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pancreatic me tumor kya hota hai aur homeopathy me kya ilaj hai?
१) पैंक्रियास ट्यूमर क्या है? अग्न्याशय शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण भाग है, जो के पेट के ऊपरी भाग में, आमाशय के पीछे स्थित होता है। इसके मुख्य दो काम करता है. (१)पाचन एंजाइम बनाना जो के भोजन को पचाने में सही से मदद करते हैं.  (२) इंसुलिन जैसे हार्मोन बनाना जो ब्लड शुगर को कण्ट्रोल करते हैं।  - अग्न्याशय की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि होने लगती है जिस से गांठ बन जाती है, तो उसे Pancreas ट्यूमर कहा जाता है।  (२) पैंक्रियास ट्यूमर के कितने प्रकार होते है? पैंक्रियास ट्यूमर को मुख्य दो प्रकार में बांटा जाता है.  1. सौम्य ट्यूमर ट्यूमर कैंसर नहीं है. पर शरीर के कोई भी भाग में नहीं फैलता है. 2. घातक ट्यूमर  यह कैंसर ट्यूमर होते हैं. और बहुत ही तेजी से बढ़ सकते हैं। (३) पैंक्रियास ट्यूमर होने के क्या - क्या कारण हो सकते है? पैंक्रियास ट्यूमर बनने का कोई निश्चित कारण नहीं है, पर कुछ जोखिम कारक इसकी संभावना बढ़ा सकते हैं. जैसे की, - ज्यादा लंबे समय तक धूम्रपान करना।  - ज्यादा शराब का सेवन करना। - मोटापा का बढ़ जाना। - मधुमेह। - परिवार में कोई को भी पैंक्रियास कैंसर का इतिहास है ,तो जोखिम का खतरा बढ़ जाता है.  (४) पैंक्रियास ट्यूमर होने के लक्षण क्या होते है? - शुरुआती स्टेज में पैंक्रियास ट्यूमर के लक्षण हल्के होते हैं. या नहीं दिखते, इसलिए जैसे-जैसे ट्यूमर बढ़ता है, निम्न लक्षण हो सकते है, जैसे की, - पेट के ऊपरी भाग में तेज दर्द का होना , जो के पीठ तक भी फ़ैल सकता है. - वजन का तेजी से कम हो जाना। - भूख भी सही से न लगना।  - गहरे रंग का पेशाब तथा हल्के रंग का मल का होना। - डायबिटीज का कण्ट्रोल में न होना।  (५) पैंक्रियास ट्यूमर के जांच कैसे होती है? पैंक्रियास ट्यूमर के पुष्टि के लिए कुछ तरह की जांचें की जाती हैं. जैसे की, 1. ब्लड टेस्ट  2. इमेजिंग टेस्ट  3. एंडोस्कोपिक जांच 4. बायोप्सी # पैंक्रियास ट्यूमर से बचाव तथा सावधानियां कैसे रखे? पैंक्रियास ट्यूमर को पूरी तरह रोक पाना मुश्किल है, पर कुछ उपायों से जोखिम को कम किया जा सकता है. जैसे की,  - धूम्रपान तथा शराब को पूरी तरह से बंद कर दे. - संतुलित आहार को लें, जिस में फल और सब्जियां ज्यादा का सेवन हों.  - नियमित कसरत करें।  - मोटापा तथा मधुमेह को कण्ट्रोल में रखें।  - पेट का दर्द, पीलिया , वजन घट जाना जैसे लक्षणों को कभी भी नजर अंदाज न करें।
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Crohn's rog ka kya ilaj hai
१) क्रोहन रोग का क्या इलाज है ? क्रोहन रोग गंभीर पर कण्ट्रोल कर सके ऐसे पाचन तंत्र की बीमारी है। यह "दीर्घकालिक सूजन संबंधी रोग" है। जो मुख्य छोटी आंत और बड़ी आंत को असर करता है. - यह मुंह से ले कर गुदा तक किसी भी भाग में हो सकता है। - इस में आंत के दीवारों में सूजन, और जलन हो जाती है, जिस से व्यक्ति को पेट में दर्द, दस्त, तथा वजन का घट जाना जैसी समस्याएं होती हैं। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp:२) क्रोहन रोग क्यों होता है?क्रोहन रोग का अभी तो, कोई भी सटीक कारण पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं, पर इसके पीछे प्रमुख कारण हो सकते हैं, जैसे की, - आनुवंशिक कारण अगर परिवार में कोई को भी यह बीमारी हो तो, इसका खतरा ज्यादा होता है. - आंतों में बैक्टीरिया के असंतुलन का होना।  - धूम्रपान तथा गलत जीवनशैली का चयन करना। - बहुत ही ज्यादा जंक फूड का सेवन करना। - ज्यादा तनाव लेना। ३) क्रोहन रोग के मुख्य क्या -क्या लक्षण होते है? क्रोहन रोग के लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है, जैसे की,  - बार-बार लगातार दस्त का लगना।  - मल में से खून का आना. - वजन का तेजी से घट जाना। - कमजोरी तथा थकान जैसा लगना। - भूख भी सही से न लगना। - बच्चों में भी ग्रोथ का रुक जाना। - मुंह में छाले का हो जाना। ४) क्रोहन रोग का प्राकृतिक और सहायक उपाय क्या है? 1. सही खानपान खानपान ही इलाज का सबसे मैन भाग है।  #खाने योग्य चीजें# - दलिया तथा ओट्स।  - दही तथा छाछ। - उबली हुई सब्जियां। - नारियल का पानी।  - सादा दाल के पानी का उपयोग। # खाने में परहेज करने वाले चीजें# - ज्यादा मसालेदार तथा ज्यादा तला हुआ भोजन।- बहुत ही ज्यादा जंक फूड.  - शराब तथा सिगरेट।  - कोल्ड ड्रिंक्स तथा कैफीन। 2. जीवनशैली में परिवर्तन  - डेली व्यायाम करें।  - पर्याप्त मात्रा में नींद लें.  - तनाव न हो तो, उसके लिए कसरत करें। - धूम्रपान को पूरी तरह से बंद कर दे. ५) क्रोहन रोग के दर्दी के लिए जरूरी क्या - क्या सावधानियां रखना चाहिए ? - दवा को नियमित रूप से लें. - खुद से कोई भी नई दवा को न ले या सप्लीमेंट न लें. - लक्षण बिगड़ते ही डॉ. से तुरंत ही संपर्क करें। - क्रोहन रोग का "स्थायी इलाज तो नहीं" है, पर कंट्रोल में रखा जा सकता है। कई दर्दी सालों तक भी बिना लक्षणों के सामान्य जीवन को जीते हैं, जिसे हम रिमिशन कहते हैं। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp:
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child development delay treatment in homeopathy
१) चाइल्ड डेवलपमेंट डिले क्या होता है? बाल विकास में देरी उस स्थिति को कहते है, जब कोई भी बच्चा अपनी उम्र के अनुसार शारीरिक, तथा मानसिक, और भावनात्मक, सामाजिक या भाषा संबंधी विकास के माइलस्टोन समय पर पूरा नहीं कर पाता है। - सामान्य रूप से सब बच्चे का विकास अलग-अलग गति से होता है, पर यदि किसी विशेष क्षेत्र में देरी बनी रहे तो उसे विकास में देरी मान सकते है। - बाल विकास में देरी कोई बीमारी नहीं है, पर संकेत है कि, बच्चे को अतिरिक्त देखभाल, तथा सही मार्गदर्शन की आवश्यकता हो सकती है। २) विकासात्मक माइलस्टोन क्या होते हैं? "माइलस्टोन" वो क्षमताएँ होती हैं, जिन्हें बच्चे निश्चित उम्र तक हासिल कर लेते हैं, जैसे की, - 6 महीने में गर्दन को संभालना।  - 1 साल में खड़ा होना या तो, चलने की कोशिश करना।  - 2 साल में कुछ -कुछ वाक्य को बोलना सीखना।  - ३.५ से ४ साल में तो,दूसरों बच्चो के साथ में खेलना।  ३) चाइल्ड डेवलपमेंट डिले के कितने प्रकार होते है? #1. शारीरिक विकास में देरी - देरी से बैठना तथा रेंगना और चलना। - कमजोर मांसपेशियाँ के वजह से।  - संतुलन के कमी.  # 2. भाषा और बोलने में देरी  - बच्चे देरी से बोलते है.  - शब्दों को जोड़ कर के भी वाक्य को नहीं बना पाते है. # 3. बौद्धिक विकास में देरी  - सीखने में परेशानी का होना।  - ध्यान को केंद्रित भी नहीं कर सकते है.  #4. सामाजिक तथा भावनात्मक विकास में देरी - आँखों से आँख मिला कर के बात न करना।  - अकेले ही रहना उनको ज्यादा पसंद होता है.  #5. फाइन मोटर स्किल में देरी - पेंसिल को पकड़ने में परेशानी का होना। - छोटे टॉय को सही से न पकड़ पाना।  - कपड़े को पहनने में परेशानी का होना। ४) बाल विकास में देरी के क्या - क्या कारण होते है? 1. जन्म से जुड़ी हुयी समस्याएँ - समय से पहले ही जन्म। - जन्म के समय में ऑक्सीजन के कमी.  - वजन का कम होना 2. पोषण की कमी  - प्रोटीन, तथा आयरन और आयोडीन की कमी का होना। 3. न्यूरोलॉजिकल कारण  - सेरेब्रल पाल्सी - ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिस ऑर्डर  4. आनुवंशिक का कारण - परिवार में अगर पहले से ही आनुवंशिक का कारण है, तो, विकास संबंधी समस्याएँ हो सकता है.  ५) चाइल्ड डेवलपमेंट डिले के क्या - क्या लक्षण होते है? - उम्र के अनुसार सही से विकास का न होना।  - बोलने में देरी का होना। - बार-बार बच्चे का गिर जाना। - दूसरों में रुचि का नहीं लेना। - सीखने में ज्यादा कठिनाई का होना।  #चाइल्ड डेवलपमेंट का सही इलाज तथा सही प्रबंधन क्या है? #1. अर्ली इंटरवेंशन  - जितने जल्दी पहचान और इलाज को शुरू होता है, उतने ही बेहतर परिणाम मिलते हैं। # 2. स्पीच थेरेपी - भाषा और संप्रेषण के कौशल को सुधारने के लिए। # 3. फिजियोथेरेपी  - मांसपेशियों के मजबूती तथा संतुलन के लिए।  #4. ऑक्यूपेशनल थेरेपी  - दैनिक गति विधियों को अच्छे से बनाने में मदद करती है। # शिक्षा - सीखने की क्षमता को और भी बढ़ाने के लिए।
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Pancreatic bimari ka homeopathic me kya ilaj hai?
१) पैंक्रियाटिक (Pancreatic) बीमारी का क्या इलाज है? हमारे शरीर में पैंक्रियाज महत्वपूर्ण अंग है, जो के पेट के ऊपरी भाग में स्थित होता है। यह पाचन एंजाइम और इंसुलिन जैसे हार्मोन को बनाता है, जो के भोजन को पचाने तथा ब्लड शुगर को कण्ट्रोल करने में मदद करते हैं। - पैंक्रियाज से जुड़ी बीमारियों भाषा में "पैंक्रियाटिक बीमारी" कहा जाता है। - मुख्य रूप से "एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस, तथा क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस" शामिल हैं। पर साई समय पर सही इलाज नहीं मिला तो, बीमारि गंभीर रूप ले लेती हैं। २) पैंक्रियाटिक बीमारी के क्या -क्या मुख्य कारण होते है? - पैंक्रियाज बीमारी से जुड़ी समस्याओं के अलग -अलग कारण होते हैं, जैसे,की,  - ज्यादा शराब का सेवन करने से। - पित्ताशय में पथरी।  - ज्यादा तला - भुना तथा फैटी भोजन। - ज्यादा समय तक धूम्रपान का सेवन करना। - मधुमेह - पारिवारिक इतिहास का होना।  ३) पैंक्रियाटिक बीमारी होने पर क्या - क्या लक्षण दिखाई देते है? - पैंक्रियाज के समस्या में लक्षण बीमारी के ऊपर निर्भर करते हैं, पर आम लक्षण इस तरह से हैं, जैसे की, - पेट के ऊपरी भाग में तेज दर्द का होना जो के, (पीठ तक फैल सकता है).  - उल्टी तथा मतली।  - भूख भी सही से न लगना। - वजन का तेजी से घट जाना.  - कमजोरी जैसा लगना।  ४) पैंक्रियाटिक बीमारी का इलाज क्या है? पैंक्रियाज के बीमारी का इलाज गंभीरता तथा प्रकार पर निर्भर करता है।  #1. एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का इलाज  - एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस मेडिकल इमरजेंसी हो सकता है। इसका इलाज अस्पताल में एडमिट होने पर किया जाता है। - दर्दी को कुछ समय तक खाने-पीने से रोक दिया जाता है. - IV फ्लूइड्स को दिया जाता है. - दर्द तथा उल्टी के दवा को दिया जाता हैं. - पित्त में पथरी होने पर एंडोस्कोपी।  #2. क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस का इलाज क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस ज्यादा समय तक चलने वाली बीमारी है, जिस में पैंक्रियाजखराब होने लगता है।  - शराब तथा धूम्रपान को पूरी तरह से ही बंद करना।  - लो-फैट डाइट उपयोग करना। - दर्द को कण्ट्रोल करने की दवा। #3. पैंक्रियाज में कमजोरी  जब पैंक्रियाज सही मात्रा में पर्याप्त एंजाइम नहीं बना पाता है,तो पाचन सही से नहीं होता है.  - पाचन एंजाइम का कैप्सूल।  - पच सके ऐसे भोजन का हो लेना सही होता है. - विटामिन - A , विटामिन - D, विटामिन - E, विटामिन - K के सप्लीमेंट। - छोटे-छोटे अंतर में समय पर भोजन को करना सही होता है.  ५) पैंक्रियाज दर्दी के लिए सही डाइट प्लान क्या है? #क्या - क्या खाएं# - उबली हुए सब्जियाँ। - दलिया तथा ओट्स।  - सेब, पपीता, केला को खाना।  - उचित मात्रा में पानी को पीना। #क्या न खाएं# - ज्यादा तला-भुना तथा मसालेदार खाना को सिमित कर दे. - शराब तथा ध्रुमपान को नहीं करे. - फास्ट फूड को खाना अब बंद कर दे.  #बचाव के लिए क्या - क्या उपाय है? १) शराब तथा धूम्रपान से पूरी तरह से दूर रहें।  २) संतुलित भोजन को लेना ही सही है.  ३) वजन को कण्ट्रोल में रखें।  ४) समय-समय पर अपने हेल्थ का चेकअप करते रहना चाहिए. ५) पेट के दर्द को कभी भी नजर अंदाज नहीं करें
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ulcerative colitis ka homeopathic me kya ilaaj hai?
१) अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज अल्सरेटिव कोलाइटिस "क्रॉनिक इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD)" है, जिस में बड़ी आंत तथा मलाशय के अंदरूनी पर्त में सूजन और घाव बन जाते हैं। - यह बीमारी ज्यादा समय तक चल सकती है, तथा बार-बार बढ़ और शांत हो सकती है। - अगर सही समय पर इसका सही इलाज तथा जीवनशैली में बदलाव से काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp: २) अल्सरेटिव कोलाइटिस के इलाज का मुख्य उद्देश्य क्या है? - अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज पुरे तरह से बीमारी को खत्म तो, नहीं करता है, पर इसका लक्ष्य होता है, जैसे की, - सूजन को कम करना।  - लक्षणों को कण्ट्रोल करना।  - जटिलताओं से बचाव करना.- दर्दी के जीवन की गुणवत्ता में सुधार।३) अल्सरेटिव कोलाइटिस में डाइट का क्या महत्व होता है? डाइट को लेने से बीमारी को कंट्रोल करने में अहम रोल निभाता है। #क्या - क्या खाना चाहिए? - हल्का, और पच सके ऐसे भोजन का उपयोग करना। -उबले चावल और दलिया। - उबली हुए सब्जियां। - दही  #क्या - क्या नहीं खाना चाहिए? - ज्यादा मसालेदार और ज्यादा तला भुना हुआ खाना। - शराब और कैफीन का उपयोग कम करना। - जंक फूड से दुरी बनाये रखना।  ३) अल्सरेटिव कोलाइटिस का लाइफ स्टाइल में परिवर्तन करने से क्या फर्क होता है? - तनाव को कम करने के लिए रोज कसरत करना.  - योग को रोज ३० मिनट तक करना अच्छा होता है. - ८ घंटे तक पूरी तरह से नींद को लें.  - धूम्रपान करने से बचे।  - नियमित रूप से डॉ. से फ़ॉलोअप लेना सही होता है. Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp:४) अल्सरेटिव कोलाइटिस में क्या -क्या सावधानियां बर्तना चाहिए? - कोई भी तरह के दवा को डॉक्टर से पूछे बिना नहीं लेना चाहिए.  - खून की जांच सही समय पर कराते रहें।  - संक्रमण से दुरी बनाये रखें।
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Influenza kya hota hai? or kaise failta hai
१) Flu इतना खतरनाक क्यों है? अक्सर लोग Flu (इन्फ्लुएंज़ा) को साधारण सर्दी - खांसी समझकर के नज़र अंदाज़ कर देते हैं। पर हकीकत यह है, कि फ्लू हर साल में दुनियाभर के लाखों लोगों को गंभीर रूप से बीमार करता है. और कई मामलों में तो,जानलेवा भी होता है। - खासतौर पर बच्चे,और बुज़ुर्ग, तथा गर्भवती महिलाएं पहले से बीमार लोग भी इसके शिकार बनते हैं। २) Flu (इन्फ्लुएंज़ा) क्या है? - Flu "वायरल संक्रमण" है, जो के Influenza virus के कारण से होता है। यह वायरस नाक, गले तथा फेफड़ों को भी असर करता है। - फ्लू बहुत तेजी से फैलता है, इसका असर हमारे पूरे शरीर पर होता है, न कि सिर्फ नाक-गले ही रहता है। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp: ३) Flu को हल्का समझना गलत हो सकता है? - लोग फ्लू को सामान्य सर्दी मान लेते हैं, पर दोनों में बड़ा अंतर है।  - साधारण सर्दी धीरे-धीरे से होता है, पर फ्लू "अचानक से और तेज़ लक्षणों" के साथ आता है. जैसे की, - तेज बुखार का आना। - बदन में दर्द और सिर में भी दर्द का होना। - ज्यादा थकान जैसा लगना। - गले में भी तेज दर्द का होना। - ठंड का लगना और ज्यादा पसीना का आना।  ४) Flu इतना खतरनाक क्यों होता है? 1. Flu शरीर के इम्यूनिटी को कमजोर कर देता है. - फ्लू वायरस शरीर "रोग प्रतिरोधक क्षमता " पर सीधा हमला करते है। जब इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, तो हमारा शरीर वायरल इन्फेक्शन से लड़ने में असमर्थ हो जाता है।  2. गंभीर जटिलताएं भी पैदा करता है. - फ्लू बुखार या खांसी तकही सीमित नहीं रहता है । कई खतरनाक बीमारियों को भी जन्म दे सकता है, जैसे की, - निमोनिया - ब्रोंकाइटिस  - फेफड़ों में सूजन का हो जाना  - हार्ट अटैक का खतरा। - किडनी पर भी असर पड़ता है.  3. बच्चों तथा बुज़ुर्गों में तो, ज्यादा ही खतरनाक होता है.  4. बीमार लोगों में भी इसका खतरा कई गुना और भी बढ़ जाता है.  5. Flu बहुत ही ज्यादा तेजी से फैलता है.  फ्लू "संक्रामक बीमारी" है। खांसने, छींकने, बात करने से फैल सकता है। - बार-बार फ्लू अलग -अलग तरह से फैलता है. - पुरानी इम्यूनिटी के सुरक्षा भी नहीं देती है. ५) Flu से बचाव करना क्यों जरूरी है? - बचाव करने से फ्लू के जोखिम को कम किया जा सकता है.  - हर साल में "Flu का Vaccine" लगवाएं। - अपने हाथ को साबुन से अच्छे धोएं।  - भीड़भाड़ वाली जगह पर मास्क को पहनें। - छींकते समय मुंह पर रुमाल ढकें। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp:
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mild acute pancreatitis ka homeopathy me ilaj
१) Mild Acute Pancreatitis का क्या इलाज है? हल्का तीव्र अग्न्याशयशोथ ऐसी स्थिति है, जिसमें अग्न्याशय में अचानक सूजन आ जाती है। - आमतौर पर कुछ दिनों तक रहता है, और हल्के लक्षण पैदा करता है। अगर सही समय पर और सही इलाज तथा जीवनशैली में बदलाव से दर्दी जल्दी ठीक हो जाता है. २) Mild Acute Pancreatitis के क्या-क्या लक्षण दिखाई देते है? - हल्के तीव्र अग्न्याशयशोथ के लक्षण तीव्र तो,नहीं होते, पर पहचान करना भी जरूरी है. 1. पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द का होना :: जो के अक्सर पीठ तक भी फैल सकता है। 2. मतली और उल्टी :: कभी खाना खाने के बाद में भी बढ़ जाता है।  3. भूख में कमी हो जाना :: भूख भी सही से नहीं लगना।  4. पेट में सूजन का हो जाना।  - यदि इस तरह के लक्षण अधिक गंभीर हो जाएं और लगातार उल्टी शुरू हो जाए, तो तुरंत ही डॉ. से संपर्क करें। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp: ३) Mild Acute Pancreatitis के क्या - क्या कारण होते है? Mild Acute Pancreatitis के लक्षण निचे सूचि में बताये अनुसार हो सकते है. जैसे की,  1. गॉलस्टोन (Gallstones).  2. ज्यादा ही शराब का सेवन करना। 3.बहुत ही ज्यादा चर्बी वाले भोजन से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है।  4. कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट या ज्यादा लेने से.  ४) Mild Acute Pancreatitis का सही निदान क्या है? डॉ. निम्नलिखित जांचों के जरिये से निदान करते हैं, जैसे की,  - ब्लड टेस्ट ::अग्न्याशय एंज़ाइम्स की जांच के लिए.  - अल्ट्रासाउंड और CT स्कैन :: पित्ताशय तथा अग्न्याशय के सूजन को देखना।  - लिवर और किडनी फंक्शन का टेस्ट :: शरीर की स्थितियों का पता करने के लिए। ५) Mild Acute Pancreatitis का इलाज? - हल्के तीव्र अग्न्याशयशोथ के इलाज अस्पताल में कुछ दिनों तक देखरेख और जीवनशैली के बदलाव पर आधारित होता है।  1. हॉस्पिटल में प्राथमिक इलाज  - फ्लूइड थेरेपी :: शरीर में पानी तथा इलेक्ट्रोलाइट्स को बनाए रखना।  - उल्टी और मतली का इलाज :: एंटीमेटिक्स दवाओं से। 2. सही आहार और पोषण  - आरंभिक लेवल में :: कुछ दिनों तक ठोस भोजन के बिना ही रहना। - धीरे-धीरे आहार :: हल्का, और पका हुआ भोजन , कम वसा वाला भोजन को लेना।  - नारियल पानी या तो, इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक।  3. जीवनशैली तथा घरेलू देखभाल  - ज्यादा शराब पिने से परहेज़ करना।  - ज्यादा तली हुई चीज़ें को नहीं खाएं। - संतुलित आहार :: सब्ज़ी, फल, और हल्का प्रोटीन , दूध या दही। #Mild Acute Pancreatitis के लिए क्या देखभाल? - अग्न्याशय के एंज़ाइम और ब्लड टेस्ट का जाँच करना ।  - यदि पित्ताशय की पथरी कारण है तो, डॉक्टर ऑपरेशन के सलाह को दे सकते हैं। - वजन और मोटापा को कण्ट्रोल में रखे। - शराब और धूम्रपान के सेवन को नहीं करना चाहिए. Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp:
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Gastritis kab hota hai | Gastritis Hone Ka homeopathy me ilaj
१) Gastritis कब होता है? गैस्ट्राइटिस तब होता है, जब पेट की अंदर के पर्त को हानि पहुँचता है, या उस पर एसिड का प्रभाव बहुत ही ज्यादा हो जाता है। - सामान्य रूप से पेट की पर्त सुरक्षात्मक म्यूकस लेयर से ढकी हुए होती है, जो के पेट के एसिड से बचाव करती है। जब यह सुरक्षा कमजोर पड़ जाती है, तब गैस्ट्राइटिस की शुरुआत होती है।  २) गैस्ट्राइटिस होने के मुख्य क्या - क्या कारण होते है? गैस्ट्राइटिस होने के मुख्य कारण निचे की सूचि में बताये अनुसार हो सकते है. जैसे की, 1. अनियमित तथा गलत खान-पान - ज्यादा तला-भुना, और मसालेदार, तथा जंक फूड, - ज्यादा चाय-कॉफी  - खाली पेट शराब पीने से पेट में एसिड बढ़ता है, जिससे गैस्ट्राइटिस हो सकता है। 2. लंबे समय तक खाली पेट ही रहना  - समय पर भोजन नही करना या लंबे अंतराल तक भूखे रहना से भी पेट के एसिड को बढ़ाता है, जो पेट की पर्त को हानि पहुँचाता है।3. Helicobacter pylori बैक्टीरिया - यह आम बैक्टीरिया है, जो के पेट की पर्त में संक्रमण पैदा करता है, और क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस का बड़ा कारण भी माना जाता है। 4. दर्द निवारक दवाओं का ज्यादा सेवन करना  - पेनकिलर दवाएँ पेट की पर्त को हानि पहुँचा सकती हैं, खास कर जब इन्हें लंबे समय तक उपयोग में लिया जाए। 5. शराब और धूम्रपान - शराब पेट की पर्त को सीधा ही नुकसान करती है, जबकि धूम्रपान एसिड से स्राव को बढ़ा देता है। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp: ३) गैस्ट्राइटिस के कितने प्रकार के होते है? 1. तीव्र गैस्ट्राइटिस - यह तो,अचानक से होता है ,और इसके लक्षण भी तेज़ होते हैं।  - गलत खान- पान , और शराब या दवाओं के कारण यह जल्दी हो सकता है।  2. दीर्घकालिक गैस्ट्राइटिस - यह धीरे-धीरे से विकसित होता है, और लंबे समय तक रहता है।  - अक्सर H. pylori संक्रमण से कारण होता है।  3. Erosive Gastritis  - इसमें पेट की पर्त पर घाव बनने लगते हैं, जिस से खून की उल्टी का मल आ सकता है।  ४) गैस्ट्राइटिस के होने पर क्या लक्षण दिखाई देते है? - पेट के ऊपरी वाले भाग में जलन या दर्द का होना। - सीने में जलन जैस लगना।  - मतली तथा उल्टी। - पेट का फूल जाना तथा पेट में गैस बनना।  - भूख भी सही से न लगना। ५) गैस्ट्राइटिस ज्यादा कब बढ़ जाता है? गैस्ट्राइटिस ज्यादा गंभीर हो जाता है जब:  - लंबे समय से सही इलाज न कराया जाए.  - लगातार शराब तथा धूम्रपान करने पर.  - डॉ के सलाह के बिना ही दवाइयाँ को लिया जाएँ।  - अनियमित दिनचर्या तथा तनाव होने पर।  #कब डॉ से संपर्क करना चाहिए? - यदि पेट का दर्द लंबे समय तक बना रहे तो, बार-बार उल्टी का होना , वजन का तेजी से घट जाना तो तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp:
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pet ki samasya ka karan laksan upchar ka homeopathyic me ilaj
१) सालों से पेट की समस्या का इलाज: कारण, घरेलू उपाय और जीवनशैली सुधार? भारत देश में बहुत से लोग "सालों से पेट की समस्या" से परेशान हैं। गैस, कब्ज, एसिडिटी,पेट का दर्द, सूजन, या बार-बार दस्त जैसी समस्याएं बन जाती हैं. दर्दी के डेली ज़िंदगी को भी असर करती हैं। यह केवल पेट से जुड़ी परेशानी ही नहीं , बल्कि मानसिक तनाव, थकान के कारण से भी बनती है। २) सालों से पेट की समस्या का मुख्य कारण क्या है? पुरानी पेट की समस्या अक्सर नहीं बल्कि कई कारणों से होती है। - गलत तरह का खान-पान इसका सबसे बड़ा कारण है। - ज्यादा मसालेदार और तला-भुना, तथा जंक फूड और बाहर का खाना पाचन तंत्र को बहुत ही कमजोर कर देता है। - अनियमित दिनचर्या, या देर रात को खाना, सही से नींद भी नहीं आना। - लंबे समय तक तनाव में रहने से भी पाचन की क्रिया बहुत ही धीमी हो जाती है।  - शराब, धूम्रपान और शारीरिक गति विधि की कमी से भी सालों से पेट की समस्या का कारण बन सकता है. Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp: ३) सालों से पेट की समस्या के क्या - क्या लक्षण होते है? - पेट में गैस का बनना। - पेट में जलन जैसा या भारीपन।  - कब्ज या पतला दस्त, और भूख भी सही से न लगना,  - खट्टी डकारें का आना ,या तो पेट का फूल जाना।  इसके सामान्य लक्षण हैं। कुछ मामलों में सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और नींद न आना भी देखा जाता है।  ४) सालों से पेट की समस्या का घरेलू उपाय क्या है? घरेलू उपायों से पेट की समस्या से राहत मिल सकती है, अगर इन्हें डेली रूप से अपनाया जाए तो।  - 1. गुनगुना पानी सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से भी अपना पाचन तंत्र साफ रहता है, और कब्ज में आराम मिलता है।  - 2. अजवाइन और काला नमक आधा चम्मच अजवाइन और काला नमक मिला कर के खाने से भी गैस और अपच में राहत मिलता है।  - 3. त्रिफला का चूर्ण रात को सोने से पहले हल्के गुनगुने पानी के साथ में त्रिफला चूर्ण लेने से वर्षों से पुरानी कब्ज की समस्या में आराम मिलता है. - 4. जीरा पानी जीरा उबालकर उसका पानी पीने से भी एसिडिटी और पेट की जलन को कम होती है।  - 5. दही और छाछ अच्छे बैक्टीरिया पाचन को सुधारते हैं, और आंतों को अंदर से स्वस्थ रखते हैं।  ५) डॉ. से कब संपर्क करना चाहिए? घरेलू और आयुर्वेदिक उपायों के बावजूद भी अगर पेट की समस्या बनी रहती है, तो भी वजन तेजी से कम हो रहा है. खून की उल्टी या मल में से खून का आने से भी आ रहा है, तो तुरंत डॉ. से संपर्क करना चाहिए। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp:
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Resolving Pancreatitis ka homeopathy me ilaj
१) Resolving Pancreatitis का इलाज? "परिचय" अग्नाशय की सूजन गंभीर पर सही समय पर इलाज मिलने पर ठीक होने वाली स्थिति है। - जब यह शुरुआत में या सही उपचार के बाद धीरे-धीरे से सुधार होने लगता है, तो उसे "Resolving Pancreatitis" कहते है. इस चरण में दर्दी की स्थिति पहले से बेहतर होती है, और दर्द भी कम होता है. और पाचन तंत्र फिर से सामान्य रूप से काम करने लगता है। - पर समय सही उपचार और सावधानियाँ भी बहुत ज़रूरी होती हैं, ताकि दोबारा अटैक न हो। २) Resolving Pancreatitis में क्या होता है? इलाज के कुछ दिनों/हफ्तों के बाद जब सूजन कम होने लगती है,तब एंजाइम लीक होना बंद होता है. और शरीर रिकवरी मोड में आ जाता है, इस स्टेज को Resolving Pancreatitis भी कहते है. #Resolving Pancreatitis के क्या लक्षण होते है? Resolving Pancreatitis के लक्षण निचे बताये गए अनुसार हो सकते है. जैसे की,  * पेट में लगातार तेज दर्द की तीव्रता कम हो जाती है.  * मितली/उल्टी भी कम हो जाती है.* खाना भी पचने लगता है.  * एनर्जी बेहतर होती है.  * ब्लड रिपोर्ट्स भी धीरे-धीरे normal हो जाती है। ३) Resolving Pancreatitis का सही इलाज? Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp: #*1. Hospital Based Care / Clinic Monitoring Resolving stage में भी डॉ. की निगरानी बहुत ही ज़रूरी होती है, किसी भी लापरवाही से सूजन फिर बढ़ सकती है. #*A. IV Fluids (जरूरत के अनुसार) अगर कमजोरी या डिहाइड्रेशन है, तो डॉ. कुछ समय तक IV Fluids जारी रख सकते हैं। #*B. Pain Management हल्का-फुल्का दर्द रह सकता है। पर इस स्टेज में painkillers की जगह पर डॉ. milder medications देते हैं।  #*C. Control of Infection अगर पहले इन्फेक्शन का खतरा था, तो resolving stage में भी एंटीबायोटिक्स की जरूरत कम हो जाती है, पर निगरानी जारी रहती है। #*2. Resolving Pancreatitis में डाइट Pancreatitis का ६० से ७०% ठीक होना **डाइट पर निर्भर** करता है। #क्या खाएँ?# - बहुत हल्का, और कम-चिकनाई वाला भोजन  - उबला हुआ खाना - ३-४ बार छोटे -छोटे अंतराल में खाएँ - ज्यादा प्रोटीन पर low-fat diet - पुरे दिन में 2.5 से 3.5 लीटर पानी का पीना  #Recommended Foods * खिचड़ी, दलिया, और मूंग के दाल * उबली सब्जियाँ * नारियल पानी, और ORS * दही * सेब, नाशपाती और पपीता * गेहूँ या मल्टीग्रेन रोटी, पर बिना घी-तेल का। ##क्या बिल्कुल नहीं खाना चाहिए? - ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना - घी, मक्खन, तेल - Non-veg (कुछ हफ्तों तक नहीं खाना ) - शराब को *100% बंद* करना  - जंक फूड, मीठा,केक नहीं खाना #*3. Lifestyle Treatment  #*A. शराब को पुरे तरह से ही बंद करना (सबसे महत्वपूर्ण) है। #B. ध्रुमपान भी नहीं करना।  #*C. तनाव को कम करने के लिए कसरत करना  ४) Resolving Pancreatitis में Investigations? डॉ. कुछ जाँच करने को कहते है, जो की इस तरह से है , - Lipase, और Amylase - CBC - CRP - MRCP (ducts की स्थिति देखनी हो) - CT Scan ५ ) कब डॉ. के पास जाना चाहिए? अगर ऐसा लक्षण हो तो , जल्दी डॉ. से जल्द ही मिलना सही होता है,  - अचानक से तेज पेट में दर्द का होना  - उल्टी का बढ़ जाना - बुखार > 100.5°F - पेट का फूल जाना  - खाना सही से न पचना - पीलिया - इनका मतलब है, कि सूजन फिर बढ़ सकती है। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp:
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Alcoholic Liver Disease ka homeopathy me ilaj?
१) अल्कोहॉलिक लिवर डिज़ीज़ का इलाज? अल्कोहॉलिक लिवर डिज़ीज़ ऐसी स्थिति है, जिस में ज्यादा शराब के सेवन से लिवर को हानि पहुँचता है। - यह नुकसान धीरे-धीरे फैटी लिवर से शुरू हो कर के हेपेटाइटिस और अंत में सिरोसिस तक पहुँच जाता है। - भारत में शराब के बढ़ती आदत के कारण से बीमारी तेजी से बढ़ रही है। पर अच्छी बात यह है कि, सही समय पर सही से इलाज और जीवनशैली में बदलाव से डॉक्टर की देखरेख से लिवर को काफी हद तक बचाया जा सकता है। २) अल्कोहॉलिक लिवर डिज़ीज़ के कितने चरण है? 1. Alcoholic Fatty Liver :: लिवर में फैट का जमना। 2. Alcoholic Hepatitis :: सूजन का आना, पीलिया और भूख में भी कमी होना। 3. Alcoholic Cirrhosis :: लिवर कठोर होना और स्थायी रूप से नुकसान। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp: इन तीनों चरणों में इलाज अलग-अलग तरह से हो सकता है, पर सबसे बड़ा और पहला कदम "शराब को पूरी तरह से छोड़ना" है। ३) अल्कोहॉलिक लिवर का मुख्य इलाज क्या है? #1. शराब को पूरी तरह से बंद करना ही सबसे अच्छा है।  - यह सबसे आवश्यक और सबसे प्रभावी उपचार है।अगर दर्दी शराब को छोड़ देता है तो: * फैटी लिवर कुछ हफ्तों में ठीक होने लग जाता है. * हेपेटाइटिस में भी काफी हद तक सुधार होता है. * सिरोसिस आगे बढ़ने से रुक जाता है. - कुछ मरीजों को घबराहट,और चिड़चिड़ापन आता है। ऐसे मामलों में डॉ. दवाइयों की मदद से सुरक्षित तरीके से शराब छोड़ने में मदद करते हैं। #2. दवाइयों से इलाज #स्टेरॉइड्स - गंभीर अल्कोहॉलिक हेपेटाइटिस में सूजन को कम करने के लिए स्टेरॉइड दिए जा सकते हैं।  # एंटी-ऑक्सीडेंट और सप्लीमेंट्स - विटामिन - E - बी कॉम्प्लेक्स - फोलिक एसिड - जिंक सप्लीमेंट ये लिवर की सूजन को कम करते हैं। #3. पौष्टिक आहार और डाइट प्लान अल्कोहॉलिक लिवर डिज़ीज़ में ज्यादातर दर्दी कुपोषित होते हैं, इसलिए डाइट सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है। #क्या खाना चाहिए?# - हाई प्रोटीन डाइट:: जिस में दाल, पनीर, अंडे, मछली।  - ताज़े फल और सब्जियाँ। - हेल्दी फैट :: बादाम, ऑलिव ऑयल. - फैट-फ्री डेयरी प्रोडक्ट।  - ज्यादा पानी को पीना #क्या नहीं खाना चाहिए?# - शराब को नहीं पीना। - ज्यादा तली-भुनी और मसालेदार भोजन। - पैक्ड वाले फ़ूड और प्रोसेस्ड फूड. अगर मरीज को हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी है, तो डॉ. प्रोटीन की मात्रा भी कम कर सकते हैं। #4. जीवनशैली में परिवर्तन - पूरी तरह से शराब का त्याग करना.  - नियमित व्यायाम करना। - वजन को कण्ट्रोल में रखना। - नमक के प्रमाण को कम करना। - सही से नींद लेना। ४) रोकथाम के लिए उपाय ? * शराब को पूरी तरह से बंद ही कर दे.  * अगर पारिवारिक इतिहास है, तो शराब को बिल्कुल न पिएँ। * हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाएँ। * साल में एक बार LFT करवाएँ। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp:
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high blood pressure ka ilaj laksan karan diagnosis
#*उच्च रक्तचाप का इलाज – कारण, लक्षण, जाँच और प्रभावी उपचार १) उच्च रक्तचाप क्या है? जब हमारे शरीर में धमनियों के अंदर रक्त का दबाव सामान्य से भी ज्यादा बढ़ जाता है, तो उसे उच्च रक्तचाप कहते हैं। - नार्मल ब्लड प्रेशर लगभग 120/80 mmHg होता है। यदि रीडिंग लगातार::  140/90 mmHg ज्यादा ** है तो,→ उच्च रक्तचाप।  अगर 160/100 mmHg से ऊपर है तो,→ गंभीर उच्च रक्तचाप। २) उच्च रक्तचाप होने के मुख्य क्या कारण है? उच्च रक्तचाप कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है। कुछ प्रमुख कारण हैं: इस तरह से है,  1.*अनियमित जीवनशैली :: ज्यादा नमक के सेवन से , तली-भुनी चीजें, और फास्ट फूड.  2. *मोटापा: : वजन बढ़ने से भी धमनी पर दबाव बढ़ जाता है. 3. *तनाव और चिंता से भी बीपी बढ़ जाता है.  4. *एक्सरसाइज़ की कमी से भी।  5. *बहुत ज्यादा मात्रा में शराब और धूम्रपान। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp: #*उच्च रक्तचाप के क्या लक्षण दिखाई देते है? शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं दिखते, है पर बढ़ा हुआ बीपी इन संकेतों से समझा जा सकता है:  * सिर में दर्द, खासकर के सुबह-सुबह। * चक्कर का आना.  * दिल की धड़कन का तेज होना। * सांस का फूलना।  * थकान जैसा लगना।  * कभी-कभी नाक में से खून का आना।  ऐसे लक्षण बार-बार दिखाई दें तो, तुरंत ही जाँच करवाना जरूरी है।  ३)उच्च रक्तचाप की जाँच कैसे होती है? *ब्लड प्रेशर को मॉनिटर करे। *ब्लड टेस्ट*, *किडनी फंक्शन टेस्ट*, **लिपिड प्रोफाइल*ECG (दिल की जाँच). * डॉ. सही कारण और लेवल के आधार पर ही उपचार करते हैं।४)*उच्च रक्तचाप का इलाज – प्रभावी उपचार? #1. जीवनशैली में परिवर्तन  - यह इलाज का सबसे महत्वपूर्ण भाग है: #*नमक को कम करें** दिनभर में 5 ग्राम से ज्यादा नमक को न लें। इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। #*स्वस्थ आहार** * हरी सब्ज़ियां, फल, दलिया, और ओट्स, घी-तेल कम मात्रा में.  * पोटैशियम-रिच फूड : नारियल पानी, केला, पालक  * पैक्ड फूड, चिप्स और पिज़्ज़ा को कम ही करें।  #*वजन को कण्ट्रोल करने से भी BP तेजी से कंट्रोल होता है। #व्यायाम :: रोज 30 मिनट तक तेज चलना, प्राणायाम, साइकलिंग बहुत ही फायदेमंद है।  #तनाव को कम करें।  #धूम्रपान और शराब को पूरी तरह से छोड़ें।  ५) घरेलू और प्राकृतिक उपाय? निचे कुछ घरेलू उपाय बताये गए है, जो की इस तरह से है, - खाली पेट लहसुन चबाने से ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद मिलती है।- मेथी दाना को रात भर भिगो कर सुबह खाली पेट खाने से भी लाभ मिलता है।  - आंवला का सेवन करने से विटामिन-C और ब्लड प्रेशर को कण्ट्रोल करने में मदद करता है।  #नारियल पानी पीना भी काफी अच्छा है.  #ध्यान दें:#  * दवा को डॉ. की सलाह के बिना नही बदलें।  * अचानक से दवा बंद करने से भी BP खतरनाक रूप से बढ़ सकता है  #उच्च रक्तचाप से बचाव कैसे करें? * अपने समय पर डेली भोजन करना।  * कम तेल-मसाले वाले भोजन को करना।  * उचित मात्रा में ८ घंटे सही से नींद लेना जरुरी है। * शुगर को कंट्रोल रखें Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp:
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Pancreatic Elastase hone ka homeopathy me ilaj
१) Pancreatic Elastase कम होने का इलाज: कारण, लक्षण और उपचार ? "Pancreatic Elastase" पाचन तंत्र में बनने वाला महत्वपूर्ण एंज़ाइम है, जिसे अग्न्याशय बनाता है। इसका काम है ,भोजन में मौजूद "प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट" को तोड़ना ताकि, शरीर उन्हें आसानी से अवशोषित कर सके। - डॉ. अक्सर "Stool Pancreatic Elastase Test" करवाते हैं, जिस से पता चलता है कि, पैनक्रियाज़ सही से एंज़ाइम बना रहा है या नहीं। - रिपोर्ट में "Elastase का लेवल कम" आता है, तो इसका मतलब होता है कि, आप को Pancreatic Exocrine Insufficiency है। - कम एलास्टेज होने से शरीर पोषण सही से अवशोषित नहीं कर पाता है। और धीरे-धीरे से कमजोरी, पाचन की समस्या और वजन में भी कमी होने लगती है। २) Pancreatic Elastase Test कम क्यों होता है?(इस के मुख्य कारण) कम एलास्टेज का अर्थ है कि, अग्न्याशय पर्याप्त एंजाइम नहीं बना रहा। इसके मुख्य कारण हैं: जो की इस तरह से है,  #1. क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस लंबे समय तक सूजन रहने से भी Pancreas के सेल कमजोर हो जाता हैं. और एंजाइम का उत्पादन भी कम हो जाता है। #2. सिस्टिक फायब्रोसिस यह जेनेटिक बीमारी है, जिस में पैनक्रियास गाढ़ा म्यूकस बनाता है। और एंज़ाइम बाहर नहीं आ पाता है. #3.मधुमेह  लंबे समय का शुगर असंतुलन होने से Pancreas के कोशिका को हानि पहुंचाता है। #4.अग्न्याशय का ऑपरेशन या चोट सर्जरी, इंफेक्शन या एंजरी की वजह से भी पैनक्रियास की शक्ति में कमी हो जाती है। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp: ३) Pancreatic Elastase कम होने के क्या लक्षण होते है? Pancreatic Elastase कम होने के लक्षण निचे बताये अनुसार है ,जैसे की,  #*1. लगातार पेट का फूल जाना  भोजन को सही से पाचन नहीं होने पर गैस और bloating बढ़ती है। #*2. फेटी स्टूल तैलीय और बदबूदार होने लगता है। #*3. वजन भी कम हो जाता है, जो सही पोषक तत्वों अवशोषित नहीं करते है.  #*4. बार-बार दस्त का होना #*5. कमजोरी और थकान** बॉडी को सही पोषण नहीं मिलता है , जिस से की एनर्जी लेवल भी कम होता है। ४) Pancreatic Elastase कम होने का इलाज? Pancreatic Elastase खुद से बढ़ नहीं सकता है, क्योंकि यह पैनक्रियास के काम से जुड़ा है। पर इलाज से पाचन सामान्य हो सकता है,और लक्षण कम होते हैं.  "इसका इलाज तीन आधारों पर चलता है." *1. Pancreatic Enzyme Replacement Therapy (PERT)** #*सबसे प्रभावी और मुख्य उपचार  - इसमें दर्दी को बाज़ार में उपलब्ध रहे हुए एंजाइम कैप्सूल/टैबलेट को दिया जाती हैं, जो की ,पैनक्रियास की कमी को पूरा करती हैं।  #*2. डाइट में बदलाव डाइट का बड़ा रोल होता है। जो की , कुछ चीजें को खाना जरूरी है ,और कुछ चीजें को पूरी तरह से बंद करना पड़ता है। #क्या खाएं? * उबली हुयी सब्जियाँ * छाछ और दही * Low-fat milk *ताज़ा फल #क्या नही खाएं? * ज्यादा तला हुआ भोजन, और मसालेदार भोजन को नहीं खाना। * जंक फूड.  * शराब (सबसे ज्यादा नुकसान करता है.)  *ध्रूमपान  #3. विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट्स इसमें भी vitamins - A ,D ,K की कमी बहुत ही नार्मल है। इसे सही करने के लिए डॉक्टर कुछ सप्लीमेंट देते हैं,जैसे की,  * विटामिन -D3* विटामिन- E * विटामिन - A + K  -ये शरीर की immunity और strength को बेहतर करने में बहुत ही मदद करते है. #Pancreatic Elastase को कम करने के लिए क्या - क्या घरेलू उपाय कर सकते है? निचे कुछ घरेलू उपाय बताये है , जैसे की,  - 1.अदरक तथा हल्का गर्म पानी से भी पाचन में काफी हदतक सुधारने में मदद करते हैं। - 2. पपीता और अनानास इनमें प्राकृतिक एंज़ाइम मौजुद होते हैं जो की digestion में मदद करते हैं। - 3. हल्का व्यायाम Blood flow को बेहतर करता है, और digestion को strong बनाता है। - तनाव कम करने के लिए डेली कसरत करना चाहिए। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp:
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homeopathy me comman cold ka kya ilaj hai?
१) कॉमन कोल्ड (सर्दी-जुकाम) का क्या इलाज है? सर्दी-जुकाम, जिसे हम "Common Cold" भी कहते हैं, बहुत ही आम वायरल संक्रमण है, जो की साल के किसी भी मौसम में हो सकता है। -  खासकर के मौसम बदलने पर, धूल-प्रदूषण में जाने पर, या शरीर की immunity कमजोर होने पर भी यह जल्दी ही लेता है। -  भारत में हर उम्र के लोग इस समस्या से प्रभावित होते ही रहते हैं. अच्छी बात यह है कि, कॉमन कोल्ड अपने आप  ही ३-४ दिनों में ठीक हो जाता है। और इसका इलाज घर पर भी आसानी से कर सकते है. २ )कॉमन कोल्ड क्या है? कॉमन कोल्ड वायरल इन्फेक्शन है,जो के मुख्य रूप से "नाक, गले और साइनस" को असर करता है। -  यह संक्रमण बेहद संचारी होता है , जो की एक व्यक्ति से दूसरे में आसानी से फैल सकता है। #सर्दी-जुकाम कैसे फैलता है? कॉमन कोल्ड फैलने के  प्रमुख कारण निचे अनुसार हो सकते है, जैसे की,  - संक्रमित मरीज के छीकने या खांसने से फ़ैल सकता है. - एक दूसरे से हाथ मिलाने पर।  - इन्फेक्टेड हाथों को नाक या चेहरे को छूने से।  -  भीड़ भाड़ वाले जगह में रहने से। - कमजोर इम्यून सिस्टम होने के कारण से। - बच्चे जल्दी ही इसके चपेट में आते हैं ,क्योंकि वो  बार-बार नाक, आंखों और चेहरे को हाथ से टच करते है.  Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp: ३) कॉमन कोल्ड के क्या लक्षण होते है? निचे बताये अनुसार इसके लक्षण हो  सकते है, जैसे की,  -  बहती नाक  - नाक का बंद होना  -  गले में खराश जैसा लगना -  खांसी - हल्का बुखार आ जाना  -  सिर में दर्द का होना  -  थकान और कमजोरी जैसा लगना  -  आंखों में से पानी का आ जाना  -  छींकें बहुत ही जल्दी जल्दी आना ४) कॉमन कोल्ड का घरेलू इलाज क्या है? नीचे दिए गए घरेलू उपाय सर्दी-जुकाम को जल्दी ठीक करने में मदद करते हैं: जैसे की , #1. भाप लेना - भाप लेने से नाक की जाम नसें खुलने  लग जाती है , और सांस लेना आसान हो जाता है।   "कैसे करें" - गरम पानी में कुछ बूंदे Eucalyptus oil को डालें। - ५ मिनट तक भाप को लें.  #2. अदरक-शहद का सेवन अदरक में anti-inflammatory  गुण होते हैं, जो के गले के दर्द और खांसी में राहत देते हैं।  - 1 चम्मच अदरक का रस। -  1 चम्मच शहद.   #3. हल्दी वाला दूध - हल्दी में मौजूद curcumin इम्यूनिटी को बढ़ाता है। और वायरस को खत्म करने में भी मदद करता है। - रात के समय में हल्का गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं। #४. तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा  तुलसी + काली मिर्च + अदरक का काढ़ा सर्दी-जुकाम का  बहुत ही सटीक इलाज है।  ""तरीका"" -  पानी में तुलसी की ५-६ पत्तियाँ। -  3 काली मिर्च। -  थोड़ा सा अदरक। - उबालकर दिन में 2 बार पिएं। ५)कॉमन कोल्ड में क्या नहीं करना चाहिए? * बहुत ज्यादा ठंडा पानी को  न पिएं। * धूल, धुआं और AC में नहीं बैठें।  * बार-बार नाक को टच करने से बचें।  #कब डॉक्टर के पास जाएं? अगर आप को भी ऐसा कुछ हो तो तुरंत ही डॉक्टर को दिखाएं। -  102°F से ज्यादा बुखार का होना।  -  सांस लेने में  भी परेशानी का होना।  - सीने में दर्द होना  -  खांसी ७  दिनों से  भी ज्यादा। -  बच्चे के सांस का  तेजी से चलना। -  गले में बहुत तेज दर्द का होना  Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp:
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Hemolytic Anemia ka homeopathy me ilaj
#*हेमोलिटिक एनीमिया का इलाज: कारण, लक्षण हेमोलिटिक एनीमिया ऐसी स्थिति है, जिस में शरीर में लाल रक्त कोशिका बनने से अधिक तेज़ी से नष्ट होने लगती हैं। सामान्य RBCs के उम्र लगभग 120 दिन के होते है, पर इस बीमारी में कुछ दिनों में या हफ्तों में ही टूट जाते हैं। - जब शरीर नई RBCs उतनी तेज़ी से नहीं बना पाता है, तो खून की कमी होने लग जाती है। #हेमोलिटिक एनीमिया दो तरह के होते है? 1. "जन्मजात" :– जैसे की, सिकल सेल रोग, थैलेसीमिया, G6PD डेफिशियेंसी। 2."बाद में होने वाली" :– जैसे की, इन्फेक्शन, दवाइयाँ, टॉक्सिन, कैंसर या हार्मोनल कारण। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp: यह बीमारी गंभीर हो सकती है, इसलिए समय रहते भी इसका सही इलाज ज़रूरी है। १) हेमोलिटिक एनीमिया के क्या कारण होते है? हेमोलिटिक एनीमिया कई वजहों से होता है, जैसे की, #1. ऑटोइम्यून हेमोलिटिक एनीमिया  - शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से RBCs को दुश्मन समझ कर नुक्सान कर देती है।  #2. संक्रमण कुछ वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण के कारण से RBCs को नुकसान पहुँचा सकते हैं, जैसे की, - मलेरिया - हेपेटाइटिस - HIV  #3. जन्मजात के कारण से  * G6PD एंजाइम की कमी से  * सिकल सेल रोग* थैलेसीमिया २ )हेमोलिटिक एनीमिया के क्या लक्षण होते है? हेमोलिटिक एनीमिया के लक्षण गंभीरता पर निर्भर करते हैं, पर मुख्य लक्षण इस तरह से है- - ज्यादा थकान जैसा लगना। - चक्कर का आ जाना। - सांस फूलने जैसे प्रॉब्लम।  - पीला या फीका रंग। - पीलिया। ३) हेमोलिटिक एनीमिया की जांच कैसे की जाती है? हेमोलिटिक एनीमिया का निदान के लिए कुछ जांचें की जाती हैं: जो की इस तरह से है- - पूर्ण रक्त गणना (CBC) :: लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं, या प्लेटलेट्स, और हेमेटोक्रिट के लेवल को मापता है। - रेटिकुलोसाइट काउंट :: नए RBCs बढ़े हुए हैं या नहीं।  - LDH Levels :: RBC टूटने पर बढ़ते हैं. - कूम्ब्स टेस्ट :: लाल रक्त कोशिका पर मौजूद एंटीबॉडी का पता करने के लिए किया जाता है. ४ ) आहार और जीवनशैली के लिए क्या टिप्स है? हेमोलिटिक एनीमिया में डाइट इलाज का हिस्सा है, पर बीमारी सिर्फ डाइट से ठीक नहीं होती है.    || खाने में क्या शामिल करें ||  - हरी पत्तेदार के सब्जियाँ। - अनार, चुकंदर और सेब.  - प्रोटीन से मिलने वाले (दाल, अंडा, पनीर) #किन से बचना चाहिए#  - शराब पिने से।  - जंक फ़ूड से ।  - इन्फेक्शन से बचना ५) कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए? अगर ऐसे लक्षण हो तो,डॉ. के पास जा कर संपर्क करना चाहिए। जैसे की,  * पीलिया का तेजी से बढ़ जाना। * गहरा रंग में लाल/काला पेशाब का होना  * दिल की तेज़ धड़कन का होना।  * सांस लेने में बहुत प्रॉब्लम का होना।  * अचानक से बेहोश हो जाना। Follow The Brahm Homeopathy Health Channel On WhatsApp:
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chronic pancreatic ka bina operation homeopathic me ilaj
#क्रॉनिक पैन्क्रियाटाइटिस का (बिना ऑपरेशन) होम्योपैथी में इलाज? "अग्नाशय की लंबे समय से चल रहे सूजन", जिस में पैंक्रियास धीरे-धीरे से सामान्य कार्य करने के क्षमता को खोने लग जाता है। यह बीमारी अक्सर सालों तक धीरे-धीरे से बढ़ती है ,और समय रहते हुए इसका सही इलाज न करने पर पाचन शक्ति, पोषक तत्वों के अवशोषण और इंसुलिन उत्पादन पर गंभीर असर पड़ता है। - आधुनिक चिकित्सा में एंजाइम सप्लीमेंट, पेन मैनेजमेंट, तथा गंभीर मामलों में सर्जरी तक की जरूरत पड़ सकती है, पर "होम्योपैथी सुरक्षित" और बिना ऑपरेशन का विकल्प है. १) क्रॉनिक पैन्क्रियाटाइटिस क्या होता है? यह एक पुरानी, और लगातार से होने वाली सूजन है, जो के समय के साथ में बिगड़ती जाती है, जिस से स्थायी क्षति और निशान पड़ जाते हैं. - पाचक एंजाइम कम बनने लग जाते है. - इंसुलिन को प्रभावित कर सकता है. - भोजन पचने में भी परेशानी हो सकती है.  - वजन भी तेज़ी से घटने लग जाता है. इसके कारणों में "अल्कोहल का सेवन, बार-बार एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस , पित्त की पथरी, और धूम्रपान" कारक भी शामिल होते हैं।
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IGE ke badhne ka homeopathy me kya ilaj hai ?
#IGE के बढ़ जाने का क्या उपचार है? - एंटीबॉडी खास तौर पर एलर्जी से जुड़ा है। जब हमारा शरीर किसी भी चीज़ को ख़तरा समझता है,—जैसे की धूल, पालतू जानवरों के बाल, दवाइयाँ, या कुछ खाने वाली चीज़ें—तो IgE का स्तर बढ़ने लग जाता है. - यदि IgE ज़्यादा रहे, तो मरीज को बार-बार एलर्जी, छींक, खुजली, अस्थमा जैसी प्रॉब्लम हो सकती है. - इस आर्टिकल में हम "IgE बढ़ने के कारण, लक्षण और सबसे महत्वपूर्ण इसका इलाज क्या है"। इस पर बात करने वाले है. १) IGE के बढ़ने का प्रमुख कारण क्या है? IGE के बढ़ने का प्रमुख कारण निचे अनुसार हो सकते है, जैसे की, #1.एलर्जी यह सब से नार्मल कारण है. हमारा शरीर किसी भी चीज़ के संपर्क में आने से कुछ प्रतिक्रिया देने लग जाते है, तो IgE बढ़ जाता है। #1.एलर्जी ट्रिगर * धूल और मिट्टी। * पालतू जानवरों के बाल।  * मूंगफली, अंडा, दूध।  * कुछ दवा के सेवन से।  * फंगस / फफूंदी। #2.अस्थमा - अस्थमा वाले दर्दी में IgE का लेवल बहुत ही ज़्यादा होता है. #3.स्किन के एलर्जी - एटॉपिक डर्मेटाइटिस वाले दर्दी में भी IgE का लेवल बढ़ा रहता है। २) IGE बढ़ने के क्या - क्या लक्षण हो सकते है? - IGE बढ़ने के लक्षण निचे बताये अनुसार है,  - बार-बार छींक का आना। - आंखों में पानी का आ जाना और खुजली का होना - सांस का फूलना - बार-बार पेट में दर्द का होना — किसी फूड एलर्जी की वजह से IgE बढ़ा हो तो, - पित्ती  लोग इन लक्षणों को नॉर्मल मानते हैं, पर असल में यह "High IgE" का संकेत हो सकता है। ३) IGE बढ़ने का इलाज क्या है? #1. एलर्जी टेस्ट और सही ट्रिगर को पहचानना  - किस चीज़ से एलर्जी हो रही है, तो,इसे पहचानना इस के लिए डॉ. कुछ जाँच करा सकते हैं, जैसे की, - सीरम IgE टेस्ट  - स्किन प्रिक टेस्ट - विशिष्ट IgE परीक्षण  एक बार कारण का पता चल जाने पर सही इलाज शुरू कर सकते है. #2. ट्रिगर से बचना - IgE को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है।  - धूल से एलर्जी :: अपने घर और ऑफिस को साफ रखें।  - पालतू जानवर के बाल से एलर्जी। - परागकण से एलर्जी :: सुबह-सुबह बाहर कम जाएँ। - जिन भी खाने वाले पदार्थ से एलर्जी हो, तो उनको नहीं खाना।  - अपने किचन को हमेशा साफ रखें।   #3 "Omalizumab (Anti-IgE Therapy)"  यह बहुत ही प्रभावी इलाज है, खास कर के उन मरीजों में जहां पर  - IgE का लेवल बहुत ज्यादा है,  - बार-बार अस्थमा या तो, त्वचा के एलर्जी होती है, - दवा से भी कंट्रोल नहीं हो रहा। "ओमालिज़ुमैब" सीधे IgE को ब्लॉक कर देता है, जिस से के एलर्जी और अस्थमा में काफी हद तक राहत होती है. - यह इलाज महंगा है,और डॉ. के देखरेख में ही करते है. ४) IgE के लिए घरेलू उपाय ? - भाप को लेना। - हल्के गर्म पानी में नमक डाल कर के गरारा।  - हल्दी वाला दूध पीना - अदरक की चाय को पीना  - अपने घर के साफ़ - सफाई  करना।  - विटामिन - C वाले फल (इम्यून सिस्टम को शांत रखता है). Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp:
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Food Poisoning kya hai or kyu hota hai
#फूड पॉइजनिंग का इलाज – कारण, लक्षण और सही उपचार हम में से भी कितने लोग कभी न कभी तो,फूड पॉइजनिंग का शिकार हुए ही होंगे। खराब भोजन खाने के कुछ ही घंटों के बाद में जब उल्टी, दस्त, और पेट में दर्द जैसी परेशानी होती है, तो यही *फूड पॉइजनिंग* कहलाती है। - यह समस्या देखने में तो, बहुत ही साधारण है, पर इसका सही इलाज अगर सही समय पर न किया गया , तो यह शरीर को गंभीर रूप से डिहाइड्रेट कर सकती है। कुछ केस में तो,अस्पताल में एडमिट होने की भी जरुरत पड़ सकती है. --- १)फूड पॉइजनिंग क्या है? यह एक तरह का संक्रमण या विषाक्तता है, जो तब होता है, जब हम ऐसा खाना या पानी को ग्रहण करते हैं, जिस में बैक्टीरिया, और वायरस, या उनके द्वारा उत्पन्न टॉक्सिन मौजूद होते हैं। सबसे आम कारण जीवाणु हैं —जो की ,इस तरह का है, ""सैल्मोनेला"" ""ई.कोलाई"" ""नोरोवायरस और रोटावायरस"' इन सूक्ष्मजीव खराब या बासी खाना, और ख़राब पानी, या गलत तरीके से स्टोर किए गए फूड में तेजी से बढ़ते हैं। २)फूड पॉइजनिंग होने के मुख्य कारण क्या है? फूड पॉइजनिंग होने के कारण निचे बताये अनुसार हो सकते है, जैसे की,  - बासी भोजन या तो,अधपका हुआ भोजन को खाने से.  - दूषित पानी को पिने से भी।  - सड़क के किनारे खुले में रखे हुए समोसे, चाट, या कटे फल को खाने से ।  - बिना हाथ को धोकर खाना को खाने से। - फ्रिज में ज्यादा लंबे समय तक रखे हुए भोजन को दूसरी बार गर्म कर के खाने से । ३)फूड पॉइजनिंग होने के क्या लक्षण होते है ? इसके लक्षण आम तौर पर २ से ४ घंटे के अंदर दिखने लग जाते है, जैसे की — - उल्टी का होना। - पेट में ऐंठन का होना और तेज दर्द का होना। - कमजोरी और चक्कर जैसा लगना।  - बुखार का आना  * डिहाइड्रेशन का संकेत।  बच्चे, और बुजुर्ग , गर्भवती महिला अगर इस तरह का कोई भी लक्षण हों, तो इलाज में देर नहीं करना चाहिए.  ४)फूड पॉइजनिंग का घरेलू इलाज? - उल्टी और दस्त से अपने शरीर में पानी की बहुत ही कमी हो जाती है। इसलिए "ORS का घोल", और "नारियल पानी" बार-बार लेते रहें। - जब तक लक्षण बने रहें, तब तक हल्का और सादा भोजन करे।  - अदरक वाली चाय पिने से उल्टी और मिचली से राहत दिलाते हैं। - दही में “गुड बैक्टीरिया” आंत को संतुलित करते हैं, जिस से रिकवरी में बहुत ही मदद मिलती है.  ५) बचाव के लिए क्या उपाय है? फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए कुछ उपाय बताये है,- - भोजन को हमेशा ताज़ा और पुरे तरह से पका हुआ ही खाएं। - हमेंशा अपने हाथ को अच्छे से धोने की आदत डालें।  - सड़क किनारे खुले में बिकने वाले खाना को न खाएं।  - फ्रिज का तापमान 4°C से कम रखें। - अपने किचन को अच्छे से साफ रखें।
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pancreatitis bimari kab or kyu hota hai?
१) पैन्क्रियाटाइटिस कब और क्यों होता है? क्या आप ने कभी भी किसी को यह कहते हुए सुना है कि, “मेरे पैनक्रियास में सूजन आ गई है”? - यह सुनाई देने वाला वाक्य गंभीर बीमारी की और संकेत करता है — जैसे की "पैन्क्रियाटाइटिस"। - यह बीमारी शरीर के उस अंग में हो जाती है, जो की , भोजन को पचाने और ब्लड शुगर को कण्ट्रोल करने का काम करता है — "अग्न्याशय"। २) पैंक्रियास क्या काम करता है? पैंक्रियास हमारे पेट के पीछे, पेट और रीढ़ की हड्डी के बीच में होता है। इसके काम करने के दो तरह होते है — 1. पाचन से जुड़ा हुआ काम digestive enzymes यह *पाचन एंजाइम* बनाता है,जो की भोजन में रहे हुए ,वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट को सही से पचाने में भी मदद करते हैं। 2. *हार्मोनल कार्य* इंसुलिन और ग्लूकागोन यह *इंसुलिन और ग्लूकागोन* जैसे हार्मोन को बनाता है, जो की हमारे ब्लड शुगर को कण्ट्रोल करते हैं। जब किसी भी कारण से यह ग्रंथि में सूजन आ जाती है. या इसके द्वारा बनाए गए एंजाइम खुद के भाग को नुकसान करने लग जाते हैं, तो इस स्थिति को "पैन्क्रियाटाइटिस" कहते है. #पैन्क्रियाटाइटिस कितने तरह के होते है ? - दो मुख्य तरह के होते हैं — 1. "तीव्र अग्नाशयशोथ" - यह अचानक से ही शुरू होता है. और बहुत ही तेज़ दर्द होता है। कुछ दर्दी में तो, कुछ दिनों में अपने आप से ठीक हो जाता है, पर गंभीर मामलों में यह जानलेवा होता है. 2. "दीर्घकालिक अग्नाशयशोथ" - यह ज्यादा लंबे समय तक के लिए बना रहता है,और धीरे-धीरे अग्नाशयशोथ को नुकसान करता है. - इसमें पाचन क्षमता बहुत ही कम हो जाती है, और मधुमेह जैसी समस्या भी होता है. ३) पैन्क्रियाटाइटिस कब होती है? यह किसी भी उम्र ले लोगो में हो सकता है, पर "३० से ५५ वर्ष" के बीच में ज्यादा देखने को मिलता है। - यह पुरुषों में अधिक होता है, , ज्यादा "शराब पीने वालों" में। "अक्सर इसके लक्षण अचानक से ही दिखाई देते हैं, जैसे की, -"- अचानक से तेज़ पेट में दर्द का होना - मिचली और उल्टी जैसा लगना - पेट में सूजन का हो जाना अगर ऐसे लक्षण हो तो, पैंक्रियास में सूजन होना शुरू हो चूका है। ४) पैन्क्रियाटाइटिस क्यों होता है? पैन्क्रियाटाइटिस होने के कई कारण हो सकते है, जैसे की, - #1." ज्यादा शराब का सेवन करने से " लंबे समय से शराब पीने पर पैंक्रियास के कोशिका धीरे-धीरे से नष्ट होने लगते है. #2."पित्त की पथरी" - यह "तीव्र अग्नाशयशोथ" का सबसे आम कारण है, - पित्त की थैली में बनी छोटी पथरियाँ डक्ट को ब्लॉक कर देती हैं। इस से पाचन पैंक्रियास में रुक जाते हैं, और उसको नुकसान करते हैं। #3."अधिक वसा का लेवल"  - यदि खून में *triglyceride* बहुत ही अधिक हो जाए तो यह पैंक्रियास में सूजन का कारण बन सकता है।  #4. "संक्रमण" कई बार वायरस और बैक्टीरिया से भी Pancreatitis का कारण बन सकते है.  # 5. "वंशानुगत" कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों से भी इसका खतरा ज्यादा होता है। ५) पैन्क्रियाटाइटिस से बचने के लिए क्या उपाय है? * शराब के सेवन को बिल्कुल ही बंद कर दे.  *फैट और ज्यादा तले हुए भोजन को करने से परहेज करें। *नियमित अपने स्वास्थ्य की जांच कराएँ*, अगर पित्त की पथरी है, तो. *वजन को कण्ट्रोल में रखे.  *डॉक्टर के द्वारा दी गई दवाइयाँ को ही लें* और कोई दूसरी दवा को न ले.
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kya baar baar khuni dast hona ulcerative colitis ho sakta hai?
१) क्या बार-बार खूनी दस्त होना अल्सरेटिव कोलाइटिस हो सकता है? अगर बार-बार "खूनी दस्त " हो रहा है, तो यह पाचन की समस्या ही नहीं, बल्कि "अल्सरेटिव कोलाइटिस " नामक गंभीर आंतों की बीमारी का संकेत हो सकता है। - यह रोग बड़ी आंत और मलाशय के अंदरूनी पर्त में सूजन , घाव पैदा करता है, जिस के कारण से बार-बार दस्त का होना , खून निकलने जैसी समस्याएँ होती हैं। #अल्सरेटिव कोलाइटिस क्या है? अल्सरेटिव कोलाइटिस "क्रॉनिक (दीर्घकालिक)" सूजन के संबंधी रोग है, जो की "इरिटेबल बाउल डिजीज" समूह का भाग है। - इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली गलती से बड़ी आंत के कोशिका पर हमला करने लग जाती है, जिस से सूजन,और अल्सर बन जाते हैं। - इस रोग मुख्य रूप से तीन प्रकार माने जाते हैं- 1. Ulcerative Proctitis :: – केवल मलाशय तक ही सीमित सूजन। 2. Left-sided Colitis :: बाईं ओर के बड़ी आंत तक फैली सूजन। 3. Pancolitis :: बड़ी आंत में सूजन और घाव। २) अल्सरेटिव कोलाइटिस के प्रमुख क्या लक्षण है? इसके लक्षण धीरे-धीरे से बढ़ते हैं ,और समय के साथ - साथ में गंभीर हो सकते हैं। - बार-बार "दस्त", जिसमें से **खून आता है।  - पेट में "मरोड़" और बहुत ही तेज दर्द का होना।  - वज़न का कम हो जाना। और भूख में भी कमी हो सकती है. - कुछ मामलों में तो, "जोड़ों में दर्द" भी हो सकता है. अगर व्यक्ति कई हफ्तों से खूनी दस्त से जूझ रहा है, तो तुरंत ही डॉक्टर से मिलना चाहिए। ३) अल्सरेटिव कोलाइटिस के प्रमुख कारण क्या - क्या है? इसका अभी तक सटीक कारण पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं, पर कई कारक इसके लिए जिम्मेदार है, - 1. ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया शरीर के रोग-प्रतिरोधक प्रणाली गलती से आंत के कोशिक पर हमला करने लग जाती है. 2. आनुवंशिक कारण अगर परिवार में यह रोग है, उनमें भी इसके होने की संभावना और भी ज्यादा होती है। 3. पर्यावरणीय कारण प्रदूषण, और गलत खान-पान, या तो, तंबाकू इस रोग को ट्रिगर करते है. 4. आहार और जीवनशैली ज्यादा मसालेदार भोजन, और फास्ट फूड, अधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से स्थिति को बिगाड़ सकता है। #जाँच (Diagnosis)? अल्सरेटिव कोलाइटिस का पता करने के लिए डॉक्टर कुछ जाँचें करते हैं:- *कोलोनोस्कोपी* ::- सबसे महत्वपूर्ण का जांच, है, जिस में कैमरे की मदद से आंत के अंदर को देख सकते है. *बायोप्सी* :: आंत के पर्त से टिशू लेकर जांच को किया जाता है. *ब्लड टेस्ट* :: संक्रमण, या सूजन का पता करने के लिए. *CT स्कैन या तो MRI स्कैन के माध्यम से आंतों के पूरी स्थिति को जानने के लिए किया जाता है. ४) अल्सरेटिव कोलाइटिस के लिए सही उपचार क्या है? अल्सरेटिव कोलाइटिस का "स्थायी इलाज" नहीं है, पर सही उपचार से इसे कण्ट्रोल कर सकते है. उपचार में मुख्य रूप से ये तरीके शामिल हैं: जैसे की, "आहार और जीवनशैली" * हल्का और पौष्टिक तथा कम फाइबर वाला भोजन को लें।  * उचित मात्रा में पानी को पीएं , जिस से की , डिहाइड्रेशन न हो।  * दूध, कैफीन और ज्यादा मसालेदार भोजन करने से बचें। * कसरत करें। जिस से तनाव में कमी हो सके। घरेलू और प्राकृतिक उपाय क्या है? डॉक्टर के कहे अनुसार ही इन उपाय को कर सकते है. - एलोवेरा का जूस :: हल्की सूजन में बहुत ही मदद कर सकता है। - हल्दी :: इसमें मौजूद करक्यूमिन सूजन को कम करता है. ५) कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए? यदि निचे बताये गए लक्षण में से कुछ भी हों, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:  * १ हफ्ते से भी अधिक समय तक खूनी दस्त का होना  * बहुत तेज़ पेट में दर्द का होना।  * अचानक से वज़न भी कम हो जाना।  * डिहाइड्रेशन जैसा होना * मल में से लगातार खून का आना।
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homeopathic me pancreatic ka bina operation ilaj
#होमियोपैथी में पैंक्रियाटाइटिस का सही इलाज? **परिचय** पैंक्रियाटाइटिस पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारी है, जिस में अग्न्याशय में सूजन आ जाता है। यह हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, जो की पाचन एंजाइम्स और इंसुलिन बनाता है। - जब किसी कारण से एंजाइम्स खुद अग्न्याशय को ही पचाने लगते हैं, तो सूजन और दर्द होने लग जाता है — इस स्थिति को ही **पैंक्रियाटाइटिस** कहते है. **इसके दो प्रकार होते है - 1. **Acute Pancreatitis** 2. **Chronic Pancreatitis** (1) Acute Pancreatitis क्या होता है? यह दर्द अचानक से शुरू होता है, और कुछ दिनों में अपने आप से ही ठीक हो जाता है. - यदि समय रहते इसका सही इलाज नहीं किया जाये ,तो, आगे जा कर के यह खतरा भी बन सकता है। - इसके कारणों में पित्त की थैली में पथरी या तो , बहुत ही ज्यादा शराब का सेवन होता है। - कभी-कभी दवा का साइड इफ़ेक्ट , उच्च ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल होता है. **मुख्य लक्षण क्या है? - पेट के ऊपरी हिस्से में बहुत ही तेज दर्द का होना।  - उल्टी या तो जी मिचलाना।  - पेट में भारीपन जैसा लगना।  * खाना खाने के बाद में भी दर्द का बढ़ जाना. (2) Chronic Pancreatitis क्या होता है? यह ज्यादा समय तक चलने वाली बीमारी है, जिस में अग्न्याशय धीरे-धीरे से क्षतिग्रस्त होने लग जाता है. - यह ज्यादा समय तक शराब पीने से ,पारिवारिक कारण होने से भी इसका जोखिम और भी बढ़ जाता है, और या तो बार-बार एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होने से विकसित होता है। ** इसके मुख्य लक्षण** - लगातार पेट में जोर - जोर से दर्द का होना। - वजन का घट जाना। - पाचन में प्रॉब्लम का होना  - मधुमेह का लक्षण (क्योंकि इंसुलिन का बनना कम होने लग जाता है) ###पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के क्या कारण है ? *पित्त की पथरी* : – यह सबसे सामान्य कारण में से एक है। *शराब का बहुत ही ज्यादा मात्रा में सेवन करना  *उच्च ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल हाई होना। * वायरल या तो, बैक्टीरियल का संक्रमण #पैंक्रियाटाइटिस का इलाज किस पर निर्भर होता है? (1) अस्पताल में इलाज  - यदि Acute Pancreatitis गंभीर हो तो दर्दी को अस्पताल में ही एडमिट किया जाता है।  *IV Fluids* :: शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए किया जाता है.  * Pain Management* :: बहुत ही तेज़ दर्द को कण्ट्रोल करने के लिए दवाएँ दी जाती हैं।  * कुछ दिनों तक खाना नहीं दिया जाता है , ताकि अग्न्याशय को आराम मिले।  * Lifestyle Changes* :: शराब और धूम्रपान के सेवन को पूरी तरह से त्याग देना । *Low-fat diet* :: कम चर्बी वाला संतुलित आहार।  *Pancreatic Enzyme Supplements* :: पाचन सही से हो सके ,इसके लिए एंजाइम कैप्सूल दिए जाते हैं। #होम्योपैथिक में पैंक्रियाटाइटिस का इलाज? शरीर की आंतरिक शक्ति को बढ़ाकर किया जाता है, जिस से की सूजन और दर्द को नियंत्रित हों सके।  - ये दवाएँ व्यक्ति के लक्षण, और रोग की अवस्था पर निर्भर होती हैं। - होम्योपैथिक इलाज करने से दीर्घकालिक रूप से अग्न्याशय सूजन को कम करने में और पाचन प्रणाली को सही करने में मदद करता है.   #आहार और परहेज़#  * शराब, और तले हुए भोजन से दूर रहें।  * ज्यादा पानी और तरल पदार्थ को लें।  * ताजे फल, और उबली सब्जियाँ और फाइबर वाले भोजन के लेना सही है.  * मसालेदार भोजन से दुरी रखे।  * छोटे-छोटे अंतर में भोजन को दिन में ३-४ बार में ले. ##संभावित जटिलताएँ## पैंक्रियाटाइटिस बीमारी का सही समय पर और सही इलाज न किया जाये ,तो कुछ जटिलताएँ हो सकती हैं –  * पैंक्रियाटिक में सिस्ट * मधुमेह  * किडनी फेल्योर
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