्रोटीन * विटामिन- A, D, K वाले खाद्य पदार्थ को खाने से  ** क्या नहीं खाना चाहिए**  -  ज़्यादा तैलीय और ज्यादा मसालेदार तली हुई चीज़ें।  * चाय और कॉफ़ी और कार्बोनेटेड ड्रिंक * शराब और धूम्रपान **किस आदत को सुधारें** * भोजन को छोटे - छोटे हिस्सों में ३-४ बार-बार खाएं  * तनाव से बचें और डेली कसरत करे।  * सही तरह से ७-८ घंटे की नींद को लें.  #2 .*सर्जिकल या एंडोस्कोपिक उपचार*  कई बार डक्ट ब्लॉकेज होने पर सर्जरी की आवश्यकता होती है, जैसे की, *Endoscopic stenting :  – पित्त या पैंक्रियाज डक्ट को खोलने के लिए.  *Partial Pancreatectomy : – खराब भाग को निकालना। *Celiac plexus block * :– दर्द को कम करने के लिए नर्व ब्लॉक
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mesenteric lymph node kab aur kyu badhta hai
1) मेसेंटेरिक लिम्फ नोड्स कब और क्यों बढ़ते हैं? **परिचय:** मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली  में **लिम्फ नोड्स** महत्वपूर्ण भूमिका  अदा करता हैं। छोटी-छोटी ग्रंथियाँ शरीर के अलग -अलग  भाग में मौजूद रहती हैं.और संक्रमण और सूजन से शरीर की रक्षा करती हैं। - जब **आंतों या पेट** में किसी प्रकार का संक्रमण या (सूजन) होता है, तो **मेसेंटरी** — यानी आंतों को पेट की दीवार से जोड़ने वाला भाग — में मौजूद लिम्फ नोड्स सूज जाते हैं। इस स्थिति को **मेसेंटेरिक लिम्फैडेनोपैथी ** कहा जाता है। २) मेसेंटेरिक लिम्फ नोड्स बढ़ने के सामान्य कारण क्या है? #(क)संक्रमण - *वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस* :  बच्चों में इसका होना सबसे आम कारण में से एक है। इसमें दस्त, बुखार और उल्टी के साथ लिम्फ नोड्स का आकार बढ़ सकता है।  - *बैक्टीरियल इंफेक्शन**:  (जैसे साल्मोनेला, यर्सिनिया आदि) भी आंत की अंदर की पर्त में सूजन पैदा करते हैं, जिससे लिम्फ नोड्स फूले हुए दिखाई देते हैं। #(ख)सूजन से संबंधित रोग  *क्रोहन डिज़ीज़** और **अल्सरेटिव कोलाइटिस** जैसी सूजन संबंधी आंतों की बीमारियों में लिम्फ नोड्स का आकार बढ़ सकता है। * **अपेंडिसाइटिस** के दौरान भी अपेंडिक्स के आसपास के मेसेंटेरिक लिम्फ नोड्स प्रभावित हो सकते हैं। (ग) कैंसर संबंधी कारण  * जब शरीर में **कैंसर कोशिकाएँ फैलती हैं**, तो वे लिम्फ नोड्स में जाकर उन्हें बड़ा कर सकती हैं। **लिम्फोमा** या **मेटास्टैटिक कैंसर** की स्थिति में भी इन नोड्स का असामान्य रूप से बढ़ना देखा जाता है। ३)  मेसेंटेरिक लिम्फ नोड्स बढ़ने के क्या लक्षण होते है?  - मेसेंटेरिक लिम्फ नोड्स बढ़ने के दौरान निम्नलिखित लक्षण महसूस हो सकते हैं — जैसे की ,  * नाभि या पेट के मध्य भाग में तेज दर्द का होना **  * उल्टी का  होना  *पेट में सूजन या भारीपन जैसा महसूस होना  * कभी-कभी भूख में कमी भी हो सकती है. ४)मेसेंटेरिक लिम्फ नोड्स की जांचें डॉक्टर कैसे करते है? - डॉक्टर स्थिति का पता करने के लिए कुछ जाँच करवाने की सलाह देते हैं — जैसे की , - अल्ट्रासाउंड ::  बच्चों में  और वयस्कों दोनों में ही लिम्फ नोड्स के आकार और संख्या को देखने के लिए।- CT Scan या MRI ::  इनसे लिम्फ नोड्स की सटीक स्थिति, आकार और आसपास के भाग की स्थिति का पूरा जानकारी मिलता है।  - ब्लड टेस्ट:: संक्रमण, सूजन या किसी इम्यून डिसऑर्डर की पुष्टि के लिए किया जाता है। - बायोप्सी :: अगर डॉक्टर को **टीबी** या **कैंसर** का संदेह हो, तो लिम्फ नोड से टिश्यू सैंपल लेकर माइक्रोस्कोपिक जांच की जाती है। #कब डॉक्टर से संपर्क करें? निम्न स्थितियों में तुरंत ही डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है — जैसे की ,  * पेट में **लगातार  तेज दर्द** रहना या दर्द का बार-बार होना * २ –३ दिनों से भी अधिक दिन में बुखार** बने रहना  *वजन का कम होना * **अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन** में लिम्फ नोड्स का बड़ जाना 
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celiac disease ka homeopathy me ilaaj kya hai
१)सीलिएक डिज़ीज़ का इलाज क्या है? यह ऑटोइम्यून विकार है, जिस में शरीर ग्लूटेन नामक प्रोटीन को पचाने में असमर्थ है। - जब भी कोई मरीज सीलिएक रोग से पीड़ित होते है, तो भी ग्लूटेन वाला भोजन करते है, तो उसके रोग-प्रतिरोधक प्रणाली आंतों के दीवार पर हमला करते है। जिस के कारण से आंतों में सूजन आ जाते है.  - भोजन से मिलने वाला पोषक तत्व को ठीक से अवशोषित भी नहीं कर पाता है। जिस के परिणाम स्वरूप शरीर में पोषण की कमी और एनीमिया, हड्डियों में कमजोरी और अन्य जटिल समस्याएँ भी हो सकती हैं। आज के लेख में समझेंगे कि, सीलिएक डिज़ीज़ का इलाज क्या है, इसका प्रबंधन कैसे किया जाता है. और मरीज़ को क्या सावधानियों का पालन करना चाहिए।  २) सीलिएक डिज़ीज़ का मूल उपचार क्या है? चिकित्सा विज्ञान में **सीलिएक रोग का कोई स्थायी इलाज ** अभी तो उपलब्ध नहीं है। - इस बीमारी को दवा से ठीक नहीं कर सकते है , पर  जीवनशैली और आहार में परिवर्तन करके कर सकते है। सबसे प्रभावी और प्रमुख इलाज है।  #1.**ग्लूटेन-फ्री डाइट** सीलिएक डिज़ीज वाले  मरीज को जीवनभर **ग्लूटेन-मुक्त भोजन** करना होता है। जिसका अर्थ है, कि गेहूँ, और जौ ,राई में से बनने वाले  पदार्थ को पूरी तरह छोड़ देना सही है।  **Avoid Foods** * गेहूँ की रोटी, नान, ब्रेड, केक, बिस्किट आदि को नहीं खाना । * जौ से बने पेय पदार्थ को भी नहीं खाना चाहिए.  * किसी भी तरह का प्रसंस्कृत खाना जिसमें ग्लूटेन मिश्रित हो।  **खाने वाले खाद्य पदार्थ** * मक्का (कॉर्न)  * बाजरा, और  ज्वार  * आलूऔर शकरकंद  * ताजे फल और ताजे सब्ज़ियाँ  * दूध से बनने वाले उत्पाद (यदि लैक्टोज इनटॉलरेंस नही हो तो )   # 2. **पोषण कमी की पूर्ति ** सीलिएक मरीज को अक्सर पोषण की कमी होती है, क्योंकि ज्यादा लंबे समय तक आंतें पोषक तत्वों को सही तहर से अवशोषित नहीं कर पातीं है।  इसलिए डॉ.कुछ निम्नलिखित सप्लीमेंट्स लेने की सलाह भी  देते हैं – जैसे की ,  * आयरन सप्लीमेंट  : – एनीमिया को दूर करने के लिए.  *  हड्डियों के मजबूती के लिए कैल्शियम और विटामिन-D  * विटामिन-B12 और फोलिक एसिड : – थकान और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से बचाव के लिए। * मेटाबॉलिज्म को सुधारने के लिए जिंक और मैग्नीशियम। #3. **दवाइयाँ और अन्य उपचार** * सीलिएक का **कोई इलाज दवा से नहीं होता है.**  * यदि ग्लूटेन-फ्री डाइट देना शुरू करने के बाद भी लक्षण बने हैं, तो डॉ.  सूजन को कम करने के लिए **स्टेरॉयड दवाएँ** देते है। #4. **जीवनशैली और सावधानियाँ** * कोई भी तरह का पैक्ड फूड खरीदते समय हमेशा  **ग्लूटेन-फ्री वाला  लेबल** को देखें।  * ज्यादातर बाहर खाना खाते टाइम में सावधानी रखें, क्योंकि यह तली हुई चीज़ों में छुपा हुआ ग्लूटेनहो सकता है। * अपने परिवार और मित्र को इसके बारे में बताएं, ताकि वे खाने-पीने में ध्यान रख सकें। 5. **दीर्घकालिक प्रबंधन** यह रोग अगर हो जाए तो जीवनभर  ग्लूटेन से परहेज़ करना बहुत ही जरुरी हो जाता है। * अगर मरीज नियमित रूप से डाइट का पालन करे,  तो वह भी सामान्य जीवन जी सकता है। 6. **भविष्य की संभावनाएँ** विज्ञान लगातार सर्च कर रहा है, ताकि सीलिएक रोग का कोई स्थायी इलाज खोज सके। अभी जिन क्षेत्रों पर काम हो रहा है, जैसे की ,–  * वैकल्पिक दवाइयाँ: ** :- ऐसी कोई दवा जो ग्लूटेन को तोड़कर उसे नुकसानदायक बनने से रोक सके । * टीकाकरण (Vaccine):** :- इम्यून सिस्टम को ग्लूटेन को सहन करने योग्य बनाने के प्रयास।  *एंजाइम सप्लीमेंट्स:** जो खाने में होने वाला ग्लूटेन को हानिरहित बना सकें।
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pancreas ke neck me mildly atrophied
१)पैंक्रियाज के Neck में Mildly Atrophied का इलाज? मानव शरीर में पैंक्रियाज बहुत ही  महत्वपूर्ण अंग है, जो की पाचन और रक्त शर्करा को नियंत्रण में भूमिका निभाता है। -  पैंक्रियाज पेट के पीछे होता है, और मुख्य तीन भाग में बाँटा गया है –  **हेड **, **नेक**, और **टेल**। - कभी-कभी इमेजिंग टेस्ट में रिपोर्ट में पता चलता है कि, पैंक्रियाज के नेक वाले भाग में हल्की सिकुड़न देखी गई है। २) पैंक्रियाज में एट्रोफी क्या है? Atrophy का अर्थ है,की  किसी भाग या ऊतक के आकार छोटा हो जाना या तो उसका  कार्य करने की क्षमता में कमी का आ जाना। * जब पैंक्रियाज के किसी भाग में एट्रोफी होता है, तो वहां की कोशिका सिकुड़ जाती हैं।  * यदि यह **(हल्की)** है, तो कोई भी गंभीर लक्षण नहीं देती है, पर समय के साथ समस्या और भी बढ़ सकती है। ३) पैंक्रियाज के Neck में Mild Atrophy के संभावित कारण क्या है? 1. * उम्र बढ़ने के साथ में पैंक्रियास का साइज भी धीरे-धीरे से छोटा हो जाता  है।   * एट्रोफी वृद्ध लोगों में बहुत ही ज्यादा देखने को मिलती  है। 2. क्रॉनिक पैन्क्रियाटाइटिस में लंबे समय तक सूजन हो जाने से ग्रंथी  सिकुड़  सकती है।   * इसमें बहुत ही दर्द, और पाचन की समस्या और मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।  3. * यदि उस भाग में खून का प्रवाह कम होने लग जाए तो ऊतक धीरे-धीरे सिकुड़ने लग जाते है. 4.* पैंक्रियाज की नली में रुकावट आ जाने से उस क्षेत्र पर दबाव पड़ता है और  साथ में एट्रोफी हो सकता है। 5. * कई बार तो पैंक्रियाज की कोशिका सिकुड़ कर उस ही जगह पर में फैट जमा होने लग जाता है। इसे **lipomatosis** भी कहते हैं।  ४) क्या लक्षण है? इसके लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है , जैसे की.  * ऊपरी पेट में तेज दर्द का होना या तो , पीठ में दर्द का होना  * भूख भी कम लगना  * वज़न का घट  जाना  * अपच, और गैस, की प्रॉब्लम का होना * मधुमेह का खतरा हो सकता है।  ५) डॉ. किस तरह की जाँच करते है? अगरआप के रिपोर्ट में *“mildly atrophied pancreas neck”* लिखा है, तो डॉ.  इन टेस्ट्स की सलाह देते हैं: जैसे की,  1.इमेजिंग टेस्ट में तो :– CT Scan, MRI,  या  तो Ultrasound जैसे टेस्ट करवाना।  2. रक्त की जांच : – एमिलेज , लिवर फंक्शन टेस्ट , ब्लड शुगर।  3. **स्टूल टेस्ट से **:  – चर्बी की मात्रा और पाचन एंजाइम  कमी की जाँच करने के लिए।  #क्या जटिलताएँ हो सकते है? अगर एट्रोफी का कारण इलाज के बिना बढ़ता रहा तो. * बार-बार पेट में तेज दर्द का होना  * कुपोषण * मधुमेह का खतरा भी होता है ।  #किस तरह से बचाव  कर  सकते है? * शराब और धूम्रपान से पूरी तरह की दूरी बनाएं।  * हेल्दी डायट को अपनाएं जिस में  की ताजे फल, और सब्जियां, प्रोटीन होता है ।  * डेली कसरत करें। * अगर पेट में बार-बार दर्द होता हो या  तो पाचन समस्या लंबे समय तक हो तो तुरंत डॉ. को दिखाएं।
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homeopathy me ulcerative colitis ka ilaaj
१) क्या अल्सरेटिव कोलाइटिस जानलेवा बीमारी है? भारत में आजकल पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारी तेजी से बढ़ रही हैं। जो की महिला और पुरुष दोनों वर्ग में देखने को मिलता है।  इनमें से **अल्सरेटिव कोलाइटिस **, है, जो की बड़ी आंत और मलाशय  को असर करती है। - यह **दीर्घकालिक सूजन से संबंधी रोग** है, जिसमें की आंत की अंदर की परत पर छाले और सूजन हो जाते हैं। - कुछ लोग इसको साधारण पेट की बीमारी समझ लेते हैं, पर वास्तव में यह गंभीर स्थिति भी बन सकती है। २) अल्सरेटिव कोलाइटिस क्या है में मरीज को क्या लक्षण होते है? इस में रोगी को अक्सर ये लक्षण दिखाई देते हैं. जैसे की ,  * बार-बार दस्त का होना, जिस में  की खून आ सकता है. * पेट में बहुत ही तेज दर्द और ऐंठन का होना  * अचानक से  वजन का कम हो जाना  * थकान और कमजोरी जैसा हो जाना  *कभी -कभी तो भूख न लगन भी नहीं लगना  ३) क्या यह जानलेवा बीमारी है? सामान्य स्थिति में अल्सरेटिव कोलाइटिस ** जानलेवा नहीं है **, अगर इस बीमारी को नजर अंदाज कर दिया जाए और इलाज सही से न किया जाए तो यह **गंभीर जटिलताओं** का कारण बन सकती है। - इन्हीं जटिलता के कारण से यह बीमारी **जीवन के लिए खतरा** बन सकती है। *अल्सरेटिव कोलाइटिस से जुड़ी गंभीर जटिलताएँ* 1.**गंभीर रक्तस्राव** लगातार आंत में से खून आ जाने पर कभी-कभी तो **एनीमिया** भी हो सकता है। अधिक रक्तस्राव की स्थिति जानलेवा भी बन जाती है।  2. **टॉक्सिक मेगाकोलन ** यह गंभीर स्थिति है, जिस में की बड़ी आंत अचानक से फैलने  लग जाती है और उस में गैस जमा होने लग  जाती है। समय पर सही इलाज न हो तो आंत फट सकती है, जिस से की संक्रमण और मृत्यु का खतरा और भी बढ़ जाता है।  3.**आंत का फटना** आंत में छेद होने से बैक्टीरिया पेट की गुहा में पहुँच सकते हैं. और **सेप्सिस** जैसी जानलेवा समस्या हो सकती है. 4. **कैंसर का खतरा**   ज्यादा समय तक अल्सरेटिव कोलाइटिस रहने पर बड़ी आंत में **कोलन कैंसर** होने का खतरा ज्यादा होता है. 5.**शरीर पर अन्य प्रभाव** * लिवर की बीमारी * आँखों, त्वचा और जोड़ों में सूजन हो जाना * हड्डियों में भी कमजोरी होना इन सभी कारणों से यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।  ४) अल्सरेटिव कोलाइटिस का  इलाज क्यों ज़रूरी है? इसका  अभी तक  कोई भी तरह से **पूर्ण इलाज** नहीं है, पर दवा और जीवनशैली में बदलाव लाने से इसे **नियंत्रित** किया जा सकता है। - अगर मरीज समय पर इलाज ले और डॉ. की सलाह का पालन करे, तो वह सामान्य जीवन जी सकता है।  #अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज  १) **सर्जरी** जब दवा से फायदा न मिले, तो डॉ. आंत का प्रभावित भाग निकालने की सलाह दे सकते हैं। - कई बार पूरी बड़ी आंत को हटाना भी पड़ सकता है। जिस से की रोग पूरी तरह खत्म हो सकता है, पर यह बड़ा और बहुत ही जटिल ऑपरेशन होता है।  २). *जीवनशैली और खानपान में परिवर्तन से**   *आसानी से पचने वाले और  संतुलित भोजन को  लें.  * ज्यादा मसालेदार और तैलीय भोजन नहीं खाना चाहिए।  * शराब और धूम्रपान से दुरी बनाये रखना।  * तनाव को कम करने के लिए कसरत करे.  ५) क्या मरीज सामान्य जीवन जी सकता है? जवाब = हाँ, पर रोगी ** सही समय पर सही निदान** कराए और **नियमित इलाज** ले, तो वह सामान्य जीवन जी सकता है। - बहुत से लोग इस बीमारी के साथ रहते हुए भी पढ़ाई, और  नौकरी, परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाते हैं।
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GERD treatment in homeopathic
१) GERD क्या है?GERD गंभीर पाचन संबंधी की समस्या है। जिस में पेट का एसिड बार-बार (भोजन नली) में चला जाता है। - जिस से की सीने में जलन का होना , खट्टी डकार का आना और कभी-कभी तो  खाँसी जैसी समस्याएँ होने लगती हैं। - इसका सही समय पर इलाज नही किया  हो, तो यह अल्सर, या बैरेट्स इसोफेगस जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। २) GERD के इलाज के प्रमुख तरीके क्या है? #1. जीवनशैली में बदलाव  सबसे पहला और महत्वपूर्ण इलाज जीवनशैली में सुधार करना है। कई बार दवा से भी ज्यादा असर डेली की आदत सुधारने से भी  होता है। *खाने के आदत बदलें*- ज्यादा तैलीय और मसालेदार खाना और  ज्यादा खट्टे भोजन से बचें। - कॉफी और चाय, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स को कम करें। - छोटे-छोटे भाग में दिन में ३-४ बार खाना को खाएँ।  - भोजन करने के बाद में  तुरंत सोना नहीं चाहिए।  - मोटापा GERD का बड़ा कारण है। जिस से की एसिड ऊपर की ओर आता है.  # 2.दवाइयो से इलाज अगर जीवनशैली में सुधारने से लाभ नहीं मिले, तो डॉ. दवाइयाँ देते हैं। * एंटासिड* : यह तुरंत आराम देते हैं, और पेट का एसिड न्यूट्रलाइज करते हैं।  *H2 Blockers* : यह एसिड का उत्पादन कम करते हैं।  *Prokinetics* : यह दवा भोजन नली और पेट की गति को सुधारती हैं,  जिस से की  एसिड ऊपर नही आए।  #3.एंडोस्कोपिक और सर्जिकल इलाज कुछ दर्दी में दवाऔर जीवनशैली में सुधार से भी लक्षण कण्ट्रोल नहीं होते। ऐसे मामलों में सर्जरी की जाती है.  *फंडोप्लिकेशन* : गर्ड की सबसे नार्मल सर्जरी है। जिसमे की पेट के ऊपरी भाग में भोजन नली के चारों ओर लपेट कर मजबूत वाल्व बनाते है.  और एसिड वापस नही  आए।  *LINX Device*:    इसमें एक मैग्नेटिक रिंग इसोफेगस के चारों तरफ लगाते है। जो की भोजन को नीचे जाने देते है, पर एसिड को ऊपर नहीं आने देते है। #4.घरेलू उपाय गर्ड से राहत पाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे भी कारगर साबित हो सकते हैं।  - खाना खाने के बाद मुँह में अदरक का छोटा टुकड़ा रख के धीमे -धीमे चबाएँ।  - सौंफ को चबा लेने से सीने में जलन कम होती  है। - एलोवेरा का जूस सीमित मात्रा में लेना बहुत ही फायदेमंद होता है. #5. किन्ह लोगो को तुरंत ही डॉ. से मिलना चाहिए? गर्ड के हल्के लक्षण घर पर कंट्रोल किए जा सकते हैं, लेकिन अगर निम्न लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए:  *बार-बार में उल्टी का होना* बहुत ही तेज सीने में दर्द होने से (हार्ट अटैक भी हो सकता है)  * वजन का तेजी से गटकम हो जाना  * खाना - खाने में परेशानी का होना
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